नशे की लत ने बनाया खूंखार: बेरहम बेटा बना मां का कातिल, खून पीते देख दहशत में लोग

वाराणसी: नशे के लिए पैसे नहीं दिए तो बेटा इस कदर बेरहम बन गया कि ईंट व लोहे की सरिया से मां के सिर पर तब तक वार करता रहा जब तक उनकी मौत नहीं हो गई. चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे तो मां की मृत देह से रिसते खून को हाथों में लेकर पीते देखकर दहशत में आ गए. दिलदहला देने वाली यह घटना मंडुआडीह थाना क्षेत्र में भुल्लनपुर में पंचायत भवन के पास हुई. सूचना के बाद पहुंची इलाकाई पुलिस ने हत्यारोपित को गिरफ्त में ले लिया.

चार बेटों के संग रहती थी मां
पंचायत भवन के समीप 65 वर्षीय शीला देवी तीन कमरों के मकान में चार बेटों के साथ रहती थीं. तीन बेटों रामबाबू, दिनेश और बहादुर की शादी हो गई है. सबसे छोटा बेटा 25 वर्षीय घनश्याम अविवाहित है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में बड़े तीनों बेटे मजदूरी करते हैं. परिवार चलाने के लिए शीला खुद दूसरों के घरों में बर्तन साफ करती थी.

पैसे ना देने पर की मां की हत्या
घनश्याम कोई काम नहीं करता और नशे का लती है. उसकी आदतों की वजह से उसके भाई उससे अलग ही रहते थे. सोमवार की शाम शीला काम करके लौटी तो घनश्याम उसके पास आया और शराब पीने के लिए रुपये मांगने लगा. काफी जिद करने पर उसने कुछ रुपये दिए, लेकिन वह और रुपयों की मांग करते हुए मां से झगड़ा करने लगा. बार-बार इन्कार करने से गुस्से में आ गया और घर में मौजूद ईंट व लोहे की सरिया से अपनी मां पर ताबड़तोड़ वार करने लगा.

परिजनों ने दी पुलिस को तहरीर
शीला दर्द से चीखती रही, लेकिन वह नहीं रुका और तब तक वार करता रहा जब तक उनकी मौत नहीं हो गई. वार इतने घातक थे कि शीला की आंखें बाहर निकल आई थीं। सिर बुरी तरह से कुचल गया था. बेटे बहादुर ने पुलिस को बताया कि घनश्याम आए दिन घर में विवाद करता था. हर कोई परेशान रहता था. मां ने पैसे नहीं दिए तो उसकी निर्मम हत्या कर दी. पुलिस को बताया कि आइडियल वूमेन वेलफेयर सोसाइटी से जुड़कर मां प्रौढ़ शिक्षा के लिए काम करती थी. दूसरे के घरों में काम भी करती थी.

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शीला के सबसे बड़े बेटे रामबाबू, दिनेश, बहादुर मजदूरी करते हैं. वहीं, छोटा घनश्याम मां के साथ ही अलग रहता था. परिजनों के मुताबिक, घनश्याम की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है. छह महीने पहले उसे मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लोगों ने पुलिस को बताया कि घनश्याम की हरकतों की वजह से कोई उससे बातचीत नहीं करता था. लोग डरते थे कि कब वह हमला न कर दे.



