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स्वच्छता की सारथी बनीं काशी की बेटियां, 82 महिलाएं हुई सम्मानित

स्वच्छता की सारथी बनीं काशी की बेटियां, 82 महिलाएं  हुई सम्मानित
Mar 13, 2026, 12:50 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में स्वच्छ भारत मिशन (नगरीय) के तहत शुक्रवार को नगर निगम सभागार में विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. नारी लीड्स स्वच्छता (8 से 14 मार्च) अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में होम कंपोस्टिंग और स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 82 महिलाओं को सम्मानित किया गया.


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बड़ी संख्या में गृहणियां रहीं शामिल


​सम्मानित होने वाली महिलाओं में महिला सफाई निरीक्षक, महिला सफाई कर्मचारी और बड़ी संख्या में गृहणियां शामिल रहीं. इन महिलाओं ने अपने घरों और कार्यक्षेत्र में गीले कचरे से खाद बनाने (होम कंपोस्टिंग) की तकनीक को न केवल अपनाया, बल्कि अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया. इन महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए अपर नगर आयुक्त सविता यादव ने कहा कि स्वच्छता के अभियान में महिलाओं की भागीदारी सबसे अहम है. जब एक महिला जागरूक होती है, तो पूरा परिवार और समाज जागरूक होता है.


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अपर नगर आयुक्त ने बताया कि शहर को डंपिंग यार्ड के बोझ से बचाने के लिए जीरो वेस्ट मॉडल जरूरी है. होम कंपोस्टिंग इसमें मील का पत्थर साबित हो रही है. संचालन सरिता तिवारी व धन्यवाद ज्ञापन डॉक्यूमेंट मैनेजर प्रीति सिंह ने किया.


घर पर ऐसे तैयार करें खाद


​ इस अवसर पर अपर नगर आयुक्त ने महिलाओं को होम कंपोस्टिंग के सरल तरीके भी साझा किया. उन्होंने बताया कि खाद बनाने के लिए एक पुराने गमले या बाल्टी में हवा के लिए छोटे छेद करें. नीचे सूखी पत्तियां या टहनियां (ब्राउन्स) रखें, फिर उसके ऊपर रसोई का गीला कचरा (ग्रीन्स) डालें. कचरे को हल्का नम रखें और सप्ताह में एक बार पलटें. 2-3 महीने में बेहतरीन जैविक खाद तैयार हो जाएगी.

