Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा- फोटोग्राफी में रघु राय जैसी दृष्टि जरूरी

डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा- फोटोग्राफी में रघु राय जैसी दृष्टि जरूरी
Apr 30, 2026, 12:58 PM
|
Posted By Preeti Kumari

Dr. Nagendra Kumar Singh said – Photography requires a vision like Raghu Rai's.


वाराणसी: फोटोग्राफी की दुनिया में रघु राय एक कुशल जौहरी की तरह थे. एक रेडियो पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या अच्छी फोटो के लिए महंगे संसाधनों और लेंस की आवश्यकता होती है? इस पर रघु राय ने उत्तर दिया—“अच्छी लिखावट के लिए जरूरी नहीं कि कलम महंगी और सुंदर हो.” ये बातें गुरुवार को महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान और लाला दीनदयाल फोटो आर्ट सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्य वक्ता कला विज्ञ आर. गणेशन ने कही. इस अवसर पर महान फोटोग्राफर पद्मश्री रघु राय और वाराणसी के फोटोग्राफर प्रदीप पांडेय ‘रवि’ को श्रद्धांजलि दी गई. कार्यक्रम की शुरुआत रघु राय और प्रदीप पांडेय ‘रवि’ के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर की गई.


hjy


रघु राय के चित्रों का एक स्लाइड शो भी प्रस्तुत


बीज वक्तव्य लाला दीनदयाल फोटो आर्ट सोसायटी के अध्यक्ष विनय रावल ने दिया. इस दौरान उन्होंने रघु राय के चित्रों का एक स्लाइड शो भी प्रस्तुत किया. मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि फोटोग्राफी के लिए दृष्टि की आवश्यकता होती है. इसी दृष्टि और जुनून ने रघु राय को बुलंदी तक पहुँचाया. कार्यक्रम में मशहूर फोटोग्राफर कृष्ण देव ने कहा कि फोटोग्राफी एक एप्लाइड आर्ट है. रघु राय ने ब्लैक एंड व्हाइट माध्यम से समाज को बहुत सहजता के साथ चित्रित किया, जो सरल और प्रभावशाली हैं.


h


इस मौके पर आनंद बरनवाल ने कहा कि फोटोग्राफर अपने विषय से भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है. किसी भी तस्वीर को कैद करने के लिए उससे जुड़ना और उसके साथ रूबरू होना आवश्यक है. उदाती दादा ने कहा कि फोटोग्राफी का विषय समय और विचार के साथ बदलता रहता है. रघु राय ने आज़ादी की लड़ाई और उसके बाद के दौर को भी अपने लेंस में प्रभावशाली ढंग से कैद किया. वरिष्ठ पत्रकार अजय राय ने कहा कि रघु राय हर तस्वीर में एक जीवंत क्षण (मूवमेंट) को पकड़ते थे. उन्होंने कहा कि एक अच्छा फोटोग्राफर वही होता है, जो बड़ा सोचता है. रघु राय के संदर्भ में उन्होंने बताया कि वे कहा करते थे—“फोटो के लिए मैं बनारस और दिल्ली की गलियों में भटकता रहता हूँ. जो भटकता है, वही पाता है.”


"बनारस बना ‘सिटी ऑफ लाइट’"


उन्होंने बनारस को ‘सिटी ऑफ लाइट’ भी कहा. अजय राय ने प्रदीप पांडेय ‘रवि’ को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी संवेदनाओं को ‘ग्रे शेड’ की तरह गहन बताया. अपने उद्बोधन में गंगारविंद ने ‘रवि’ के साथ बिताए पलों को भावुक मन से याद किया. वहीं ओ.पी. चौबे ने रघु राय के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे हमेशा गले में कैमरा लटकाए रखते थे और लेंस खुला रखते थे. रघु राय का मानना था कि “100 में से 90 फोटो डिलीट करना सीखिए.”


