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पुराने की विदाई और नए साल के स्‍वागत को आस्‍थावान आतुर, बाबा दरबार में इतने लोगों ने लगाई हाजिरी

पुराने की विदाई और नए साल के स्‍वागत को आस्‍थावान आतुर, बाबा दरबार में इतने लोगों ने लगाई हाजिरी
Dec 27, 2025, 08:49 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - पुराने साल की विदाई और नए वर्ष के स्‍वागत के लिए आस्‍थावान आतुर हैं. यही वजह है कि इस बेला पर काशी में श्रद्धालुओं का रेला टूट पड़ा है. शन‍िवार को श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ बाबा दरबार और दशाश्‍वमेध क्षेत्र में पहुंच गई क‍ि पुल‍िस और नागरिक सुरक्षा संगठन को मोर्चा संभालना पड़ गया. यह भीड़ आने वाले दिनों और भी विकराल होने वाली है. क्‍योंकि श्रीकाशी विश्‍वनाथ मंदिर की ओर भीड लगातार बढती जा रही है. हालांकि पुलिस प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्‍यापाक रणनीति तैयार की है.


दोपहर तक दो लाख ने लगाई हाजिरी


वहीं शनिवार की दोपहर तक ही दो लाख से अध‍िक भक्‍तों ने बाबा दरबार में हाज‍िरी लगा दी. भक्‍तों की भीड़ की वजह से मंदि‍र प्रशासन और पुल‍िस प्रशासन की ओर से भी सक्र‍ियता द‍िखाते हुए भीड़ को न‍ियंत्र‍ित करने का प्रयास शुरू क‍िया गया. काशी व‍िश्‍वनाथ मंद‍िर में दोपहर तक दो लाख भक्‍तों ने दर्शन कर ल‍िया था तो भारी भीड़ के आगे प्रशासन भी दोपहर तक हांफने लगा. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विशिष्ट तीर्थ क्षेत्र एसडीएम शंभू शरण ने बताया क‍ि भारी भीड़ का आगमन काशी में हो रहा है. इसके ल‍िए अत‍िर‍िक्‍त प्रयास करना पड़ रहा है ताक‍ि मंद‍िर में व्‍यवस्‍था बनाई जा सके. वहीं पुल‍िस और यातायात के कर्मी मंद‍िर पर‍िक्षेत्र के आसपास यातायात व्‍यवस्‍था को दुरुस्‍त करने में सुबह से ही लगे रहे.

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दर्शन और गंगा स्‍नान मुख्‍य ध्‍येय


बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ-साथ गंगा स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंच रहे हैं. हर कोई चाहता है कि नए वर्ष पर बाबा विश्वनाथ और मां गंगा के स्नान के साथ नए वर्ष की शुरुआत हो.

एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि महादेव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ की संख्या ज्यादा है. शन‍िवार दोपहर तक सुबह से करीब दो लाख से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके हैं. लगातार इस भीड़ को देखते हुए जो काशी विश्वनाथ में बैरकेड‍िंग की व्यवस्था थी वह सुनिश्चित कर दी गई है. जो श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं वह बैरि‍केड‍िंंग के अंदर होकर ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन पूजन कर रहे हैं. एसडीएम ने बताया कि हमारे लिए सारे श्रद्धालु वीवीआईपी हैं, लेकिन जो भी लोग प्रोटोकॉल से आते हैं उनके लिए एक अलग से गेट बनाया गया है. इस गेट के रास्‍ते ही लोगों को बाबा विश्वनाथ का दर्शन कराया जाएगा.


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लाउडस्‍पीकर से दी जा रही हिदायत


बाबा विश्वनाथ मंदिर की तरफ से लगातार श्रद्धालुओं को लाउडस्‍पीकर के जरिए हिदायत दी जा रही है कि आप लोग आसानी और सुलभ दर्शन के लिए बैरिकेड‍िंग से दर्शन कर सकते हैं. इसके साथ ही किस दर्शनार्थी को किस गेट से आना है उनके लिए भी घोषणा की जा रही है ताकि‍ श्रद्धालुओं को सुविधाजनक दर्शन कराया जा सके.

