Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

प्रो.बिहारी लाल शर्मा- परशुराम जयन्ती धर्म और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम

प्रो.बिहारी लाल शर्मा- परशुराम जयन्ती धर्म और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम
Apr 19, 2026, 08:57 AM
|
Posted By Preeti Kumari

Prof. Bihari Lal Sharma - Parashuram Jayanti - a wonderful confluence of religion and moral leadership


वाराणसी: वैशाख शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जयन्ती देशभर में श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाई जा रही है. इस अवसर पर सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने सन्देश में कहा कि भगवान परशुराम का जीवन केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि समकालीन समाज के लिए एक सशक्त नैतिक-दर्शन प्रस्तुत करता है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था।

कुलपति ने अपने वक्तव्य में कहा कि भगवान परशुराम, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, ज्ञान और शक्ति के अद्वितीय समन्वय के प्रतीक हैं.


र


तप-संयम और शौर्य के माध्यम से धर्म की पुनःस्थापना


महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र परशुराम ने तप, त्याग,संयम और शौर्य के माध्यम से धर्म की पुनःस्थापना का कार्य किया.कार्तवीर्य अर्जुन जैसे अत्याचारी शासकों के विरुद्ध उनका संघर्ष इस तथ्य को रेखांकित करता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव न्याय और लोककल्याण के लिए होना चाहिए. समसामयिक सन्दर्भों में हम देखते हैं कि वर्तमान युग में, जब समाज विभिन्न प्रकार की विषमताओं, नैतिक चुनौतियों और मूल्यों के संकट से जूझ रहा है, तब भगवान परशुराम का आदर्श मार्गदर्शक बनकर सामने आता है.


ु


परशुराम का जीवन हमें यह सिखाता है कि शासन-व्यवस्था और नेतृत्व का आधार नैतिकता, पारदर्शिता और जनकल्याण होना चाहिए, आज की शिक्षा-व्यवस्था में केवल ज्ञानार्जन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि चरित्र-निर्माण और आत्मानुशासन का समावेश भी अनिवार्य है. भगवान परशुराम ‘ब्राह्मतेज’ और ‘क्षात्रतेज’ के समन्वय के प्रतीक हैं, जो यह सन्देश देते हैं कि समाज में सन्तुलित विकास के लिए बौद्धिक क्षमता और साहस दोनों का होना आवश्यक है.


कुलपति ने युवाओं का किया आह्वान


कुलपति ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अन्याय और अधर्म के विरुद्ध सजग रहें तथा अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान बनें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में आत्मसंयम, अनुशासन और नैतिकता का महत्व और भी बढ़ गया है, जिसे अपनाकर ही एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है।पर्यावरण-संरक्षण के संदर्भ में भी भगवान परशुराम के जीवन को प्रासंगिक बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ सन्तुलित सह-अस्तित्व आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। परशुराम के जीवन में निहित यह सन्देश वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए प्रेरणादायक है.


ु


Also Read: केसरवानी वैश्य महिला नगर सभा द्वारा अक्षय तृतीया पर आयोजित सेवा कार्यक्रम, सफलतापूर्वक संपन्न


वस्तुतः भगवान परशुराम की जयन्ती हमें यह संकल्प लेने का अवसर प्रदान करती है कि हम अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में धर्म, न्याय और करुणा के सिद्धान्तों का पालन करें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इसी मार्ग पर चलकर हम एक समरस, सशक्त और नैतिक समाज की स्थापना कर सकते हैं.


