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मुख्यमंत्री के वाराणसी दौरे से पहले सीपी मोहित अग्रवाल ने सिगरा स्टेडियम में सुरक्षा तैयारियों को परखा

मुख्यमंत्री के वाराणसी दौरे से पहले सीपी मोहित अग्रवाल ने सिगरा स्टेडियम में सुरक्षा तैयारियों को परखा
Jan 03, 2026, 10:08 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वाराणसी आगम कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस कमिश्‍नर मोहित अग्रवाल ने आयोजन स्थल सिगरा स्टेडियम का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों की ब्रीफिंग कर कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए.


सुरक्षा के प्रमुख इंतजाम


VARANASI CM YOGI KE KDE INTIJAM


* कार्यक्रम स्थल पर मानक अनुरूप मजबूत बैरिकेडिंग, बिना चेकिंग किसी को प्रवेश नहीं

* सभी प्रवेश द्वारों पर DFMD से अनिवार्य जांच, हर आगंतुक की फ्रिस्किंग

* CCTV और ड्रोन कैमरों से 24×7 सतत निगरानी

* संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश

पुलिस बल की तैनाती व भीड़ नियंत्रण

* सभी प्रमुख चौक-चौराहों, कार्यक्रम स्थल और मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल

* संवेदनशील स्थानों पर रूफटॉप ड्यूटी

* वीआईपी मार्ग की गलियों और कटों पर रस्सों से भीड़ नियंत्रण

* प्रभारी अधिकारियों को ड्यूटी प्वाइंट पर जवानों की पूर्व ब्रीफिंग, लाउड-हेलर के उपयोग के निर्देश


यातायात व वीआईपी मूवमेंट


* वीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग

* यातायात पुलिस को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश

होटल व सोशल मीडिया पर सख्ती

* होटल, ढाबा और ठहरने के सभी स्थलों की गहन चेकिंग

* वहां ठहरे व्यक्तियों के आधार/पहचान पत्र का अनिवार्य सत्यापन

* असामाजिक तत्वों और सोशल मीडिया गतिविधियों पर सतर्क निगरानी


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मातहतों को ब्रीपिफंग में पुलिस आयुक्त ने मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार रहकर पूर्ण मनोयोग से ड्यूटी निभाने के निर्देश दिए. ब्रीफिंग में अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय एवं कानून-व्यवस्था) शिवहरी मीणा, अपर पुलिस आयुक्त अपराध राजेश सिंह सहित कमिश्नरेट वाराणसी एवं बाह्य जनपदों से आए सभी राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे. प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा में किसी भी स्तर पर चूक नहीं होने दी जाएगी.

