38 साल पुराने विवाद के बाद ककरमत्ता की ऐतिहासिक पोखरी का होगा कायाकल्प

वाराणसी. बीएलडब्ल्यू रोड स्थित ककरमत्ता की ऐतिहासिक पोखरी अब जल्द ही नए स्वरूप में नजर आएगी। नगर निगम ने 38 वर्षों से चले आ रहे विवाद को समाप्त कर करीब 1.5 बीघा सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के बाद पोखरी के पुनरुद्धार का काम शुरू कर दिया है। इसे काशी के प्रमुख पर्यटन केंद्र और आकर्षक पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने की योजना है।
मंगलवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने ककरमत्ता पहुंचकर पोखरी का स्थलीय निरीक्षण किया। दोनों ने मौके पर चल रहे सफाई, गहरीकरण और पुनरुद्धार कार्यों का जायजा लिया तथा अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

नगर निगम के अनुसार, लंबे समय से विवाद के कारण ऐतिहासिक पोखरी की स्थिति खराब होती चली गई थी। पोखरी में कूड़ा-कचरा डालकर इसे पाटने का प्रयास किया गया था। अब नगर निगम की ओर से इसे उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
मौके पर जेसीबी, पोकलैंड, डंपर और हाइवा जैसी मशीनों की मदद से पोखरी की सफाई और गहरीकरण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। नगर निगम ने इसके लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों और मशीनरी को लगाया.
नगर निगम की योजना पोखरी के आसपास हरियाली विकसित करने के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है, ताकि यह क्षेत्र स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सके। पोखरी को सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप देकर इसे शहर के एक प्रमुख पर्यटन स्थल और पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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नगर निगम के अनुसार, करीब 1.5 बीघा क्षेत्र में फैली इस सरकारी संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये बताई गई है। लंबे समय बाद पोखरी को कब्जे से मुक्त कराने के बाद अब इसके संरक्षण और विकास की दिशा में काम शुरू किया गया है।
निरीक्षण के दौरान अतुल पांडेय सहित नगर निगम के कई अधिकारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।



