अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर CM योगी का बड़ा बयान, कहा- 'हर कोई शंकराचार्य नहीं लिख सकता'

प्रयागराज माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच कुछ दिनों पहले काफी विवाद देखने को मिला. जिसमें संत ने अफसरों पर आरोप लगाते हुए ये कहा था कि उन्हें योगी के अफसरों ने स्नान नहीं करने दिया है. बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने इस मुद्दे का जिक्र किया. जिसे देखते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा कि, मौनी अमावस्या के दिन 4.50 करोड़ श्रद्धालु थे. एग्जिट गेट से किसी को एंट्री की इजाजत नहीं दी जा सकती थी, इससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी, यह श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ होता, कोई भी मर्यादित व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता, सबके लिए एक व्यवस्था बनाई गई थी जो सबके लिए बराबर होता है. क्या हर कोई सीएम का बोर्ड लगाकर घूम सकता है?

"शंकराचार्य का पद सनातन में पवित्र होता है"
सीएम योगी ने कहा कि, कोई भी मंत्री या सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का बोर्ड लगाकर घूम सकता है? शंकराचार्य का पद सनातन में पवित्र होता है. यह भी परपरा और नियमों से संचालित होता है, हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता, हर व्यक्ति आचार्य के रूप में जहां-तहां वातावरण खराब नहीं कर सकता है. इसलिए हर पद की अपनी एक गरिमा होती है. यहां तक की खुद सदन भी नियमों और परंपराओं से चलता है, इसलिए कानून हर किसी के लिए सामान है. “मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है, हम सभी संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हैं और उसका पालन करना जानते भी हैं और करवाना भी जानते हैं.” इस मुद्दे को जानबूझकर विवादित मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है.

"सीएम के लिए भी कोई अलग कानून नहीं"
अपने बयानों में सीएम योगी ने यह तक कहा कि, सीएम के लिए भी कोई अलग कानून नहीं है, अगर मैं अपराध करूंगा तो उसी कानून से मैं भी देखा जाऊगा, जिस कानून से एक आम जनता भी चलती है. हम कानून के शासन का पालन करते है और पालन भी करवाना जानते है. विपक्ष पर कटाक्ष कर कहा कि अगर सपा उन्हें अपना शंकराचार्य मानते है तो उन पर लाठीचार्ज क्यों करवाया? एफआईआर क्यों करवाई? आपको पूजना है तो पूजा करिए, लेकिन इसके नाम पर लोगों को गुमराह करना बंद करिए, तो ही आपके लिए बेहतर होगा, नहीं इसका अंजाम बहुत ही बुरा होगा. समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते हुए सीएम योगी ने कहा कि, इस पार्टी ने राम मंदिर अयोध्या, काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा-वृंदावन के विकास का विरोध किया है.

सीएम योगी बोले-विपक्ष की खैर नहीं
ये वहीं पार्टी है जिसकी सरकार में जन्माष्टमी जैसे धार्मिक पर्वों के आयोजन पर रोक लगाई गई, कांवड़ यात्रा बाधित की गई और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा रोकी गई. एक बात कान खोलकर सुन ले विपक्ष “सनातन आस्था को कोई भी अपनी ताकत की मदद से कैद नहीं कर सकता.” प्रदेश के पुनर्जागरण माडल में आस्था और विकास दोनों शामिल हैं, दीपोत्सव और रंगोत्सव जैसे आयोजनों से करोड़ों लोग जुड़ रहे हैं और इससे प्रदेश की जीडीपी में भी वृद्धि हुई है.



