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व्रत त्‍योहार 2026 - 15 फरवरी को महाशिवरात्रि, 24 नवंबर देव दीपावली, 43 पर्वों और व्रतों की सूची जारी

व्रत त्‍योहार 2026 - 15 फरवरी को महाशिवरात्रि, 24 नवंबर देव दीपावली, 43 पर्वों और व्रतों की सूची जारी
Jan 03, 2026, 08:52 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : श्री काशी विश्वनाथ ट्रस्ट की ओर से नए साल के 43 पर्वों और व्रतों की सूची जारी की गई है. मंदिर के मुताबिक 2026 में काशी से जुड़े त्योहारों में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को होगी. इससे पहले 14 जनवरी को मकर संक्रांति पड़ेगी. 23 जनवरी को वसंत पंचमी मनाई जाएगी. ये जानकारी ट्रस्ट के आधिकारिक एप पर आगामी कार्यक्रम के नाम से एक सूची जारी कर दी गई है.

ट्रस्ट के कैलेंडर में 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी और तीन मार्च को काशी में रंगोत्सव का आयोजन होगा. जबकि 27 को पूरे देश में आमलकी एकादशी होगी. 25 मई को गंगा दशहरा, 16 जुलाई को लक्खा मेले में शुमार रथयात्रा मेला होगा. 10 अक्तूबर को पितृ विसर्जन, नौ नवंबर को अन्नकूट और 24 नवंबर को देव दीपावली मनाई जाएगी. उसी दिन कार्तिक पूर्णिमा और गुरुनानक जयंती भी होगी.


इस साल के प्रमुख 43 व्रत और पर्व


मकर संक्रांति : 14 जनवरी (बुधवार)

वसंत पंचमी : 23 जनवरी (शुक्रवार)

महाशिवरात्रि : 15 फरवरी (रविवार)

रंगभरी एकादशी : 27 फरवरी (शुक्रवार)

होली रंगोत्सव (काशी में) : 3 मार्च (मंगलवार)

होली रंगोत्सव (काशी से अन्यत्र) : 4 मार्च (बुधवार)

चैत्र नवरात्र प्रारंभ : 19 मार्च (बृहस्पतिवार)

श्री रामनवमी : 27 मार्च (शुक्रवार)

मेष संक्रांति : 14 अप्रैल (मंगलवार)

श्री परशुराम जयंती : 19 अप्रैल (रविवार)

अक्षय तृतीया : 20 अप्रैल (सोमवार)

आदि जगद्गुरु शंकराचार्य जयंती : 21 अप्रैल (मंगलवार)

बुद्ध पूर्णिमा : एक मई (शुक्रवार)

गंगा दशहरा : 25 मई (सोमवार)

रथयात्रा : 16 जुलाई (बृहस्पतिवार)

गुरु पूर्णिमा : 29 जुलाई (बुधवार)

नाग पंचमी : 17 अगस्त (सोमवार)

रक्षाबंधन/संस्कृत दिवस : 28 अगस्त (शुक्रवार)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : 4 सितंबर (शुक्रवार)

हरितालिका तीज व्रत : 14 सितंबर (सोमवार)

श्री अनंत चतुर्दशी व्रत : 25 सितंबर (शुक्रवार)

श्री विश्वकर्मा पूजा : 17 सितंबर (गुरुवार)

महालयारंभ (पितृ पक्ष प्रारंभ) : 27 सितंबर (रविवार)

महालक्ष्मी व्रत (पूर्ण) : 3 अक्तूबर (शनिवार)

जीवित्पुत्रिका व्रत : 3 अक्तूबर (शनिवार)

पितृ विसर्जन (अमावस्या) : 10 अक्तूबर (शनिवार)

शारदीय नवरात्र आरंभ : 11 अक्तूबर (रविवार)

महाअष्टमी व्रत : 18 अक्तूबर (रविवार)

महानवमी व्रत : 19 अक्टूबर (सोमवार)

श्री विजयादशमी/नवरात्र पारण : 20 अक्तूबर (मंगलवार)

शरद पूर्णिमा : 25 अक्तूबर (रविवार)

