ड्रोन तकनीक से बदलेगी किसानों की तकदीर, आधुनिक खेती पर जोर...

वाराणसी: बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान में ड्रोन तकनीक से आधुनिक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई. शताब्दी कृषि ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यशाला में ड्रोन से फसल बोआई, क्रॉप मॉनिटरिंग, पीपीई के उपयोग, लेबल रीडिंग और फील्ड ऑपरेशन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई. कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने 400 से अधिक प्रगतिशील किसानों, स्वयं सहायता समूहों, ड्रोन दीदियों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक खेती को तकनीक आधारित, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना वक्त की जरूरत है. उन्होंने कहा कि ड्रोन से सटीक छिड़काव संभव होगा जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से भी किसान सुरक्षित रहेंगे.
उद्योग जगत से कंधा मिलाकर करना होगा काम
उन्होंने विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि ग्रामीण बदलाव और तकनीकी नए विचार का माध्यम बनाने पर जोर दिया. मुख्य अतिथि डॉ. संजय सिंह ने कहा कि कृषि विभाग को विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा. कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यूपी सिंह ने कहा कि ड्रोन आधारित प्रिसीजन फार्मिंग आने वाले समय में खेती की तस्वीर बदल देगी.
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क्रॉपलाइफ इंडिया के महासचिव दुर्गेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य ड्रोन दीदियों, स्वयं सहायता समूहों और किसानों की तकनीकी क्षमता बढ़ाना है ताकि वे कृषि रसायनों का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर सकें. क्रॉपलाइफ इंडिया की सदस्य डॉ. प्रियंका ने रसायनों के सुरक्षित इस्तेमाल, प्राथमिक उपचार और जिम्मेदार कृषि रसायन प्रबंधन पर जानकारी साझा की.



