एपस्टीन का दिखा असर, नामचीन अधिकारियों ने दिया इस्तीफा

अमेरिका के यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन का मुद्दा इन दिनों चर्चाओं का विषय बन बैठा है. एपस्टीन फाइलों से जुड़े दस्तावेज लगातार राजनेताओं से लेकर दिग्गज लोगों की करतूतों की पोल खोलने में लगी हुई है. इस पोल का असर इस हद तक हुआ कि बड़े पदों पर बैठे तमाम लोग जांच के घेरे में आ गए हैं, जिसके चलते इस्तीफों की लाइन लग गई हैं. इसकी वजह इन दस्तावेजों में ईमेल, सोशल संपर्क, पैसों के लेन-देन और लड़कियों से निजी मुलाकातों से जुड़ी जानकारियां शामिल है. बता दें, हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के चहेते चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा. उन पर आरोप है कि, उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाने की सलाह दी थी. इन्हीं आरोपों को स्वीकार करते हुए मॉर्गन मैकस्वीनी ने चीफ स्टाफ का अपना पद छोड़ना ही बेहतर समझा. ये किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसका असर नॉर्वे में भी देखने को मिला.

एपस्टीन ने छिना इतनों का पद
यहां के विदेश मंत्रालय का कहना है कि, वरिष्ठ राजनयिक मोना जूल एपस्टीन से जुड़े मामले में "फैसले में गंभीर गलती" होने की वजह से अपना पद छोड़ने को तैयार है. हालांकि, 66 वर्षीय जूल पहले मंत्री रह चुकी हैं इजरायल, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र में नॉर्वे की राजदूत भी रह चुकी हैं. लेकिन एपस्टीन फाइल की इन करतूतों से यूरोप में बढ़ते विवाद का हिस्सा माना जा रहा है. बात करें अमेरिका की तो फरवरी 2026 में ब्रैड कार्प ने एक बड़ी लॉ फर्म के चेयरमैन पद छोड़ने का फैसला लेते हुए इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि उनके एपस्टीन से जुड़े ईमेल संपर्क सामने आए थे. इससे पहले नवंबर 2025 में लैरी समर्स ने भी एपस्टीन मामले से जुड़े होने का नतीजा भोगा था, जिसके चलते उन्होंने ने भी अपना एक अहम बोर्ड पद छोड़ा. दिसंबर 2025 में एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंजिनो ने भी इसी विवाद के बीच पद छोड़ दिया.

एपस्टीन फाइल्स ने ऐसे-ऐसे राज खोले की बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों की कुर्सी हिलने लगी, यूरोप के अन्य देशों में भी एपस्टीन फाइल्स ने अपना खेल दिखाया, फ्रांस में पूर्व मंत्री जैक लैंग ने एक सांस्कृतिक संस्थान के प्रमुख पद से इस्तीफा दिया. स्वीडन के साथ-साथ कई अधिकारियों को अपने पद से हाथ धोना पड़ा. ध्यान देने वाली बात यह है कि हर इस्तीफा अपराध साबित होने के कारण नहीं हुआ. कई मामलों में सिर्फ संपर्क सामने आने से ही विवाद खड़ा हुआ और सार्वजनिक दबाव बढ़ा. संस्थाओं की साख और अपना रूतवा कायम रखने के लिए कई लोगों ने पद छोड़ने में ही अपनी समझदारी समझी.

इन इस्तीफों को देखते हुए ये कहना जरा भी गलत नहीं होगा कि, इस एपस्टीन फाइल्स ने जैसे ही कई बड़े नेताओं की पोल क्या खोली उन्हें कुछ पल के लिए ये लगा कि हमारे द्वारा किये गए करतूतों पर कैसे भी करके पर्दा पड़ ही जाएगा. पर शायद वो ये भूल गए कि किसी भी हाल में उन्हें उन कारनामों का हिसाब चुकाना ही पड़ेगा, जो बंद दरवाजे के भीतर किया गया था.....क्योंकि कहा जाता है जैसी करनी वैसी भरनी.. जिसका नतीजा ये इस्तीफा है, जिसकी झड़ी आपको देखने को मिल रही है. जिसने पल भर में उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया और उनसे उनकी इज्जत और नौकरी ले डूबी.

जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसल, एपस्टीन 'फ़ाइल्स' के एक ईमेल मैसेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े-बड़े अधिकारियों का नाम सामने आया है. जहां पीएम मोदी का जेफ़री एपस्टीन की मुलाक़ात का दावा भी किया गया, जिसे भारतीय विदेश मंत्रालय ने ख़ारिज कर दिया है. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी खुद पर लगे आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि, उनका जेफ़री एपस्टीन से 'कोई लेना-देना नहीं' था. यहां तक कि अमेरिकी जांच से साज़िश सामने आती है. इसका मक़सद उन्हें 'राजनीतिक रूप से नुक़सान पहुंचाना और चुनाव हरवाना था. बता दें, यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन प्रभावशाली लोगों के लिए लड़कियां सप्लाई करता था? यह सवाल लंबे समय से उठ रहा है. लेकिन FBI यानि (फेडरल ब्यूरों इन्वेस्टिगेशन) जो संयुक्त राज्य अमेरिकी एजेंसी है इसी अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अब सामने आई जानकारी ने एक नई बहस छेड़ दी है.

सेक्स नेटवर्किंग का खिलाड़ी निकला एपस्टीन
जांच एजेंसियों ने एपस्टीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड खंगाले, जिसके बाद भी उन्हें ऐसा ठोस सबूत नहीं मिला जो ये साबित कर सके कि, वह शक्तिशाली लोगों के लिए कोई संगठित सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क चला रहा था, लेकिन जांच में यह जरूर सामने आया कि एपस्टीन सेक्स नेटवर्किंग चला रहा था, जिसके जरिए नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करता था. यह जांच 2005 में हुई थी, जब 2008 में 14 साल की एक लड़की के परिवार ने फ्लोरिडा में शिकायत दर्ज कराई थी.
इस जांच-पड़ताल में पुलिस ने कम से कम 35 लड़कियों की पहचान की, जिन्होंने अपनी आप बीती बताते हुए कहा कि जेफरी एपस्टीन उन्हें यौन प्रकृति की मालिश के लिए एक बड़ी रकम देता था, इस शिकायत के बाद एपस्टीन का काला चिट्ठा खुलते ही 2019 में उसकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन इस मामले से छुटकारा पाने के लिए उसने जेल में ही आत्महत्या कर ली. हैरानी इस बात की है कि, एपस्टीन की मौत के बाद भी एपस्टीन की फ़ाइलें विश्व की कई सरकारों, नेताओं, बिज़नेसमैन और नामचीन हस्तियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं. अब देखने वाली बात यह है कि, एपस्टीन का ये मुद्दा नामचीन अधिकारियों को किस हद तक का सफर तय कराता हैं.



