पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल और विजय जायसवाल को 21 अगस्त को एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश होने का आदेश

वाराणसी: वाराणसी की एमपी-एमएलए न्यायालय ने एक पुराने मुकदमे में पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल और विजय जायसवाल को 21 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर आरोप तय कराने का आदेश दिया है. दोनों के पूर्व में निर्धारित तिथियों पर न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अगली तारीख निर्धारित की है.
मामला वर्ष 2011 में कैंट थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 547/2011 से जुड़ा है। वादी माता प्रसाद मिश्रा की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में जवाहर जायसवाल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 323, 374, 504, 506, 120बी तथा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आरोप लगाए गए थे. पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था.
मुकदमे में सभी आरोपियों की ओर से उन्मोचन (डिस्चार्ज) प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था. न्यायालय ने इन प्रार्थना पत्रों को खारिज करते हुए आरोपियों को संबंधित धाराओं में आरोप तय किए जाने के लिए न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया था.
हालांकि, बाद में अवर न्यायालय द्वारा जवाहर जायसवाल और विजय जायसवाल के खिलाफ केवल धारा 120बी आईपीसी और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आरोप तय किए गए. इस आदेश को वादी माता प्रसाद मिश्रा ने सत्र न्यायालय में आपराधिक निगरानी के माध्यम से चुनौती दी.
सत्र न्यायालय ने वादी की आपराधिक निगरानी को स्वीकार करते हुए मामले में निर्णय वादी के पक्ष में दिया. इसके बाद एमपी-एमएलए न्यायालय ने जवाहर जायसवाल और विजय जायसवाल को आरोप तय करने की कार्रवाई के लिए पूर्व में 4 अगस्त और 18 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था.
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बताया गया कि दोनों आरोपी निर्धारित तिथियों पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए. इसके बाद न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों को अब 21 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर आरोप बनवाने का आदेश दिया है.
मामला करीब 15 वर्ष पुराना होने के कारण न्यायालय की इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अब 21 अगस्त को दोनों आरोपियों की व्यक्तिगत उपस्थिति और आगे की न्यायिक कार्यवाही पर नजर रहेगी.



