CM योगी ने वाराणसी में "स्कूल चलो अभियान" का किया शुभारंभ, बच्चों का परोसा खाना
वाराणसी: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दौरे से दूसरे दिन आज शनिवार 4 अप्रैल को वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया. उन्होंने शिवपुर के कंपोजिट स्कूल के बच्चों को खुद कंधे पर स्कूल बैग पहनाया, गिफ्ट और किताबें दीं. खाना भी परोसने के साथ उनसे बातचीत की और हालचाल पूछा. इस मौके पर सीएम योगी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा सरकार पर हमला किया. कहा- 2017 से पहले सरकार के एजेंडे में शिक्षा नहीं थी. उनके लोग नकल कराते थे, ताकि उनके स्कूलों में पढ़ाई न हो. इस तरह की कामचलाऊ व्यवस्था से समाज आगे नहीं बढ़ता.

सीएम ने काल भैरव के दर्शन कर उतारी आरती
अपने इसी बयानों में सीएम योगी ने आगे कहा कि, तीसरी, चौथी, पांचवीं और छठी के बाद बच्चे स्कूल छोड़ देते थे. किसी भी सड़क से जाओं तो बच्चे दिनभर घूमते मिलते थे. कोई तालाब में, कोई कीचड़ में, तो कोई भैंसों के साथ खेलता मिलता था. हम बच्चों से पूछते थे कि स्कूल क्यों नहीं जा रहे. पता चलता था कि स्कूल दूर हैं. इससे पहले, सीएम ने काशीविश्वनाथ मंदिर और काल भैरव के दर्शन किए और आरती भी उतारी.

"स्कूली शिक्षा पर हम यूपी में करोड़ों रुपए खर्च करते हैं"
स्कूल चलो अभियान की शुरूआत करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्कूली शिक्षा पर हम यूपी में 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च करते हैं. इसका रिजल्ट आना चाहिए. जहां कस्तूरबा गांधी स्कूल नहीं थे, वहां इस बजट में हमने पैसा दिया. कस्तूरबा गांधी स्कूलों में 8वीं तक की पढ़ाई थी, जिसके बाद बच्चियां स्कूल जाना बंद कर देती थीं. हमने कहा कि इसे 12वीं तक करेंगे. मुझे याद है, जब 2017 में हमारी सरकार बनी थी. हम लोगों ने 1 जुलाई को स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ किया था. उससे पहले मुझे अलग-अलग जिलों में जाने का अवसर मिला था. मैंने बेसिक शिक्षा विभाग के भवनों की जर्जर स्थिति देखी. बंदी की कगार पर पहुंच रहे स्कूलों के बारे में जानकारी ली. मैं एक स्कूल में गया था, जहां प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है. 10 से कम बच्चे रह गए हैं. नए सत्र में शायद ये बच्चे भी न आएं.
सीएम योगी ने की प्रिंसिपल से बात
मैंने प्रिंसिपल से पूछा कि आखिर ये बच्चे कहां जा रहे हैं. जवाब मिला-बच्चों में पढ़ने की रुचि नहीं है. तब मैंने प्रिंसिपल से कहा था-बच्चों में पढ़ने की रुचि नहीं है या आप में पढ़ाने की रुचि नहीं है. बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाना ही हमारा काम है. योगी ने कहा-याद रखना, सामाजिक और आर्थिक समानता लानी है तो सबको शिक्षित करना होगा. पहले स्थितियां कैसी थीं, स्कूलों में बच्चों का ड्रॉपआउट रेट 19% से ज्यादा हो गया था. लेकिन अब ड्रॉपआउट रेट 19% से घटकर 3% पर पहुंच गया है. हमें इसे 0% पर लाना है.
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शिक्षा का मतलब सिर्फ सर्टिफिकेट या डिग्री लेना नहीं होता. शिक्षा इंसान को अच्छे संस्कार देने और सही रास्ता दिखाने का जरिया है. यह जिम्मेदारी ईश्वर ने हमारे गुरुजनों को सौंपी है. अगर शिक्षा इस भूमिका को सही तरीके से निभाए, तो समाज और देश दोनों को अच्छे नतीजे मिलेंगे. योगी ने कहा-ऑपरेशन कायाकल्प को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया. आज ऑपरेशन कायाकल्प की बात होती है तो भारत सरकार के नीति आयोग ने देश में शिक्षा की सक्सेस स्टोरी के रूप में ऑपरेशन कायाकल्प को जगह दी है.

इस ऑपरेशन में 1 लाख 36 हजार से ज्यादा स्कूल सभी सुविधाओं से लैस हुए हैं. ऑपरेशन निपुण से सामान्य शिक्षा के मामले में बच्चों में जिज्ञासा बढ़ी है. हमारे शिक्षकों ने मेहनत की. उसी जर्जर स्कूल में मैं 3 साल बाद गया तो वही प्रिंसिपल थे और 250 से ज्यादा बच्चे थे. प्रिंसिपल का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ था.
‘2017 के पहले 60% से ज्यादा बालिकाएं नंगे पैर चलती थीं’
योगी ने कहा-मुझे याद है, 2017 के पहले 60% से ज्यादा बालिकाएं नंगे पैर चलती थीं. सर्दी हो या गर्मी, बदन पर सिर्फ एक फटी कुर्ती होती थी. कमोबेश बालकों की स्थिति भी ऐसी ही थी. आज मैं कह सकता हूं कि बेसिक शिक्षा में पढ़ने वाले सभी बच्चों को डबल इंजन की सरकार ने साल में 2 ड्रेस, बैग, किताबें, जूते और मोजे सब मुफ्त में दिलाए हैं. जैसे ही एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी, 15 अप्रैल और 15 जुलाई के बाद दो चरणों में पैसे अभिभावकों के खाते में दिए जाएंगे.

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योगी ने टीचरों से कहा-देश के भविष्य को गढ़ने और उसे तराशने की जिम्मेदारी ईश्वर ने आपको दी है. अगर आप इस दायित्व का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करेंगे, तो आपका जीवन भी यशस्वी होगा और ये बच्चे जब आगे बढ़ेंगे, तो आपको याद करते हुए हमेशा सम्मान देंगे.
हम लोगों को जिन शिक्षकों ने बचपन में पढ़ाया था, उनसे कभी मिलते हैं तो मैं आज भी उनके पैर छूता हूं.


