सारनाथ में युवा बौद्ध विद्वानों का चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन , 'मध्यम मार्ग' को अपनाने का वैश्विक आह्वान...

वाराणसी : सारनाथ स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बती स्टडीज (सीआईएचटीएस) में गुरुवार को युवा बौद्ध विद्वानों का चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ. इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और सीआईएचटीएस के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का विषय "आज की पीढ़ी के लिए बुद्ध का मध्यम मार्ग" रखा है. सम्मेलन में भारत सहित थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, श्रीलंका, ताइवान और लाओस के विद्वान भाग ले रहे हैं.
उद्घाटन सत्र में IBC के महासचिव वेन. शार्टसे खेनसुर जांगचुप चोएडेन रिम्पोचे ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान बुद्ध का 'मध्यम मार्ग' शांति, संवाद और सद्भाव स्थापित करने का सबसे प्रासंगिक मार्ग है. उन्होंने युवा विद्वानों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को साझा मंच पर लाने की आवश्यकता पर बल दिया.

मुख्य अतिथि एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि सारनाथ वही पावन भूमि है. जहां भगवान बुद्ध ने लगभग 2500 वर्ष पूर्व पहली बार 'मध्यम मार्ग' का उपदेश दिया था. उन्होंने कहा कि आज के समय में अतिवादी सोच के बजाय संवाद, संतुलन और सहमति की संस्कृति को बढ़ावा देना आवश्यक है.
विशिष्ट वक्ता एवं सीआईएचटीएस के कुलपति वेन. प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी ने कहा कि बुद्ध का दर्शन प्रत्यक्ष अनुभव और तर्क पर आधारित है. उन्होंने चार आर्य सत्य, त्रिविध प्रशिक्षण तथा प्रतीत्यसमुत्पाद को आधुनिक समाज में करुणा, सह-अस्तित्व और साझा जिम्मेदारी का आधार बताया.
कार्यक्रम के समापन संबोधन में IBC के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर ने युवा विद्वानों से बुद्ध के करुणा और विवेकपूर्ण चिंतन के संदेश को विश्वभर तक पहुंचाने का आह्वान किया. उन्होंने युवाओं को "धम्म सेतु" बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि वे बुद्ध के शाश्वत संदेश के वैश्विक दूत बनें.
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सम्मेलन के दौरान तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. पहले सत्र में दार्शनिक एवं अस्तित्व संबंधी आयाम पर चर्चा करते हुए मध्यम मार्ग, चार आर्य सत्य और प्रतीत्यसमुत्पाद को आधुनिक जीवन के लिए प्रासंगिक बताया गया। दूसरे सत्र में नैतिक एवं व्यावहारिक आयाम के तहत डिजिटल युग में जिम्मेदार नागरिकता, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवनशैली पर विचार रखे गए। तीसरे सत्र में मनोवैज्ञानिक एवं चिंतनशील आयाम के माध्यम से बुद्ध धम्म को मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-अनुशासन और समग्र कल्याण का प्रभावी मार्ग बताया गया.
सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं के बीच भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए शांति, करुणा, नैतिकता और वैश्विक सहयोग की भावना को सुदृढ़ करना है.