संकट गणेश चतुर्थी (करवाचौथ) : 29 अक्तूबर (बृहस्पतिवार)

धन्य त्रयोदशी (धनतेरस) : 6 नवंबर (शुक्रवार)

दीपावली/महालक्ष्मी पूजा/महाकाली पूजा : 8 नवंबर (रविवार)

अन्नकूट : 9 नवंबर (सोमवार)

गोवर्धन पूजा : 9 नवंबर (सोमवार)

भैया दूज : 11 नवंबर (बुधवार)

सूर्यषष्ठी व्रत (छठ) : 15 नवंबर (रविवार)

अक्षय नवमी : 18 नवंबर (बुधवार)

श्री हरिबोधिनी एकादशी (देवउठनी) : 20 नवंबर (शुक्रवार)

बैकुंठ चतुर्दशी/विश्वनाथ प्रतिष्ठा दिवस : 23 नवंबर (सोमवार)

कार्तिक पूर्णिमा/गुरु नानक जयंती : 24 नवंबर (मंगलवार)

देव-दीपावली : 24 नवंबर (मंगलवार)


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योगी सरकार के शर्तनामा ने धर्मयुद्ध का मार्ग किया प्रशस्‍त- स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद
योगी सरकार के शर्तनामा ने धर्मयुद्ध का मार्ग किया प्रशस्‍त- स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद
वाराणसी: योगी सरकार ने पूरा बल लगा लिया लेकिन हम लखनऊ पहुंच गए. पहले मठ से ही बाहर नहीे निकलने का प्‍लान बनाया, जब निकल गए तो रास्‍ते में रोकने का इंतजाम किया. उसमें भी सफलता नहीं मिली तो शर्तों पर सभा की अनुमति दी गई. इतना सब कुछ होने के बाद कल रात एक और नोटिस आ गया कि सभा के इंतजाम ठीक नहीं हैं. इसके बावजूद आज शंखनाद किया गया. गौ माता को राष्‍ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर शंकराचार्य स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद सरस्‍वती ने लखनऊ में सभा के दौरान उक्‍त बातें कही.सभा में उन्‍होंने बसपा सुप्रीमो मायावती और कांशीराम को लेकर कहा कि आज हम लोगों में उनकी तरह समर्पण की आवश्‍यकता है.हम प्रजा के कल्‍याण की कामना करने वाले हैं. यहां आने वाल लोगों में गौ माता के प्रति प्रेम है इसलिए यहां त‍क पहुंच सके हैं. हमें सरकारी नहीं असरकारी चाहिए. सरकारी संत से जुडेंगे तो सरकार जाने के बाद असर खत्‍म हो जाएगा. असरकारी संत जब तक जीवित रहेगा तब तक उसका असर रहेगा. न्‍याय के मार्ग से प्रजा का शासन होना चाहिए न कि अन्‍याय के मार्ग से. वेद पढने वाले बटुक लाठी के योग्‍य है. चोटी नोचने के लायक हैं. धिक्‍कार है ऐसी सरकार को जिसने ऐसा कलंकित कारनामा किया.यह भी पढ़ें: मौसम विभाग ने मार्च में कोहरा पड़ने की बताई वजह, बारिश के बन रहे आसारतमाम रुकवटों के बावजूद 11 मार्च को शीतला अष्टमी के अवसर पर आशियाना के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा पर दोपहर 2ः15 बजे से शाम पांच बजे तक कार्यक्रम का आगाज हो गया. लखनऊ शहर पहुंचते ही स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने हनुमान मंदिर पहुंचकर दर्शन कर बजरंगबली का आशीर्वाद लिया. इसके बाद कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए. हालांकि भारी भीड़ की आशंका के चलते खुफिया एजेंसियां पहले से ही सक्रिय रहीं.इसके अलावा बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई. आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थाने की पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है. बता दें कि इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए आयोजकों की ओर से करीब 4.5 लाख रुपये का शुल्क स्मारक समिति में जमा कराया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद काशी से गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शुभारम्भ किया. इसके बाद जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज, उन्नाव और नैमिषारण्य में सभाएं करते हुए लखनऊ पहुंचे.