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CM योगी ने वाराणसी में "स्‍कूल चलो अभियान" का किया शुभारंभ, बच्‍चों का परोसा खाना

CM योगी ने वाराणसी में "स्‍कूल चलो अभियान" का किया शुभारंभ, बच्‍चों का परोसा खाना
Apr 04, 2026, 06:36 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अपने दौरे से दूसरे दिन आज शनिवार 4 अप्रैल को वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया. उन्होंने शिवपुर के कंपोजिट स्कूल के बच्चों को खुद कंधे पर स्कूल बैग पहनाया, गिफ्ट और किताबें दीं. खाना भी परोसने के साथ उनसे बातचीत की और हालचाल पूछा. इस मौके पर सीएम योगी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा सरकार पर हमला किया. कहा- 2017 से पहले सरकार के एजेंडे में शिक्षा नहीं थी. उनके लोग नकल कराते थे, ताकि उनके स्कूलों में पढ़ाई न हो. इस तरह की कामचलाऊ व्यवस्था से समाज आगे नहीं बढ़ता.


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सीएम ने काल भैरव के दर्शन कर उतारी आरती


अपने इसी बयानों में सीएम योगी ने आगे कहा कि, तीसरी, चौथी, पांचवीं और छठी के बाद बच्चे स्कूल छोड़ देते थे. किसी भी सड़क से जाओं तो बच्चे दिनभर घूमते मिलते थे. कोई तालाब में, कोई कीचड़ में, तो कोई भैंसों के साथ खेलता मिलता था. हम बच्चों से पूछते थे कि स्कूल क्यों नहीं जा रहे. पता चलता था कि स्कूल दूर हैं. इससे पहले, सीएम ने काशीविश्‍वनाथ मंदिर और काल भैरव के दर्शन किए और आरती भी उतारी.


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"स्कूली शिक्षा पर हम यूपी में करोड़ों रुपए खर्च करते हैं"


स्‍कूल चलो अभियान की शुरूआत करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्कूली शिक्षा पर हम यूपी में 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च करते हैं. इसका रिजल्ट आना चाहिए. जहां कस्तूरबा गांधी स्कूल नहीं थे, वहां इस बजट में हमने पैसा दिया. कस्तूरबा गांधी स्कूलों में 8वीं तक की पढ़ाई थी, जिसके बाद बच्चियां स्कूल जाना बंद कर देती थीं. हमने कहा कि इसे 12वीं तक करेंगे. मुझे याद है, जब 2017 में हमारी सरकार बनी थी. हम लोगों ने 1 जुलाई को स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ किया था. उससे पहले मुझे अलग-अलग जिलों में जाने का अवसर मिला था. मैंने बेसिक शिक्षा विभाग के भवनों की जर्जर स्थिति देखी. बंदी की कगार पर पहुंच रहे स्कूलों के बारे में जानकारी ली. मैं एक स्कूल में गया था, जहां प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है. 10 से कम बच्चे रह गए हैं. नए सत्र में शायद ये बच्चे भी न आएं.


सीएम योगी ने की प्रिंसिपल से बात


मैंने प्रिंसिपल से पूछा कि आखिर ये बच्चे कहां जा रहे हैं. जवाब मिला-बच्चों में पढ़ने की रुचि नहीं है. तब मैंने प्रिंसिपल से कहा था-बच्चों में पढ़ने की रुचि नहीं है या आप में पढ़ाने की रुचि नहीं है. बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाना ही हमारा काम है. योगी ने कहा-याद रखना, सामाजिक और आर्थिक समानता लानी है तो सबको शिक्षित करना होगा. पहले स्थितियां कैसी थीं, स्कूलों में बच्चों का ड्रॉपआउट रेट 19% से ज्यादा हो गया था. लेकिन अब ड्रॉपआउट रेट 19% से घटकर 3% पर पहुंच गया है. हमें इसे 0% पर लाना है.


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शिक्षा का मतलब सिर्फ सर्टिफिकेट या डिग्री लेना नहीं होता. शिक्षा इंसान को अच्छे संस्कार देने और सही रास्ता दिखाने का जरिया है. यह जिम्मेदारी ईश्वर ने हमारे गुरुजनों को सौंपी है. अगर शिक्षा इस भूमिका को सही तरीके से निभाए, तो समाज और देश दोनों को अच्छे नतीजे मिलेंगे. योगी ने कहा-ऑपरेशन कायाकल्प को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया. आज ऑपरेशन कायाकल्प की बात होती है तो भारत सरकार के नीति आयोग ने देश में शिक्षा की सक्सेस स्टोरी के रूप में ऑपरेशन कायाकल्प को जगह दी है.


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इस ऑपरेशन में 1 लाख 36 हजार से ज्यादा स्कूल सभी सुविधाओं से लैस हुए हैं. ऑपरेशन निपुण से सामान्य शिक्षा के मामले में बच्चों में जिज्ञासा बढ़ी है. हमारे शिक्षकों ने मेहनत की. उसी जर्जर स्कूल में मैं 3 साल बाद गया तो वही प्रिंसिपल थे और 250 से ज्यादा बच्चे थे. प्रिंसिपल का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ था.


