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सारनाथ में युवा बौद्ध विद्वानों का चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन , 'मध्यम मार्ग' को अपनाने का वैश्विक आह्वान...

सारनाथ में युवा बौद्ध विद्वानों का चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन , 'मध्यम मार्ग' को अपनाने का वैश्विक आह्वान...
Jul 30, 2026, 09:47 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : सारनाथ स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बती स्टडीज (सीआईएचटीएस) में गुरुवार को युवा बौद्ध विद्वानों का चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ. इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और सीआईएचटीएस के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का विषय "आज की पीढ़ी के लिए बुद्ध का मध्यम मार्ग" रखा है. सम्मेलन में भारत सहित थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, श्रीलंका, ताइवान और लाओस के विद्वान भाग ले रहे हैं.


उद्घाटन सत्र में IBC के महासचिव वेन. शार्टसे खेनसुर जांगचुप चोएडेन रिम्पोचे ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान बुद्ध का 'मध्यम मार्ग' शांति, संवाद और सद्भाव स्थापित करने का सबसे प्रासंगिक मार्ग है. उन्होंने युवा विद्वानों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को साझा मंच पर लाने की आवश्यकता पर बल दिया.

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मुख्य अतिथि एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि सारनाथ वही पावन भूमि है. जहां भगवान बुद्ध ने लगभग 2500 वर्ष पूर्व पहली बार 'मध्यम मार्ग' का उपदेश दिया था. उन्होंने कहा कि आज के समय में अतिवादी सोच के बजाय संवाद, संतुलन और सहमति की संस्कृति को बढ़ावा देना आवश्यक है.


विशिष्ट वक्ता एवं सीआईएचटीएस के कुलपति वेन. प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी ने कहा कि बुद्ध का दर्शन प्रत्यक्ष अनुभव और तर्क पर आधारित है. उन्होंने चार आर्य सत्य, त्रिविध प्रशिक्षण तथा प्रतीत्यसमुत्पाद को आधुनिक समाज में करुणा, सह-अस्तित्व और साझा जिम्मेदारी का आधार बताया.


कार्यक्रम के समापन संबोधन में IBC के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर ने युवा विद्वानों से बुद्ध के करुणा और विवेकपूर्ण चिंतन के संदेश को विश्वभर तक पहुंचाने का आह्वान किया. उन्होंने युवाओं को "धम्म सेतु" बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि वे बुद्ध के शाश्वत संदेश के वैश्विक दूत बनें.


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सम्मेलन के दौरान तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. पहले सत्र में दार्शनिक एवं अस्तित्व संबंधी आयाम पर चर्चा करते हुए मध्यम मार्ग, चार आर्य सत्य और प्रतीत्यसमुत्पाद को आधुनिक जीवन के लिए प्रासंगिक बताया गया। दूसरे सत्र में नैतिक एवं व्यावहारिक आयाम के तहत डिजिटल युग में जिम्मेदार नागरिकता, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवनशैली पर विचार रखे गए। तीसरे सत्र में मनोवैज्ञानिक एवं चिंतनशील आयाम के माध्यम से बुद्ध धम्म को मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-अनुशासन और समग्र कल्याण का प्रभावी मार्ग बताया गया.


सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं के बीच भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए शांति, करुणा, नैतिकता और वैश्विक सहयोग की भावना को सुदृढ़ करना है.

