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मंडल स्तरीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का समापन, 10 दिनों में 2.23 करोड़ की रिकॉर्ड बिक्री

मंडल स्तरीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का समापन, 10 दिनों में 2.23 करोड़ की रिकॉर्ड बिक्री
Dec 30, 2025, 05:59 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी- उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा अर्बन हॉट प्रांगण चौकाघाट में आयोजित खादी एवं ग्रामोद्योग तथा एक जनपद एक उत्पाद उत्सव “मण्डल स्तरीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी” सोमवार को विधान परिषद सदस्य धर्मेन्द्र राय द्वारा किया गया , 20 दिसम्बर से 29 दिसम्बर तक आयोजित 10 दिवसीय खादी मेले के द्वारा खादी के उत्पादों, स्थानीय हस्तशिल्प व खादी विचार धारा का प्रचार–प्रसार किया गया. आयोजित बृहद प्रदर्शनी में लगे 125 स्टालों पर खादी उत्पादों की 2.23 करोड़ रुपए की बिक्री हुई.


इस अवसर पर उन्होंने गांधीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर व खादी उत्पादकों, दुकानदारों को सराहा व माटी कला टूल्स किट वितरण योजना अंतर्गत चाक के 50 लाभार्थियों व पगमिल के 9 लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरण किया। मंडल स्तरीय पुरस्कार योजना अंतर्गत तीन लाभार्थियों को चेक प्रदान किया। प्रदर्शनी में लगे विभिन्न स्टालों के उत्पादों के अवलोकन व महत्व पर चर्चा किया गया.

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खादी वस्त्र नहीं, आत्मनिर्भरता की विचारधारा


सदस्य विधान परिषद धर्मेंद्र राय ने कहा कि खादी एक वस्त्र ही नहीं अपितु विचार धारा है,आज शासन–प्रशासन खादी बोर्ड की विभिन्न योजनाओं में युवाओं व महिलाओं को आत्मनिर्भर कर उन्हें रोजगार हेतु अनुदान प्रदान कर रहा है,खादी मेला में प्रदेश व देश के विभिन्न हस्तशिल्प उद्योगों को एक मंच मिल रहा है.उन्होंने बताया कि वाराणसी संत कबीर दास जी की भी धरती है जो संत होने के साथ-साथ कर्म से बुनकर भी थे प्रजापति समाज आज मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए पत्थर की चाक के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक चाक का वितरण जो आज माटी कला बोर्ड व ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा किया गया उनके कार्य क्षमता में वृद्धि के साथ साथ कार्यों में नयापन भी आया लाया है. उन्होंने ग्राहकों से अपील की कि वे स्थानीय भाइयों आजीविका को बढ़ावा देने हेतु अपने मनपसंद की चीजों को खरीदें, उन्होंने केन्द्र व प्रदेश सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं पर महत्व देते हुए बताया कि खादी बोर्ड के विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा युवाओं को रोजगार देने पर बल दिया गया,उन्होंने ग्राहकों को धन्यवाद दिया कि आप सब खादी को अपनाकर अपनी आवश्यकता व पसंद की चीजों की खरीद कर अपने उत्पादक भाई–बहनों के हाथों को मजबूती दे रहे हैं.


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अपर आयुक्त (उद्योग) उमेश कुमार सिंह ने कहा कि खादी प्रदर्शनी द्वारा वोकल फॉर लोकल व ओडीओपी योजनाओं को बल मिला है, परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी यू. पी. सिंह ने अतिथियों व ग्राहकों को आभार व धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि 20 से 29 दिसम्बर तक आयोजित 10 दिवसीय खादी मेले के द्वारा खादी के उत्पादों, स्थानीय हस्तशिल्प व खादी विचार धारा का प्रचार–प्रसार किया गया.उन्होंने बताया कि आयोजित बृहद प्रदर्शनी में लगे 125 स्टालों पर खादी उत्पाद सूती खादी, ऊनी खादी, पोली खादी, सिल्क के वस्त्र, रेडीमेड वस्त्र, जूट के खादी बैग, वूलन प्रोडक्ट, अचार, मुरब्बा, नमकीन, अगरबत्ती, साबुन, कश्मीरी ड्राई फ्रूट्स व मखाना इत्यादि उत्पादों की 2.23 करोड़ रुपए की बिक्री हुई.


