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आईआईटी बीएचयू में काशी यात्रा की धूम, नृत्‍य, जादूगरी, इल्‍यूजन शो का रोमांच

आईआईटी बीएचयू में काशी यात्रा की धूम, नृत्‍य, जादूगरी, इल्‍यूजन शो का रोमांच
Jan 16, 2026, 09:08 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : आईआईटी बीएचयू में सामाजिक-सांस्कृतिक महोत्सव काशीयात्रा 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ. गुरुवार की देर शाम स्वतंत्रता भवन में धार्मिक और सांस्‍कृतिक मुखौटा पहने कलाकारों ने मां काली का तांडव और देव नृत्य किया तो वहीं अंधेरे में लेजर लाइट से जादू-करतब के इल्यूजन शो ने दर्शकों के रोमांच और जोश का स्‍तर ऊपर कर दिया. स्पिक मैके के तत्वावधान में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित तारापदा रजक ने पश्चिम बंगाल के पारंपरिक पुरुलिया छऊ नृत्य की भावपूर्ण और रोमांचक प्रस्तुति दी.

ये कार्यक्रम 16, 17 और 18 जनवरी तक होगा. इंटरनेशनल कार्निवल होगा. इसमें प्रसिद्ध ग्रैफिटी कलाकार डॉ. टॉय और चर्चित सितार वादक सेप्पे सितार पर प्रस्तुति देंगे. 17 जनवरी को बॉलीवुड गायक मोहित चौहान और 18 को सूफी गायक-गीतकार बिस्मिल अपनी डीजे नाइट की दमदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर करेंगे.


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संतूर वादक पंडित तरुण भट्टाचार्य ने कई शास्त्रीय धुनों को ऐसा छेड़ा कि तकनीक के छात्र और छात्राओं में संगीत कला प्रेम झलकने लगा. राष्ट्रीय तानसेन पुरस्कार (2025) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पंडित तरुण भट्टाचार्य की प्रस्तुति ने सभागार में बैठे दर्शकों भारतीयता के सुरों में पिरो दिया.

IIT BHU आईआईटी बीएचयू में काशी यात्रा की धूम, नृत्‍य, जादूगरी, इल्‍यूजन शो का रोमांच

इल्यूजनिस्ट राहुल खरबंदा ने दर्शकों को आधुनिकता और चकाचौंध भरी दुनिया इल्यूजन शो में प्रवेश कराया. विजुअल इफेक्ट, लेजर और रोमांचक जादुई करतब ने पूरे सभागार को हैरानी में डाल दिया. पलक झपकते ही राहुल के हाथ से पकड़ गया सामान आंखों से ओझल होता रहा और दर्शक तालियां बजाते रहे. कभी 100 रुपये के नोट को 200 रुपये का बना दिया. लाल रुमाल को अंडा बना दिया और ग्लास में फोड़ के भी दिखाया.


काशीयात्रा में शामिल हैं 1800 से ज्यादा टेक्नोसेवी


काशीयात्रा का औपचारिक उद्घाटन आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने किया. प्रो. पात्रा ने छात्रों से कहा कि काशीयात्रा केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि छात्रों में सृजनात्मकता, नवाचार और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ाने वाला एक सशक्त मंच है. प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि काशीयात्रा 2026 में देश के कई शिक्षण संस्थानों से 1800 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं.

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नृत्य, क्विज, फैशन, मिराज समेत होंगे 15 से ज्यादा कार्यक्रम


महोत्सव में तीन दिनों तक अभिनय, बंदिश, क्रॉसविंड्स, एनक्विजिटा, मिराज, नटराज, संवाद, तूलिका और जायका जैसी प्रतियोगिताएं होंगी. इनमें नाट्य, संगीत, नृत्य, क्विज़, फैशन, साहित्यिक कला, ललित कला एवं पाक-कला शामिल हैं. ये कार्यक्रम टेक्नो पैवेलियन, संस्थान परिसर, राजपुताना ग्राउंड, लेक्चर थिएटर (एलटी-3 और एलटी-4) और गोपाल त्रिपाठी ऑडिटोरियम में आयोजित होंगे.

ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
वाराणसी। बालू परिवहन में ओवरलोडिंग और बिना आवश्यक वैध दस्तावेजों के वाहनों के संचालन को लेकर बनारस ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रशासन और खनन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंपकर ओवरलोड एवं बिना आवश्यक आईएसटीपी/वैध कागजात के बालू परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने की मांग की।एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले प्रशासन की ओर से ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया और कार्रवाई की गई। अभियान का असर यह रहा कि कुछ समय तक ओवरलोड बालू वाहनों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित रहा, लेकिन कार्रवाई की गति धीमी पड़ने के बाद एक बार फिर ऐसे वाहनों के संचालन की शिकायतें सामने आने लगी हैं।ओवरलोडिंग से वैध ट्रक ऑपरेटरों को नुकसानएसोसिएशन के संरक्षक विजय सिंह ने कहा कि ओवरलोडिंग का सीधा असर निर्धारित क्षमता के अनुसार वाहन चलाने वाले ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है। वैध तरीके से क्षमता के अनुरूप बालू परिवहन करने वाले वाहन संचालकों की लागत अधिक आती है, जबकि ओवरलोड वाहन कम लागत में अधिक माल पहुंचाकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इससे नियमों का पालन करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है।एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व की तरह नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए तथा बालू लदे प्रत्येक वाहन के भार और दस्तावेजों की जांच सुनिश्चित की जाए।सड़क क्षति और राजस्व नुकसान की भी जताई आशंकाट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने कहा कि ओवरलोडिंग का असर केवल परिवहन कारोबार तक सीमित नहीं है। क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों से सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वहीं, नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बालू मंडी से जुड़े व्यापारियों ने ओवरलोडिंग के मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद प्रशासन और खनन विभाग से प्रभावी कार्रवाई के लिए पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया।ALSO READ: BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरीमिलीभगत के आरोपों की जांच की मांगएसोसिएशन से जुड़े कुछ ऑपरेटरों ने ओवरलोड वाहनों को कथित रूप से पास कराने में बालू माफिया और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरोप गलत पाए जाएं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह, संरक्षक विजय सिंह, उपाध्यक्ष कुंवर सिंह, राकेश सिंह, नीतेश सिंह, महामंत्री आनंद भूषण सिंह, उपमहामंत्री शुभांशु सिंह, मंत्री मुकुंद सिंह, धर्मेंद्र यादव, जितेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी अजित कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अनुराग सिंह (गुड्डू सिंह), सचिव दीपू यादव समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरी
BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरी
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय भवन में रविवार को गीता समिति की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘रविवासरीय गीता प्रवचन’ का सत्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन प्रत्येक रविवार की तरह सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक किया जाएगा और पूरे शैक्षणिक सत्र में इसकी निरंतरता बनी रहेगी।कार्यक्रम की शुरुआत वेद विभाग के विद्यार्थियों के वैदिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद संगीत एवं मंच कला संकाय के विद्यार्थियों ने कुलगीत एवं भजन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के उस विचार को प्रमुखता से रेखांकित किया गया, जिसमें शिक्षा के उद्देश्य को केवल बौद्धिक विकास तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों में नैतिक और आध्यात्मिक चेतना के विकास पर जोर दिया गया था।इस अवसर पर प्रो. हृदयरंजन शर्मा ने कहा कि महामना मालवीय का विश्वास था कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक जीवन-मूल्यों और सिद्धांतों से उनका परिचय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने विश्वविद्यालय में रविवासरीय गीता प्रवचन की परंपरा शुरू की थी।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए BHU के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नवप्रवेशी विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में भी गीता से संबंधित आयोजन शामिल किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों में प्रारंभ से ही भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति जुड़ाव विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि गीता के माध्यम से मन को संस्कारित करने और जीवन-मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास जरूरी है।मालवीय भवन के मानित निदेशक प्रो. पतंजलि मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती भौतिक प्रतिस्पर्धा और तनाव के कारण व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में गीता के संदेश और जीवन-दर्शन की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।गीता समिति के सचिव प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा का अमूल्य ग्रंथ है, जो मनुष्य को कर्तव्य, आत्मसंयम और सदाचार का मार्ग दिखाता है। उन्होंने बताया कि महामना ने विश्वविद्यालय परिवार से प्रत्येक रविवार डेढ़ घंटे का ‘समय-दान’ गीता प्रवचन में शामिल होने के लिए अपनी गुरु-दक्षिणा के रूप में देने की अपील की थी।