IITBHU ने बनाया बायो-कन्वर्टर डस्टबिन, स्मार्ट सिटी के अंतर्गत घरों तक पहुंचाने की योजना...

वाराणसी : आईआईटी बीएचयू के जैव रासायनिक अभियंत्रिकी विभाग ने एक विशेष बायो-कन्वर्टर डस्टबिन विकसित किया है, जो घरों से निकलने वाले किचन वेस्ट को मात्र 30 दिनों में जैविक खाद में बदल देता है. वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक सुरेश ढोबले ने बताया कि बड़े स्तर पर कचरे को खाद में बदलने वाले संयंत्र पहले भी बनाए गए हैं, लेकिन घरेलू उपयोग के लिए इस प्रकार का माइक्रो-लेवल समाधान पहली बार सफलतापूर्वक विकसित किया गया है.
शहर में हर रोज लगभग 600 से 1000 मीट्रिक टन (MT) कचरा (म्युनिसिपल सालिड वेस्ट) निकलता है. इस कुल कचरे का लगभग 40% से 50% हिस्सा (यानी करीब 250 से 400 मीट्रिक टन) गीला और किचन वेस्ट (सब्जी, फलों के छिलके और बचा हुआ खाना) होता है. इसे घरों से लेना और निस्तारण करना नगर निगम के लिए बड़ी समस्या है. इस तकनीक के विकसित होने पर आने वाले दिनों में यह समस्या नहीं रहेगी. डॉ अभिषेक सुरेश धोबले ने एक खास तरह की बाल्टी तैयार किया है जिसमें किचेन वेस्ट को खाद में बदला जा सकता है. अपनी इस तकनीक को उन्होंने पेटेंट भी करा लिया है.
डॉ अभिषेक का कहना है कि शहरों में बढ़ रहा कचरा एक बड़ा संकट है. इसका गहरा असर पड़ रहा है कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ हर शहर में नजर आ रहे हैं. जल से लेकर मिट्टी तक प्रदूषित हो रही है लेकिन इसका कोई ठोस निष्कर्ष निकलता नहीं दिख रहा. हालांकि यह समस्या बड़ी है लेकिन इसका निदान छोटे स्तर से शुरू करने की जरूरत है. आईआईटी बीएचयू के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने ऐसे डस्टबिन को तैयार किया है जो न सिर्फ नगर निगम के कचरे के लोड को काम करेगा बल्कि घरों से निकलने वाले किचन वेस्ट को खाद में कन्वर्ट करेगा. ऐसे बड़े-बड़े कन्वर्टर मंदिरों से लेकर कई अस्पतालों में ऑपरेट हो रहे हैं लेकिन इस माइक्रो लेवल पर किया जा रहा प्रयास न सिर्फ घरों से निकलने वाले कचरे को नेचुरल खाद में कन्वर्ट करके घरों में बालकनी से लेकर छत पर होने वाली ग्रीनरी को बढ़ाने का काम करेगा बल्कि अपार्टमेंट कल्चर में डेवलप हो रहे छोटी फैमिली के कॉन्सेप्ट में बिल्कुल सटीक बैठ भी जाएगा. बालकनी या लॉबी से लेकर किसी भी खुली जगह में इस डस्टबिन के जरिए किचन का कचरा बायो खाद में कन्वर्ट हो जाएगा.

