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निर्माल्य से बनेगी सीएनजी, आईआईटी बीएचयू के शोधछात्र के नवाचार को मिला पेटेंट

निर्माल्य से बनेगी सीएनजी, आईआईटी बीएचयू के शोधछात्र के नवाचार को मिला पेटेंट
Jul 14, 2026, 01:30 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसीः घाटों पर बिखरे फूलों को देखकर उपजा एक विचार अब भारतीय पेटेंट में बदल गया है. मंदिरों में प्रतिदिन चढ़ने वाले फूल-मालाएं और पूजन सामग्री पूजा के बाद अक्सर अन्य कचरे के साथ मिलकर फेंक दी जाती हैं या जल स्रोतों में पहुंच जाती हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ श्रद्धालुओं की भावनाएं भी प्रभावित होती हैं. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए आईआईटी बीएचयू के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग स्कूल में पुष्प अपशिष्ट के वैज्ञानिक एवं आस्था-सम्मत प्रबंधन पर शोध किया गया है। इस शोध में आस्था, विज्ञान और सर्कुलर इकोनामी को साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है.


इस शोध के आधार पर विकसित तकनीक का पेटेंट आईआईटी बीएचयू को प्रदान किया गया है. इस परियोजना में शोधार्थी कैलाश पति पांडेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शोध एसोसिएट प्रोफेसर डा. अभिषेक सुरेश ढोबले के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया गया.

“एक दिन घाटों पर घूमते समय कैलाशपति ने देखा कि श्रद्धा से भगवान को अर्पित किए गए फूल कचरे के ढेर में पड़े हैं. तभी लगा कि इन फूलों को अपशिष्ट नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए, उसी सोच से यह शोध शुरू हुआ.


शोध में विकसित माडल के तहत पुष्प अपशिष्ट से बायो-सीएनजी, जैविक खाद और हवन सामग्री तैयार की जा सकती है. सबसे पहले फूलों को नियंत्रित जैविक प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे बायोगैस उत्पन्न होती है. इस गैस को शुद्ध और संपीड़ित कर बायो-सीएनजी के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जो सीएनजी किट वाले वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन का विकल्प बन सकती है.


वैश्विक स्तर पर तेल संकट, बढ़ती ईंधन कीमतों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच स्थानीय जैविक संसाधनों से ईंधन उत्पादन को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. शोधकर्ताओं के अनुसार धार्मिक स्थलों से निकलने वाला जैविक कचरा ऊर्जा उत्पादन का स्थानीय स्रोत बन सकता है, जिससे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.


बायोगैस निकालने के बाद बचा हुआ डाइजेस्टेट पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जाता है. उसी डाइजेस्टेट को प्राकृतिक पदार्थों के साथ मिलाकर हवन सामग्री तैयार की जाती है। शोध के अनुसार यह हवन सामग्री पारंपरिक व्यावसायिक उत्पादों की तुलना में बेहतर दहन क्षमता, कम धुआं और अधिक ऊष्मीय क्षमता प्रदर्शित करती है.


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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाए, तो इससे धार्मिक नगरों में पुष्प अपशिष्ट प्रबंधन की समस्या कम होगी, स्वच्छ ऊर्जा का स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा और फूल संग्रह, प्रसंस्करण, खाद निर्माण तथा हवन सामग्री उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. इस परियोजना के माध्यम से वाराणसी में प्रतिदिन 350 किलोग्राम से अधिक संपीड़ित बायो-सीएनजी के उत्पादन का अनुमान है.


