Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

कफ सिरप तस्‍करी सिंडिकेट का अहम किरदार बर्खास्‍त सिपाही लखनऊ से गिरफ्तार, एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई

कफ सिरप तस्‍करी सिंडिकेट का अहम किरदार बर्खास्‍त सिपाही लखनऊ से गिरफ्तार, एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई
Dec 02, 2025, 09:02 AM
|
Posted By Gaandiv

वाराणसी: प्रतिबंधिक कोडीन युक्‍त कफ सिरप तस्‍करी सिंडीकेट में अहम किरदार निभाने वाला बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह मंगलवार की सुबह यूपी स्‍पेशल टास्‍क फोर्स के हत्‍थे चढ गया. उसे लखनऊ के सुल्तानपुर रोड स्थित उसके घर के पास से गिरफ्तार किया गया है. आलोक सिंह पूर्व सांसद एवं पूर्वांचल के बाहुबली धनंजय सिंह का करीबी बताया जा रहा है. एसटीएफ की टीम उससे पूछताछ कर रही है. तस्‍करी सिंडिकेट के अमित सिंह टाटा, भोला जायसवाल के बाद यह तीसरी बड़ी गिरफ्तारी है. पूछताछ में कई बड़े नाम उजागर हो सकते हैं.

एसटीएफ ने आलोक सिंह के खिलाफ सोमवार को लुक आउट सर्कुलर जारी करने की कवायद की थी, हालांकि उसे 24 घंटे के भीतर ही दबोच लिया गया. उसने राजधानी की एक अदालत में चार दिन पहले आत्मसमर्पण करने की अर्जी भी दी थी. सूत्रों की माने तो बर्खास्‍त सिपाही की पहुंच के चलते पुलिस और जांच एजेंसियां उस पर हाथ डालने से कतरा रही थीं. हालांकि सिंडिकेट के सुर्खियों में आने के बाद एसटीएफ ने उस पर शिकंजा कस दिया.


image


बर्खास्‍त सिपाही की दो फर्मों का नाम आया सामने


बर्खास्‍त सिपाही आलोक बीते कुछ सालों में तेजी से संपत्तियां खरीद रहा था. कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट में आलोक की दो फर्मों का नाम आया है. साथ ही एक बाहुबली के संरक्षण में वह कफ सीरप गिरोह के मास्टर माइंड शुभम जायसवाल और अमित सिंह टाटा के साथ मिलकर काम कर रहा था. फर्मों का नाम आने के बाद आलोक सिंह अंडरग्राउंड हो गया था. सोमवार को एसटीएफ ने उसकी गिरफ्तारी के लिए पूर्वांचल के कई स्थानों पर छापेमारी की, लेकिन वह एसटीएफ के हाथ नहीं लगा था. कुछ समय के लिए उसकी लोकेशन जौनपुर के एक बाहुबली के घर के पास जरूर आई थी. बाहुबली के संरक्षण में आने के बाद आलोक ने कुछ ही वर्षों में कफ सीरप की तस्करी से मोटी कमाई की थी.


एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, तस्करी सिंडिकेट में असम की तीन कंपनियों की जानकारी मिली है. कफ सिरप की तस्करी 173 फर्मों को फर्जी सप्लाई दिखाकर की गई. आरोपियों पर गैंगस्टर लगाकर संपत्तियां जब्त करने की भी तैयारी शुरू कर दी गई है. इस केस से सरगना शुभम के पिता भोला जायसवाल के सोनभद्र आने के बाद अहम खुलासे होने की उम्मीद है. कोलकाता नगर निगम अस्पताल ने भोला जायसवाल को हायर सेंटर रेफर किया है. सोनभद्र पुलिस ने कोलकाता कोर्ट में भोला जायसवाल को ट्रांजिट रिमांड पर लाने की अर्जी डाली है. इस मामले में एफएसडीए अब तक 98 एफआईआर दर्ज करा चुकी है. इनमें से कई फर्जी फर्म हैं. एसटीएफ और कई जिलों की पुलिस ने भी करीब एक दर्जन एफआईआर दर्ज कराई हैं.


