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बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.

बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.
Jul 28, 2026, 12:43 PM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग एवं अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार से महामना सभागार, मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र में 'नयी चाल की हिन्दी' विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। 28 से 30 जुलाई तक चलने वाली इस संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति, आलोचना, अनुवाद, लोक परंपरा और डिजिटल युग में हिन्दी के बदलते स्वरूप पर विचार-विमर्श करेंगे।


उद्घाटन सत्र में हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. राजकुमार ने स्वागत वक्तव्य एवं विषय-प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि नामवर सिंह के बिना हिन्दी का कोई भी गंभीर अकादमिक विमर्श पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि उनसे सहमति या असहमति हो सकती है, लेकिन उन्हें दरकिनार कर हिन्दी के बौद्धिक विमर्श को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने कहा कि नामवर सिंह भारतीय और पाश्चात्य दोनों ज्ञान परंपराओं के अद्वितीय अध्येता थे और एक आदर्श शिक्षक के रूप में उनकी पहचान सदैव बनी रहेगी।


मुख्य वक्ता एवं आईएसीएलएलएस के पूर्व सचिव प्रो. हरीश त्रिवेदी ने कहा कि महादेवी वर्मा, अज्ञेय और नामवर सिंह जैसे विद्वानों को सुनकर हिन्दी भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता का वास्तविक आभास होता था। उन्होंने कहा कि नामवर सिंह की बहुभाषिक दृष्टि, ज्ञान के प्रति समर्पण और वैचारिक स्वतंत्रता उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषताएं थीं।


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संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भाषा का स्वभाव निरंतर परिवर्तनशील होता है। आज व्हाट्सऐप, एसएमएस और ई-मेल जैसे त्वरित संचार माध्यम भाषा के सामने नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग भाषा और ज्ञान के विकास के लिए किया जाना चाहिए। कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने डिजिटल युग में साहित्य की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।


द्वितीय सत्र 'नामवर स्मरण' के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र की उक्ति 'हिन्दी नई चाल में ढली' केवल भाषाई बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय समाज और आधुनिक चेतना के व्यापक परिवर्तन का संकेत थी। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, आचार्य रामचंद्र शुक्ल की आलोचना-दृष्टि और भक्ति परंपरा की मानवीय संवेदनाओं पर विस्तार से चर्चा की।


प्रो. मनोज कुमार सिंह ने नामवर सिंह के व्यक्तित्व और उनकी आलोचना दृष्टि को याद करते हुए बनारस से उनके गहरे आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया। आईआरएस अधिकारी शैलेश कुमार ने नामवर सिंह से जुड़े संस्मरण साझा किए, जबकि वरिष्ठ कथाकार एवं 'तद्भव' के संपादक अखिलेश ने प्रेमचंद की कहानी ईदगाह पर नामवर सिंह की आलोचनात्मक दृष्टि का उल्लेख करते हुए उनके प्रसिद्ध कथन "सौन्दर्य वही है, जो हमारे अस्तित्व की रक्षा कर सके" को रेखांकित किया।


तृतीय अकादमिक सत्र में आरंभिक आधुनिक हिन्दी साहित्य, हिंदवी प्रेमाख्यान, भारतीय भक्ति आंदोलन और सांस्कृतिक इतिहास पर गंभीर विमर्श हुआ। टेक्सॉस विश्वविद्यालय की गुंजन मल्होत्रा, कुमार नीरज, प्रो. माधव हाड़ा और प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने अपने शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और भक्ति आंदोलन के विविध आयामों पर प्रकाश डाला।


चतुर्थ सत्र में 'विश्वविद्यालय की अवधारणा' विषय पर चर्चा हुई। इसमें डी. वेंकट राव, संजय कुमार तथा स्वाति गांगुली ने भारतीय शिक्षा दर्शन, नालंदा से लेकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तक की ज्ञान परंपरा और वैकल्पिक विश्वविद्यालय अवधारणा पर अपने विचार प्रस्तुत किए।


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संगोष्ठी के दौरान नामवर सिंह के शिष्य शैलेश कुमार की पुस्तक 'चंद तस्वीर-ए-बुताँ' (नामवर जी का जीवन—तस्वीरों के आईने में) का विमोचन भी किया गया। साथ ही पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। तीन दिनों तक चलने वाली इस संगोष्ठी में हिन्दी भाषा और साहित्य से जुड़े समकालीन मुद्दों पर देश-विदेश के विद्वानों के बीच शोधपरक चर्चा जारी रहेगी.

नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
वाराणसी : नागपंचमी पर्व को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जैतपुरा स्थित ऐतिहासिक नागकुआं क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर मेला क्षेत्र में सफाई, प्रकाश, जल निकासी और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी न रहे।नगर आयुक्त ने पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए निर्बाध स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए। उन्होंने जलकल और सिविल विभाग के जेई को व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने को कहा।ALSO READ: कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथनागकुआं के निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने औसानगंज वार्ड का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सफाई समेत अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नागपंचमी के मेला क्षेत्र और आसपास के वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय पार्षद, जलकल विभाग के जेई, सिविल विभाग के जेई, सफाई निरीक्षक अवनीश दुबे समेत नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
वाराणसीः बीएचयू में पालतू कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल 11 साल के अभिनव से चार दिन बाद रविवार को मिलने प्रो. श्रद्धा सिंह अपने पति के साथ ट्रामा सेंटर पहुंचीं. उन्होंने बच्चे के माता-पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में कुत्ता नहीं रखने की बात कही. हालांकि बच्चे के माता-पिता ने उनसे नाराजगी जताई. मां ने तो सीधे सवाल कर दिया कि अब क्यों आईं हैं. पिता ने शिकायत किया कि बच्चा अब भी बोल नहीं पा रहा है.ALSO READ: BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकालाप्रोफेसर और उनके पति ने कुत्ते के टीकाकरण का कार्ड दिखाया. साथ ही कहा कि भविष्य में कुत्ता घर में नहीं रखने की बात भी कही। बता दें कि बीते 13 अगस्त की सुबह बीएचयू ट्रामा सेंटर में सीनियर नर्सिंग आफिसर प्रेमाराम दोनों बेटों 11 वर्षीय अभिनव और 13 वर्षीय हर्ष के साथ बीएचयू परिसर में मार्निंग वाक पर निकले थे. वापस लौटने के दौरान कुछ दूर निकल चुके बड़े बेटे को लेने के लिए आगे बढ़ गए. वहीं छोटा बेटा परिसर की ही जोधपुर कालोनी स्थित घर की ओर अकेला जाने लगा. इसी दौरान हिंदी विभाग की प्रो. श्रद्धा सिंह के पालतू कुत्ते ने अभिनव पर हमला कर दिया. वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से बच्चे को कुत्ते से बचाया. गंभीर हालत में उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया. बच्चे को कुत्ते ने इतनी बुरी तरह से काटा था कि उसके सिर व चेहरे पर 50 टांके लगाने पड़े. वहीं आरोप है कि प्रो. श्रद्धा सिंह बच्चे की मदद करने की बजाय वहां से चली गईं. उन्होंने बच्चे पर कुत्ते द्वारा हमले से भी इनकार किया था. वहीं बीएचयू प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था.
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
वाराणसी : बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के नवनियुक्त प्रभारी पर 11 साल से तैनात केयरटेकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केयर टेकर का आरोप है कि मुझ पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाया गया।केयर टेकर ने दावा किया कि दबाव में काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 28 जुलाई को कुलपति से शिकायत की। इसके अगले ही दिन मुझे ट्रॉमा सेंटर आने से रोक दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी शोकॉज नोटिस के काम से हटा दिया गया।मामले में केयर टेकर ने कुलपति को ई-मेल के जरिए शिकायत करने के साथ सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर प्रभारी बदलाव के लिए आए थे, लेकिन उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाने का आरोपBHU ट्रॉमा सेंटर में 2014 से केयरटेकर के पद पर तैनात सुनील यादव ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है। कहा- 20 जुलाई को नए प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. अजीत कुमार के आने के बाद से मुझे परेशान किया जा रहा था।सुनील ने कहा- कुछ कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने के लिए मुझ पर दबाव बनाया जा रहा था। लिखना था कि वे समय पर ड्यूटी नहीं आते और काम नहीं करते, जबकि कर्मचारी नियमित रूप से काम कर रहे थे।ALSO READ: बीएचयू शिक्षा संकाय का 109वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गयासुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।सुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।मना किया तो ट्रामा में प्रवेश पर रोक लगा दीसुनील ने बताया कि उन्होंने ऐसा लिखने से इनकार किया तो उन पर दबाव बनाया गया और कहा गया कि वह सौरभ सिंह के आदमी हैं। इसके बाद उन्होंने 28 जुलाई को पत्र के माध्यम से कुलपति से शिकायत की। उनका आरोप है कि 29 जुलाई को जब वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बताया कि उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।सुनील का कहना है कि उन्हें काम से हटाने से पहले कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया। उन्हें सीधे कहा गया कि वह अगले दिन से काम पर न आएं। उन्होंने इस कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताते हुए मामले में शिकायत की है।सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में शिकायतसुनील यादव ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर ई-मेल के जरिए कुलपति से शिकायत की। इसके बाद जनसुनवाई, सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में वर्चस्व की लड़ाई के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुनील के मुताबिक, वह 11 साल से काम कर रहे हैं और उन्हें बदले की भावना से हटाया गया है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बना हुआ है।सुनील ने दावा किया कि जब उन्होंने कार्रवाई का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि वीसी ने निर्देश दिया है कि जो भी गलत दिखाई दे, उसे हटा दिया जाए।