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आधी आबादी ने निकाला बेनकाब मार्च, महिला आरक्षण नहीं तो रोटी पानी बंद

आधी आबादी ने निकाला बेनकाब मार्च, महिला आरक्षण नहीं तो रोटी पानी बंद
Apr 19, 2026, 08:02 AM
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Posted By Preeti Kumari

Half the population took out an unmasked march, saying if there is no women's reservation, food and water will be stopped.


वाराणसी: उधर संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को महिला विरोधी दलों ने गिरा कर महिलाओं को नीचा दिखाया, इधर काशी में आक्रोशित महिलाओं ने महिला परिषद की ओर से महिला विरोधियों के खिलाफ बेनकाब मार्च सुभाष मन्दिर से मुंशी प्रेमचन्द स्मृति द्वार लमही तक निकाला. महिलाओं के हाथों में पोस्टर थे जिस पर लिखा था- महिला आरक्षण नहीं मिलेगा तो, होगा रोटी पानी बंद. महिलाओ ने अपने पतियों के लिए चेतावनी जारी कर दी कि महिला विरोधियों के पार्टी से किसी तरह का सम्बन्ध रखे तो होगा किचन हड़ताल. किसी छुटभैये या बड़े नेताओं को घर ले आये तो चाय पानी सब बन्द रहेगा. महिलाओं ने कहा जो महिला विरोधी है उससे सम्बन्ध किस बात का. महिलाएं इतनी आक्रोशित थीं कि उन्होंने राहुल गांधी का पुतला फूंका और राहुल गांधी से उनका इस्तीफा तक मांगती नजर आई.


परकह


कांग्रेस और सपा का चेहरा बेनकाब


बता दें, महिला परिषद का नेतृत्व कर रहीं बीएचयू की इतिहास की प्रोफेसर डॉ० मृदुला जायसवाल ने कहा कि कुछ बेशर्म नेता महिलाओं को भरी संसद में अपमानित कर हंस रहे थे. याद रहे, इतिहास दोहराता है. एक बार भरी संसद में माता द्रोपदी का भी अपमान हुआ था, तब महाभारत हुआ और नारी द्रोहियों का समूल विनाश हुआ. फिर से महाभारत होगा और इन नारी द्रोहियों को संसद और घर से भगाया जाएगा.


रकगह


मोदी जी ने अपने भाई और पिता होने का फर्ज निभाया है, लेकिन कुछ नारी द्रोहियों की वजह से वो साधारण महिलाओं को सम्मान नहीं दिला पाए, मोदी जी आप चिंता मत करिए, इस महिला आरक्षण के लिए हम सभी आपके साथ हैं. मरते दम तक आपका साथ देंगे ताकि आप महिलाओं को इज्जत दिला सकें, जिन बेशर्मों ने मेज थपथपाया है, उन्हें हम ताली बजाने लायक भी नहीं छोड़ेंगे.


जदग


विशाल भारत संस्थान की राष्ट्रीय महासचिव डॉ० अर्चना भारतवंशी ने कहा कि भरी संसद में नारी शक्ति को अपमानित करने वाले दुर्योधन और दुशासन को कोई महिला नहीं भूलेगी. हम अपमानित महसूस कर रहे हैं. एक मौका था हम लोगों के पास 33 प्रतिशत ही तो आरक्षण दे रहे थे, ये एहसान नहीं कर रहे थे, उसको भी नहीं लेने दिए. इन पापियों और अत्याचारियों को सबक सिखाने के लिए महिलाएं सड़क पर उतरेंगी और हर स्तर पर इन सभी दलों के नेताओं का व्यक्तिगत विरोध करेंगी. हमने इसको पर्सनल ले लिया है. यह महिलाओं के सम्मान का विषय है, इससे समझौता नहीं होगा. 33 प्रतिशत नहीं दिए, अब 100 प्रतिशत आउट होंगे.


नारी विरोधियों के खिलाफ घर-घर तक ड्रम बजेगा


महिला परिषद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ० नजमा परवीन ने कहा कि महिला आरक्षण बिल का जिन दलों ने विरोध किया वो नहीं चाहते हैं कि साधारण महिलाएं संसद और विधानसभा में पहुंचे. ये महिलाओं को गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं, महिलाएं इनके पीछे घूमे, ये महिलाओं का शोषण करें और पैसा लेकर टिकट बांटे. राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी सांसद बन सकती हैं, अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल सांसद बन सकती हैं तो मैं क्यों नहीं ? मैं तो इन दोनों से ज्यादा काबिल और पढ़ी लिखी हूँ, बीएचयू से पीएचडी होकर क्या मैं इन नारी विरोधियों की गुलामी करूँ ? इन नारी विरोधियों के खिलाफ घर-घर तक ड्रम बजेगा.