शंकराचार्य की अपील-जो लखनऊ नहीं पहुंच पाए वे अपने-अपने शहरों से ही करेंग शंखनादगौरतलब है कि माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान से रोके जाने और अपमानजनक व्यवहार के बाद शंकराचार्य ने शासन और प्रशासन के खिलाफ जंग ही छेड़ दिया. इसके बाद से ही शंकराचार्य के कार्यक्रमों और उनकी गतिविधियों की पल-पल की घटनाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है. इधर, लखनऊ पहुंचना ही उनके लिए आसान नही था, फिर भी वह पहुंच गये. लेकिन प्रशासनिक शिकंजे को देखते हुए शंकराचार्य ने अनुयायियों से की अपील की है. उन्होंने कहाकि अनुमति देर से मिलने के कारण बहुत से लोग नही पहुंच पाए. उन्होंने कहाकि जो लोग लखनऊ नहीं पहुंच पाएंगे, वे अपने-अपने शहरों या गांवों में ही गो रक्षा के लिए शंखनाद करें.प्रशासन ने सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए 26 सख्त शर्तों के साथ अनुमति दी है. शंकराचार्य ने 7 मार्च को वाराणसी से अपनी ’गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू की थी. इस दौरान जगह-जगह सभा में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम की मियाद पूरी हो गई है. लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसलिए आज लखनऊ में धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जा रहा है.काशीवासी गौभक्तों ने किया शंखनादलखनऊ में शंकराचार्य द्वारा किए जा रहे गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के समर्थन में आज सैकड़ों काशीवासी गौभक्तों असि घाट पर सामूहिक रूप से शंखनाद किया. इस दौरान स्वप्रेरणा से गौमाता भी स्वत: शंखनाद स्थल पर पहुंच कर गौभक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया. शंखनाद स्थल पर उपस्थित गौभक्तों को संबोधित करते हुए मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा कि सनातनधर्म की आत्मा गौमाता के प्राणों की रक्षा हेतु सचल शिव शंकराचार्य राष्ट्रव्यापी आंदोलन चला रहे हैं. जिसका व्यापक असर पूरे राष्ट्र पर पड़ रहा है और 100 करोड़ सनातनी जनता शंकराचार्य के इस गौप्रतिष्ठा आंदोलन से मजबूती से जुड़ रही है.शंखनाद कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सर्वश्री महामृत्युंजय मंदिर के महंत किशन दक्षिण, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, राकेश पाण्डेय, सरदार सतनाम सिंह,अरुण सोनी,सुनील श्रीवास्तव,प्रमोद वर्मा,पं सदानंद तिवारी,संतोष चौरसिया,पुलक त्रिपाठी,हिमांशु सिंह,किशन यादव,के.के. द्विवेदी,शशिकांत यादव,श्रीश तिवारी,सुभाष सिंह,मिर्ची दुबे,आशीष पाण्डेय,प्रदीप पाण्डेय सहित सैकड़ों लोग शामिल थे.
मौसम विभाग ने मार्च में कोहरा पड़ने की बताई वजह, बारिश के बन रहे आसार
मौसम विभाग ने मार्च में कोहरा पड़ने की बताई वजह, बारिश के बन रहे आसार
वाराणसी: इस साल मौसम कुछ अलग ही तेवर दिखा रहा है. सुबह ठंड दोपहर गर्म और शाम शुष्‍क मौसम लोगों को चौंका रहा है. ऐसे में आगामी 4-5 दिनों के दौरान वायुमण्डलीय स्थिरता के कारण कोहरे और धुन्ध की स्थिति बनी रहने की संभावना है. वर्तमान में मौसम अत्यधिक गर्म है, और तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की उम्मीद है. हालांकि, 15 मार्च से हल्की बारिश के आसार हैं, जो प्रदेश के तराई इलाकों और पूर्वांचल के कुछ हिस्सों में देखने को मिल सकती है.प्रदेश में सक्रिय मौसम तंत्र की अनुपस्थिति और पश्चिमी तथा मध्य भारत के मध्य क्षोभ मंडल में बने प्रतिचक्रवात के कारण वायुमंडलीय स्थिरता का प्रभाव देखा जा रहा है. इसके परिणामस्वरूप, प्रदेश में सामान्य से अधिक तापमान के साथ-साथ निचले क्षोभमंडल में पूर्वी भारत के दक्षिणी झारखण्ड के आसपास संकेन्द्रित चक्रवाती परिसंचरण से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विस्तृत द्रोणी का प्रभाव है. इस स्थिति के कारण प्रदेश में सुबह के समय कोहरे के साथ-साथ दिन में धुन्ध की स्थितियाँ बन रही हैं.