12000 करोड के मालिक, किराये का कमरा, नहीं रहे Raymond के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया

रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 साल की उम्र में निधन हो गया. जिसकी जानकारी उनके बेटे गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया पर शेयर कर दी. बता दें कि, विजयपत सिंघानिया देश की प्रमुख टेक्सटाइल कंपनी रेमंड ग्रुप के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर रहे और साल 2017 में बेटे गौतम सिंघानिया के साथ परिवार और संपत्ति से जुड़े विवाद को लेकर सुर्खियों में रहे.

अब कहानी विजयपत की कंपनी रेमंड के बारे में…
Raymond की शुरुआत 1925 में ठाणे से हुई थी. पहला रिटेल शोरूम 1958 में मुंबई में खोला गया. इसके बाद इसे आम लोगों तक पहुंचाया गया. धीरे- धीरे भारत का एक भरोसेमंद मेंस वियर ब्रांड बन गया और छोटे शहरों में शोरूम खुले. समय बदला, कंपनी ने फैब्रिक, डिजाइन और टेक्नोलॉजी पर काम किया और हाल यह हुआ की देश के साथ विदेश में भी कंपनी के शो-रूम खुले.
Raymond देश में 20 हजार से ज्यादा जगहं पर अपना प्रोडक्ट बेचता है जिसमें 1500 से ज्यादा शो- रूम और 60 देशों में स्टोर है.

विजयपत से जुड़े कुछ फैक्ट्स..
सबसे रईस लोगों में शामिल विजयपत का एविएशन और फिल्म इंडस्ट्री में भी रसूख था.
विजयपत ने कंपनी की कमान 1980 में संभाली और इसे मॉडर्न इंडस्ट्रियल ग्रुप की पहचान दी.
1986 में प्रीमियम ब्रांड पार्क एवेन्यू लांच किया. फैशनेबल ब्रांड्स और नई रे-स्टाइल चाहने वाले पुरुषों के लिए कंप्लीट वार्डरोब रेंज उपलब्ध करवाई.
ओमान में कंपनी का पहला विदेशी शोरूम 1990 में खोला और उसके बाद 1996 में देश में एयर चार्टर सर्विस शुरू की.
प्लेन उड़ाकर भारत आए थे विजयपत...
बात है साल 1988 की जब विजयपत एक माइक्रोलाइट विमान में लंदन से नई दिल्ली तक 23 दिन में अकेले उड़ान भरकर 'स्पीड-ओवर-टाइम एंड्योरेंस रिकॉर्ड' बनाया था. उसके बाद 1994 में भारतीय वायुसेना ने उन्हें 'मानद एयर कमोडोर' बनाया और 2006 में उन्हें मुंबई का 'शेरिफ' नियुक्त किया.
वहीँ, नवंबर 2005 में 67 साल की उम्र में उन्होंने एक हॉट एयर बैलून से 69000 फीट की ऊंचाई में उड़ान भरी.

इसके साथ साल 2006 में उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से भी नवाजा गया था.
विजयपत सिंघानियां से जुड़ी एक खास बात ये है कि बिजनेस सेक्टर में अपनी धमक के साथ उनकी नेटवर्थ 12,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी और वे मुंबई के पॉश इलाके में अपने महलनुमा घर जेके हाउस में लग्जरी लाइफ स्टाइल जी रहे थे, समय ऐसा बदला कि उन्हें साउथ मुंबई की ग्रैंड पराडी सोसायटी में किराए के घर में रहने को मजबूर होना पड़ा.