िुपर


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घर में घुसने पर प्रतिबंध लगेगा. महिला परिषद की पूनम श्रीवास्तव ने कहा कि पतियों ने अगर इन दलों के किसी नेता का साथ दिया तो घर में कर देंगे किचन हड़ताल. अगर महिलाओं को सम्मान दिलाना है तो इन नारी विरोधियों को संसद तक नहीं पहुंचने देना है. आधी आबादी इनका पूरा विरोध करेंगी. मार्च में कृष्णावती, रेखा, कलावती, देवती, आशा, प्रभावती, वन्दना, शालमनी, मुन्नी, ज्ञानमाला, सोमरा, कुसुम, उमा, फूलवती, पार्वती, रीता, सगीत, रीनू, उर्मिला, रीता, झुनका, मैना, इली, खुशी, उजाला, दक्षिता आदि महिलाएं मौजूद रहीं.


कुलपति ने साइबर लाइब्रेरी का किया औचक निरीक्षण, आधुनिकीकरण पर दिया जोर
कुलपति ने साइबर लाइब्रेरी का किया औचक निरीक्षण, आधुनिकीकरण पर दिया जोर
The Vice Chancellor conducted a surprise inspection of the Cyber ​​Library and stressed on modernization.वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने 17 अप्रैल 2026 को रात्रि 10:45 बजे सयाजीराव गायकवाड़ केन्द्रीय ग्रन्थालय स्थित साइबर लाइब्रेरी अध्ययन केन्द्र का औचक निरीक्षण किया. इस संबंध में उल्लेखनीय है कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की साइबर लाइब्रेरी विद्यार्थीयों के लिए दिन में 21 घंटे खुली रहती है. निरीक्षण के दौरान कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने अध्ययन केन्द्र में उपलब्ध संसाधनों, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता एवं तकनीकी सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया और उन्हें और अधिक सुदृढ़ एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर चर्चा की.इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष ने उन्हें विद्यार्थियों की अध्ययन-संबंधी आवश्यकताओं, वर्तमान व्यवस्थाओं तथा उपलब्ध सुविधाओं के बारे में विस्तार से अवगत कराया. कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि ग्रन्थालय केवल पुस्तकों का भण्डार नहीं, अपितु यह विश्वविद्यालय में अध्ययन, ज्ञान और शोध का केन्द्रबिंदु है, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रत्येक विद्यार्थी को अत्याधुनिक अध्ययन सुविधाएँ मिलनी चाहिए.Also Read: शिवाला घाट पर टला हादसा: गंगा में डूब रहे 3 श्रद्धालुओं को मल्लाहों ने बचाया, वीडियो वायरलइस क्रम में कुलपति महोदय ने साइबर लाइब्रेरी अध्ययन केन्द्र के उस भाग को जो वातानुकूलित नहीं है वहां शीघ्र ही एसी लगाए जाने की बात कही ताकि विद्यार्थियों को ग्रीष्मकाल में भी अनुकूल वातावरण में अध्ययन की सुविधा प्राप्त हो सके. इसके अतिरिक्त, कुलपति ने विश्वविद्यालय कार्य विभाग के आचार्य प्रभारी को कहा कि साइबर लाइब्रेरी अध्ययन केन्द्र के प्रथम तल को तैयार कराने और केन्द्रीय ग्रन्थालय के पुराने भवन की मरम्मत और नवीनीकरण कराए जाने की यथाशीघ्र व्यवस्था की जाए.https://www.youtube.com/watch?v=QjOstaxZcOM
शिवाला घाट पर टला हादसा: गंगा में डूब रहे 3 श्रद्धालुओं को मल्लाहों ने बचाया, वीडियो वायरल
शिवाला घाट पर टला हादसा: गंगा में डूब रहे 3 श्रद्धालुओं को मल्लाहों ने बचाया, वीडियो वायरल
Tragedy averted at Shivala Ghat: Boatmen rescue 3 devotees drowning in the Ganges; video goes viralवाराणसी: भेलूपुर थाना क्षेत्र के शिवाला घाट पर रविवार दोपहर गंगा स्नान के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दक्षिण भारत से काशी भ्रमण पर आए श्रद्धालुओं के एक समूह के तीन सदस्य अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे. घाट पर मौजूद स्थानीय मल्लाहों और जल पुलिस की त्वरित कार्रवाई से तीनों की जान बचा ली गई. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश से 15 सदस्यीय श्रद्धालुओं का दल रविवार को गंगा स्नान के लिए शिवाला घाट पहुंचा था, स्नान के दौरान अनुषा प्रिया (22) और चिन्नी पैरो (20) अचानक गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं. दोनों को बचाने के प्रयास में एस.वी. पंडा भी पानी में उतर गए, लेकिन तेज धारा और गहराई के कारण वे भी फंस गए.घाट पर मौजूद लोगों ने जब चीख-पुकार मचाई तो मौके पर तैनात जल पुलिस के दीवान श्याम सुंदर यादव और स्थानीय मल्लाह सुरेश माझी, दिलीप साहनी, भुवल साहनी और पंकज साहनी तुरंत गंगा में कूद पड़े. सभी ने मिलकर साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए डूब रहे तीनों यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. घटना के बाद घाट पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया. श्रद्धालुओं को बाहर निकालने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली, मौके पर मौजूद लोगों ने मल्लाहों और जल पुलिसकर्मियों की बहादुरी की सराहना की.