नागपंचमी पर काशी के नागकूप में उमड़ी आस्था, पाताल लोक से जुड़ी है मान्यता, कालसर्प दोष की शांति के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु

वाराणसी: धर्म और आस्था की नगरी काशी में नागपंचमी का पर्व बेहद खास तरीके से मनाया जाता है, काशी के जैतपुरा क्षेत्र में स्थित प्राचीन नागकूप नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है. नागकूप को धार्मिक परंपरा में कारकोटक वाप तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है, नागपंचमी के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर नाग देवता की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं.
पाताल लोक से जुड़ी है मान्यता
काशी के इस प्राचीन नागकूप को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. लोक-आस्था में इस कूप को पाताल लोक से जुड़ा हुआ माना जाता है, मान्यता है कि नागकूप के भीतर से पाताल लोक तक जाने का मार्ग है, इसी वजह से काशी के धार्मिक स्थलों में इस स्थान की अपनी अलग पहचान है.
हालांकि पाताल लोक से जुड़ी यह बात धार्मिक मान्यता और लोक-आस्था पर आधारित है, लेकिन सदियों से चली आ रही परंपराओं के कारण नागकूप श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है.
मान्यता है कि नाग देवता की आराधना करने से परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं और नागदोष से जुड़ी परेशानियों से राहत मिलती है. इसी आस्था के चलते नागपंचमी के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है.

कालसर्प दोष की शांति के लिए विशेष आस्था
नागकूप में नागपंचमी के दिन सबसे अधिक चर्चा कालसर्प दोष की शांति को लेकर होती है, धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष माना जाता है, वे यहां नाग देवता की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं.
श्रद्धालु कूप के दर्शन करते हैं, नाग देवता का स्मरण करते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं. कई परिवार नागपंचमी के अवसर पर विशेष रूप से यहां पहुंचकर पूजा करवाते हैं.
यह मान्यताएं धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं और श्रद्धालु इन्हें अपनी आस्था के अनुसार मानते हैं.
काशी की प्राचीन धार्मिक परंपरा का हिस्सा
काशी में भगवान शिव से जुड़े हजारों मंदिरों और तीर्थों के साथ-साथ नाग देवताओं से जुड़े प्राचीन धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं. इन्हीं में जैतपुरा का नागकूप भी शामिल है, काशी की धार्मिक परंपरा में नागों और नाग देवताओं का विशेष स्थान माना जाता है.
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यानी काशी का यह नागकूप सिर्फ एक प्राचीन जलस्रोत नहीं, बल्कि नाग देवता, कारकोटक नाग और पाताल लोक से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण आज भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है.