30 दिन में तैयार होगा खाद
डॉ अभिषेक ने बताया कि उनके द्वारा बनाए गए कनवर्टर को ट्रायल के साथ तैयार किया जो पूरी तरह से 90 की जगह 30 दिनों में ही किचन से निकलने वाले कचरे जिसमें फल सब्जियों के छिलके बचे भोजन को खाद में बदला जाता है. इस खास डस्टबिन को प्लास्टिक में तैयार किया लेकिन हमको यह समझ में आया कि जब इस वेस्ट मैटेरियल को खाद में कन्वर्ट किया जा रहा था तो प्लास्टिक के अंश भी खाद में मिल रही थी जो जैविक होने के बाद भी कहीं ना कहीं से फल सब्जियों के पौधों में इस्तेमाल करने पर नुकसान पहुंचा सकती थी. इसलिए स्टील के कंटेनर और मिट्टी के बर्तनों पर ट्राई किया उन्होंने बताया कि हमने छोटे-छोटे छिद्र करके एक और पाइप इसके अंदर फिट किया है. इसमें एयर पाइप लगाया जिसके जरिए धीमी धीमी ऑक्सीजन गैस दी गई. इसके लिए साधारण और सस्ता एयर पंप इस्तेमाल किया गया. डस्टबिन में कचरा डालने के बाद ऑक्सीजन की सप्लाई करनी होती है. बिना ऑक्सीजन दिए किचेन वेस्ट खाद बनने में 90 दिन का वक्त लेता है. इस खास डस्टबिन में ऑक्सीजन पाइप के जरिए हवा की सप्लाई शुरू की गई तो रिजल्ट चौंकाने वाले थे और जो 90 दिन का वक्त था वह घटकर 30 दिनों में आ गया. 30 दिन के अंदर ही इसमें खाद तैयार होना शुरू हो गई जिसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
मिला पेटेंट, मार्केट में लाने की तैयारी
डॉ अभिषेक का कहना है कि इसका पेटेंट भी मिल चुका है. लगभग दो सप्ताह पहले इसके पेटेंट पर अनुमति आने के बाद इसे मार्केट में लाने की भी तैयारी की जा रही हैं. इसे आईआईटी बीएचयू के स्टार्टअप सेल के जरिए प्रमोट करेंगे. यह एक बेहतरीन स्टार्टअप है जो कोई भी युवा आगे आकर अपने एक अच्छे बिजनेस के तौर पर डेवलप कर सकता है. उन्होंने बताया सबसे बड़ी बात यह है कि इसे तैयार करने में बहुत खर्च भी नहीं आया बस कुछ वैज्ञानिक सिद्धांतों का इस्तेमाल करके इसे तैयार किया गया है. इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि घर के अंदर यदि हम कचरे को कुछ दिन रखेंगे तो महक आ सकती है. इसके लिए इसमें कुछ केमिकल भी डालकर कचरे को जल्दी निस्तारित करने की प्रक्रिया शुरू की जिससे कचरा महकेगा भी नहीं और खाद भी तैयार हो जाएगी.
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तकीनीक का इस्तेमाल आसान
डॉक्टर अभिषेक का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल कोई भी अपार्टमेंट में अपने फ्लैट में या फिर ऑफिसेज में उसे कर सकता है. खास तौर पर ऐसे लोग जो अपार्टमेंट के बालकनी में पौधे लगाने के शौकीन होते हैं. टेरिस गार्डन बनाकर उसे डेवलप करते हैं, ऑफिसेज में भी ग्रीनरी बढ़ाने के साथ उसे जैविक खाद की मदद से बेहतर रखने के लिए इस तरह के डस्टबिन का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह एक सार्थक पहल है जो न सिर्फ जैविक खाद घर पर ही तैयार करने की प्रक्रिया को बल देगी बल्कि नगर निगम के कूड़ा निस्तारण के लोड को भी काम करेगी और भविष्य के लिए हम स्मार्ट सिटी के साथ मिलकर इसके प्रमोशन की तैयारी कर रहे हैं ताकि नगर निगम भी लोगों तक यह बात पहुंचाएं की ऐसे डस्टबिन आपके कचरे को घर में ही निस्तारित कर देंगे. यह प्रक्रिया घर-घर तक पहुंचेगी तो बहुत ही सार्थक परिणाम सामने आएंगे नगर निगम के कचरे का लोड कम होगा और सिटी से निकलकर बाहर तैयार हो रहे कूड़े के पहाड़ को भी काम करने में बड़ी मदद मिलेगी.



