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भारत अध्ययन की परंपरा पर राष्ट्रीय कार्यशाला में गोपीनाथ कविराज और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के चिंतन पर हुआ विमर्श.

भारत अध्ययन की परंपरा पर राष्ट्रीय कार्यशाला में गोपीनाथ कविराज और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के चिंतन पर हुआ विमर्श.
Aug 19, 2026, 05:06 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केन्द्र एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पंद्रह दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘भारत अध्ययन की परम्परा : व्यक्ति, विचार और संस्थाएँ’ के अंतर्गत प्रथम दिन दो महत्वपूर्ण बौद्धिक सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में ‘पंडित गोपीनाथ कविराज की सारस्वत साधना’ विषय पर वाराणसी के प्रख्यात विद्वान एवं दर्शन विभाग, सागर विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अंबिका दत्त शर्मा ने व्याख्यान दिया।

दूसरे सत्र में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के डॉ. विवेक सिंह ने ‘रवीन्द्रनाथ ठाकुर और भारत का सभ्यतामूलक विमर्श’ विषय पर विचार रखे।


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प्रो. अंबिका दत्त शर्मा ने कहा कि पंडित गोपीनाथ कविराज भारतीय ज्ञान परंपरा के ऐसे विलक्षण मनीषी थे, जिनके व्यक्तित्व में व्यापक शास्त्रीय विद्वत्ता और गहन साधना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने भारतीय दर्शन को केवल बौद्धिक चिंतन का विषय नहीं माना, बल्कि उसे जीवन के रूपांतरण और साधना का माध्यम बनाया।


प्रो. शर्मा ने कहा कि गोपीनाथ कविराज ऐसे समय में सक्रिय हुए, जब बंग-भंग आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना अपने उत्कर्ष पर थी। इसके बावजूद उन्होंने प्रत्यक्ष राजनीतिक आंदोलन के बजाय भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन और साधना को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। उनके लिए राजनीतिक स्वराज्य से अधिक महत्वपूर्ण ‘ज्ञानात्मक स्वराज्य’ था। उनका मानना था कि भारत को समझने के लिए उसकी अपनी ज्ञान परंपराओं, शास्त्रों और साधना पद्धतियों के भीतर प्रवेश करना आवश्यक है।


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प्रो. शर्मा ने सरस्वती भवन पुस्तकालय के साथ कविराज के जुड़ाव को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक सरस्वती भवन के पुस्तकालयाध्यक्ष रहते हुए कविराज ने दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों के अध्ययन के माध्यम से भारतीय दर्शन, योग और तंत्र के विभिन्न पक्षों को गहराई से समझा।


उन्होंने कहा कि कविराज के लिए पुस्तकालय महज पुस्तकों का संग्रह नहीं था, बल्कि भारतीय ज्ञान-संपदा में प्रवेश का द्वार था। इसी अध्ययन और साधना के क्रम में उन्होंने भारतीय दर्शन की विभिन्न धाराओं में अंतर्निहित समन्वयकारी तत्वों को समझने का प्रयास किया।


प्रो. शर्मा ने कहा कि भारतीय दर्शन को केवल पश्चिमी अर्थों में बौद्धिक जिज्ञासा का परिणाम मानना उचित नहीं है। भारतीय दर्शन में ऋषियों की अनुभूति, श्रुति, आगम और साधना से प्राप्त ज्ञान का भी महत्वपूर्ण स्थान है। भारतीय दर्शन सिद्धांत भी है और साधना भी, थ्योरी भी है और थेरेपी भी। इसका उद्देश्य केवल संसार की व्याख्या करना नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन का रूपांतरण करना है।


कार्यशाला के दोनों सत्रों में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा भारत अध्ययन में रुचि रखने वाले प्रतिभागी हाइब्रिड माध्यम से शामिल हुए। सत्रों में भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य, सभ्यता, शिक्षा, मानवता और सांस्कृतिक चेतना के विभिन्न आयामों पर सार्थक चर्चा हुई।

33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में ‘GenZ For BHU’ छात्र आंदोलन के तहत सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने 33 पेड़ों की कटाई, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने और छात्रों के साथ कथित मारपीट को लेकर कार्रवाई की मांग की।छात्र प्रतिनिधिमंडल में सत्यम सिंह, रवि सिंह, अमन मौर्य, विवर्त सिंह समेत अन्य छात्र शामिल रहे। छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से पेड़ों की कटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।छात्रों की प्रमुख मांगों में U.P. Trees Protection Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराना शामिल है। छात्रों ने यह भी मांग की कि NGT द्वारा लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि छात्र फंड से नहीं वसूली जाए। उनका कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की जानी चाहिए।इसके अलावा छात्रों ने कुलपति से मिलने गए छात्र-छात्राओं के साथ कथित मारपीट के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्र प्रतिनिधियों ने अपने खिलाफ गठित कमेटियों और जारी नोटिस को भी वापस लेने की मांग की है।ALSO READ : बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयनपरिसर में पेड़ों की जियो-टैगिंग की मांगछात्रों ने बीएचयू परिसर के सभी पेड़ों का ट्री सेंसस कराने, उनकी जियो-टैगिंग करने और पेड़ों की निगरानी के लिए ‘ट्री मॉनिटरिंग समिति’ गठित करने की मांग भी रखी।छात्रों का कहना है कि परिसर में पर्यावरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के छात्र दुर्गेश यादव का ज़ी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा 2026’ के लिए चयन हुआ है। शो का प्रसारण 19 सितंबर 2026 से ज़ी टीवी पर शुरू हो चुका है।उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के महलीपुर गांव निवासी दुर्गेश यादव, श्री इंद्रजीत यादव और श्रीमती कौशिल्या देवी के पुत्र हैं। उन्होंने बीएचयू से वर्ष 2020-23 में बीपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) और 2023-25 में एमपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह संगीत एवं मंच कला संकाय में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप कर रहे हैं।दुर्गेश यादव ने पं. गिरजा शंकर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शास्त्रीय संगीत की इसी पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।उनके ‘सा रे गा मा पा 2026’ में चयन पर संगीत एवं मंच कला संकाय की संकाय प्रमुख एवं गायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप के समन्वयक प्रो. राम शंकर, प्रो. ज्ञानेश चंद्र पांडेय सहित अन्य संकाय सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।ALSO READ : बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंकबीएचयू से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो में चयन होने से विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में भी उत्साह का माहौल है।
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
वाराणसी : बेनियाबाग चौराहे से हड़हा सराय मार्केट तक सोमवार को नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया. टीम ने सड़क पर दुकान लगाकर और अन्य तरीकों से किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए मार्ग को कब्जामुक्त कराया. कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों की प्रवर्तन टीम से नोकझोंक भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल के चलते स्थिति नियंत्रित रही.अभियान के दौरान सड़क पर दुकान लगाकर रखा गया सामान नगर निगम की टीम ने वाहनों में लादकर हटाया. सड़क किनारे गिट्टी, बालू और ईंट रखकर बिक्री किए जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था. इसके अलावा सड़क पर अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी. नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे पार्षद इंद्रेश सिंह ने बताया कि बेनियाबाग क्षेत्र में सड़क जाम और अतिक्रमण की शिकायतों के बाद यह अभियान चलाया गया.ALSO READ : सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक, बोले डीएम- किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाएउन्होंने कहा कि सड़क पर कब्जे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी. अतिक्रमण हटने से यातायात सुगम होगा और स्थानीय लोगों को अपने घरों तकपहुंचने में भी सुविधा मिलेगी. पार्षद ने कहा कि हड़हा सराय मार्केट तक आवागमन सुचारु रहने से व्यापारिक गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी और ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी. नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न करने की हिदायत भी दी.