BHU में हृदय रोग विभाग को मिली दो अत्याधुनिक सुविधाएं, फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन का उद्घाटन.

वाराणसी. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के हृदय रोग विभाग में मंगलवार को उन्नत इकोकार्डियोग्राफी प्रयोगशाला और अत्याधुनिक फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन का उद्घाटन किया गया। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने इन दोनों नई सुविधाओं का लोकार्पण किया। यह फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन देश के सरकारी संस्थानों में दूसरी तथा उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी मशीन है, जो भ्रूण के हृदय की अत्यंत सूक्ष्म जांच और त्रि-आयामी (3D) एवं चार-आयामी (4D) इमेजिंग करने में सक्षम है।
चिकित्सा विज्ञान संस्थान में स्थापित इन सुविधाओं से पूर्वांचल के साथ बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और नेपाल के मरीजों को भी लाभ मिलेगा। अब गर्भ में पल रहे शिशु के हृदय की जन्मजात समस्याओं का प्रारंभिक अवस्था में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे गर्भवती महिलाओं को समय पर परामर्श और बेहतर उपचार मिल सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन की उन्नत तकनीक से भ्रूण के हृदय की प्रमुख धमनियों और संरचनाओं का विस्तृत अध्ययन संभव होगा। इसकी अत्याधुनिक स्वीपिंग तकनीक हृदय की सूक्ष्म असामान्यताओं की पहचान करने में भी सक्षम है। सामान्यतः गर्भावस्था के 18वें सप्ताह के बाद भ्रूण के हृदय की विस्तृत जांच की जा सकती है।

इसके साथ ही हृदय रोग विभाग में स्थापित नई 4D इकोकार्डियोग्राफी मशीन में 3D ट्रांसइसोफेगल एवं ट्रांसथोरेसिक इकोकार्डियोग्राफी, स्ट्रेन इमेजिंग, स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राफी और कॉन्ट्रास्ट इकोकार्डियोग्राफी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह मशीन हृदय रोगों के सटीक निदान के साथ शल्य चिकित्सा और इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं में भी मददगार होगी।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि किसी चिकित्सा संस्थान की पहचान केवल मरीजों की संख्या से नहीं, बल्कि उपचार की गुणवत्ता, जटिल मामलों के सफल प्रबंधन और नवाचारों से होती है। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान संस्थान में जटिल हृदय रोगों के उपचार की संस्थागत क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।
चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने बढ़ते हृदय रोगों के मद्देनजर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सेवाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई। वहीं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत ने भविष्य में बाल हृदय चिकित्सा इकाई के विस्तार की योजना की जानकारी दी।
ALSO READ : 38 साल पुराने विवाद के बाद ककरमत्ता की ऐतिहासिक पोखरी का होगा कायाकल्प
हृदय रोग विभागाध्यक्ष प्रो. विकास अग्रवाल ने बताया कि विभाग में आधुनिक कैथ लैब के माध्यम से 24 घंटे सेवाएं उपलब्ध हैं और प्रतिदिन लगभग 25 से 30 प्रक्रियाएं की जाती हैं। इनमें कोरोनरी एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी तथा जन्मजात और संरचनात्मक हृदय रोगों से संबंधित जटिल इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इस अवसर पर डॉ. उमेश पांडेय, डॉ. सौमिक घोष, डॉ. राजपाल प्रजापति, डॉ. प्रतिभा राय सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में युवाओं में बढ़ते हृदयाघात के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए समय पर जांच और उन्नत हृदय चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।