दूसरी ओर गंगा में नौकाओं के संचालन पर भी नि‍गाह रखी जा रही है; कोहरे और गलन के बीच नौकाओं पर भी भारी भीड़ को देखते हुए जल पुल‍िस और एनडीआरएफ की टीम लगातार नजर रख रही है. गंगा के व‍िभ‍िन्‍न घाटों से नौका संचालन को लेकर भारी भीड़ देखने को म‍िल रही है. जबक‍ि सारनाथ, संकटमोचन, दशाश्‍वमेध घाट के साथ नमो घाट और अस्‍सी घाट पर भी आस्‍थावानों का रेला उमड़ पड़ा है.

स्वीटजरलैंड के नागरिक का १० लाख का खोया कैमरा मिला
स्वीटजरलैंड के नागरिक का १० लाख का खोया कैमरा मिला
वाराणसी : स्विट्जरलैंड से वाराणसी घूमने आए जोनस बेंजामिन ईहले नामक व्यक्ति द्वारा भारत में फोटोग्राफी करने के लिए काफी अच्छी गुणवत्ता का Leica कंपनी का लगभग 10 लाख रुपए कीमत का कैमरा लेकर आए थे, जिसको वह घाट के पास रखकर कही भूल गए तथा अपने स्तर से काफी खोजने का काफी प्रयास किए किंतु असफल रहे. जिसके पश्चात उनके द्वारा घटना की सूचना दशाश्वमेध चौकी पर जाकर चौकी प्रभारी दशाश्वमेध अनुज मणि तिवारी को दिया, जिसके पश्चात पुलिस द्वारा तत्परता करते हुए सीसीटीवी कैमरा व अन्य माध्यमों से महज 2 घंटे के अंदर कैमरा खोज कर जोनस बेंजामिन ईहले को सुपुर्द किया गया। पुलिस की इतनी तत्परता से कार्यवाही करते हुए अपने काफी महंगे कैमरे को वापस पाकर जोनस बेंजामिन द्वारा वाराणसी पुलिस का अपने शब्दों में कृतज्ञता व्यक्त किया गया। पुलिस टीम में चौकी प्रभारी दशाश्वमेध अनुज मणि तिवारी, उप निरीक्षक शिव स्वरूप पाण्डेय, का. देवेंद्र प्रताप सिंह, भूपेंद्र सिंह, संजय यादव व संजीव कुमार शामिल थे।ALSO READ : प्रो. राजनाथ बने डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य
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वाराणसी: सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. राजनाथ को लखनऊ स्थित डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद का सदस्य नामित किया गया है।उत्तर प्रदेश राज्यपाल सचिवालय की ओर से 30 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 की धारा 14(1)(छ) के अंतर्गत यह नामांकन किया गया है। उनका कार्यकाल पत्र जारी होने की तिथि से दो वर्ष अथवा अग्रिम आदेश तक, जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है।प्रो. राजनाथ वर्तमान में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष के साथ पुस्तकालयाध्यक्ष का दायित्व भी संभाल रहे हैं। विश्वविद्यालय परिवार ने उनके नामांकन पर प्रसन्नता जताते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग समेत विश्वविद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।ALSO READ: बीएचयू के दक्षिणी परिसर में APACON-2026 का शुभारंभ, सतत पशुधन उत्पादन पर वैज्ञानिक मंथन
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वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन APACON-2026 का सोमवार को शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का विषय ‘सतत पशुधन उत्पादकता की दिशा में पशु शरीर क्रिया विज्ञान के उभरते प्रतिमान : विकसित भारत की ओर’ रखा गया है। दक्षिणी परिसर में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की ओर से यह पहला राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन है।उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने आधारभूत संरचना और संकाय से जुड़ी चुनौतियों को लगातार दूर करते हुए प्रगति की है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और संवाद का मंच उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग, संयुक्त शोध परियोजनाओं, उद्योगों के साथ साझेदारी, नवाचार, पेटेंट और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर दिया।विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIAB), हैदराबाद के निदेशक डॉ. रवि कुमार गंधम ने पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता और ताप सहनशीलता जैसे शारीरिक लक्षणों के आनुवंशिक और बाह्य स्तर पर समग्र अध्ययन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में हो रहे शोध को किसानों के लिए उपयोगी समाधानों में बदलना वैज्ञानिकों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मीथेन उत्सर्जन को मापने और उसका डेटाबेस तैयार करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के आचार्य प्रभारी प्रो. बी. एम. एन. कुमार ने कहा कि सतत पशुधन उत्पादन में पशु चिकित्सा शरीर क्रिया विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं कृषि विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. सतीश कुमार सिंह ने सटीक पोषण और वास्तविक समय स्वास्थ्य निगरानी को पशुधन स्वास्थ्य सुधार तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी के लिए महत्वपूर्ण बताया।APA के अध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने पशुधन उत्पादकता, स्वास्थ्य, कल्याण और जलवायु-सहिष्णुता में पशु शरीर क्रिया विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। APA के महासचिव एवं ICAR-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास चंद्र ने APA 2025 के विभिन्न पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की।सम्मेलन के पहले दिन पशुधन प्रजनन, प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी, तनाव शरीर क्रिया विज्ञान, ताप तनाव निगरानी, जलवायु-सहिष्णुता, जीनोम इंजीनियरिंग, क्रायोसंरक्षण, पुनर्योजी चिकित्सा और सतत पशुधन उत्पादन जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। इसमें युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से संवाद का अवसर मिला।सम्मेलन में जर्मनी के लाइबनिज इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड बायोइकोनॉमी (ATB), पॉट्सडैम की डॉ. गुंडुला हॉफमैन ने ऑनलाइन माध्यम से बीज वक्तव्य दिया। इसके अलावा डॉ. बी. एस. प्रकाश और अमेरिका के डॉ. आशीष रंजन ने भी व्याख्यान दिए।इस अवसर पर Compendium of Abstracts – APACON-2026, Compendium of Lead Papers – APACON-2026 तथा Fundamentals of Livestock and Poultry Management पुस्तकों का विमोचन किया गया।सम्मेलन के दौरान APA Lifetime Achievement Award-2025 प्रो. बी. एस. प्रकाश को प्रदान किया गया। APA Fellow Awards डॉ. आशीष मिश्रा और डॉ. बी. रामबाबू नाइक को, जबकि APA Best Teacher Awards डॉ. सोहन वीर सिंह, डॉ. निशांत कुमार और डॉ. राकेश कुमार सिंह को दिए गए। इसके अलावा APA Best Girl Student Award, APA Best PhD Thesis Award, Prof. A. K. Pal Best MVSc Thesis Award और APA Best Research Paper Award भी प्रदान किए गए।ALSO READ : वाराणसी में मंत्री के क्षेत्र में लकड़ी का पुल बना आवागमन का सहारा, जलभराव से जीना दुष्‍करपशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. अमित राज गुप्ता ने स्वागत संबोधन में कहा कि पशुधन उत्पादन के भविष्य के लिए मौलिक शरीर क्रिया विज्ञान को जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, सहायक प्रजनन तकनीक, सटीक पशुधन पालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विज्ञान जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ना जरूरी है। आयोजन सचिव डॉ. मनीष कुमार ने सम्मेलन की आगामी गतिविधियों की जानकारी दी। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तुलसीरामन पी. ने किया।पहले दिन का समापन वैज्ञानिक चर्चाओं, शोध प्रस्तुतियों और विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच संवाद के साथ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों और युवा शोधकर्ताओं की भागीदारी से सतत पशुधन उत्पादन तथा विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर नए शोध और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर मंथन हुआ।