शिवाला घाट पर टला हादसा: गंगा में डूब रहे 3 श्रद्धालुओं को मल्लाहों ने बचाया, वीडियो वायरल
शिवाला घाट पर टला हादसा: गंगा में डूब रहे 3 श्रद्धालुओं को मल्लाहों ने बचाया, वीडियो वायरल
Tragedy averted at Shivala Ghat: Boatmen rescue 3 devotees drowning in the Ganges; video goes viralवाराणसी: भेलूपुर थाना क्षेत्र के शिवाला घाट पर रविवार दोपहर गंगा स्नान के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दक्षिण भारत से काशी भ्रमण पर आए श्रद्धालुओं के एक समूह के तीन सदस्य अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे. घाट पर मौजूद स्थानीय मल्लाहों और जल पुलिस की त्वरित कार्रवाई से तीनों की जान बचा ली गई. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश से 15 सदस्यीय श्रद्धालुओं का दल रविवार को गंगा स्नान के लिए शिवाला घाट पहुंचा था, स्नान के दौरान अनुषा प्रिया (22) और चिन्नी पैरो (20) अचानक गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं. दोनों को बचाने के प्रयास में एस.वी. पंडा भी पानी में उतर गए, लेकिन तेज धारा और गहराई के कारण वे भी फंस गए.घाट पर मौजूद लोगों ने जब चीख-पुकार मचाई तो मौके पर तैनात जल पुलिस के दीवान श्याम सुंदर यादव और स्थानीय मल्लाह सुरेश माझी, दिलीप साहनी, भुवल साहनी और पंकज साहनी तुरंत गंगा में कूद पड़े. सभी ने मिलकर साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए डूब रहे तीनों यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. घटना के बाद घाट पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया. श्रद्धालुओं को बाहर निकालने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली, मौके पर मौजूद लोगों ने मल्लाहों और जल पुलिसकर्मियों की बहादुरी की सराहना की.हर साल होती हैं ऐसी घटनाएंगंगा किनारे स्नान के दौरान पैर फिसलने, गहरे पानी में चले जाने और धारा में बहने जैसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं. इसके बावजूद कई श्रद्धालु चेतावनी और सुरक्षा सीमाओं को नजरअंदाज कर जोखिम उठाते हैं.प्रशासन की अपीलप्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि गंगा स्नान के दौरान केवल निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में ही उतरें, गहरे पानी की ओर न जाएं और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें.काशी के मल्लाह फिर बने जीवनदातावाराणसी के घाटों पर संकट की घड़ी में मल्लाहों की बहादुरी एक बार फिर सामने आई है। यदि समय रहते स्थानीय नाविक और जल पुलिस मौके पर न पहुंचते, तो यह घटना बड़ा हादसा बन सकती थी.https://www.youtube.com/watch?v=QjOstaxZcOM
प्रो.बिहारी लाल शर्मा- परशुराम जयन्ती धर्म और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम
प्रो.बिहारी लाल शर्मा- परशुराम जयन्ती धर्म और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम
Prof. Bihari Lal Sharma - Parashuram Jayanti - a wonderful confluence of religion and moral leadershipवाराणसी: वैशाख शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जयन्ती देशभर में श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाई जा रही है. इस अवसर पर सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने सन्देश में कहा कि भगवान परशुराम का जीवन केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि समकालीन समाज के लिए एक सशक्त नैतिक-दर्शन प्रस्तुत करता है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था।कुलपति ने अपने वक्तव्य में कहा कि भगवान परशुराम, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, ज्ञान और शक्ति के अद्वितीय समन्वय के प्रतीक हैं.तप-संयम और शौर्य के माध्यम से धर्म की पुनःस्थापना महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र परशुराम ने तप, त्याग,संयम और शौर्य के माध्यम से धर्म की पुनःस्थापना का कार्य किया.कार्तवीर्य अर्जुन जैसे अत्याचारी शासकों के विरुद्ध उनका संघर्ष इस तथ्य को रेखांकित करता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव न्याय और लोककल्याण के लिए होना चाहिए. समसामयिक सन्दर्भों में हम देखते हैं कि वर्तमान युग में, जब समाज विभिन्न प्रकार की विषमताओं, नैतिक चुनौतियों और मूल्यों के संकट से जूझ रहा है, तब भगवान परशुराम का आदर्श मार्गदर्शक बनकर सामने आता है.परशुराम का जीवन हमें यह सिखाता है कि शासन-व्यवस्था और नेतृत्व का आधार नैतिकता, पारदर्शिता और जनकल्याण होना चाहिए, आज की शिक्षा-व्यवस्था में केवल ज्ञानार्जन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि चरित्र-निर्माण और आत्मानुशासन का समावेश भी अनिवार्य है. भगवान परशुराम ‘ब्राह्मतेज’ और ‘क्षात्रतेज’ के समन्वय के प्रतीक हैं, जो यह सन्देश देते हैं कि समाज में सन्तुलित विकास के लिए बौद्धिक क्षमता और साहस दोनों का होना आवश्यक है.कुलपति ने युवाओं का किया आह्वान कुलपति ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अन्याय और अधर्म के विरुद्ध सजग रहें तथा अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान बनें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में आत्मसंयम, अनुशासन और नैतिकता का महत्व और भी बढ़ गया है, जिसे अपनाकर ही एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है।पर्यावरण-संरक्षण के संदर्भ में भी भगवान परशुराम के जीवन को प्रासंगिक बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ सन्तुलित सह-अस्तित्व आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। परशुराम के जीवन में निहित यह सन्देश वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए प्रेरणादायक है.Also Read: केसरवानी वैश्य महिला नगर सभा द्वारा अक्षय तृतीया पर आयोजित सेवा कार्यक्रम, सफलतापूर्वक संपन्नवस्तुतः भगवान परशुराम की जयन्ती हमें यह संकल्प लेने का अवसर प्रदान करती है कि हम अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में धर्म, न्याय और करुणा के सिद्धान्तों का पालन करें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इसी मार्ग पर चलकर हम एक समरस, सशक्त और नैतिक समाज की स्थापना कर सकते हैं.https://www.youtube.com/watch?v=QjOstaxZcOM
केसरवानी वैश्य महिला नगर सभा द्वारा अक्षय तृतीया पर आयोजित सेवा कार्यक्रम, सफलतापूर्वक संपन्न
केसरवानी वैश्य महिला नगर सभा द्वारा अक्षय तृतीया पर आयोजित सेवा कार्यक्रम, सफलतापूर्वक संपन्न
The service program organized by Kesarwani Vaishya Mahila Nagar Sabha on Akshaya Tritiya was successfully completed.वाराणसी: केसरवानी वैश्य महिला नगर सभा द्वारा अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर एक भव्य सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सभा की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विभिन्न अन्नदान सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया. इस कार्यक्रम के तहत सभा की महिलाओं ने लक्सा स्थित मिशन अस्पताल के सामने राहगीरों को हर वर्ष की भांति खिचड़ी, रूह अफजा शर्बत, नींबू पानी, जलेबी ,फ्रूटी, पेठा, केला, बिस्कुट और मठ्ठी का वितरण किया। भीषण गर्मी में शर्बत और नींबू पानी पिलाकर राहगीरों को राहत प्रदान की गई। अक्षय तृतीया के पावन पर्व को सेवा-भाव से मनाना गया.इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सतरुपाजी, सलोनी जी, सुधा जी सत्यभामा जी, स्नेहलता जी, मंजू जी, अर्चना जी, सुधा केशरी, भारती जी, पल्लवी, गीता, बाॅबी,ज्योति, प्रीति, मिथिलेश, खुशबु, वर्षा,सुनीता प्रियंकाआदि केसरवानी वैश्य महिला नगर सभा की सभी महिलाओं का सराहनीय योगदान रहा.Also Read: आधी आबादी ने निकाला बेनकाब मार्च, महिला आरक्षण नहीं तो रोटी पानी बंदसेवा कार्यों को जारी रखने का संकल्पकेसरवानी वैश्य महिला नगर सभा की अध्यक्षा वंदना केसरी एवं महामंत्री सारिका केसरी ने बताया कि यह कार्यक्रम हमारी सभा की सभी महिलाओं के संयुक्त प्रयास और सहयोग का परिणाम है, सभी ने तन, मन और धन से सहयोग कर इस सेवा कार्य को सफल बनाया. इस अवसर पर सभा की महिलाओं ने एक-दूसरे को अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं दीं और भविष्य में भी ऐसे सेवा कार्यों को जारी रखने का संकल्प लिया.https://www.youtube.com/watch?v=QjOstaxZcOM