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IIA एक्सपो: कभी लगा था पिछड़े जिले का ठप्‍पा, अब निवेश संग उद्योग और व्‍यापार को मिल रही रफ्तार

IIA एक्सपो: कभी लगा था पिछड़े जिले का ठप्‍पा, अब निवेश संग उद्योग और व्‍यापार को मिल रही रफ्तार
Dec 19, 2025, 07:20 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - पूर्वांचल का पिछड़ा जिला कहा जाने वाला वाराणसी अब निवेश, उद्योग और व्‍यापार का अंतरराष्‍ट्रीय हब बन गया है. यहां कभी उद्योगपति निवेश से कतराते थे, लेकिन आज काशी में निवेश के साथ उद्योग और व्यापार को रफ्तार मिल रही है. ये बातें राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने इंडियन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन की ओर से नदेसर स्थित एक होटल में आयोजित इंटरनेशनल टूरिज़्म एंड हॉस्पिटैलिटी एक्सपो में कही. कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने प्रदर्शनी का फीता काटकर किया. राष्ट्रीय महासचिव दीपक कुमार बजाज ने कहा कि इस एक्सपो का मुख्य उद्देश्य वैश्विक निवेश की संभावनाओं को साकार करना, नए उद्योगों को बढ़ावा देना और युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करना है. यह एक्सपो विकसित भारत–2047 के संकल्प में मील का पत्थर साबित होगा.


इन्वेस्ट यूपी एवं स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन सत्र


VARANASI


स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ, सेवानिवृत्त आईएएस मनोज कुमार सिंह ने कहा कि आईआईए द्वारा दिए गए कई सुझावों को सरकार ने अमल में लाया है, जिससे प्रदेश के विकास को पंख लगे हैं. आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने कहा कि काशी में अंतरराष्ट्रीय एक्सपो इसलिए लगाया गया क्योंकि प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण यह विश्व पटल पर पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है. वर्ष 2024 में गोवा से अधिक पर्यटक काशी पहुंचे.

वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कहा कि इस एक्सपो के माध्यम से पर्यटन और कारोबार में जबरदस्त वृद्धि होगी. खासकर होटल, रिसॉर्ट, ट्रैवल और क्रूज ऑपरेटर, इवेंट मैनेजर, खाद्य-पेय ब्रांड, लॉजिस्टिक्स समेत कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. इसका उद्देश्य स्टार्ट-अप्स को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, निवेशकों, टूर ऑपरेटरों और एग्रीगेटर्स से जोड़ना, संयुक्त उद्यम, फ्रेंचाइजी, गंतव्य विकास परियोजनाओं और पीपीपी अवसरों के माध्यम से निवेश को बढ़ाना है.


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निवेश और निर्यात का केंद्र बनकर उभरा उत्तर प्रदेश


राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि एक्सपो में 85 से अधिक प्रदर्शकों द्वारा भारतीय उत्पादों, कला तथा होटल इंडस्ट्री में उपयोग होने वाले उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं. उत्तर प्रदेश पूरे भारत में निवेश, निर्यात और आयात का केंद्र बनकर उभरा है. व्यापार सुगमता, निवेश संभावनाओं तथा पर्यटन एवं आतिथ्य परियोजनाओं के लिए प्रदेश को एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है.


काशी पूरे देश में विकास का मॉडल: मेयर


कार्यक्रम में मेयर अशोक तिवारी ने कहा कि 2014 से पहले पूर्वांचल को मिनी चंबल कहा जाता था. आज भाजपा सरकार में उत्तर प्रदेश में तेजी से विकास हुआ है. विश्व के कई देशों से निवेशक यहां निवेश कर चुके हैं. पर्यटन के क्षेत्र में काशी पूरे देश की कनेक्टिविटी बनी हुई है. काशी पूरे देश में विकास का मॉडल बना हुआ है.

इस दौरान अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. ए.के. त्यागी, आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर.के. चौधरी, महासचिव दीपक कुमार बजाज, कोषाध्यक्ष अवधेश अग्रवाल, एक्सपो संयोजक उमाशंकर अग्रवाल, मेयर अशोक तिवारी, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, पद्मश्री डॉ. रजनीकांत, नेशनल टूरिज्म कमेटी के अध्यक्ष राहुल मेहता मौजूद रहे। कार्यक्रम में 6 देशों से आए नीति-निर्माता, राजनयिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, प्रदर्शक तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल रहे.