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​वाराणसी : नगर निगम द्वारा सम्पत्ति कर (गृहकर, जलकर और सीवरकर) के भुगतान पर दी जा रही छूट की मियाद 31 जुलाई को समाप्त हो रही है. अब तक शहर के कुल 84,386 भवन स्वामी (नकद, चेक एवं ऑनलाइन माध्यमों से) 69.30 करोड़ रुपये का संपत्ति कर जमा कर चुके हैं. इसमें 37,151 भवन स्वामियों ने ऑनलाइन माध्यम से 35 करोड़ रुपये टैक्स जमा किया है.नगरीय सीमा में करीब 2.33 लाख भवन गृहकर के दायरे में हैं. वहीं करीब 1.48 लाख भवन स्वामियों ने अब तक टैक्स जमा नहीं किया है, उनके लिए 12 प्रतिशत तक की छूट पाने का महज एक दिन का मौका शेष बचा है.31 जुलाई की समय-सीमा बीतने के बाद टैक्स जमा करने पर पूरा टैक्स देना होगा. ​​नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष (2026-27) में सात मई से टैक्स जमा करने पर मुख्य रूप से 10 प्रतिशत की छूट दी जा रही है. इसके साथ ही, डिजिटल इंडिया अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऑनलाइन माध्यमों से भुगतान करने वाले नागरिकों को दो प्रतिशत की अतिरिक्त रियायत दी जा रही है. इस प्रकार, ऑनलाइन टैक्स जमा करने पर कुल 12 प्रतिशत की छूट प्राप्त हो रही है.ALSO READ : थाना सिगरा में 75 लावारिस वाहनों की नीलामी, 11.01 लाख रुपये की सबसे ऊंची बोली...उन्होंने बताया कि भवन स्वामी अपने मोबाइल के माध्यम बेहद सरल और सुरक्षित तरीके से घर बैठे टैक्स जमा कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें निगम के आधिकारिक वाट्सएप चैटबॉट नंबर 86018 72601 पर सिर्फ हाय (Hi) लिखकर भेजना होगा. मैसेज भेजते ही करदाता को डिजिटल बिल प्राप्त हो जाएगा, जहाँ से वे सीधे ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं.
थाना सिगरा में 75 लावारिस वाहनों की नीलामी, 11.01 लाख रुपये की सबसे ऊंची बोली...
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वाराणसी। कमिश्नरेट वाराणसी के "ऑपरेशन क्लीन" अभियान के तहत थाना सिगरा परिसर में गुरुवार को 75 लावारिस वाहनों की खुली नीलामी की गई. नीलामी में सर्वाधिक 11 लाख 1 हजार रुपये की बोली लगने पर वाराणसी के कादीपुर क्षेत्र निवासी मुन्नू गुप्ता को विजेता घोषित किया गया.पुलिस आयुक्त के निर्देश पर थानों में लंबे समय से खड़े लावारिस वाहनों के निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है. इसी क्रम में पुलिस उपायुक्त काशी जोन के निर्देशन में गठित समिति ने वाहनों का मूल्यांकन कराने, संबंधित वाहन स्वामियों को नोटिस भेजने तथा सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नीलामी की प्रक्रिया संपन्न कराई.थाना सिगरा परिसर में आयोजित खुली बोली में कुल 26 ठेकेदारों (कबाड़ियों) ने भाग लिया. इनमें मुन्नू गुप्ता द्वारा सबसे अधिक 11 01 लाख रुपये की बोली लगाए जाने पर उन्हें नीलामी का विजेता घोषित किया गया। अन्य प्रतिभागियों की एक-एक लाख रुपये की जमानत राशि वापस कर दी गई। विजेता को निर्धारित राशि एवं जीएसटी जमा करने के बाद वाहनों का कब्जा लेने के निर्देश दिए गए.ALSO READ : बीएचयू के प्रोफेसर बने राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के विशेषज्ञ निदेशक...इस नीलामी के माध्यम से थाना सिगरा में लंबे समय से खड़े 75 दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया लावारिस वाहनों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया . पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई से थानों में स्थान खाली होने के साथ ही लंबे समय से लंबित मालों के निस्तारण में भी तेजी आएगी.
बीएचयू के प्रोफेसर बने राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के विशेषज्ञ निदेशक...
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वाराणसी : भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं, दुग्ध विकास मंत्रालय द्वारा बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य विभाग के प्रो. गुरु प्रसाद सिंह को राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड का विशेषज्ञ निदेशक बनाया गया है. उनकी इस नवीन उपलब्धि पर मित्रों एवं पारिवारिक जनों में हर्ष की लहर दौड़ पड़ी है.प्रो. गुरु प्रसाद सिंह को 34 वर्षों का शिक्षण, अनुसंधान विस्तार और प्रशासन का अनुभव है. वह 17 साल से प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इसके पूर्व में प्रो. सिंह राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के निदेशक मंडल के सदस्य, एनडीडीबी मृदा लिमिटेड के स्वतंत्र निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के सलाहकार बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं. उनकी अब तक कुल आठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.इसके पूर्व वे भारतीय गो-वंश रक्षण एवं संवर्धन परिषद, छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदत्त गौ ज्योति पुरस्कार (2013), डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह गौ रक्षा पुरोधा सम्मान (2018), प्रगति पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट, लखनऊ द्वारा प्रदत्त उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान (2018) जैसे विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किये जा चुके हैं. इसके अतिरिक्त वे आजीवन सदस्यः इंडियन डेयरी एसोसिएशन, इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन, इंडियन साइंस कांग्रेस सोसाइटी, उत्तर प्रदेश उत्तरांचल इकोनॉमिक एसोसिएशन, भारतीय गो-वंश रक्षण एवं संवर्धन परिषद, सोसाइटी फॉर कम्युनिटी मोबिलाइजेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट, भारत जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के आजीवन सदस्य भी है.ALSO READ : सारनाथ में युवा बौद्ध विद्वानों का चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन , 'मध्यम मार्ग' को अपनाने का वैश्विक आह्वान...किसानों को स्व रोजगार और कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर वह प्रोत्साहित भी करते हैं. उन्होंने विगत कई वर्षों से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में भी आपने विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है.