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बाल विवाह मुक्त भारत एवं सुशासन सप्ताह: ‘प्रशासन गांव की ओर’ थीम के तहत किया गया जागरूक

बाल विवाह मुक्त भारत एवं सुशासन सप्ताह: ‘प्रशासन गांव की ओर’ थीम के तहत किया गया जागरूक
Dec 24, 2025, 12:34 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - कमलापति त्रिपाठी गर्ल्स इंटर कॉलेज में बुधवार को बाल विवाह मुक्त भारत एवं सुशासन सप्ताह प्रशासन गांव की ओर थीम के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मौजूद रहे जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार एवं मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह के निर्देशन में व जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज कुमार मिश्र के कुशल मार्गदर्शन में महिला कल्याण विभाग की टीम द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत जागरूक किया गया.


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इस अवसर पर चाइल्ड हेल्पलाइन से सुपरवाइजर पारुल राय ,परामर्श दाता प्राची जयसवाल द्वारा कंपोजिट विद्यालय शिवपुर ,जेंडर स्पेशलिस्ट एचईडब्लू से प्रियंका राय, रेखा श्रीवास्तव द्वारा कमलापति गर्ल्स इंटर कॉलेज, जिला बाल संरक्षण इकाई से सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार एवं रामकिशन तथा धर्मराज द्वारा कंपोजिट विद्यालय होलापुर में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान तथा सुशासन सप्ताह के अंतर्गत , सभी को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए हुए बताया गया कि बाल विवाह करने से बच्चों का शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास पूर्णतया नहीं हो पता है. जिससे बालक एवं बालिकाओं का पूरा जीवन अंधकारमय बीतता है. बाल विवाह करना कानूनन अपराध है, यदि कोई भी व्यक्ति बाल विवाह करता है तब उसको 1 लाख रुपए जुर्माने 2 वर्ष तक का कठोरतम कारावास या फिर दोनों से दंडित किया जाएगा.


परिवार ,समाज, समुदाय एवं देश के प्रत्येक नागरिक को बाल विवाह रोकने हेतु सक्रिय सहभागिता के साथ बाल विवाह का अंत करना होगा तभी बाल विवाह मुक्त भारत संभव हो सकेगा. परियोजना समन्वयक द्वारा बताया गया कि विवाह करने की उम्र लड़की की 18 वर्ष से अधिक तथा लड़के की उम्र 21 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए.


बाल विवाह के खिलाफ लिया शपथ


इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का संकल्‍प लिया. उक्त कार्यक्रम में बच्चों को वीर बाल दिवस के बारे में भी जागरूक किया गया तथा सुशासन सफ्ताह प्रशासन गांव की और के अंतर्गत बच्चों की समस्याओं को मौके पर ही निस्तारण किया गया तथा बच्चों को निम्नलिखित विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई.


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- मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना

- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना

- वन स्टॉप सेंटर

. बाल सेवा योजना

. स्पॉन्सरशिप योजना

- 181 महिला हेल्पलाइन

- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

- पति की मृत्यु पर निराश्रित महिला पेंशन योजना आदि

उक्त कार्यक्रम में तीनों विद्यालय के विद्यार्थी एवं सभी शिक्षक गण उपस्थित रहे .