'[


Also Read: वाराणसी में होगा बुद्ध अस्थि अवशेष का दर्शन, धम्‍मयात्रा में विदेशी अनुयायी भी रहेंगे शामिल


इस अवसर पर वाराणसी के नामचीन पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने उनसे जुड़ी स्मृतियाँ साझा करते हुए फोटोग्राफी की विभिन्न विधाओं पर चर्चा की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान रंजन गौंड, डॉ जावेद और रमेश पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम का संचालन गणेश राय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रभा शंकर मिश्रा ने दिया। इस मौके पर वैश्वनी शुक्ला, श्री राम त्रिपाठी, संतोष मिश्रा, रामात्मा श्रीवास्तव, डॉ जिनेश, डॉ मनोहरलाल, डॉ. शिवजी सिंह, नागेंद्र पाठक, अनिरुद्ध पांडेय आदि उपस्थित रहे.


&t=2s

कैंट पुलिस का जुए के अड्डे पर छापा, नगदी समेत छह जुआरी गिरफ्तार.
कैंट पुलिस का जुए के अड्डे पर छापा, नगदी समेत छह जुआरी गिरफ्तार.
वाराणसी: कमिश्नरेट पुलिस के ऑपरेशन चक्रव्यूह अभियान के तहत कैंट थाना पुलिस ने सोमवार रात अर्दली बाजार स्थित एमएम लॉन के पास संचालित जुए के अड्डे पर छापेमारी कर छह जुआरियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से फड़ पर लगी 5,400 रुपये की नगदी, आरोपितों की तलाशी से 2,200 रुपये तथा 52 पत्तों की एक खुली ताश की गड्डी बरामद की।प्रभारी निरीक्षक राज किशोर पांडेय के नेतृत्व में सोमवार रात करीब 8:40 बजे की गई कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपितों की पहचान रोहित पटेल, दीपक पटेल, चंदन पटेल, पवन कुमार गौतम, राजीव कुमार पटेल और सूरज कुमार के रूप में हुई। सभी आरोपी कैंट थाना क्षेत्र के टकटकपुर एवं आसपास के रहने वाले हैं।ALSO READ : बरेका में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित, 51 अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया हिस्सा.पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ उत्तर प्रदेश जुआ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। छापेमारी टीम में उपनिरीक्षक बलवंत कुमार, उपनिरीक्षक अभिषेक सिंह, कांस्टेबल अतुल कुमार पांडेय, नागेंद्र कुमार, राजन कुमार राव और अमित तिवारी शामिल रहे।
बरेका में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित, 51 अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया हिस्सा.
बरेका में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित, 51 अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया हिस्सा.
वाराणसी : बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में मंगलवार को राजभाषा विभाग के तत्वावधान में प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन में तथा बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत के मार्गदर्शन में आयोजित हुई।मुख्य राजभाषा अधिकारी रामजन्म चौबे के नेतृत्व में आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य रेलवे बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के लिए बरेका के प्रतिभागियों का चयन करना तथा अधिकारियों और कर्मचारियों में हिंदी के प्रयोग, राजभाषा नीति एवं सामान्य ज्ञान के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ाना था।प्रतियोगिता में बरेका के विभिन्न विभागों के 51 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हिंदी माध्यम में आयोजित इस प्रतियोगिता में रेलवे, हिंदी भाषा एवं साहित्य, राजभाषा नीति तथा सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।ALSO READ : बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.प्रतियोगिता का आयोजन सुव्यवस्थित और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक, उपयोगी और प्रेरणादायक बताते हुए इसकी सराहना की। प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी अब रेलवे बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में बरेका का प्रतिनिधित्व करेंगे।राजभाषा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ कर्मचारियों के ज्ञानवर्धन और राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.
बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग एवं अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार से महामना सभागार, मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र में 'नयी चाल की हिन्दी' विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। 28 से 30 जुलाई तक चलने वाली इस संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति, आलोचना, अनुवाद, लोक परंपरा और डिजिटल युग में हिन्दी के बदलते स्वरूप पर विचार-विमर्श करेंगे।उद्घाटन सत्र में हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. राजकुमार ने स्वागत वक्तव्य एवं विषय-प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि नामवर सिंह के बिना हिन्दी का कोई भी गंभीर अकादमिक विमर्श पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि उनसे सहमति या असहमति हो सकती है, लेकिन उन्हें दरकिनार कर हिन्दी के बौद्धिक विमर्श को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने कहा कि नामवर सिंह भारतीय और पाश्चात्य दोनों ज्ञान परंपराओं के अद्वितीय अध्येता थे और एक आदर्श शिक्षक के रूप में उनकी पहचान सदैव बनी रहेगी।मुख्य वक्ता एवं आईएसीएलएलएस के पूर्व सचिव प्रो. हरीश त्रिवेदी ने कहा कि महादेवी वर्मा, अज्ञेय और नामवर सिंह जैसे विद्वानों को सुनकर हिन्दी भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता का वास्तविक आभास होता था। उन्होंने कहा कि नामवर सिंह की बहुभाषिक दृष्टि, ज्ञान के प्रति समर्पण और वैचारिक स्वतंत्रता उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषताएं थीं।संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भाषा का स्वभाव निरंतर परिवर्तनशील होता है। आज व्हाट्सऐप, एसएमएस और ई-मेल जैसे त्वरित संचार माध्यम भाषा के सामने नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग भाषा और ज्ञान के विकास के लिए किया जाना चाहिए। कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने डिजिटल युग में साहित्य की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।द्वितीय सत्र 'नामवर स्मरण' के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र की उक्ति 'हिन्दी नई चाल में ढली' केवल भाषाई बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय समाज और आधुनिक चेतना के व्यापक परिवर्तन का संकेत थी। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, आचार्य रामचंद्र शुक्ल की आलोचना-दृष्टि और भक्ति परंपरा की मानवीय संवेदनाओं पर विस्तार से चर्चा की।प्रो. मनोज कुमार सिंह ने नामवर सिंह के व्यक्तित्व और उनकी आलोचना दृष्टि को याद करते हुए बनारस से उनके गहरे आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया। आईआरएस अधिकारी शैलेश कुमार ने नामवर सिंह से जुड़े संस्मरण साझा किए, जबकि वरिष्ठ कथाकार एवं 'तद्भव' के संपादक अखिलेश ने प्रेमचंद की कहानी ईदगाह पर नामवर सिंह की आलोचनात्मक दृष्टि का उल्लेख करते हुए उनके प्रसिद्ध कथन "सौन्दर्य वही है, जो हमारे अस्तित्व की रक्षा कर सके" को रेखांकित किया।तृतीय अकादमिक सत्र में आरंभिक आधुनिक हिन्दी साहित्य, हिंदवी प्रेमाख्यान, भारतीय भक्ति आंदोलन और सांस्कृतिक इतिहास पर गंभीर विमर्श हुआ। टेक्सॉस विश्वविद्यालय की गुंजन मल्होत्रा, कुमार नीरज, प्रो. माधव हाड़ा और प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने अपने शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और भक्ति आंदोलन के विविध आयामों पर प्रकाश डाला।चतुर्थ सत्र में 'विश्वविद्यालय की अवधारणा' विषय पर चर्चा हुई। इसमें डी. वेंकट राव, संजय कुमार तथा स्वाति गांगुली ने भारतीय शिक्षा दर्शन, नालंदा से लेकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तक की ज्ञान परंपरा और वैकल्पिक विश्वविद्यालय अवधारणा पर अपने विचार प्रस्तुत किए।ALSO READ : काशी विद्यापीठ के कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह को मिला 'विशिष्ट शिक्षक सम्मान...संगोष्ठी के दौरान नामवर सिंह के शिष्य शैलेश कुमार की पुस्तक 'चंद तस्वीर-ए-बुताँ' (नामवर जी का जीवन—तस्वीरों के आईने में) का विमोचन भी किया गया। साथ ही पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। तीन दिनों तक चलने वाली इस संगोष्ठी में हिन्दी भाषा और साहित्य से जुड़े समकालीन मुद्दों पर देश-विदेश के विद्वानों के बीच शोधपरक चर्चा जारी रहेगी.