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सावित्रीबाई फुले के 195 वीं जयंती पर निबंध लेखन प्रतियोगिता, निकाली रैली

सावित्रीबाई फुले के 195 वीं जयंती पर निबंध लेखन प्रतियोगिता, निकाली रैली
Jan 03, 2026, 11:06 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : महान शिक्षिका और समाजसेविका सावित्री बाई फुले की 195वीं जयंती पर उनके सम्मान में भंदहां कला कैथी ग्राम स्थित आशा लाइब्रेरी में निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. यह प्रतियोगिता महिलाओं की शिक्षा, स्वाभिमान और सशक्तिकरण को समर्पित सावित्री बाई फुले के विचारों को सम्मानित करने के लिए रखी गई थी.लाइब्रेरी से जुड़ी बालिकाओं ने इस प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लिया.


VARANASI AASHAPUR


इस अवसर पर संस्था के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि क्रांतिज्योति सावित्री बाई फुले जी ने उस दौर में शिक्षा की अलख जगाई, जब बेटियों को पढ़ाना भी संघर्ष था. उनका जीवन आज भी समाज को समानता, साहस और प्रगति का मार्ग दिखाता है.उनके विचार और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे.

कार्यक्रम आयोजन में सौरभ चन्द्र, साधना पाण्डेय, प्रदीप सिंह, सरोज और सनी का विशेष योगदान रहा.


सावित्रीबाई फुले (जन्म 3 जनवरी, 1831) भारत की पहली महिला शिक्षक, समाज सुधारक और कवयित्री थीं, जिन्होंने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 19वीं सदी में महिलाओं और दलितों के लिए शिक्षा के द्वार खोले, छुआछूत मिटाने और विधवा विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी; उन्हें भारतीय नारी आंदोलन की जननी और शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रकाश स्तंभ माना जाता है, जिन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1897 में प्लेग पीड़ितों की सेवा करते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया.


जागरुकता रैली निकाली


SDF


वाराणसी के मिर्जामुराद अंतर्गत गौर और रखौना गांव में सावित्री बाई फुले जयंती के अवसर पर समता किशोरी युवा मंच से जुड़ी किशोरियों ने बालिका शिक्षा पर जागरूकता रैली निकाली. रैली की शुरुआत रखौना पंचायत भवन से हुई और इसका समापन अंबेडकर पार्क में किया गया.


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इस दौरान किशोरियों ने "बाबा मुझको पढ़ने दो, पढ़कर आगे बढ़ने दो" तथा "किशोरियों ने कर दिया कमाल, चूल्हे से निकली चौपाल" जैसे नारे लगाकर बालिका शिक्षा का संदेश दिया. उन्होंने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प भी लिया. कार्यक्रम में मनरेगा मजदूर यूनियन के संयोजक सुरेश राठौर ने कहा कि सावित्री बाई फुले ने महिलाओं और किशोरियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए अपने जीवन में समाज की रूढ़ियों को तोड़ा. उनकी प्रेरणा से समता किशोरी युवा मंच किशोरियों को शिक्षित और संगठित करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर सकें. इस अवसर पर रेनू, पूजा, सपना, नेहा, ज्योति, सरोजा, कविता, प्रियंका, अनिल, रोशन, मुश्तफा, सोनाली, खुशबू, रानी, प्रिया, फूलपत्ती, राजकुमारी, माला, संगीता, राधा, केवला, उषा, सरिता, अमिता, अनिता, किरण, वंदना सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे.

काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के पहले दिन सजी भव्य सांस्कृतिक संध्या, भजनों और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के पहले दिन सजी भव्य सांस्कृतिक संध्या, भजनों और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन रविवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित मंदिर चौक में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। मां भगवती की आराधना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित इस कार्यक्रम में भजन गायन और नृत्य की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन उद्घोषिका मीनाक्षी दीक्षित ने किया।सांस्कृतिक संध्या में भजन गायक प्रवीण कुमार सिंह ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्तिमय वातावरण बनाया। इसके बाद भजन गायक शेर सिंह ने भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक भाव से जोड़ा। वहीं, सोनी सेठ के नृत्य समूह की आकर्षक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिए।ALSO READ : बीएचयू के श्री विश्वनाथ मंदिर में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय पूजा कार्यक्रम का शुभारंभ.नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के साथ भारतीय कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है। मंदिर न्यास की ओर से नवरात्रि के प्रत्येक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे धाम आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिल सके।श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।
सगरा तालाब के आसपास से हटेगा अतिक्रमण, नगर आयुक्त ने दिए सीमांकन के निर्देश.
सगरा तालाब के आसपास से हटेगा अतिक्रमण, नगर आयुक्त ने दिए सीमांकन के निर्देश.
वाराणसी। शहर में तालाबों के संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने माधोपुर स्थित सगरा तालाब का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान तालाब के आसपास फैली गंदगी और अतिक्रमण की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तालाब की पैमाइश कराकर उसका सीमांकन कराने और अवैध अतिक्रमण को जल्द हटाने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने तालाब के आसपास की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से वहां की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि तालाबों का संरक्षण और उनके आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए तालाब की वास्तविक सीमा निर्धारित करना जरूरी है, ताकि उसके क्षेत्र में किए गए अवैध कब्जों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।नगर आयुक्त ने अधिकारियों को सगरा तालाब की तत्काल पैमाइश कराने और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाब के आसपास यदि अवैध अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब और उसके आसपास के परिसर में व्यापक सफाई अभियान चलाकर गंदगी को दूर करने के निर्देश भी दिए।ALSO READ : केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचनसोमवार से शुरू होगी सफाई और आगे की कार्रवाईनगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए सोमवार से ही सफाई अभियान और आगे की कार्रवाई की योजना पर काम शुरू करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि तालाब के आसपास साफ-सफाई सुनिश्चित करने के साथ ही सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाए, ताकि तालाब की स्थिति में सुधार हो सके।नगर आयुक्त ने साफ किया कि तालाब के संरक्षण और सुंदरीकरण से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।नगर निगम की इस पहल से माधोपुर स्थित सगरा तालाब के आसपास स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने, उसकी सीमा स्पष्ट करने और अतिक्रमण की समस्या दूर करने की दिशा में कार्रवाई की उम्मीद है। अब संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली पैमाइश, सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचन
केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचन
वाराणसी: केंद्रीय कारागार वाराणसी में नवरात्रि के प्रथम दिन रविवार को बंदियों द्वारा मंचित दस दिवसीय रामलीला का शुभारंभ विधि-विधान से मुकुट पूजन के साथ हुआ। रामलीला के पहले दिन नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। बंदियों ने अपनी अभिनय कला के माध्यम से नारद मोह की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान जेल के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ हुआ। इसके बाद नारद मोह की लीला का मंचन शुरू किया गया। कथा के अनुसार, कामदेव द्वारा नारद की समाधि भंग करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन वह इसमें असफल रहता है। इसके बाद नारद को अपनी तपस्या पर अभिमान हो जाता है और वह स्वयं को कामदेव पर विजय प्राप्त करने वाला मानने लगते हैं। नारद इस घटना का समाचार भगवान शिव को सुनाते हैं। भगवान शिव उन्हें भगवान विष्णु से इस प्रसंग का उल्लेख नहीं करने की सलाह देते हैं।अभिमान के वशीभूत नारद भगवान विष्णु के सामने भी अपनी विजय का वर्णन करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु अपने भक्त के अहंकार को दूर करने के लिए माया रचते हैं। माया के प्रभाव में नारद राजा शीलनिधि की कन्या पर मोहित हो जाते हैं और उससे विवाह करने की इच्छा व्यक्त करते हैं। वह भगवान विष्णु से अपने लिए सुंदर रूप प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।भगवान विष्णु नारद को वानर का रूप देकर भेजते हैं। स्वयंवर में अपने रूप को लेकर नारद को अपमान का सामना करना पड़ता है। इससे क्रोधित होकर नारद भगवान विष्णु को मनुष्य रूप धारण करने और नारी वियोग में दर-दर भटकने का श्राप दे देते हैं। इसी श्राप को भगवान राम के अवतार और उनके वनवास के प्रसंग से जोड़कर दिखाया गया। इसके बाद भगवान राम अपने अंशों सहित अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां प्रकट होते हैं। इसी प्रसंग के साथ रामलीला के पहले दिन का मंचन संपन्न हुआ।ALSO READ : सपा कार्यालय में मनाई गई लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती, संपूर्ण क्रांति के विचारों पर हुई चर्चा.केंद्रीय कारागार में बंदियों द्वारा आयोजित इस रामलीला का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना है। दस दिनों तक चलने वाली इस रामलीला में विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। बंदियों की सहभागिता से आयोजित यह कार्यक्रम जेल परिसर में धार्मिक वातावरण और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का माध्यम बना।इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार मिश्र, अमित कुमार वर्मा, अशोक कुमार राय, अयोध्या प्रसाद, भोजराज, श्रीमती अमिता श्रीवास्तव और फार्मासिस्ट संदीप खरे सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।