ईडी ने शुरू की जांच, तस्‍करी का कारोबार दो हजार करोड़ से अधिक का


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बहुचर्चित कफ सीरप मामले की जांच शुरू कर दी है. इसके लिए ईडी ने रिकार्ड खंगालने के साथ जांच में जुटी अन्य एजेंसियों से सारी जानकारी जुटा ली है. ईडी की प्रारम्भिक जांच में यह बात सामने आइ है कि अवैध कफ सीरप की तस्करी का कारोबार दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का था.

इस कारोबार में कई सफेदपोश लोग भी शामिल थे. ईडी ने इस मामले की जांच के लिए दो टीमों का गठन किया है. एक टीम कफ सीरप की तस्करी में बरते गए वित्तीय प्रणाली की जांच कर रही है. वहीं दूसरी टीम एसटीएफ सहित अन्य राज्यों की जांच एजेंसियों के साथ संपर्क में रहकर जांच को आगे बढ़ा रही है. कफ सिरप प्रकरण में अब तक दर्ज एफआईआर पर ईडी की जांच आगे बढ रही हे. सूत्रों का कहना है कि फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों की मनी लाॉन्ड्रिंग का संदेह है. पूरा मामला बीते चार सालों में अरबों रुपए का कफ सिरप तस्करी के जरिए बांग्लादेश में बेचने का है. फर्जी फर्मों में बिक्री दिखाकर कफ सिरप बांग्लादेश भेजी गई.


शुभम के पिता भोला प्रसाद की मिली ट्रांजिट रिमांड


कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल की ट्रांजिट रिमांड सोनभद्र पुलिस को मिल गई है. भोला को कोलकाता से सोनभद्र लाया जा रहा है. भोला जायसवाल से पूछताछ के बाद सिंडिकेट से जुड़े लोगों की जानकारी मिल सकती है. बता दें कि भोला जायसवाल को सोनभद्र पुलिस ने कोलकाता एयरपोर्ट से पिछले दिनों गिरफ्तार कर लिया था. ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पुलिस पूछताछ की तैयारी में लगी हुई है जिसके बाद इस सिंडिकेट के तार खुलने लगेंगे.


image


भगोड़े शुभम के प्रत्‍यर्पण की तैयारी


कोडिन युक्त कफ सिरप तस्करी के मुख्‍य आरोपित शुभम जायसवाल को भगोड़ा और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी में कमिश्नरेट पुलिस है. पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि भगौड़ा घोषित कराने के लिए कमिश्नरेट पुलिस की ओर से कोर्ट में आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसी प्ररिप्रेक्ष्‍य मेंअभियोजन अधिकारियों से सीपी ने वार्ता की. शैली ट्रेडर्स के कर्ता धर्ता और 100 करोड़ के अवैध कारोबार के आरोपी शुभम की लोकेशन दुबई में मिली है. दुबई से शुभम के प्रत्यर्पण को लेकर प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी और एनडीपीएस एक्ट में वांछित शुभम की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की अलग-अलग पांच टीमें काम कर रही हैं. कमिश्नरेट की एसआईटी के अलावा अन्य एजेंसियां भी लगी हुई हैं.


बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच, पांच टीमें गठित


पिछले दो साल से चल रहे कफ सिरप के अवैध कारोबार की भनक कहीं न कहीं बैंक अधिकारियों को भी थी. बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच एसआईटी कर रही है. फर्जी फर्म के बैंक खातों की जांच और बैंक अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने, बिलिंग, एग्रीमेंट और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं. सोमवार को एसआईटी ने फर्जी फर्मों के नाम पर खुले बैंक खातों की जांच की. पता चला कि बैंक अधिकारियों को आरोपित फर्म के खातों में आने वाली रकम के बारे में पूरी जानकारी थी. ऐसे बैंकों के शाखा प्रबंधकों को भी एसआईटी नोटिस जारी करेगी.