हर साल होती हैं ऐसी घटनाएंगंगा किनारे स्नान के दौरान पैर फिसलने, गहरे पानी में चले जाने और धारा में बहने जैसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं. इसके बावजूद कई श्रद्धालु चेतावनी और सुरक्षा सीमाओं को नजरअंदाज कर जोखिम उठाते हैं.प्रशासन की अपीलप्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि गंगा स्नान के दौरान केवल निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में ही उतरें, गहरे पानी की ओर न जाएं और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें.काशी के मल्लाह फिर बने जीवनदातावाराणसी के घाटों पर संकट की घड़ी में मल्लाहों की बहादुरी एक बार फिर सामने आई है। यदि समय रहते स्थानीय नाविक और जल पुलिस मौके पर न पहुंचते, तो यह घटना बड़ा हादसा बन सकती थी.https://www.youtube.com/watch?v=QjOstaxZcOM
प्रो.बिहारी लाल शर्मा- परशुराम जयन्ती धर्म और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम
प्रो.बिहारी लाल शर्मा- परशुराम जयन्ती धर्म और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम
Prof. Bihari Lal Sharma - Parashuram Jayanti - a wonderful confluence of religion and moral leadershipवाराणसी: वैशाख शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जयन्ती देशभर में श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाई जा रही है. इस अवसर पर सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने सन्देश में कहा कि भगवान परशुराम का जीवन केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि समकालीन समाज के लिए एक सशक्त नैतिक-दर्शन प्रस्तुत करता है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था।कुलपति ने अपने वक्तव्य में कहा कि भगवान परशुराम, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, ज्ञान और शक्ति के अद्वितीय समन्वय के प्रतीक हैं.तप-संयम और शौर्य के माध्यम से धर्म की पुनःस्थापना महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र परशुराम ने तप, त्याग,संयम और शौर्य के माध्यम से धर्म की पुनःस्थापना का कार्य किया.कार्तवीर्य अर्जुन जैसे अत्याचारी शासकों के विरुद्ध उनका संघर्ष इस तथ्य को रेखांकित करता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव न्याय और लोककल्याण के लिए होना चाहिए. समसामयिक सन्दर्भों में हम देखते हैं कि वर्तमान युग में, जब समाज विभिन्न प्रकार की विषमताओं, नैतिक चुनौतियों और मूल्यों के संकट से जूझ रहा है, तब भगवान परशुराम का आदर्श मार्गदर्शक बनकर सामने आता है.परशुराम का जीवन हमें यह सिखाता है कि शासन-व्यवस्था और नेतृत्व का आधार नैतिकता, पारदर्शिता और जनकल्याण होना चाहिए, आज की शिक्षा-व्यवस्था में केवल ज्ञानार्जन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि चरित्र-निर्माण और आत्मानुशासन का समावेश भी अनिवार्य है. भगवान परशुराम ‘ब्राह्मतेज’ और ‘क्षात्रतेज’ के समन्वय के प्रतीक हैं, जो यह सन्देश देते हैं कि समाज में सन्तुलित विकास के लिए बौद्धिक क्षमता और साहस दोनों का होना आवश्यक है.कुलपति ने युवाओं का किया आह्वान कुलपति ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अन्याय और अधर्म के विरुद्ध सजग रहें तथा अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान बनें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में आत्मसंयम, अनुशासन और नैतिकता का महत्व और भी बढ़ गया है, जिसे अपनाकर ही एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है।पर्यावरण-संरक्षण के संदर्भ में भी भगवान परशुराम के जीवन को प्रासंगिक बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ सन्तुलित सह-अस्तित्व आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। परशुराम के जीवन में निहित यह सन्देश वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए प्रेरणादायक है.Also Read: केसरवानी वैश्य महिला नगर सभा द्वारा अक्षय तृतीया पर आयोजित सेवा कार्यक्रम, सफलतापूर्वक संपन्नवस्तुतः भगवान परशुराम की जयन्ती हमें यह संकल्प लेने का अवसर प्रदान करती है कि हम अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में धर्म, न्याय और करुणा के सिद्धान्तों का पालन करें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इसी मार्ग पर चलकर हम एक समरस, सशक्त और नैतिक समाज की स्थापना कर सकते हैं.https://www.youtube.com/watch?v=QjOstaxZcOM