अहं त्यागकर विनम्रता और आत्मसंयम से जीवन जीने का संदेशकार्यक्रम के मुख्य अतिथि सद्गुरु माधव प्रियदास जी, अध्यक्ष, स्वामीनारायण गुरुकुल, गुजरात, अहमदाबाद ने गीता के अध्ययन, मनन और उसके अनुसार जीवन जीने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अहं की भावना का त्याग कर विनम्रता और आत्मसंयम के साथ जीवन जीने का सुझाव दिया।उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बाहरी ज्ञान से परिचित कराना नहीं, बल्कि व्यक्ति को उस ज्ञान को ग्रहण करने योग्य बनाना भी है। भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार त्रिविक्रम ने तीन पगों में समस्त ब्रह्मांड को नाप लिया, उसी प्रकार गीता जैसे विराट विषय को सीमित शब्दों में समेटना कठिन है। उन्होंने कहा कि किसी विषय को समझे बिना उसका सही विवेचन संभव नहीं है, इसलिए गीता के संदेश को समझने और जीवन में उतारने की आवश्यकता है।कार्यक्रम का संचालन भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शारदिंदु कुमार त्रिपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन गीता समिति की संयुक्त सचिव प्रो. सुमन जैन ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गंभीर हादसे के बाद BHU छात्र के इलाज में देरी का आरोप, छात्रों ने की निष्पक्ष जांच की मांग....
गंभीर हादसे के बाद BHU छात्र के इलाज में देरी का आरोप, छात्रों ने की निष्पक्ष जांच की मांग....
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के बिरला ‘C’ छात्रावास के एमए फ्रेंच द्वितीय वर्ष के छात्र राम के साथ शनिवार देर रात गंभीर दुर्घटना हो गई। घायल अवस्था में छात्र को तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। छात्रावास के विद्यार्थियों ने ट्रॉमा सेंटर में उपचार में कथित देरी और अस्पताल कर्मियों व प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।छात्रों के मुताबिक, दुर्घटना के बाद राम को रात करीब 12 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें तत्काल आवश्यक प्राथमिक उपचार नहीं मिला। आरोप है कि उनके गंभीर घाव पर कई घंटों तक टांके नहीं लगाए गए और उपचार की प्रक्रिया में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई।सुबह घायल छात्र का हाल जानने और उपचार में मदद के लिए बिरला ‘C’ छात्रावास के कई छात्र ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल कर्मियों से तत्काल इलाज शुरू करने का आग्रह किया, लेकिन इस दौरान कुछ सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। छात्रों ने दावा किया कि उन्हें धमकी भरे लहजे में कहा गया कि इलाज नहीं करेंगे, जो करना है कर लें।छात्रों के अनुसार, दुर्घटना के करीब 12 घंटे बाद लगातार मांग और चिकित्सकों से हस्तक्षेप की अपील के बाद राम का उपचार शुरू हुआ। बाद में उसके गंभीर घाव पर 29 टांके लगाए गए। छात्रों ने उपचार में हुई इस कथित देरी को गंभीर मामला बताते हुए पूरी मेडिकल टाइमलाइन और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर भी लगाए आरोपमामले की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल अधिकारी मौके पर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि स्थिति को शांत करने और उनकी बात सुनने के बजाय अधिकारियों ने उनसे कथित तौर पर अभद्र भाषा में बात की। छात्रों ने धक्का-मुक्की और हाथापाई जैसी स्थिति उत्पन्न होने का भी आरोप लगाया है।छात्रों का यह भी दावा है कि घायल छात्र राम के लिए कथित रूप से असंवेदनशील भाषा का इस्तेमाल किया गया और उसे ‘लावारिस’ कहकर संबोधित किया गया। इसको लेकर छात्रों ने नाराजगी जताई है।छात्रों के मुताबिक, जब उन्होंने उपचार में देरी और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों से सवाल किए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी दौरान पुलिस को मौके पर बुलाया गया। छात्रों का आरोप है कि बाद में घटना को इस तरह पेश करने का प्रयास किया गया कि छात्रों ने प्रॉक्टर के साथ मारपीट की। छात्र समुदाय ने इस आरोप को गलत बताते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।उपचार पूरा होने से पहले डिस्चार्ज करने का आरोपछात्रों ने आरोप लगाया कि घायल राम को उचित उपचार पूरा हुए बिना डिस्चार्ज करने का प्रयास भी किया गया। विरोध के बाद उन्हें दोबारा भर्ती किया गया। छात्रों के अनुसार, उन्हें बताया गया कि करीब तीन बजे चिकित्सक उपलब्ध होंगे।प्रशासनिक वार्डन ने संभाली स्थितिघटना के दौरान तनाव बढ़ने पर प्रशासनिक वार्डन मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और पूरे मामले को अपने संज्ञान में लिया। इसके बाद छात्रों को छात्रावास वापस भेजा गया, ताकि अस्पताल परिसर में तनाव कम हो और घायल छात्र के उपचार पर ध्यान दिया जा सके।छात्र समुदाय ने प्रशासनिक वार्डन की पहल को सकारात्मक कदम बताते हुए मामले में आगे निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।ALSO READ: रामनगर पुलिस ने साइबर ठगों के चंगुल से वापस कराए 97 हजार रुपयेछात्रों की प्रमुख मांगेंछात्रों ने राम के उपचार में हुई कथित देरी और लापरवाही की स्वतंत्र जांच, दुर्घटना से उपचार शुरू होने तक की मेडिकल टाइमलाइन व अस्पताल रिकॉर्ड की जांच, अस्पताल कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के कथित दुर्व्यवहार की जांच तथा प्रॉक्टोरियल अधिकारियों और छात्रों के बीच हुई कथित धक्का-मुक्की की निष्पक्ष जांच की मांग की है।इसके अलावा छात्रों ने घायल विद्यार्थी को उसकी स्थिति के अनुरूप पूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और भविष्य में किसी भी घायल छात्र को समय पर प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि घायल विद्यार्थी के उचित उपचार और सम्मान की रक्षा करना है।