एसआईटी के अध्यक्ष एडीसीपी सरवणन टी. ने बताया कि बैंकों की भूमिका, दस्तावेज, गिरफ्तारी, साइबर के लिए अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं. प्राथमिकी में फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी और एनडीपीएस की धाराएं बढ़ाई गई हैं. अधिकतर फर्में ऐसी पाई गई है, जो कि एफिडेविट और रेंट एग्रीमेंट के आधार पर चल रही थीं। सिरप खरीदे गए, लेकिन किसको बेचे गए, यह दर्ज नहीं है. फर्म संचालकों को अपना पक्ष रखने के लिए एसआईटी की ओर से जारी नोटिस का अधिकतर फर्म संचालकों ने जवाब नहीं दिया और न ही एसआईटी के सामने दस्तावेज प्रस्तुत किए. जांच में यह भी सामने आया कि फर्म संचालकों ने कफ सिरप तो खरीदी, लेकिन बिक्री का लेखाजोखा नहीं दिखा सके.


image


लोकसभा में सांसद ने उठाया कफ सिरप का मुद्दा


ALSO READ:काशी तमिल संगमम–4 का पहला दल वाराणसी पहुँचा, बनारस स्टेशन पर हुआ भव्य स्वागत


लोकसभा में सोमवार को चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह ने नियम 377 के अंतर्गत विशेष उल्लेख कर देशभर में फैले नकली दवाओं के अवैध कारोबार पर गंभीर सवाल उठाए. सांसद ने कहा कि यह संगठित अपराध अब लाखों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है और इसके पीछे बड़े माफिया गिरोह के साथ-साथ “सफेदपोश” लोगों का संरक्षण होने की आशंका है. सांसद ने वाराणसी में हाल ही में बरामद हुए 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के नकली कफ सिरप का मामला उठाते हुए कहा कि इतने बड़े रैकेट के बावजूद अब तक कोई बड़ा सरगना या मास्टरमाइंड गिरफ्तार नहीं हुआ है. उन्होंने इसे “गंभीर चिंता और संदेह का विषय” बताया और आशंका जताई कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को दबाया या भटकाया जा रहा है; सांसद ने चेतावनी दी कि यदि इस काले कारोबार पर सख्ती से लगाम नहीं लगाई गई तो आम जनता का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में रहेगा.