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर काशी विद्यापीठ में राष्ट्रीय संगोष्ठी, डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों पर मंथन...
हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर काशी विद्यापीठ में राष्ट्रीय संगोष्ठी, डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों पर मंथन...
वाराणसी: हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को 'डिजिटल युग में हिन्दी पत्रकारिता' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित हुआ, जिसमें पत्रकारिता, शिक्षा और जनसंचार जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने अपने विचार साझा किए.कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता के विकास में बाबू शिवप्रसाद गुप्त, भारतेंदु हरिश्चंद्र और महावीर प्रसाद द्विवेदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति ने पत्रकारिता के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है. आज सूचनाएं डिजिटल माध्यमों के जरिए बेहद तेजी से लोगों तक पहुंच रही हैं, जिससे पत्रकारों का कार्य पहले की तुलना में अधिक सरल और प्रभावी हो गया है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन से चार दशकों में हिन्दी पत्रकारिता ने उल्लेखनीय प्रगति की है और नई पीढ़ी ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया है.कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने पत्रकारिता में विश्वसनीयता को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया.उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र आज असीम संभावनाओं से भरा हुआ है और आने वाले वर्षों में इसकी उपयोगिता और अधिक बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है तथा अनुभव, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और समर्पण किसी भी व्यक्ति को सफलता के शिखर तक पहुंचा सकते हैं.सारस्वत अतिथि एवं उत्तर प्रदेश सरकार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि डिजिटल युग में सूचनाएं तेजी से उपलब्ध हो रही हैं, लेकिन समाचारों की सत्यता की जांच करना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है. उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत 'उदंत मार्तंड' से हुई थी और आज यह मजबूत परंपरा आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुकी है. ऐसे में पाठकों और पत्रकारों दोनों की जिम्मेदारी है कि वे किसी भी सूचना की पुष्टि के बाद ही उस पर विश्वास करें.मुख्य वक्ता एवं न्यूज18 ग्रुप के पूर्व समूह संपादक प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग अवसर, संकट और चुनौती का संगम है. उन्होंने कहा कि जहां डिजिटल मीडिया ने सूचनाओं के प्रसार को अभूतपूर्व गति दी है, वहीं पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल खबरों तक सीमित न रहें, बल्कि खबरों के पीछे छिपी सच्चाई को भी खोजने का प्रयास करें. यही वास्तविक पत्रकारिता की पहचान है.तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार स्नेह रंजन ने कहा कि आधुनिक पत्रकारिता में तकनीकी दक्षता अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से सक्षम बनने के साथ-साथ नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने की सलाह देते हुए कहा कि हर छात्र को महीने में कम से कम दो पुस्तकें अवश्य पढ़नी चाहिए.विशिष्ट वक्ता राहुल अवस्थी ने कहा कि शब्द, भाषा और तकनीक आज के समय के सबसे प्रभावशाली उपकरण हैं. इनका संतुलित और रचनात्मक उपयोग विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, शिक्षा और भविष्य की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.ALSO READ:काशी में गूंजेगी वैश्विक संस्कृति की आवाज, BRICS देशों के प्रतिनिधि करेंगे मंथन...वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नागेन्द्र पाठक ने हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इतिहास, उसके विकास और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला.कार्यक्रम में निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया, जबकि विषय प्रवर्तन डॉ. मनोहर लाल ने किया. संचालन डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वैष्णवी शुक्ला एवं विजय कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया.इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही.
काशी में गूंजेगी वैश्विक संस्कृति की आवाज, BRICS देशों के प्रतिनिधि करेंगे मंथन...
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वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आयोजन की मेजबानी का अवसर मिला है. 4 और 5 जून को काशी में BRICS देशों के संस्कृति कार्य समूह (संस्कृति कार्य समूह) की दो दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी. यह बैठक शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में होगी, जिसमें BRICS सदस्य देशों और हाल ही में समूह में शामिल हुए देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे.इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत, ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे. विदेशी मेहमान विभिन्न समूहों में वाराणसी पहुंचेंगे, जिसके मद्देनजर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं.बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विचार-विमर्श करना और आपसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत बनाना है. कार्यक्रम के दौरान संस्कृति से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिससे सदस्य देशों के बीच संबंध और अधिक मजबूत हो सकेंगे.बैठक में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा केंद्र सरकार के कई मंत्रियों के वाराणसी आगमन की भी चर्चा है, हालांकि उनकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.अंतरराष्ट्रीय महत्व के इस आयोजन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया जा रहा है. एयरपोर्ट से लेकर होटल और प्रतिनिधियों के भ्रमण मार्गों तक सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहेंगी. प्रशासन का प्रयास है कि विदेशी प्रतिनिधियों को काशी की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से भी परिचित कराया जाए.विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS संस्कृति कार्य समूह की यह बैठक वाराणसी को वैश्विक सांस्कृतिक संवाद के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. इससे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नई मजबूती मिलने के साथ-साथ काशी की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी नया विस्तार मिलेगा.
बीएचयू में शुरू हुई हाईटेक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं कुलपति ने किया उद्घाटन...
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वाराणसी: विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग में शनिवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी और ‘इम्पार्टिंग हेल्थ एजुकेशन टू कम्युनिटी’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का विषय “अनमास्किंग दि अपील - काउन्ट्रिग निकोटीन एंड टोबैको एडिक्शन” रहा.कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि तंबाकू निषेध जैसे विषयों पर केवल एक दिन का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग विशेषकर युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों के बीच लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि धूम्रपान और चबाने वाले तंबाकू दोनों ही कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के प्रमुख कारण हैं.कुलपति ने बताया कि तनाव और मानसिक दबाव से राहत पाने के लिए कई लोग तंबाकू का सहारा लेते हैं, लेकिन यह आदत लंबे समय में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाती है. उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर “तंबाकू छोड़ो अभियान” शुरू करने का सुझाव भी दिया.इस अवसर पर मनोचिकित्सा विभाग में कई अत्याधुनिक नैदानिक और उपचार सुविधाओं का उद्घाटन किया गया. इनमें क्वांटिटेटिव इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी (QEEG), स्लीप लेबोरेटरी (पॉलीसोमनोग्राफी), इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ECT), ट्रांसक्रैनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (TDCS), रिपीटेटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (RTMS) तथा डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड शामिल हैं.विशेषज्ञों के अनुसार नई सुविधाओं से अवसाद, चिंता, नींद संबंधी विकारों और अन्य न्यूरो-मनोरोग संबंधी समस्याओं के निदान एवं उपचार में मदद मिलेगी. साथ ही अनुसंधान और चिकित्सा प्रशिक्षण को भी नई दिशा मिलेगी.ALSO READ:बरेका पहुंचे रेलवे बोर्ड सदस्य आर राजगोपाल, उत्पादन और नवाचार कार्यों का लिया जायजा...चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. शंखवार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया. वहीं चिकित्सा संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने धूम्ररहित तंबाकू के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस दिशा में व्यापक जनजागरूकता की जरूरत है.कार्यक्रम में मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. अच्युत कुमार पाण्डेय ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और तंबाकू निषेध को मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन से जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. इस दौरान चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.