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नाविक परिवारों के बच्चे सीख रहे तमिल — “तमिल सीखें, तमिल करकलाम”

नाविक परिवारों के बच्चे सीख रहे तमिल — “तमिल सीखें, तमिल करकलाम”
Dec 03, 2025, 12:01 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी। काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत नमो घाट, वाराणसी में एक विशेष और प्रेरक पहल की शुरुआत की गई है, जहाँ गंगा तट पर नाविक परिवारों के बच्चे अब तमिल भाषा सीख रहे हैं. आईआईटी मद्रास द्वारा संचालित विद्या शक्त‍ि स्टॉल पर इन बच्चों के लिए रोज़ाना तमिल सीखने का सत्र आयोजित किया जा रहा है. उन्होंने प्रतिदिन 5 तमिल शब्द सीखने का संकल्प लिया है, ताकि वे तमिलनाडु से आने वाले अतिथियों से सरलता और आत्मीयता से संवाद स्थापित कर सकें.


यह प्रयास न केवल भाषा सीखने का माध्यम है, बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. नाविक समुदाय काशी की संस्कृति में विशेष स्थान रखता है. गंगा की लहरों के साथ जीवन जीने वाले इन परिवारों के बच्चे काशी आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से निरंतर संपर्क में रहते हैं. तमिल भाषा का ज्ञान उन्हें सांस्कृतिक संवाद और पर्यटन के नए अवसर भी प्रदान करेगा.

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तमिल विश्व की सबसे प्राचीन, समृद्ध और साहित्यिक दृष्टि से गौरवपूर्ण भाषाओं में से एक है. भाषा सीखते हुए बच्चे न केवल नए शब्दों से परिचित हो रहे हैं, बल्कि तमिल समुदाय की ऐतिहासिक पहचान, साहित्यिक वैभव और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में भी जान रहे हैं. यह पहल उन्हें विविधता के सम्मान का पाठ पढ़ाती है और यह समझने में मदद करती है कि भाषा दिलों को जोड़ने की सबसे सशक्त कड़ी है.


काशी तमिल संगमम् 4.0 का व्यापक उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक एकता को नई ऊर्जा देना है. जब काशी के बच्चे तमिल बोलेंगे और तमिलनाडु के अतिथि काशी की आत्मीयता महसूस करेंगे, तब “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का सपना और अधिक जीवंत हो उठेगा.

नमो घाट पर शुरू हुई यह छोटी-सी सीखने की यात्रा आने वाले दिनों में बड़े सांस्कृतिक बदलाव का आधार बनेगी. यह संदेश देती हुई कि गंगा और कावेरी केवल नदियाँ नहीं भारत की आत्मा को जोड़ने वाली अनंत धारा हैं.


काशी में चल रहे काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत बुधवार को नमो घाट पर छात्रों के लिए विशेष एकेडमिक सत्र का आयोजन किया गया. इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “तमिल सीखें – तमिल करकलाम” रखी गई, जिसका उद्देश्य बच्चों को तमिल भाषा, लोककथाओं और दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक वैभव से परिचित कराना था.