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कार्यक्रम में जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, चंदौली गिरजा प्रसाद यादव, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, जौनपुर वी. के. सिंह, ग्रामोद्योग अधिकारी भदोही राजेश कुमार सिंह, वरिष्ठ सहायक अमन, पवन एवं अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी, पत्रकार बंधु उपस्थित रहे.

कैंट पुलिस का जुए के अड्डे पर छापा, नगदी समेत छह जुआरी गिरफ्तार.
कैंट पुलिस का जुए के अड्डे पर छापा, नगदी समेत छह जुआरी गिरफ्तार.
वाराणसी: कमिश्नरेट पुलिस के ऑपरेशन चक्रव्यूह अभियान के तहत कैंट थाना पुलिस ने सोमवार रात अर्दली बाजार स्थित एमएम लॉन के पास संचालित जुए के अड्डे पर छापेमारी कर छह जुआरियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से फड़ पर लगी 5,400 रुपये की नगदी, आरोपितों की तलाशी से 2,200 रुपये तथा 52 पत्तों की एक खुली ताश की गड्डी बरामद की।प्रभारी निरीक्षक राज किशोर पांडेय के नेतृत्व में सोमवार रात करीब 8:40 बजे की गई कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपितों की पहचान रोहित पटेल, दीपक पटेल, चंदन पटेल, पवन कुमार गौतम, राजीव कुमार पटेल और सूरज कुमार के रूप में हुई। सभी आरोपी कैंट थाना क्षेत्र के टकटकपुर एवं आसपास के रहने वाले हैं।ALSO READ : बरेका में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित, 51 अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया हिस्सा.पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ उत्तर प्रदेश जुआ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। छापेमारी टीम में उपनिरीक्षक बलवंत कुमार, उपनिरीक्षक अभिषेक सिंह, कांस्टेबल अतुल कुमार पांडेय, नागेंद्र कुमार, राजन कुमार राव और अमित तिवारी शामिल रहे।
बरेका में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित, 51 अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया हिस्सा.
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वाराणसी : बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में मंगलवार को राजभाषा विभाग के तत्वावधान में प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन में तथा बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत के मार्गदर्शन में आयोजित हुई।मुख्य राजभाषा अधिकारी रामजन्म चौबे के नेतृत्व में आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य रेलवे बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के लिए बरेका के प्रतिभागियों का चयन करना तथा अधिकारियों और कर्मचारियों में हिंदी के प्रयोग, राजभाषा नीति एवं सामान्य ज्ञान के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ाना था।प्रतियोगिता में बरेका के विभिन्न विभागों के 51 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हिंदी माध्यम में आयोजित इस प्रतियोगिता में रेलवे, हिंदी भाषा एवं साहित्य, राजभाषा नीति तथा सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।ALSO READ : बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.प्रतियोगिता का आयोजन सुव्यवस्थित और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक, उपयोगी और प्रेरणादायक बताते हुए इसकी सराहना की। प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी अब रेलवे बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में बरेका का प्रतिनिधित्व करेंगे।राजभाषा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ कर्मचारियों के ज्ञानवर्धन और राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.
बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग एवं अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार से महामना सभागार, मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र में 'नयी चाल की हिन्दी' विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। 28 से 30 जुलाई तक चलने वाली इस संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति, आलोचना, अनुवाद, लोक परंपरा और डिजिटल युग में हिन्दी के बदलते स्वरूप पर विचार-विमर्श करेंगे।उद्घाटन सत्र में हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. राजकुमार ने स्वागत वक्तव्य एवं विषय-प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि नामवर सिंह के बिना हिन्दी का कोई भी गंभीर अकादमिक विमर्श पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि उनसे सहमति या असहमति हो सकती है, लेकिन उन्हें दरकिनार कर हिन्दी के बौद्धिक विमर्श को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने कहा कि नामवर सिंह भारतीय और पाश्चात्य दोनों ज्ञान परंपराओं के अद्वितीय अध्येता थे और एक आदर्श शिक्षक के रूप में उनकी पहचान सदैव बनी रहेगी।मुख्य वक्ता एवं आईएसीएलएलएस के पूर्व सचिव प्रो. हरीश त्रिवेदी ने कहा कि महादेवी वर्मा, अज्ञेय और नामवर सिंह जैसे विद्वानों को सुनकर हिन्दी भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता का वास्तविक आभास होता था। उन्होंने कहा कि नामवर सिंह की बहुभाषिक दृष्टि, ज्ञान के प्रति समर्पण और वैचारिक स्वतंत्रता उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषताएं थीं।संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भाषा का स्वभाव निरंतर परिवर्तनशील होता है। आज व्हाट्सऐप, एसएमएस और ई-मेल जैसे त्वरित संचार माध्यम भाषा के सामने नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग भाषा और ज्ञान के विकास के लिए किया जाना चाहिए। कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने डिजिटल युग में साहित्य की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।द्वितीय सत्र 'नामवर स्मरण' के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र की उक्ति 'हिन्दी नई चाल में ढली' केवल भाषाई बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय समाज और आधुनिक चेतना के व्यापक परिवर्तन का संकेत थी। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, आचार्य रामचंद्र शुक्ल की आलोचना-दृष्टि और भक्ति परंपरा की मानवीय संवेदनाओं पर विस्तार से चर्चा की।प्रो. मनोज कुमार सिंह ने नामवर सिंह के व्यक्तित्व और उनकी आलोचना दृष्टि को याद करते हुए बनारस से उनके गहरे आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया। आईआरएस अधिकारी शैलेश कुमार ने नामवर सिंह से जुड़े संस्मरण साझा किए, जबकि वरिष्ठ कथाकार एवं 'तद्भव' के संपादक अखिलेश ने प्रेमचंद की कहानी ईदगाह पर नामवर सिंह की आलोचनात्मक दृष्टि का उल्लेख करते हुए उनके प्रसिद्ध कथन "सौन्दर्य वही है, जो हमारे अस्तित्व की रक्षा कर सके" को रेखांकित किया।तृतीय अकादमिक सत्र में आरंभिक आधुनिक हिन्दी साहित्य, हिंदवी प्रेमाख्यान, भारतीय भक्ति आंदोलन और सांस्कृतिक इतिहास पर गंभीर विमर्श हुआ। टेक्सॉस विश्वविद्यालय की गुंजन मल्होत्रा, कुमार नीरज, प्रो. माधव हाड़ा और प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने अपने शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और भक्ति आंदोलन के विविध आयामों पर प्रकाश डाला।चतुर्थ सत्र में 'विश्वविद्यालय की अवधारणा' विषय पर चर्चा हुई। इसमें डी. वेंकट राव, संजय कुमार तथा स्वाति गांगुली ने भारतीय शिक्षा दर्शन, नालंदा से लेकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तक की ज्ञान परंपरा और वैकल्पिक विश्वविद्यालय अवधारणा पर अपने विचार प्रस्तुत किए।ALSO READ : काशी विद्यापीठ के कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह को मिला 'विशिष्ट शिक्षक सम्मान...संगोष्ठी के दौरान नामवर सिंह के शिष्य शैलेश कुमार की पुस्तक 'चंद तस्वीर-ए-बुताँ' (नामवर जी का जीवन—तस्वीरों के आईने में) का विमोचन भी किया गया। साथ ही पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। तीन दिनों तक चलने वाली इस संगोष्ठी में हिन्दी भाषा और साहित्य से जुड़े समकालीन मुद्दों पर देश-विदेश के विद्वानों के बीच शोधपरक चर्चा जारी रहेगी.