‘2017 के पहले 60% से ज्यादा बालिकाएं नंगे पैर चलती थीं’


योगी ने कहा-मुझे याद है, 2017 के पहले 60% से ज्यादा बालिकाएं नंगे पैर चलती थीं. सर्दी हो या गर्मी, बदन पर सिर्फ एक फटी कुर्ती होती थी. कमोबेश बालकों की स्थिति भी ऐसी ही थी. आज मैं कह सकता हूं कि बेसिक शिक्षा में पढ़ने वाले सभी बच्चों को डबल इंजन की सरकार ने साल में 2 ड्रेस, बैग, किताबें, जूते और मोजे सब मुफ्त में दिलाए हैं. जैसे ही एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी, 15 अप्रैल और 15 जुलाई के बाद दो चरणों में पैसे अभिभावकों के खाते में दिए जाएंगे.


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योगी ने टीचरों से कहा-देश के भविष्य को गढ़ने और उसे तराशने की जिम्मेदारी ईश्वर ने आपको दी है. अगर आप इस दायित्व का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करेंगे, तो आपका जीवन भी यशस्वी होगा और ये बच्चे जब आगे बढ़ेंगे, तो आपको याद करते हुए हमेशा सम्मान देंगे.

हम लोगों को जिन शिक्षकों ने बचपन में पढ़ाया था, उनसे कभी मिलते हैं तो मैं आज भी उनके पैर छूता हूं.

वाराणसी रिंग रोड फेज 2 पर अज्ञात वाहन में पीछे से टकराया ट्रक, चालक की मौत...
वाराणसी रिंग रोड फेज 2 पर अज्ञात वाहन में पीछे से टकराया ट्रक, चालक की मौत...
वाराणसी : जंसा थाना क्षेत्र में रिंग रोड फेज 2 पर सजोई गांव के पास मंगलवार की सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया. तेज रफ्तार ट्रक किसी अज्ञात वाहन में पीछे से टकरा गया, जिससे चालक की मौत हो गई. ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. मशक्‍कत के बाद केबिन में फंसे चालक को बाहर निकाला गया. इस दौरान कुछ देर तक यातायात भी प्रभावित रहा. पुलिस शव कब्‍जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई में जुट गई.घटना की सूचना राहगीरों ने जंसा पुलिस को दी. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और काफी प्रयास के बाद चालक के शव को केबिन से बाहर निकाला. हादसे के समय ट्रक में कोई खलासी मौजूद नहीं था. प्रारंभिक अनुमान है कि चालक को झपकी आने के कारण यह दुर्घटना हुई होगी, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है.जंसा थाना प्रभारी सत्यजीत सिंह ने बताया कि ट्रक के पंजीकरण नंबर के आधार पर मृत चालक की पहचान कराने का प्रयास किया जा रहा है. शव को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है. साथ ही दुर्घटना में शामिल अज्ञात वाहन की भी तलाश की जा रही है. घटना के बाद कुछ देर तक रिंग रोड पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे पुलिस ने सामान्य किया. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.ALSO READ:संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान, घाट पर गूंजा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा...इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों ने सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों की बढ़ती संख्या और लापरवाह ड्राइविंग के प्रति चिंता व्यक्त की है. सड़क दुर्घटनाएं अक्सर गंभीर परिणाम लेकर आती हैं, और यह घटना भी इस बात का प्रमाण है कि सड़क पर सतर्कता और सावधानी बरतना कितना आवश्यक है. पुलिस ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे सड़क पर नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग को प्राथमिकता दें.
संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान, घाट पर गूंजा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा...
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संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा से चल रहे राष्ट्रव्यापी 'समरसता संकल्प अभियान' के तहत मंगलवार को संत रविदास घाट पर नमामि गंगे द्वारा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. हाथों में संत रविदास के संदेश लिखी तख्तियां और कठौती में गंगाजल लेकर उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता, आंतरिक पवित्रता, सच्चे कर्म और मानवता का संदेश दिया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. उत्तम ओझा ने संत रविदास के विचारों को आज भी समाज के लिए प्रासंगिक बताते हुए उनके समरसता और नैतिक जीवन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया.वहीं नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' केवल एक कथन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सदाचार और समानता का जीवन-दर्शन है. इस अवसर पर पुष्पलता वर्मा, विशाल केसरी, दिनेश कुमार सिंह, सतवंत भारती, रवि निषाद, संजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे.बता दें कि शिरोमणी गुरु रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा 29 जुलाई गुरु पुर्णिमा से लेकर 20 फरवरी माघी पुर्णिमा तक देशभर में विविध आयोजन किए जा रहे हैं. भाजपा देशभर में "संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास सामाजिक समरसता अभियान" चलाएगी. अभियान का उद्देश्य गुरु रविदास के समरसता, कर्मयोग, भक्ति और सामाजिक सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है. अभियान पांच चरणों में संचालित होगा. प्रथम चरण के तहत 29 जुलाई को गुरु रविदास की जन्मस्थली एवं स्मारक पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा जन्मस्थली मंदिर के महंत संत निरंजन दास महाराज सहित अनेक संत एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे.इससे पहले 28 जुलाई को देशभर से आने वाले कार्यकर्ताओं की टोलियां गुरु रविदास स्मारक स्थल पर पवित्र मिट्टी का पूजन कर 131 कलश तैयार करेंगी. इसके बाद स्मारक स्थल से गुरु रविदास जन्मस्थली मंदिर तक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जहां सभी कलशों का विधिवत पूजन होगा.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।