ग्रीन वाराणसी कॉन्क्लेव में विरासत को संजोने के साथ ही सतत भविष्य के निर्माण पर होगा मंथन...
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वाराणसी : शहर में व‍िरासत सहेजने और सतत भविष्‍य के ल‍िए नए स‍िरे से प्रयास के क्रम में ग्रीन वाराणसी कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन आगामी सात अगस्‍त को क‍िया जा रहा है. इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) "ग्रीन वाराणसी: विरासत को बचाना, टिकाऊ भविष्य बनाना" थीम के साथ ग्रीन वाराणसी कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन कर रहा है.यह कॉन्क्लेव नीति-निर्माताओं, उद्योग के नेताओं, डेवलपर्स, आर्किटेक्ट्स, हॉस्पिटैलिटी से जुड़े व्यक्तियों और सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य वाराणसी को एक मॉडल ग्रीन सिटी में परिवर्तित करने के तरीकों पर चर्चा करना है, साथ ही शहर की समृद्ध सांस्कृतिक और आर्किटेक्चरल विरासत को सुरक्षित रखना भी है. इस कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी वाराणसी की ग्रीन सिटी पहल को साकार करने के लिए अपने विचार साझा करेंगे. IGBC, जो कि Confederation of Indian Industry का हिस्सा है, भारत में ग्रीन बिल्डिंग मूवमेंट का नेतृत्व करता है और ग्रीन सर्टिफ‍िकेशन के लिए प्रमुख संस्था है.यह कॉन्क्लेव न केवल वाराणसी के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा कि कैसे एक शहर अपनी विरासत को संरक्षित करते हुए टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है. कॉन्क्लेव में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ अपने अनुभव और ज्ञान साझा करेंगे. इसके अलावा, वाराणसी की विशेषताओं और चुनौतियों पर भी चर्चा की जाएगी. यह आयोजन न केवल वाराणसी के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह टिकाऊ विकास के सिद्धांतों को लागू करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है.ALSO READ : वाराणसी में डीआरएम कार्यालय के पास ट्रेन चालकों ने किया धरना प्रदर्शन, जताया आक्रोश...इस कॉन्क्लेव के माध्यम से, IGBC और अन्य भागीदार मिलकर वाराणसी को एक ऐसा शहर बनाने का प्रयास करेंगे, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल हो, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी संजोए रखे. यह आयोजन वाराणसी के लिए एक नई दिशा प्रदान करेगा और इसे एक मॉडल ग्रीन सिटी के रूप में स्थापित करेगा. ग्रीन वाराणसी कॉन्क्लेव 2026 एक महत्वपूर्ण मंच होगा, जहां विचारों का आदान-प्रदान होगा और वाराणसी के विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.
वाराणसी में डीआरएम कार्यालय के पास ट्रेन चालकों ने किया धरना प्रदर्शन, जताया आक्रोश...
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वाराणसी : माल गाड़ियों में पुनः ट्रेन मैनेजर की ड्यूटी लगाने सहित अन्य छह सूत्रीय मांगों को लेकर ट्रेन चालकों ने गुरुवार को लहरतारा स्थित पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधन कार्यालय के समक्ष धरना दिया. ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित गेट मिटिंग के दौरान रेलकर्मियों ने अपनी आवाज बुलंद की.इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि विगत एक वर्ष से सामान्य परिस्थितियों में भी बिना ट्रेन मैनेजर के माल गाड़ियों का संचालन किया जा रहा है. इस असुरक्षित व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाकर ट्रेन मैनेजर के साथ सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जाए.प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में गाड़ियों की संख्या बढ़ गई है, इसके सापेक्ष रिक्त पदों पर अविलंब भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए. रेलकर्मियों ने नारेबाजी करते हुए रेलवे प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया. प्रदर्शन में आल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष लालजी यादव एवं मंडल मंत्री केपी यादव सहित अन्य रेलकर्मी मौजूद रहे. प्रदर्शन के दौरान, रेलकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई और रेलवे प्रशासन से उचित कार्रवाई की अपेक्षा की. उन्होंने कहा कि बिना ट्रेन मैनेजर के माल गाड़ियों का संचालन न केवल असुरक्षित है, बल्कि यह रेलकर्मियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा उत्पन्न करता है. वक्ताओं ने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष से यह स्थिति बनी हुई है, जिससे न केवल रेलकर्मियों को बल्कि यात्रियों को भी खतरा हो सकता है.ALSO READ : निर्जला एकादशी पर काशी में बही भक्ति की धारा, कलश यात्रा निकालकर बाबा का जलाभिषेक...रेलकर्मियों ने मांग की कि रेलवे प्रशासन को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और तत्काल कदम उठाने चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे. प्रदर्शन के दौरान, रेलकर्मियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए नारेबाजी की और अपनी आवाज को मजबूती से उठाया.
निर्जला एकादशी पर काशी में बही भक्ति की धारा, कलश यात्रा निकालकर बाबा का जलाभिषेक...
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वाराणसी : निर्जला एकादशी के अवसर पर गुरुवार की सुबह काशी में कलश यात्रा निकाली गई. बाबा विश्वनाथ का 1008 कलशों से जलाभिषेक किया गया. बाबा विश्वनाथ के भक्त उनके धाम के लिए राजेंद्र प्रसाद घाट से गंगाजल लेकर "हर-हर महादेव" का उद्घोष करते हुए निकले. धाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया. पूरे आयोजन के दौरान शिवभक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला. यात्रा में झेलम, चिनाव, रावी, गोदावरी, व्यास के अलावा काशी, हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगाजल से पूरित 11 रजत कलश लेकर भक्तगण सबसे आगे चलते दिखे.इनके साथ श्रद्धालु भक्ति भाव से आगे बढ़ते रहे. श्री काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति द्वारा यह परंपरा वर्ष 1998 में शुरू की गई थी. यह कलश यात्रा कुल 2 किलोमीटर लंबी रही, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती के स्वरूप में कलाकार भी शामिल हुए. उन्होंने पूरे रास्ते भक्ति गीतों के बीच जमकर नृत्य किया. काशी के विभिन्न इलाकों से महिलाएं पीली साड़ी पहनकर इस यात्रा में शामिल होने पहुंचीं. मिट्टी के कलशों में गंगाजल भरा गया और फिर बाबा विश्वनाथ को अर्पित करने के लिए निर्जला व्रत रखकर महिलाएं इस यात्रा में शामिल हुईं.भक्ति का भावसनातन धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है. इस दिन सनातनी पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए कठिन व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि इस दिन बाबा को पवित्र नदियों का जल अर्पित किया जाए, तो वे अत्यंत शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों को भीषण गर्मी से राहत प्रदान करते हैं. इस व्रत में सूर्योदय से पहले उठना जरूरी होता है. फिर तीर्थ स्नान करने का विधान है. ऐसा न कर पाएं तो पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे और एक चुटकी तिल मिलाकर नहाते हैं.ALSO READ : अग्निकांड के बाद सख्‍ती : वाराणसी में 35 कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी सील, 20 को नोटिस...फिर व्रत करने का संकल्प लिया जाता है. इसके बाद उगते हुए सूरज को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत होती है. एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल नहीं पिया जाता और भोजन भी नहीं किया जाता है.