काशी को वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने पर जोर, ‘संत परंपरा’ पर स्टोरीटेलिंग सत्र का आयोजन

वाराणसी : हाल के वर्षों में वाराणसी देश के एक सशक्त एवं विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरा है तथा इसमें एक वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित होने की अपार संभावनाएँ हैं. यहां की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत, जीवन परंपराएँ, ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित स्मारक, घाट, समृद्ध खान-पान की परंपरा तथा विविध अनुभवात्मक पर्यटन इसकी विशिष्ट पहचान हैं. बुनियादी ढाँचे, पर्यटक सुविधाओं, कनेक्टिविटी, ब्रांडिंग एवं प्रचार-प्रसार तथा गुणवत्तापूर्ण पर्यटन उत्पादों के विकास पर निरंतर ध्यान देकर काशी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने वाले एक वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सकता है.

यद्यपि वाराणसी में पर्यटन अवसंरचना एवं पर्यटक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, तथापि गंतव्य विकास के अगले चरण में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी तथा क्षमता निर्माण पर अधिक बल दिए जाने की आवश्यकता है. होटल व्यवसायियों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटन हितधारकों, पर्यटन सुविधादाताओं, पर्यटक गाइडों तथा पर्यटन उद्योग से जुड़े अन्य हितधारकों एवं स्थानीय समुदाय की पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने तथा पर्यटन के लाभों को स्थानीय स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका है.
इसके लिए पर्यटन शिक्षा, कौशल विकास, सेवा गुणवत्ता, डिजिटल साक्षरता तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग से संबंधित लक्षित क्षमता निर्माण कार्यक्रम आवश्यक हैं, ताकि स्थानीय पर्यटन हितधारक पर्यटकों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान कर सकें. इन क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा पर्यटन विकास में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने से वाराणसी में एक समावेशी, प्रभावी, प्रौद्योगिकी-सक्षम एवं सुदृढ़ पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकेगा, जिससे पर्यटकों के अनुभव तथा स्थानीय आजीविका—दोनों में सुधार होगा.

इसी क्रम में पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार, वाराणसी कार्यालय, इंटैक वाराणसी चैप्टर, टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन (TGA) एवं संत अतुलानंद रेजिडेंशियल अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में 22 सितंबर 2026 को संत अतुलानंद रेजिडेंशियल अकादमी, होलापुर, वाराणसी में युवा टूरिज्म क्लब के सदस्यों एवं पर्यटन व्यवसाय से जुड़े अन्य हितधारकों के लिए ‘संत परंपरा’ विषय पर स्टोरीटेलिंग सत्र का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात वक्ता व्योमेश शुक्ला द्वारा गोस्वामी तुलसीदास की संत परंपरा एवं साहित्यिक विरासत तथा उमेश कबीर द्वारा संत कबीरदास की विचारधारा, जीवन-दर्शन एवं शिक्षाओं पर आधारित रोचक एवं प्रेरणादायक स्टोरीटेलिंग सत्र प्रस्तुत किया. इस सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को काशी की समृद्ध संत परंपरा, आध्यात्मिक विरासत एवं सांस्कृतिक धरोहर से परिचित कराया गया.
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कार्यक्रम में संयुक्त महानिदेशक एवं क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर), पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की. इस अवसर पर अशोक कपूर, संयोजक, इंटैक वाराणसी चैप्टर, सुश्री दिव्या सिंह, निदेशक, प्रधानाचार्य, संत अतुलानंद रेजिडेंशियल अकादमी तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों एवं संस्थाओं के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में प्रतिभाग किया.
इस स्टोरीटेलिंग सत्र का उद्देश्य स्थानीय पर्यटन उद्योग से जुड़े व्यवसायियों एवं सेवा प्रदाताओं में पर्यटन संबंधी जागरूकता एवं सेवा मानकों को सुदृढ़ करना तथा गंतव्य पर पर्यटकों को बेहतर गुणवत्ता की सेवाएँ एवं समग्र रूप से बेहतर पर्यटन अनुभव प्रदान करने के लिए क्षमता निर्माण करना था. साथ ही, काशी की समृद्ध संत परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण उद्देश्य था.