डॉ. अभिषेक सुरेश ढोबले का कहना है कि

“यदि ऐसे फूल जल स्रोतों या सामान्य कचरे में मिलते हैं तो पर्यावरण और लोगों की भावनाओं दोनों को नुकसान होता है. हमारा प्रयास है कि इन्हें संसाधन के रूप में देखा जाए, न कि अपशिष्ट के रूप में. हमने ऐसा मॉडल विकसित करने का प्रयास किया है जिसमें फूल पहले ऊर्जा उत्पादन में योगदान दें, फिर उनसे खाद बने और अंत में शेष संसाधन हवन सामग्री के रूप में पुनः भगवान को अर्पित किए जा सकें. यह सच्चे अर्थों में सर्कुलर इकोनॉमी का उदाहरण है. इस उपलब्धि पर संस्थान के निदेशक प्रो.अमित पात्रा ने टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि “आईआईटी बीएचयू समाज की ज़रूरी समस्याओं के समाधान हेतु अनुसंधान आधारित नवाचारों के लिए प्रतिबद्ध है. यह शोध स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ता है तथा स्वच्छ भारत मिशन जैसी राष्ट्रीय पहलों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है.”


भारतीय पेटेंट IN595095 B1 के रूप में स्वीकृत यह नवाचार वाराणसी सहित देश के अन्य धार्मिक शहरों के लिए भी एक उपयोगी और टिकाऊ मॉडल साबित हो सकता है। यह मॉडल “आस्था से संसाधन और संसाधन से आत्मनिर्भरता” की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है.