गंगा सफाई मिशन पर सवाल: NGT की सख़्ती, वाराणसी में सीवेज और अतिक्रमण बना बड़ी चुनौती
गंगा सफाई मिशन पर सवाल: NGT की सख़्ती, वाराणसी में सीवेज और अतिक्रमण बना बड़ी चुनौती
वाराणसी : राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) द्वारा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) को सौंपी गई हालिया रिपोर्टों ने गंगा की सफाई को लेकर किए जा रहे दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद गंगा की जल गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर NGT ने कड़ी नाराज़गी जताई है। खास तौर पर वाराणसी में लगातार सीवेज निर्वहन, सहायक नदियों की दुर्दशा और गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण को लेकर ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाया है।सीवेज ट्रीटमेंट में भारी अंतरNGT के समक्ष पेश आंकड़ों के अनुसार, गंगा के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के शहरों से प्रतिदिन लगभग 3000 एमएलडी सीवेज उत्पन्न हो रहा है, जबकि प्रभावी उपचार क्षमता केवल करीब 1000 एमएलडी ही विकसित की जा सकी है।विशेष रूप से सेगमेंट-बी में स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई, जहां 1255 एमएलडी सीवेज उत्पादन के मुकाबले केवल 1013 एमएलडी उपचार क्षमता उपलब्ध है। इसका सीधा अर्थ है कि 242 एमएलडी सीवेज बिना उपचार के नदियों में प्रवाहित हो रहा है।NGT ने टिप्पणी की कि इतने बड़े निवेश के बावजूद जल गुणवत्ता में ठोस सुधार न दिखना, योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।सीवेज का दबाव, अधूरा नेटवर्कफरवरी 2026 की सुनवाई में वाराणसी को लेकर ट्रिब्यूनल की चिंता विशेष रूप से मुखर रही। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के करीब 4.14 लाख घरों में से सिर्फ 1.56 लाख घर ही सीवर नेटवर्क से जुड़े हैं।शेष आबादी का सीवेज या तो सीधे नालों के माध्यम से या फिर तूफानी जल निकासी नालियों के जरिए गंगा, असि और वरुणा नदियों में छोड़ा जा रहा है।NGT ने साफ शब्दों में कहा कि कच्चे सीवेज के निस्तारण के लिए स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स का उपयोग न तो स्थायी समाधान है और न ही कानूनी, बल्कि यह पारिस्थिति के रूप से अत्यंत हानिकारक है।असि और वरुणा: ‘नाला नहीं, नदी है’NGT की फरवरी 2026 की रिपोर्ट में असि और वरुणा नदियों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि असि गंगा की सहायक नदी है, न कि नाला, लेकिन व्यवहार में उसे नाले की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में मौजूद 76 नालों में से 31 नाले अब भी आंशिक या पूर्ण रूप से अनुपचारित सीवेज गंगा और वरुणा में बहा रहे हैं।बाढ़ क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पर फटकारगंगा के बाढ़ क्षेत्र में बिना पूर्व अनुमति बनाए गए एक रेलवे पुल के मामले में भी NGT ने NMCG को फटकार लगाई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बाढ़ क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गंगा की प्राकृतिक धारा और पारिस्थिति के लिए भी खतरा है।औद्योगिक प्रदूषण: कानपुर अब भी चुनौतीNGT ने यह भी माना कि कानपुर में चमड़ा उद्योगों और अन्य औद्योगिक इकाइयों से होने वाला प्रदूषण अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। कई अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग (GPI) निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, जबकि नियमों के तहत उन्हें शून्य तरल निर्वहन (ZLD) सुनिश्चित करना था।छह सप्ताह का अल्टीमेटमइन तमाम मुद्दों को गंभीर मानते हुए NGT ने NMCG और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वे. सीवेज उपचार की स्थिति. नालों के टैपिंग और एसटीपी की प्रगति. बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमणपर छह सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करें।इस मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।ALSO READ :वाराणसी के दालमंडी में 34 मकानों का एक साथ ध्‍वस्‍तीकरण, मीडिया पर पुलिस ने लगाई रोकसवाल जस के तसNGT की टिप्पणियों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है किक्या गंगा सफाई मिशन ज़मीनी स्तर पर प्रभावी साबित हो पाएगा, या यह योजना रिपोर्टों और आंकड़ों तक ही सीमित रह जाएगी?वाराणसी जैसी आध्यात्मिक राजधानी में जब सहायक नदियां ही सीवेज का भार नहीं झेल पा रहीं, तो गंगा की निर्मलता का सपना कितना दूर है—यह सवाल अब और भी तीखा हो गया है।
विशेश्वरगंज में ऑनलाइन जुए का बड़ा भंडाफोड़: ‘भाग्यलक्ष्मी’ ऐप के जरिए करोड़ों का खेल, तीन गिरफ्तार
विशेश्वरगंज में ऑनलाइन जुए का बड़ा भंडाफोड़: ‘भाग्यलक्ष्मी’ ऐप के जरिए करोड़ों का खेल, तीन गिरफ्तार