 "अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस" पर एसएसपीजी मंडलीय अस्पताल में महिला अधिकारी एवं कर्मचारी   सम्मानित
"अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस" पर एसएसपीजी मंडलीय अस्पताल में महिला अधिकारी एवं कर्मचारी सम्मानित
वाराणसी: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय जिला चिकित्सालय में डॉ बृजेश कुमार, प्रमुख अधिक्षक द्वारा महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य एवं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग विभाग व चिकित्सालय को दिए गए अपने सक्रिय सेवा भावना के लिए अप्रिशिएसन सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया तथा उनके कार्यों की सराहना की.इस दौरान महिलाओं को स्वास्थ्य जागरूकता मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य जागरण के अभियान के तहत उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा ब्रेस्ट कैंसर, मेंस्ट्रूअल हाइजीन, एचपीवी वैक्सीनेशन तथा पोषण संबंधी मानसिक शारीरिक स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक किया गया.ALSO READ : महिला दिवस पर काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्थाकार्यक्रम में प्रमुख अधीक्षक के मार्गदर्शन में डॉ मुकुंन्दजी श्रीवास्तव, डॉ पुष्पा सिंह, डॉ मेराज बानो, डॉ स्वाति, डॉ नेहा वर्मा, डॉ रचना सिंह, डॉ इकबाल के साथ ICN अफसाना खातून एवं नर्सिंग स्टाफ की महिलाएं के साथ साथ बड़ी संख्या में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, सफाई कर्मचारी वह अन्य चिकित्सा कर्मी एवं मरीज के परिजन मौजूद रहे.
महिला दिवस पर काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था
महिला दिवस पर काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था
वाराणसी: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई. मंदिर प्रशासन की ओर से महिलाओं के लिए अलग से दर्शन की लाइन और सुगम प्रवेश की सुविधा दी गई, जिससे बड़ी संख्या में पहुंची महिला श्रद्धालुओं को आसानी से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने का अवसर मिला.मंदिर में पहुंची महिलाओं ने इस व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है कि महिला दिवस के मौके पर उनके लिए खास व्यवस्था की गई है. कई महिलाओं का कहना था कि इस तरह की सुविधा मिलने से उन्हें सम्मान और खुशी का एहसास हो रहा है.कुछ महिलाओं ने बताया कि घर के कामकाज और जिम्मेदारियों के कारण अक्सर मंदिर आने का समय निकालना मुश्किल हो जाता है, लेकिन अलग लाइन होने से दर्शन करना आसान हो गया. उनका कहना है कि अगर ऐसी व्यवस्था समय-समय पर होती रहे तो महिलाओं को काफी राहत मिलेगी.ALSO READ : ई- रिक्शा बना महिलाओँ के आत्मनिर्भर बनने का सहाराउन्होंने कहा कि महिला दिवस पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करना उनके लिए बहुत खास अनुभव है. दर्शन करने के बाद वे अपने दिन को खास तरीके से मनाने की योजना बना रही हैं. कुछ महिलाओं ने बताया कि दर्शन के बाद वे गंगा घाट जाएंगी, वहां घूमने-फिरने के साथ फोटो और रील बनाकर इस दिन को यादगार बनाएंगी.कई श्रद्धालु महिलाओं ने यह भी कहा कि रविवार जैसे व्यस्त दिनों में मंदिर में भीड़ ज्यादा रहती है, ऐसे में अलग लाइन होने से उन्हें काफी सुविधा मिली. उनका मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से महिलाओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन करने का मौका मिल रहा है.
ई- रिक्शा बना महिलाओँ के आत्मनिर्भर बनने का सहारा
ई- रिक्शा बना महिलाओँ के आत्मनिर्भर बनने का सहारा
वाराणसी. आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं . शिक्षा , खेल , प्रशासन से लेकर हर क्षेत्र में उनकी भागेदारी बढ़ रही है . इसके बावजूद समाज में कई महिलाये ऐसी है जो आर्थिक मजबूरियों के कारण घर की चार दीवारी तक सिमित रह जाती है . ऐसे में एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेस ने इन महिलाओ को नई दिशा दी हैसंस्था महिलाओ को निःशुल्क ई- रिक्शा देकर उन्हें रोजगार के अवसर दे रही है इसके साथ ही महिलाओ को वाहन चलना भी सिखाया जाता है और साथ ही साथ ड्राइविंग लइसेंस दिलाने में भी मदद की जाती है . इस पहल का मकसद बस महिलाओ को रोजगार देना नहीं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है ताकि वो अपने पैरों पर खड़े हो कर आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सके .इस पहल से जुड़ कर आज कई महिलाये इससे अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है . पहले जो महिलाएं दूसरों पर निर्भर थी आज वही महिलाएं अपना और अपने परिवार की जिम्मेदारी उठा कर गर्व महसूस कर रही है .ALSO READ : महिला दिवस पर नारी शक्ति का उत्सव, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही महिलाएंकई महिलाओ ने कहा की शुरुआत में समाज के लोगो से उनको ताने भी सुनने को मिला पर उन्होंने हार नहीं मानी और अपना काम जारी रखा तो वही कई महिलाओ का ये भी कहना था की पहले उन्होंने बिना किसी की मदत के रिक्शा चलाना सीखा परिवार में इसका कई लोगो ने विर्रोध भी किया तो वही कई लोगो ने साथ भी दिया था . आज वही महिलाएं सड़क पर रिक्शा चला कर अपनी पहचान बना रही और आत्मनिर्भर बन रही है . महिलाओ का मन्ना है की रिक्शा चलाना उनके लिए केवल रोजगार नहीं आत्मसम्मान का भी माध्यम बन गया है कई लोग उन्हें देख कर प्रोत्साहित करते है और कहते है की महिलाओ को ऐसे आगे बढ़ाते देख उन्हें काफी गर्व महसूस होता है हलाकि कई लोग इसकी आलोचना भी करते है पर महिलाओ का कहना है की आगे बढ़ने के लिए ऐसी बातो को नजरअंदाज करना बेहतर है .आज यह पहल कई महिलाओ के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है . इ रिक्शा की मदत से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है , बल्कि समाज में एक नई मिशाल भी पेश कर रही है . यह पहल दिखता है की अगर सही अवसर और सहयोग मिले तो महिलाये किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहेंगी