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रचा इतिहासः भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जीता वर्ल्ड कप

रचा इतिहासः भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जीता वर्ल्ड कप
Nov 03, 2025, 12:02 PM
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Posted By Preeti Kumari

भारतीय टीम ने महिला वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीत लिया है. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने अपना पहला आईसीसी का खिताब जीता, महिलाओं ने ना सिर्फ कप जीता है, बल्कि इतिहास भी रचा है. डीवाई पाटिल स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ रविवार को खेले गए फाइनल्स में 52 रन से जीत कर भारतीय टीम वर्ल्ड चैंपियन बन गई है. आपको बता दे कि इससे पहले टीम ने 2005 और 2017 में जीती थी. कपिल देव की अगुआई में भारतीय पुरुष टीम के 1983 में विश्व चैंपियन बनने के बाद देश में क्रिकेट की लोकप्रियता काफी बढ़ गई थी और इसने कई पीढ़ियों को इस खेल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया था.


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क्रिकेटर्स ने दी बधाईयां


भारत के वर्ल्ड चैंपियन बनने पर बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और अन्य क्रिकेटर - सचिन तेंदुलकर और गौतम गंभीर ने भी बधाई दे है. बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने लिखा, "हमारी महिलाएं चैंपियन हैं. हरमनप्रीत और भारतीय पूर्ण महिला क्रिकेट टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ वर्ल्ड कप फाइनल में जीत पर बधाई. खेल के इतिहास में हमारी पहली और एक ऐतिहासिक जीत. शेफाली वर्मा, दीप्ति शर्मा का शानदार प्रदर्शन."


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मजूमदार ने मैच के बाद कहा, ‘यह भारतीय क्रिकेट में ‘वाटरशेड मोमेंट (बड़ी प्रगति और बड़े सकारात्मक बदलाव का प्रतीक)’ है. पिछले तीनों मैचों में ये स्टेडियम बहुत भरा हुआ था. करोड़ों की संख्या में ऑडियंस टेलीविसिओं पर देख रहे थे. इससे कुछ दर्शक जरूर प्रेरित हुए होंगे. 1983 की विश्व कप जीत ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया था और इस जीत में भी ऐसा करने की क्षमता है. ’उन्होंने भारत के विश्व चैंपियन बनने को अविश्वसनीय करार देते हुए कहा कि उन्हें इसे आत्मसात करने में थोड़ा समय लगेगा.


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देश में पहली बार इच्छामृत्यु की मंजूरी, जानें परिजनों ने क्या कहा...
देश में पहली बार इच्छामृत्यु की मंजूरी, जानें परिजनों ने क्या कहा...
Harish Rana: भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है. कोर्ट ने 13 साल से ज़्यादा समय से कोमा में 32 साल के हरीश राणा का लाइफ़ सपोर्ट (जीवनरक्षक मशीनें) हटाने की मंज़ूरी दे दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले पर फै़सला सुनाया. जानें क्या था कोर्ट का फैसला बता दें कि, इस मामले में कोर्ट ने बड़ा दिल दिखाते हुए एम्स-दिल्ली को यह भी निर्देश दिया है कि लाइफ़ सपोर्ट हटाने के लिए एक ख़ास योजना तैयार की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज़ की गरिमा और सम्मान बना रहे.इतना ही नहीं, हरीश राणा के परिवार ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से साल 2018 के पांच जजों की पीठ के उसके फ़ैसले के आधार पर चिकित्सा सुविधाएं हटाने की मांग की थी. वहीँ, 2018 के फैसले से असाध्य रूप से बीमार मरीज़ों के लिए "पैसिव यूथेनेशिया" (इच्छामृत्यु) को क़ानूनी मान्यता दी थी.हरीश के पिता अशोक का बयान...सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पिता अशोक ने कहा- मैं माननीय न्यायाधीश का धन्यवाद करता हूं. अधिवक्ताओं और डॉक्टरों का भी आभार व्यक्त करता हूं. आज हमें वही फैसला मिला है, जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे. मेरी उम्र 62 साल है और मेरी पत्नी करीब 60 साल की है.हमने अदालत का रुख तब किया था, जब हमें एहसास हुआ कि हमारे बेटे की स्थिति असाध्य और लाइलाज है. कोई भी माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा नहीं चाहेंगे, लेकिन मजबूरी में हमें यह फैसला लेना पड़ा. हम पिछले तीन साल से इस मामले को लेकर अदालत में प्रयास कर रहे थे. अब उसे एम्स ले जाया जाएगा.ALSO READ : मौसम विभाग ने मार्च में कोहरा पड़ने की बताई वजह, बारिश के बन रहे आसारपैसिव यूथेनेशिया क्या है?पैसिव यूथेनेशिया यानी अगर कोई मरीज़ सालों साल बिस्तर पर है, कोमा में है और उसके ठीक होने की संभावना पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है और वो सिर्फ़ लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम पर ज़िंदा है तो उसका लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा सकता है.साल 2011 में 'पैसिव यूथेनेशिया' के हक़ में फैसला गौरतलब है कि, इससे पहले साल 2011 में मुंबई के केईएम अस्पताल की पूर्व नर्स अरुणा शानबाग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ये फ़ैसला सुनाया था. साल 1973 में सोहनलाल नाम के वॉर्ड बॉय ने अरुणा से बलात्कार की कोशिश की थी जिसमे उसने अरुणा का गला दबाया था और उसके बाद वह 42 साल तक कोमा में रहीं. वहीँ, साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी कि अरुणा की स्थिति को देखते हुए उन्हें इच्छा मृत्यु दी जाए. लेकिन कोर्ट ने ये अनुमति तो नहीं दी पर 'पैसिव यूथेनेशिया' के हक़ में फ़ैसला लिया.ALSO READ : संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगारदेश में कब- कब मांगी गई इच्छामृत्यु साल 2001 (बीके पिल्लई): में केरल हाईकोर्ट ने असाध्य रोग से पीड़ित पिल्लई की याचिका खारिज कर दी थी जिन्होंने इच्छामृत्यु के लिए याचिका दायर की थी.साल 2005 (मोहम्मद युनूस अंसारी): ओडिशा के व्यक्ति ने असाध्य रोग से पीड़ित चार बच्चों के लिए राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अपील की थी., लेकिन याचिका ख़ारिज कर दी गई थी.साल 2004 (वेंकटेश) : हैदराबाद के 25 वर्षीय व्यक्ति ने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के कारण इच्छामृत्यु और अंगदान की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था.साल 2005 (तारकेश्वर सिन्हा): पटना के निवासी ने कोमा में पत्नी कंचनदेवी के लिए दया मृत्यु की मांग की थी.साल 2011 ( अरुणा शानबाग): इस मामले में अरुणा 42 वर्षों तक कोमा में रहीं. नर्स अरुणा शानबाग की दोस्त ने याचिका दायर की थी. कोर्ट ने उन्हें मौत तो नहीं दी, लेकिन पैसिव यूथेनेशिया के हल में फैसला दिया.
संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगार
संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगार
वाराणसी: लंका चौराहे के पास बुधवार की रात ई-रिक्शा चालक समेत दो युवकों को लंका पुलिस ने पशुओं के मांस की तस्करी के आरोप में हिरासत में लिया. पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है. हालांकि पुलिस का कहना है कि ई रिक्‍शा पर लदी बोरियों में हड्डियां मिली हैं. इसकी जांच कराई जा रही है कि हड्डियां जानवर की हैं या किसी अन्‍य की. मामला संदिग्‍ध है इसलिए पुलिस सरगर्मी से जांच कर रही है.ई-रिक्शा से दुर्गंध महसूसदेवरिया के रहने वाले सत्यम पांडेय ने पुलिस को बताया कि वह दुर्गाकुंड के मानस नगर कालोनी में रहते हैं और फास्ट फूड का व्यापार करते हैं. रात 10 बजे के बाद वह बाइक से लंका की ओर जा रहे थे तो उन्हें एक ई-रिक्शा से बहुत दुर्गंध महसूस हुई. चालक से पूछा कि बोरे में क्या है, जो कि इतना दुर्गंध उठ रहा है. रिक्शा चालक ने जवाब दिया कि मुर्गी का चारा है.यह भी पढ़ें: योगी सरकार के शर्तनामा ने धर्मयुद्ध का मार्ग किया प्रशस्‍त- स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंदसत्यम ने पुलिस को बताया कि उन्हे विश्वास नहीं हुआ और ई-रिक्शा को रूकवाना चाहा. इस पर चालक रफ्तार तेज कर भागने लगा. इस बीच उसे लंका चौराहे के पास पकड़ा. बोरे की तलाशी ली तो पशुओं की हड्डी और मांस निकला. तभी दोनों युवकों को ई-रिक्शा समेत पकड़ा गया. इस दौरान सडक पर अफरा तफरी की स्थिति बन गई.हड्डी बरामद लंका इंस्पेक्टर राजकुमार ने बताया कि हड्डी बरामद हुई है, जिसकी जांच लैब से कराई जाएगी. दोनों युवकों ने पूछताछ में बताया कि भैंस की हड्डी है, जो कि पुरानी है, कीड़े पड़ गए थे तो उन्हें फेंकने के लिए जा रहे थे.
योगी सरकार के शर्तनामा ने धर्मयुद्ध का मार्ग किया प्रशस्‍त- स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद
योगी सरकार के शर्तनामा ने धर्मयुद्ध का मार्ग किया प्रशस्‍त- स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद
वाराणसी: योगी सरकार ने पूरा बल लगा लिया लेकिन हम लखनऊ पहुंच गए. पहले मठ से ही बाहर नहीे निकलने का प्‍लान बनाया, जब निकल गए तो रास्‍ते में रोकने का इंतजाम किया. उसमें भी सफलता नहीं मिली तो शर्तों पर सभा की अनुमति दी गई. इतना सब कुछ होने के बाद कल रात एक और नोटिस आ गया कि सभा के इंतजाम ठीक नहीं हैं. इसके बावजूद आज शंखनाद किया गया. गौ माता को राष्‍ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर शंकराचार्य स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद सरस्‍वती ने लखनऊ में सभा के दौरान उक्‍त बातें कही.सभा में उन्‍होंने बसपा सुप्रीमो मायावती और कांशीराम को लेकर कहा कि आज हम लोगों में उनकी तरह समर्पण की आवश्‍यकता है.हम प्रजा के कल्‍याण की कामना करने वाले हैं. यहां आने वाल लोगों में गौ माता के प्रति प्रेम है इसलिए यहां त‍क पहुंच सके हैं. हमें सरकारी नहीं असरकारी चाहिए. सरकारी संत से जुडेंगे तो सरकार जाने के बाद असर खत्‍म हो जाएगा. असरकारी संत जब तक जीवित रहेगा तब तक उसका असर रहेगा. न्‍याय के मार्ग से प्रजा का शासन होना चाहिए न कि अन्‍याय के मार्ग से. वेद पढने वाले बटुक लाठी के योग्‍य है. चोटी नोचने के लायक हैं. धिक्‍कार है ऐसी सरकार को जिसने ऐसा कलंकित कारनामा किया.यह भी पढ़ें: मौसम विभाग ने मार्च में कोहरा पड़ने की बताई वजह, बारिश के बन रहे आसारतमाम रुकवटों के बावजूद 11 मार्च को शीतला अष्टमी के अवसर पर आशियाना के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा पर दोपहर 2ः15 बजे से शाम पांच बजे तक कार्यक्रम का आगाज हो गया. लखनऊ शहर पहुंचते ही स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने हनुमान मंदिर पहुंचकर दर्शन कर बजरंगबली का आशीर्वाद लिया. इसके बाद कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए. हालांकि भारी भीड़ की आशंका के चलते खुफिया एजेंसियां पहले से ही सक्रिय रहीं.इसके अलावा बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई. आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थाने की पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है. बता दें कि इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए आयोजकों की ओर से करीब 4.5 लाख रुपये का शुल्क स्मारक समिति में जमा कराया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद काशी से गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शुभारम्भ किया. इसके बाद जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज, उन्नाव और नैमिषारण्य में सभाएं करते हुए लखनऊ पहुंचे.शंकराचार्य की अपील-जो लखनऊ नहीं पहुंच पाए वे अपने-अपने शहरों से ही करेंग शंखनादगौरतलब है कि माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान से रोके जाने और अपमानजनक व्यवहार के बाद शंकराचार्य ने शासन और प्रशासन के खिलाफ जंग ही छेड़ दिया. इसके बाद से ही शंकराचार्य के कार्यक्रमों और उनकी गतिविधियों की पल-पल की घटनाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है. इधर, लखनऊ पहुंचना ही उनके लिए आसान नही था, फिर भी वह पहुंच गये. लेकिन प्रशासनिक शिकंजे को देखते हुए शंकराचार्य ने अनुयायियों से की अपील की है. उन्होंने कहाकि अनुमति देर से मिलने के कारण बहुत से लोग नही पहुंच पाए. उन्होंने कहाकि जो लोग लखनऊ नहीं पहुंच पाएंगे, वे अपने-अपने शहरों या गांवों में ही गो रक्षा के लिए शंखनाद करें.प्रशासन ने सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए 26 सख्त शर्तों के साथ अनुमति दी है. शंकराचार्य ने 7 मार्च को वाराणसी से अपनी ’गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू की थी. इस दौरान जगह-जगह सभा में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम की मियाद पूरी हो गई है. लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसलिए आज लखनऊ में धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जा रहा है.काशीवासी गौभक्तों ने किया शंखनादलखनऊ में शंकराचार्य द्वारा किए जा रहे गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के समर्थन में आज सैकड़ों काशीवासी गौभक्तों असि घाट पर सामूहिक रूप से शंखनाद किया. इस दौरान स्वप्रेरणा से गौमाता भी स्वत: शंखनाद स्थल पर पहुंच कर गौभक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया. शंखनाद स्थल पर उपस्थित गौभक्तों को संबोधित करते हुए मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा कि सनातनधर्म की आत्मा गौमाता के प्राणों की रक्षा हेतु सचल शिव शंकराचार्य राष्ट्रव्यापी आंदोलन चला रहे हैं. जिसका व्यापक असर पूरे राष्ट्र पर पड़ रहा है और 100 करोड़ सनातनी जनता शंकराचार्य के इस गौप्रतिष्ठा आंदोलन से मजबूती से जुड़ रही है.शंखनाद कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सर्वश्री महामृत्युंजय मंदिर के महंत किशन दक्षिण, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, राकेश पाण्डेय, सरदार सतनाम सिंह,अरुण सोनी,सुनील श्रीवास्तव,प्रमोद वर्मा,पं सदानंद तिवारी,संतोष चौरसिया,पुलक त्रिपाठी,हिमांशु सिंह,किशन यादव,के.के. द्विवेदी,शशिकांत यादव,श्रीश तिवारी,सुभाष सिंह,मिर्ची दुबे,आशीष पाण्डेय,प्रदीप पाण्डेय सहित सैकड़ों लोग शामिल थे.