वाराणसी : विशेश्वरगंज इलाके में पुलिस ने मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को ऑनलाइन जुए के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई कोतवाली पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर की, जहाँ मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए अवैध रूप से ऑनलाइन सट्टा खिलाया जा रहा था।पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सोनू, राम भरोस और नरेश सिंह के रूप में हुई है। तीनों वाराणसी के स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं और विशेश्वरगंज व आसपास के इलाकों से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे थे।‘भाग्यलक्ष्मी’ ऐप से हो रहा था ऑनलाइन दांवप्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ‘भाग्यलक्ष्मी’ नामक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए लोगों को ऑनलाइन जुए के लिए प्रेरित करते थे। मोबाइल फोन के माध्यम से दांव लगवाए जाते थे और जीत-हार की रकम पूरी तरह डिजिटल तरीके से ट्रांसफर की जाती थी।कमीशन पर काम कर रहे थे आरोपीपुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी किसी बड़े नेटवर्क के स्थानीय एजेंट थे और कमीशन के आधार पर काम कर रहे थे। इनका मुख्य काम नए लोगों को जुए से जोड़ना, आईडी बनवाना और डिजिटल लेनदेन की व्यवस्था करना था।ये खुद बड़े संचालक नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर जुआ सिंडिकेट का हिस्सा बताए जा रहे हैं।डिजिटल ट्रांजैक्शन और म्यूल अकाउंट्स का करते थे इस्तेमाल जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पूरा नेटवर्क UPI, डिजिटल वॉलेट और नेट बैंकिंग पर आधारित था।पुलिस का अनुमान है कि वाराणसी में चल रहे ऐसे ऑनलाइन जुआ ऐप्स के जरिए रोजाना 50 लाख रुपये तक का अवैध लेनदेन किया जा रहा था।आरोपियों द्वारा म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया जा रहा था—यानी फर्जी दस्तावेजों और सिम कार्ड के जरिए दूसरों के नाम पर खोले गए बैंक खाते, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।मोबाइल फोन से मिले करोड़ों के सबूत छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई स्मार्टफोन और नकदी बरामद की है। मोबाइल फोन की जांच में डिजिटल वॉलेट, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और वेबसाइट से जुड़े ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो करोड़ों रुपये के लेनदेन की ओर इशारा करते हैं।मास्टरमाइंड की तलाशइस पूरे मामले में पुलिस को एक बड़े मास्टरमाइंड की तलाश है। हाल ही में पांडेयपुर समेत अन्य इलाकों में हुई छापेमारी में रिशु सिंह नाम सामने आया था, जो मुख्य संचालक बताया जा रहा है और फिलहाल फरार है।पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क का संचालन विदेश, खासकर दुबई या अन्य राज्यों से किया जा रहा है और स्थानीय एजेंटों के जरिए पूरा खेल चलाया जा रहा है।ALSO READ ; छेड़खानी के आरोपी प्रिंसिपल के बचाव में आया शिक्षक संघ, आरोपों को बताया साजिशकानूनी कार्रवाई जारीवाराणसी पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ जुआ अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश कर दिया है। साथ ही, उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और बैंक खातों की भी गहन जांच की जा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
छेड़खानी के आरोपी प्रिंसिपल के बचाव में आया शिक्षक संघ, आरोपों को बताया साजिश
छेड़खानी के आरोपी प्रिंसिपल के बचाव में आया शिक्षक संघ, आरोपों को बताया साजिश
वाराणसी : शिवपुर के पिसौर स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल पर छात्राओं से छेड़खानी के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है. प्रकरण को लेकर शिक्षकों में रोष है. उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ वाराणसी के बैनर तले शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है. उनका कहना है कि विवाद एक सुनुयोजित साजिश के तहत लगाया गया है.शिक्षक नेताओं का कहना है कि प्रधानाध्यापक पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और साजिशपूर्ण हैं. शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक होने के चलते कुछ लोग जानबूझकर मुद्दे गढ़कर शिक्षकों को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग झूठे आरोप लगाकर माहौल खराब कर रहे हैं, जबकि शिक्षक समाज सेवा कर जनता का विश्वास जीतने का प्रयास करता है. शिक्षक संघ के जिला समिति के पदाधिकारी प्रताप सिंह ने बताया कि जिन प्रधानाध्यापक पर आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ पहले भी गांव में जमीन और विद्यालय से जुड़े विवाद को लेकर तनाव रहा है. आरोप है कि इसी रंजिश के तहत छात्राओं के माध्यम से झूठा आरोप लगवाया गया, जिसके बाद गांव के कुछ लोगों ने विद्यालय स्टाफ पर जानलेवा हमला तक कर दिया.ALSO READ : वाराणसी पुलिस आयुक्त कार्यालय में आधुनिक सुविधाओं का लोकार्पण, फरियादियों को सर्वोच्च प्राथमिकताशिक्षकों का कहना है कि यदि घटना वास्तव में शुक्रवार या शनिवार को हुई थी, तो उसी समय इसकी शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए थी. आरोप लगाने वालों के पास शनिवार और रविवार को पर्याप्त समय था, लेकिन इसके बजाय सोमवार को विद्यालय खुलते ही बड़ी संख्या में लोगों के साथ पहुंचकर विद्यालय परिसर में भय का माहौल बनाया गया और हमला किया गया, जो गंभीर चिंता का विषय है. शिक्षकों ने यह भी बताया कि मामले में प्रधानाध्यापक की गिरफ्तारी कर ली गई है और उनके खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है. जिससे शिक्षक समुदाय बेहद आहत है. उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और निर्दोष को न्याय मिल सके.