पंचकोशी यात्रा की तैयारियों का नगर आयुक्त ने लिया जायजा...
पंचकोशी यात्रा की तैयारियों का नगर आयुक्त ने लिया जायजा...
वाराणसी: नगर निगम द्वारा पंचकोशी यात्रा की तैयारियों को लेकर व्यवस्थाएं तेज कर दी गई हैं. सोमवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शिवपुर स्थित पांचो पांडव मंदिर, धर्मशाला एवं पंचकोशी यात्रा मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जायजा लिया.निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पंचकोशी यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. यात्रा मार्ग एवं आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ सुलभ शौचालयों की नियमित सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए.भीषण गर्मी को देखते हुए धर्मशालाओं में ठहरने वाले यात्रियों के लिए कूलर और पंखों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया. नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि कूलरों में नियमित रूप से पानी भरने की व्यवस्था भी बनी रहे, ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके.ALSO READ:राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...रात्रि में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पंचकोशी मार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु पर्याप्त संख्या में पानी के टैंकर लगाने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग करने के आदेश भी संबंधित विभागों को दिए.नगर निगम प्रशासन ने कहा कि पंचकोशी यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा किया जा रहा है.
राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...
राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...
नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. कला, चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला.भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान वायलिन वादक डॉ. एन. राजम् को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. “सिंगिंग वायलिन” के नाम से प्रसिद्ध डॉ. राजम् ने हिंदुस्तानी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लंबे समय तक प्रोफेसर और डीन के रूप में सेवाएं दीं.संक्रामक रोगों विशेषकर काला- अजार के उपचार और अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रो. श्याम सुन्दर को पद्म श्री से सम्मानित किया गया. बीएचयू में उनके नेतृत्व में काला- अजार रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और उनके शोध कार्यों को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सराहा.पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रो. बुद्ध रश्मि मणि को भी पद्म श्री प्रदान किया गया.अयोध्या, सारनाथ और कपिलवस्तु सहित कई ऐतिहासिक स्थलों पर उनके शोध और उत्खनन कार्यों ने भारतीय इतिहास अध्ययन को नई दिशा दी.ALSO READ:धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवालपद्म पुरस्कारों में बीएचयू से जुड़ी हस्तियों की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय परिवार और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है. शिक्षा, शोध और संस्कृति के क्षेत्र में बीएचयू की मजबूत परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है.
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
BHU doctor fasts to protest 'distortion' of religious identity, raises questions about faithवाराणसी: धर्म, आस्था और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहप्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार ने वाराणसी में उपवास शुरू किया है. सर्किट हाउस के समीप चल रहे इस उपवास के माध्यम से उन्होंने धार्मिक प्रतीकों, नामों और स्वरूपों के कथित “विकृतिकरण” तथा आध्यात्मिक भ्रम फैलाने के खिलाफ जनजागरण की जरूरत बताई.डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में भोजन, आचरण और आध्यात्मिक शुद्धता का विशेष महत्व बताया गया है. उनके अनुसार दूषित विचारों और आचरण का प्रभाव समाज की चेतना पर पड़ता है, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन भी प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि जब धार्मिक संस्थाओं और परंपराओं में आस्था से इतर विचारधारा का प्रभाव बढ़ता है, तब श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा होती है.उन्होंने दक्षिण भारत के कुछ राज्यों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण मंदिर व्यवस्थाओं में ऐसे लोगों को स्थान मिला, जिनकी धार्मिक आस्था पर सवाल उठते रहे हैं. डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि इससे आम श्रद्धालु स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है. उन्होंने धार्मिक और पौराणिक पात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म और अधर्म, आदर्श और विरोधी प्रवृत्तियों के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है. उनका कहना है कि यदि इन भेदों को जानबूझकर धुंधला किया जाता है तो समाज की सांस्कृतिक चेतना प्रभावित होती है और नई पीढ़ी भ्रमित हो सकती है.Also Read: नमोघाट हत्‍याकांड पर सामने आया मंत्री रवींद्र जायसवाल का बयान, 5 लाख मुआवजे का एलानतमिलनाडु और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक राजनीति का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाओं और पात्रों की व्याख्या को राजनीतिक या वैचारिक लाभ के लिए बदले जाने के प्रयास हुए हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम को धर्म स्थापना का प्रतीक माना जाता है, जबकि महाभारत के पात्र कर्ण की भूमिका अलग रही है. समाज में कई बार नायक और खलनायक की छवि को मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे सही और गलत की समझ कमजोर होती है. डॉ. सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि उनका उपवास किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से है.