Gandiv Digital Exclusive: 488 करोड़ की ठगी में गिरफ़्तारी नहीं सिर्फ केस डायरी तैयार कर रही वाराणसी पुलिस

Gandiv Digital Exclusive : 488 करोड़ रुपये के आर्थिक अपराध में वाराणसी की साइबर क्राइम थाना पुलिस के हाथ खाली हैं. जबकि इस मामले में 40 दिन पहले अजीबो-गरीब तरीके का मुकदमा दर्ज किया था. वादी की ओर से तहरीर में आरोपितों के नाम देने के बावजूद मुकदमा अज्ञात के खिलाफ लिखा गया. किसी की गिरफ्तारी करने की बजाय पुलिस सिर्फ केस डायरी भर रही है. इस मामले में कानून के लंबे हाथ छोटे हो जाने की वजह लेन-देन होने की खूब चर्चा हो रही. इस मामले में किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पाई इस बारे में जांच अधिकारी इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह कुछ बता नहीं पा रहे हैं. गांडीव डिजिटल ने इस बारे में उनसे सवाल पूछा तो उनका कहना था कि देखकर ही बता पाएंगे.


बनारस में मना रहे थे स्थापना दिवस
दिल्ली आधारित कंपनी मेडालिओन ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड ने बीते पांच जुलाई को वाराणसी के नागरी नाटक मंडली में अपना छठवां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया था. इसमें मेयर अशोक तिवारी, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल समेत कई गणमान्य लोगों को अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था. कार्यक्रम शुरू ही हुआ था कि तभी कुछ निवेशक वहां पहुंचे और कंपनी के संचालकों पर फ्राड का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे. यह देखकर कंपनी के सीनियर अधिकारी मौके से भाग निकले. पुलिस ने पूरे कार्यक्रम को रुकवा दिया और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया था. लखनऊ के गोमती नगर के विभव खंड निवासी निवेशक मानवेंद्र तिवारी ने साइबर क्राइम थाना में कंपनी के संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया. उसने पुलिस को बताया है कि सितंबर 2022 से अक्टूबर 2023 तक कंपनी में नेतृत्व प्रशिक्षक था.
कंपनी ने ग्राहकों को पहले सोना खरीदने पर कैशबैक दिया. बाद में बुकिंग योजना शुरू की और 10 से 20 महीने में रुपये डबल करने की बात कह कर लोगों को लालच दिया. इस लालच में आकर बड़ी संख्या में लोगों ने कंपनी में निवेश किया. लेकिन उनके रुपये हड़प लिए गए. कंपनी ने तीन बार अपनी वेबसाइट में बदलाव किया और निवेशकों का पूरा डाटा ही गायब कर दिया.
आगे नहीं बढ़ सकी पुलिस की जांच
मामले की जांच साइबर क्राइम थाना के इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह कर रहे हैं. एफआईआर अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया है. पुलिस ने इस मामले में पुरस्कार चिट और धन प्रचलन योजना (प्रतिबंध) अधिनियम, 1978 की धाराएं जो सभी प्रकार की इनामी चिट और मनी सर्कुलेशन योजनाओं के संचालन, प्रचार और उनमें शामिल होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है व धोखाधड़ी की धारा में मुकदमा दर्ज किया है. डेढ़ महीने बीतने के बाद भी साइबर क्राइम थाना पुलिस कुछ कार्रवाई नहीं कर पाई है. कंपनी के संचालक भी उसकी पकड़ से बाहर हैं जबकि वह देश के बाहर जाने की योजना बना रहे हैं.
खूब हो रही लेन-देन की चर्चा
चर्चा है कि इस पूरे मामले में लीपापोती की तैयारी चल रही है. जो लोग मामले को खत्म कराने का दावा कर रहे हैं उन्होंने लाखों रुपये की मांग की थी और उनके पास रुपये पहुंच भी गए हैं. इस मामले में सेटलमेंट कराने के लिए कानून की जानकारी रखने वालों से लेकर पुलिस के लोग भी शामिल हैं. इन रुपयों के बदौलत ही ठगी के आरोपितों को पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी है लेकिन पुलिस उनके बारे में कुछ भी पता नहीं लगा पा रही है. आरोपित आपस में व्हाट्सएप चैट के जरिए बातचीत करते हैं और नेपाल में जाकर छुपने की योजना बना रहे हैं.

पुलिस ने केस डायरी में बताया गंभीर मामला
इस मामले में जांच कर रहे अधिकारी उदयवीर ने जो केस डायरी तैयार की है उसमें पूरा मामला 488 करोड़ का बताया है. केस डायरी के मुताबिक कंपनी से 18,580 लोग जुड़े थे. इनमें से 3750 सक्रिय रहे. कंपनी के कंप्यूटर से मिली जानकारी के अनुसार कंपनी ने कुल 488 करोड़ से अधिक की धनराशि एकत्र किया है जबकि निकासी बहुत कम हुई है. जो निवेशकों के रुपयों के गबन की ओर इशारा करता है. कई लोग ऐसे हैं जिनके साथ लाखो की ठगी की गई. पुलिस की केस डायरी के मुताबिक रामपुर के आकाश दीप के साथ सवा करोड़ की ठगी हुई. गोपालगंज के रमेश चंद्र से 30 लाख, आगरा के गोपाल शर्मा से 12 लाख, ग्वालियर के हरि सिंह राजपूत से 40 लाख रुपये, राजस्थान के हनुमान सहाय यादव से डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी हुई. इसके अतिरिक्त सैकड़ों लोग ठगी के शिकार हुए.
ऐसे करते थे ठगी
पुलिस की केस डायरी के अनुसार श्री मेडालिओन ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी (सीइओ सत्यजीत कुमार द्वारा आभूषण व्यवसाय की आड़ में बड़ा मल्टीलेवल मार्केटिंग, पोजी व पिरामिड स्कीम चलाजा रहा है. कंपनी द्वारा आम जनता को आकर्षित करने के लिए अनुचित-अवास्तविक लाभ, कैशबैक और विदेश यात्रा का प्रलोभन दिया जा रहा है. कंपनी दस हजार की ज्वेलरी आनलाइन बुक कराने पर 20 महीने में 55 हजार कैशबैक, एक लाख दस हजार गोल्ड फंड देने का दावा करती है. पिरामिड व बाइनरी स्ट्रक्चर योजना में दो कस्टमर बाएं और दाएं बनाने का नियम लागू किया गया था. इनको डायरेक्ट बोनस, मैचिंग बोनस, फ्लैगशिप बोनस और रिवार्ड बोनस के जरिए आय दर्शाया गया था. कंपनी के लिए कस्टमर लाने वालों को पांच लाख से 250 करोड़ रुपये के टर्न ओवर, बिजनेस ट्रिप, कार, विला और फार्म हाउस जैसे बड़े-बड़े पुरस्कार देने का वादा किया गया था.
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पुलिस ने मानी संलिप्तता लेकिन पकड़ा नहीं
साइबर क्राइम पुलिस को 488 करोड़ रुपये के आर्थिक अपराध के मामले में पुलिस को सत्यजीत कुमार, कृष्ण गौर, राहुल देव रजक, आनंद पांडेय, अजीत पांडेय की तलाश ही. हालांकि साइबर क्राइम थाना में मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज है लेकिन इनमें से एक आरोपित वाराणसी के बृजइंक्लेव कालोनी में रहने वाले आनंद पांडेय ने स्थानीय अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र भी दे दिया. साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इसका विरोध किया और इसे मामले संलिप्त बताया. अदालत ने उसकी जमानत अर्जी को खारिज भी कर दिया.



