बीएचयू में सीजीएचएस योजना लागू, 40 से ज्यादा अस्पतालों से होगा एमओयू...

वाराणसी : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में लंबे समय से चली आ रही सीजीएचएस (केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना) लागू करने की मांग पूरी हो गई है. गुरुवार को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संबंधित कमेटी की अनुशंसाओं को मंजूरी दे दी. देर शाम जारी अधिसूचना के माध्यम से बीएचयू ने अपने हजारों शिक्षकों, कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा उनके परिवारजनों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला किया है. इसके तहत 40 से अधिक निजी अस्पतालों को चिह्नित किया गया है. जून के अंत तक इन अस्पतालों के साथ एमओयू (समझौता) कर लिया जाएगा.
मौजूदा समस्या का समाधान
वर्तमान व्यवस्था में बीएचयू के कर्मचारियों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने पर पूरे बिल का भुगतान स्वयं करना पड़ता था, जबकि विश्वविद्यालय सीजीएचएस निर्धारित दरों पर केवल प्रतिपूर्ति देता था. शेष राशि का बोझ कर्मचारी को ही उठाना पड़ता था. नई व्यवस्था में यह समस्या समाप्त हो जाएगी.
चार श्रेणियों में बांटे गए लाभार्थी
वाराणसी में रहने वाले 70 वर्ष तक के आयु वाले पेंशनभोगी और उनके परिवार
वाराणसी में रहने वाले 70 वर्ष से अधिक आयु वाले पेंशनभोगी और उनके परिवार
वाराणसी के बाहर रहने वाले पेंशनभोगी और उनके परिवार
वाराणसी में रहने वाले 70 वर्ष से कम आयु के लाभार्थियों को उपचार के लिए बीएचयू से रेफरल लेना आवश्यक होगा, जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगी बिना रेफरल के सीधे चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकेंगे. जांच व उपचार का प्रतिपूर्ति मुख्य रूप से सीजीएचएस दरों के अनुसार होगा. आपातकालीन उपचार, दवा प्रतिपूर्ति आदि मामलों में विश्वविद्यालय की स्वास्थ्य योजना, सीजीएचएस एवं सीसीएस (मेडिकल अटेंडेंस) नियम लागू होंगे.
देशभर के प्रमुख शहरों में सुविधा
बीएचयू दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता समेत अन्य राज्यों की राजधानियों और वाराणसी के निजी अस्पतालों के साथ एमओयू करेगा. इन अस्पतालों में बीएचयू के शिक्षक-कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीजीएचएस दरों पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी. यह व्यवस्था शुरू में तीन वर्षों के लिए प्रभावी होगी.
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एमओयू के बाद पैनल अस्पतालों की सूची बीएचयू की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट की जाएगी. कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा, “बीएचयू के कर्मचारी और पेंशनभोगी देश के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं. हमें खुशी है कि इस दिशा में हम सकारात्मक प्रगति कर रहे हैं. समय के साथ इस व्यवस्था में और सुधार किए जाते रहेंगे.”