वाराणसी में 14 साल की छात्रा से छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग का आरोप
वाराणसी में 14 साल की छात्रा से छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग का आरोप
वाराणसी: वाराणसी में 14 साल की छात्रा से छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आया है, छात्रा के पिता ने एक युवक पर बेटी को परेशान करने और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है. पिता का आरोप है कि बेटी ने जब स्कूल की प्रधानाचार्य से इसकी शिकायत की तो उसकी मदद करने के बजाय स्कूल प्रबंधन ने उसका नाम ही काट दिया, मामले की शिकायत पर अब पुलिस और संबंधित विभाग से कार्रवाई की मांग की गई है.परिजनों के मुताबिक, छात्रा के साथ आरोपी युवक कथित तौर पर काफी समय से छेड़छाड़ कर रहा था. आरोप है कि वह छात्रा को परेशान करने के साथ ही उसे ब्लैकमेल भी करता था, इससे छात्रा मानसिक रूप से परेशान हो गई. छात्रा ने हिम्मत जुटाकर स्कूल की प्रधानाचार्य को पूरे मामले की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई.छात्रा के पिता का आरोप है कि शिकायत के बाद स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय छात्रा का नाम स्कूल से काट दिया. उनका कहना है कि बेटी पहले ही कथित छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग से परेशान थी, ऐसे में स्कूल से नाम काटे जाने से परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं.परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई है, उनका कहना है कि शिकायत करने वाली नाबालिग छात्रा को सुरक्षा और सहयोग मिलना चाहिए था.ALSO READ: वरुणा जोन में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस की बड़ी समीक्षा बैठक, डीसीपी ने दिए सख्त निर्देशमामले में पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की पूरी सच्चाई सामने आएगी. नाबालिग छात्रा से जुड़े मामले को देखते हुए उसकी पहचान गोपनीय रखी जा रही है.
वरुणा जोन में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस की बड़ी समीक्षा बैठक, डीसीपी ने दिए सख्त निर्देश
वरुणा जोन में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस की बड़ी समीक्षा बैठक, डीसीपी ने दिए सख्त निर्देश
वाराणसी. अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए वरुणा जोन में पुलिस अधिकारियों की क्राइम मीटिंग आयोजित की गई। पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देशन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन ने की। इसमें जोन के सभी सहायक पुलिस आयुक्त, प्रभारी निरीक्षक, थानाध्यक्ष एवं संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।बैठक में अपराध की रोकथाम, लंबित विवेचनाओं, वांछित एवं वारंटी अभियुक्तों की गिरफ्तारी सहित कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। डीसीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ प्रभावी वैधानिक कार्रवाई की जाए।वांछित और इनामी अपराधियों पर कसें शिकंजाडीसीपी ने वांछित, वारंटी एवं पुरस्कार घोषित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही हत्या, लूट, चोरी, वाहन चोरी, नकबजनी जैसे गंभीर अपराधों वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां प्रभावी गश्त और चेकिंग बढ़ाने को कहा गया।विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण पर जोरलंबित विवेचनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक मामले की विवेचना साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरी की जाए। निर्धारित 60/90 दिवस की समयावधि में विवेचनाओं का निस्तारण सुनिश्चित करने तथा अनावश्यक रूप से मामलों को लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए गए। विवेचनाओं में ई-साक्ष्य के प्रभावी उपयोग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विधिक प्रक्रिया के अनुरूप सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया।ALSO READ : वाराणसी में रोपवे परियोजना के काम में तेजी, मंडलायुक्त ने किया स्थलीय निरीक्षणएनडीपीएस और निरोधात्मक कार्रवाई पर विशेष जोरअवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रभावी कार्रवाई करने तथा पूरे नेटवर्क और मादक पदार्थों के स्रोत का पता लगाने के निर्देश दिए गए। अपराध की रोकथाम के लिए आपराधिक प्रवृत्ति वाले एवं संदिग्ध व्यक्तियों को चिन्हित कर धारा 111 बीएनएसएस के तहत नियमानुसार निरोधात्मक कार्रवाई करने को कहा गया।महिला-बाल सुरक्षा और जनशिकायतों को प्राथमिकतामहिला एवं बाल अपराधों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई के साथ स्कूल-कॉलेज, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर प्रभावी पुलिस मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। थानों पर आने वाले फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनकर समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर भी विशेष जोर दिया गया।बैठक में रात्रि गश्त, पैदल गश्त और संदिग्ध वाहनों एवं व्यक्तियों की चेकिंग बढ़ाने के साथ आगामी त्योहारों एवं महत्वपूर्ण आयोजनों को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए गए।बैठक के अंत में पुलिस उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अपराध नियंत्रण, जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी अधिकारी पूरी निष्ठा, तत्परता और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें तथा आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास को और मजबूत करें।
वाराणसी में रोपवे परियोजना के काम में तेजी, मंडलायुक्त ने किया स्थलीय निरीक्षण
वाराणसी में रोपवे परियोजना के काम में तेजी, मंडलायुक्त ने किया स्थलीय निरीक्षण
वाराणसी. में निर्माणाधीन रोपवे परियोजना को जल्द पूरा करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। सोमवार को मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने गोदौलिया, गिरजाघर और रथयात्रा सहित विभिन्न रोपवे स्टेशनों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति, सुरक्षा व्यवस्था, आर्ट वर्क और फिनिशिंग कार्यों का जायजा लिया।मंडलायुक्त ने गोदौलिया स्टेशन पर बोर्डिंग-डिबोर्डिंग के लिए चल रहे निर्माण कार्य को देखा। वहीं गिरजाघर स्टेशन पर बन रहे कंट्रोल रूम की प्रगति की जानकारी ली। रथयात्रा स्टेशन पर भी निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।उन्होंने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं से परियोजना के अलग-अलग हिस्सों की जानकारी लेते हुए कहा कि गोदौलिया, गिरजाघर समेत सभी स्टेशनों के बचे हुए कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। साथ ही नियमित स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा करने और निर्माण में आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए।मंडलायुक्त ने कहा कि रोपवे परियोजना वाराणसी की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और शहर में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया गया।ALSO READ : ऐढ़े में बनेगा आधुनिक पशु अस्पताल, खुशहाल नगर में बुजुर्गों के लिए बनेगी इंटरलॉकिंग सड़कगौरतलब है कि वाराणसी रोपवे परियोजना के तहत कैंट स्टेशन से रथयात्रा तक का कार्य पूरा हो चुका है। रथयात्रा से आगे के स्टेशनों पर अलाइनमेंट चेक का कार्य जारी है। परियोजना को नवंबर तक पूरा करने के लक्ष्य के साथ अंतिम तैयारियां तेजी से चल रही हैं।निरीक्षण के दौरान वाराणसी रोपवे की परियोजना निदेशक पूजा मिश्रा समेत रोपवे के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।