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हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ आज से, इस साल 12 नहीं 13 महीने...
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हिन्दू नववर्ष: भारत में आज से हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो चुकी है.पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ लोग नववर्ष का स्वागत कर रहे हैं.मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हो रही है, वहीं घर-घर में मंगलकामनाओं के साथ नए साल की शुरुआत की जा रही है.हिंदू नववर्ष केवल एक कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर चलने वाली जीवन शैली का प्रतीक है.इस समय प्रकृति भी नए रूप में दिखाई देती है.पतझड़ के बाद वृक्ष अपने पुराने पत्तों को त्याग देते हैं और वसंत ऋतु में नई कोपलें जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती हैं.इसी तरह यह नववर्ष भी हमें पुरानी नकारात्मकताओं को छोड़कर सकारात्मक सोच और नए उत्साह के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है. अगर आर्थिक दृष्टि से देखें, तो इस पर्व का बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी खासा प्रभाव पड़ता है. नववर्ष के मौके पर लोग नए वस्त्र, आभूषण, वाहन और घरेलू सामान की खरीदारी करते हैं, जिससे बाजार में रौनक बढ़ जाती है.मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजन...मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के चलते फूल विक्रेताओं, मिठाई दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को विशेष लाभ मिलता है.इसके अलावा, कृषि प्रधान समाज में यह समय नई फसलों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है.इस तरह हिंदू नववर्ष आस्था के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाला पर्व है, जो समाज को सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से जोड़ने का काम करता है.शुक्ल योग-उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में हिन्दू नववर्ष 2083 का शुभारंभहिन्दू नववर्ष 2083 का शुभारंभ शुक्ल योग और उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है. आज शुक्ल योग प्रात:काल से लेकर देर रात 01:17 ए एम तक है. वहीं उत्तरभाद्रपद नक्षत्र भी प्रात:काल से लेकर कल 04:05 ए एम तक है. उसके बाद से रेवती नक्षत्र है.ALSO READ : स्कूल संचालक के साथ जमकर मारपीट, अटेंडेंस को लेकर छिड़ा विवादहिन्दू नववर्ष 2083 में 12 नहीं 13 महीनेइस बार हिन्दू नववर्ष में 12 की जगह पर 13 महीने होंगे. ज्येष्ठ माह में एक अधिकमास जुड़ जाएगा, इसकी वजह से 12 के स्थान पर 13 महीने होंगे. अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. यह जिस माह के साथ जुड़ता है, उसमें कृष्ण पक्ष के बाद अधिक मास का शुक्ल पक्ष 15 तिथियों तक होता है.
दिल्ली के इस इमारत में भीषण आग, नौ लोगों को रेस्क्यू करने में जुटी फायर ब्रिगेड
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राजधानी दिल्ली में साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के साध नगर इलाके में आज सुबह भीषण आग लग गई. जिसके चलते इलाके में हंगामा मच गया. ये आग साध नगर इलाके में स्थित एक इमारत में लगी है, जहां देखते ही देखते आग ने भयानक रूप ले लिया. जिससे चारों तरफ आग की लपटे तेजी से फैल गई. इसी के चलते एक ही परिवार के 9 लोग बुरी तरह से फंस गए हैं.घटना मामले की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस संग दमकल विभाग ने घटनास्थल का जायजा लिया और बिल्डिंग के अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत बचाव अभियान चलाया. इसी के साथ ही फायर ब्रिग्रेड की गाड़ियों ने आग बुझाने में जुट गई, लेकिन कई घंटों के बाद भी आग को बुझाया नहीं जा सका, क्योंकि भयकंर तरीके से लगी आग ने विकराल रूप ले लिया था, जिस पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.आग पर काबू पाने की कोशिश मामले की जांच-पड़ताल में जुटी पुलिस के मुताबिक, बिल्डिंग में लगी आग ने भयानक रूप ले लिया, जिसके धुंए का गुब्बारा आसमान में उठने लगा. जिसकी भनक लगते ही लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया, ग्रामीणों की सूचना मिलते ही दमकल विभाग द्वारा आग पर काबू पाने की कोशिश की गई.पहले भी झुलस चुका है दिल्ली की ये इलाका दिल्ली के इलाके में लगी ये आग का कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी हूबहू ऐसा ही मामला देखने को मिला, जी हां, बीते 6 दिन पहले उत्तम नगर के मछली मंडी इलाके में भी भयानक आग ने तबाही मचा रखी थी, जहां दुकानें और झुग्गी-झोपड़ियों को आग ने अपनी चपेट में ले लिया था, जब तक दमकल विभाग पहुंचा तब-तक काफी कुछ जल कर राख हो चुका था.यह भी पढ़ें: योगी सरकार के नौ साल पूरे, स्टाम्प मंत्री ने गिनाई कई उपलब्धियां...मगर देर से पहुंची बचाव दल ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जबकि नुकसान का सही आंकलन अब तक सामने नहीं आ पाया है. हालांकि इस दौरान 300 से 400 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं. मटियाला के पास स्थित इस घनी बस्ती में गर्मी के चलते आग तेजी से फैली और पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जबकि आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है.
स्कूल संचालक के साथ जमकर मारपीट, अटेंडेंस को लेकर छिड़ा विवाद
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वाराणसी: राजातालाब थाना क्षेत्र के पयागपुर मातलदेई स्थित एक इंटर कॉलेज परिसर में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अटेंडेंस को लेकर चल रहे विवाद के बीच कई लोग लाठी-डंडा और असलहे के साथ विद्यालय में घुस आए और संचालक व उनके पिता के साथ मारपीट कर दी. घटना के बाद विद्यालय परिसर में दहशत का माहौल बन गया.घायल युवक ने दी पुलिस को तहरीर घायल प्रकाश सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि विकास यादव,अजय यादव,अमित कुमार यादव,अगनू यादव,गब्बर यादव,आनंद कुमार यादव समेत 8-10 अज्ञात लोग पहले से साजिश के तहत एकजुट होकर विद्यालय पहुंचे थे. सभी के हाथों में लाठी-डंडे और असलहे थे. आरोप है कि पहुंचते ही इन लोगों ने उनके पिता केशव से छात्र की उपस्थिति बढ़ाने को लेकर विवाद शुरू कर दिया और देखते ही देखते गाली-गलौज के बाद मारपीट पर उतर आए.बीच बचाव में बुलाई गई पुलिस शोर-शराबा सुनकर जब प्रकाश सिंह, उनकी माता विमला देवी, अखिलेश कुमार समेत अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव करने का प्रयास किया तो हमलावरों ने उन्हें भी निशाना बना लिया. हमलावरों ने घेरकर लाठी-डंडों व लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई की. इस दौरान प्रकाश सिंह के सिर पर गंभीर चोट लगी, जिससे उनका सिर फट गया ,उनके पिता को भी इस हमले में गंभीर चोटें आई हैं. कॉलेज के अन्य स्टाफ ने बीच बचाव कर पुलिस बुलाई.यह भी पढ़ें: योगी सरकार के नौ साल पूरे, स्टाम्प मंत्री ने गिनाई कई उपलब्धियां...पुलिस ने वादी की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और नामजद व अज्ञात आरोपियों की तलाश की जा रही है. एसीपी राजातालाब का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है. हीं छात्र पक्ष का कहना है कि कक्षा 9 का एक छात्र पिछले डेढ़ महीने से बीमार होने के कारण स्कूल नहीं आ पा रहा था. उसके साथ बंद कमरे में मारपीटकी गई ,जब वह परिजनों के साथ विद्यालय पहुंचा तो पुनः उसके साथ और उसके परिवार के साथ मारपीट की गई.