महादेव की नगरी काशी में हनुमान जयंती पर ध्वजा यात्रा, दिखी अद्भुत अखंड भारत की झलक

वाराणसी: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में गुरुवार को हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर आस्था का सैलाव सड़क पर उतरा. श्री हनुमत् सेवा समिति (नेवादा) द्वारा आयोजित भव्य 'श्री हनुमान ध्वज यात्रा' निकाली गई. अपने 23वें वर्ष के सफर में यह यात्रा आज सड़कों पर भक्तों का रेला देखने को मिला. लगभग 3 किलोमीटर लंबी कतार में हजारों श्रद्धालु राम भक्त हनुमान के जयकारे लगाते हुए हनुमान ध्वजा को लेकर चलते रहे.

एक तरफ जहां वर्तमान समय में लोग जात-पात उच नीच का भेदभाव बताकर लोगों को आपस में बांटने का काम कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ इस यात्रा में सभी जाति के लोगों ने शामिल होते हुए हनुमान ध्वजा को हाथ में लेकर एक भारत श्रेष्ठ भारत और अखंड भारत के परिकल्पना को मजबूत किया. क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या महिलाएं यह सब आस्था के रस में भीगे हुए राम रस से सराबोर होकर अपने देश समाज परिवार के सुख एवं समृद्धि की कामना लिए हनुमान जी के दर्शन को आगे बढ़ रहे थे.
भिखारीपुर तिराहे से यात्रा का शुभारंभ
बतादें कि, यात्रा का शुभारंभ सुबह भिखारीपुर तिराहे पर हुआ, जहाँ सूर्य की पहली किरण के साथ 11 ब्राह्मणों ने 60 फीट लम्बे वाहन पर राम दरबार रथ और पालकी में विराजे हनुमान का पूजन किया. 200 से अधिक डमरूओं की थाप और ढोल-नगाड़ों की गर्जना ने भक्तों में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया. नेवादा स्थित मुख्य कार्यालय पर अतिथियों द्वारा आरती के पश्चात यात्रा संकट मोचन दरबार की ओर बढ़ी.

गदा लेकर चल रहे थे श्रद्धालु
यात्रा में 1100 भक्त हाथों में बजरंगबली की पहचान 'गदा' लेकर चल रहे थे, जो साहस और शक्ति का प्रतीक नजर आया. यात्रा के पूरे 5.25 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर भक्तों के लिए जन-जन का सहयोग दिखा. 200 से ज्यादा स्टॉलों पर जूस, लस्सी, छाछ, फल और मेवों की बौछार थी. समिति द्वारा 501 किलोग्राम शुद्ध लड्डू का महाप्रसाद भक्तों में वितरित किया गया. कड़ी धूप के बावजूद हज़ारों महिलाएँ और युवतियाँ नंगे पाँव हाथों में ध्वज और पूजन की थाली लिए अटूट श्रद्धा के साथ बढ़ती रहीं. सडक पर पानी का छिडकाव भी कराया गया था ताकि भक्तों को कष्ट न हो.

शोभायात्रा में संतों, महंतों और दंडी स्वामि संग प्रमुख रूप से डॉ. चंद्रमौली उपाध्याय ,डॉ गिरीश चंद तिवारी,डॉ. सुभाष पांडे और डॉ. विनय पांडे ,समिति के अध्यक्ष रामबली मौर्य, कोषाध्यक्ष अजय मौर्य, संरक्षक डा. सन्तोष ओझा, त्रिभुवन मौर्य, संकटमोचन मौर्य, अशोक गुप्ता, बबलू सिंह, तारकेश्वर नाथ कुशवाहा, ओमप्रकाश वर्मा, रामदयाल प्रजापति, मुन्ना पटेल प्रमुख रूप से मौजूद रहे. इस वर्ष यात्रा का एक बड़ा संदेश भी रहा. “अभियान पवित्र काशी” के तहत हजारों भक्तों ने काशी को मांस-मदिरा मुक्त बनाने का संकल्प लिया. यह पहल धार्मिक आयोजन को सामाजिक जागरूकता से जोड़ने का प्रयास बनी.

बैठी हुई मुद्रा में दर्शन की अनूठी परंपरा
इस अवसर पर संकर्टमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने सभी भक्तों को शुभकामनाएं दीं और मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं की जानकारी साझा की. प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने एक रोचक परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि संकट मोचन मंदिर में हनुमान जी सामान्य दिनों में खड़ी मुद्रा में विराजमान रहते हैं, लेकिन हनुमान जयंती के दिन विशेष रूप से उनकी ‘बैठी हुई झांकी’ सजाई जाती है. उन्होंने कहा, “पूरे वर्ष हनुमान जी भक्तों के संकट हरने के लिए तत्पर (खड़े) रहते हैं, किन्तु उनके जन्मोत्सव पर विशेष अनुनय-विनय कर उन्हें विश्राम मुद्रा में बैठाया जाता है.

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प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि दूर-दराज के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं. भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. शाम के समय मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों से आने वाली मंडलियों द्वारा रामचरितमानस का सामूहिक गान किया जाएगा. मंदिर परिसर में भव्य धार्मिक वातावरण के बीच भक्तों को प्रसाद वितरित किया जा रहा है.