यह भी पढ़ें: काशी विश्‍वनाथ धाम में गर्मी से नहीं तपेगी फर्श, भक्‍तों के लिए शुरू हुई नई व्‍यवस्‍थाआगामी 4-5 दिनों के दौरान मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है. वर्तमान मौसम परिस्थितियों में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने से प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक बना रहेगा. इस प्रकार, मौसम अत्यधिक गर्म रहने के साथ-साथ कोहरे और धुन्ध की स्थितियाँ बनी रहने की सम्भावना है. हालांकि, 15 मार्च से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में वर्षा की संभावना बढ़ रही है. यह वर्षा इस सीजन में पहली बार होगी, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आने की उम्मीद है.मौसम व‍िभाग ने सलाह दी है कि वे मौसम की स्थितियों के प्रति सतर्क रहें और आवश्यक सावधानियाँ बरतें. विशेषकर कोहरे और धुन्ध के कारण सड़क पर यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें. मौसम विभाग की ओर से जारी की गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश में तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होगा, लेकिन 15 मार्च से मौसम में बदलाव आने की संभावना है. इस बदलाव के साथ ही प्रदेशवासियों को राहत मिलने की उम्मीद है.इस मौसम परिवर्तन के साथ, प्रदेश में कृषि गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जिससे किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता होगी. मौसम की वर्तमान स्थिति और आगामी संभावित परिवर्तन पर ध्यान देना आवश्यक है.
काशी विश्‍वनाथ धाम में गर्मी से नहीं तपेगी फर्श, भक्‍तों के लिए शुरू हुई नई व्‍यवस्‍था
काशी विश्‍वनाथ धाम में गर्मी से नहीं तपेगी फर्श, भक्‍तों के लिए शुरू हुई नई व्‍यवस्‍था
वाराणसी: गर्मी बढ़ने के साथ ही श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में फर्श तपने लगी है. ऐसे में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्‍यवस्‍था की गई है. श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से जर्मन हैंगर के प्रबंध किए गए हैं, ताकि दर्शन के लिए प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से किसी प्रकार की असुविधा न हो. इससे गर्मी से राहत मिलेगी और फर्श पर चलने से छाले नहीं पडेंगे.इस व्यवस्था के माध्यम से श्रद्धालु बिना किसी कष्ट के भगवान श्री विश्वेश्वर का शांतिपूर्वक दर्शन कर सकेंगे. ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या और कतार की लंबाई बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है. विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि कतार में खड़े श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो. यदि श्रद्धालुओं के साथ छोटे बच्चे या बुजुर्ग भी हों, तो उन्हें भी आरामपूर्वक प्रतीक्षा करने और दर्शन करने में कोई कठिनाई न हो. इसी उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है.यह भी पढ़ें: कोचिंग संचालक पर छेड़खानी का आरोप, अश्‍लील वीडियो वायरल करने की दे रहा धमकीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षित दर्शन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. गर्मी के मौसम में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होने की संभावना को देखते हुए, यह प्रबंध श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया गया है. जर्मन हैंगर की व्यवस्था से श्रद्धालुओं को छांव में बैठने और आराम करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अधिक सहजता से अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकेंगे.इस व्यवस्था के माध्यम से श्रद्धालुओं को न केवल धार्मिक अनुभव में सुधार होगा, बल्कि वे गर्मी के प्रभाव से भी सुरक्षित रहेंगे. मंदिर न्यास की यह पहल श्रद्धालुओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाती है और धार्मिक स्थलों पर ऐसी सुविधाओं की आवश्यकता को प्रदर्शित करती है.