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IITBHU ने बनाया बायो-कन्वर्टर डस्टबिन, स्मार्ट सिटी के अंतर्गत घरों तक पहुंचाने की योजना...

IITBHU ने बनाया बायो-कन्वर्टर डस्टबिन, स्मार्ट सिटी के अंतर्गत घरों तक पहुंचाने की योजना...
Jun 19, 2026, 08:24 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : आईआईटी बीएचयू के जैव रासायनिक अभियंत्रिकी विभाग ने एक विशेष बायो-कन्वर्टर डस्टबिन विकसित किया है, जो घरों से निकलने वाले किचन वेस्ट को मात्र 30 दिनों में जैविक खाद में बदल देता है. वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक सुरेश ढोबले ने बताया कि बड़े स्तर पर कचरे को खाद में बदलने वाले संयंत्र पहले भी बनाए गए हैं, लेकिन घरेलू उपयोग के लिए इस प्रकार का माइक्रो-लेवल समाधान पहली बार सफलतापूर्वक विकसित किया गया है.


शहर में हर रोज लगभग 600 से 1000 मीट्रिक टन (MT) कचरा (म्युनिसिपल सालिड वेस्ट) निकलता है. इस कुल कचरे का लगभग 40% से 50% हिस्सा (यानी करीब 250 से 400 मीट्रिक टन) गीला और किचन वेस्ट (सब्जी, फलों के छिलके और बचा हुआ खाना) होता है. इसे घरों से लेना और निस्तारण करना नगर निगम के लिए बड़ी समस्या है. इस तकनीक के विकसित होने पर आने वाले दिनों में यह समस्या नहीं रहेगी. डॉ अभिषेक सुरेश धोबले ने एक खास तरह की बाल्टी तैयार किया है जिसमें किचेन वेस्ट को खाद में बदला जा सकता है. अपनी इस तकनीक को उन्होंने पेटेंट भी करा लिया है.



डॉ अभिषेक का कहना है कि शहरों में बढ़ रहा कचरा एक बड़ा संकट है. इसका गहरा असर पड़ रहा है कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ हर शहर में नजर आ रहे हैं. जल से लेकर मिट्टी तक प्रदूषित हो रही है लेकिन इसका कोई ठोस निष्कर्ष निकलता नहीं दिख रहा. हालांकि यह समस्या बड़ी है लेकिन इसका निदान छोटे स्तर से शुरू करने की जरूरत है. आईआईटी बीएचयू के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने ऐसे डस्टबिन को तैयार किया है जो न सिर्फ नगर निगम के कचरे के लोड को काम करेगा बल्कि घरों से निकलने वाले किचन वेस्ट को खाद में कन्वर्ट करेगा. ऐसे बड़े-बड़े कन्वर्टर मंदिरों से लेकर कई अस्पतालों में ऑपरेट हो रहे हैं लेकिन इस माइक्रो लेवल पर किया जा रहा प्रयास न सिर्फ घरों से निकलने वाले कचरे को नेचुरल खाद में कन्वर्ट करके घरों में बालकनी से लेकर छत पर होने वाली ग्रीनरी को बढ़ाने का काम करेगा बल्कि अपार्टमेंट कल्चर में डेवलप हो रहे छोटी फैमिली के कॉन्सेप्ट में बिल्कुल सटीक बैठ भी जाएगा. बालकनी या लॉबी से लेकर किसी भी खुली जगह में इस डस्टबिन के जरिए किचन का कचरा बायो खाद में कन्वर्ट हो जाएगा.


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30 दिन में तैयार होगा खाद


डॉ अभिषेक ने बताया कि उनके द्वारा बनाए गए कनवर्टर को ट्रायल के साथ तैयार किया जो पूरी तरह से 90 की जगह 30 दिनों में ही किचन से निकलने वाले कचरे जिसमें फल सब्जियों के छिलके बचे भोजन को खाद में बदला जाता है. इस खास डस्टबिन को प्लास्टिक में तैयार किया लेकिन हमको यह समझ में आया कि जब इस वेस्ट मैटेरियल को खाद में कन्वर्ट किया जा रहा था तो प्लास्टिक के अंश भी खाद में मिल रही थी जो जैविक होने के बाद भी कहीं ना कहीं से फल सब्जियों के पौधों में इस्तेमाल करने पर नुकसान पहुंचा सकती थी. इसलिए स्टील के कंटेनर और मिट्टी के बर्तनों पर ट्राई किया उन्होंने बताया कि हमने छोटे-छोटे छिद्र करके एक और पाइप इसके अंदर फिट किया है. इसमें एयर पाइप लगाया जिसके जरिए धीमी धीमी ऑक्सीजन गैस दी गई. इसके लिए साधारण और सस्ता एयर पंप इस्तेमाल किया गया. डस्टबिन में कचरा डालने के बाद ऑक्सीजन की सप्लाई करनी होती है. बिना ऑक्सीजन दिए किचेन वेस्ट खाद बनने में 90 दिन का वक्त लेता है. इस खास डस्टबिन में ऑक्सीजन पाइप के जरिए हवा की सप्लाई शुरू की गई तो रिजल्ट चौंकाने वाले थे और जो 90 दिन का वक्त था वह घटकर 30 दिनों में आ गया. 30 दिन के अंदर ही इसमें खाद तैयार होना शुरू हो गई जिसका इस्तेमाल किया जा सकता है.


मिला पेटेंट, मार्केट में लाने की तैयारी


डॉ अभिषेक का कहना है कि इसका पेटेंट भी मिल चुका है. लगभग दो सप्ताह पहले इसके पेटेंट पर अनुमति आने के बाद इसे मार्केट में लाने की भी तैयारी की जा रही हैं. इसे आईआईटी बीएचयू के स्टार्टअप सेल के जरिए प्रमोट करेंगे. यह एक बेहतरीन स्टार्टअप है जो कोई भी युवा आगे आकर अपने एक अच्छे बिजनेस के तौर पर डेवलप कर सकता है. उन्होंने बताया सबसे बड़ी बात यह है कि इसे तैयार करने में बहुत खर्च भी नहीं आया बस कुछ वैज्ञानिक सिद्धांतों का इस्तेमाल करके इसे तैयार किया गया है. इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि घर के अंदर यदि हम कचरे को कुछ दिन रखेंगे तो महक आ सकती है. इसके लिए इसमें कुछ केमिकल भी डालकर कचरे को जल्दी निस्तारित करने की प्रक्रिया शुरू की जिससे कचरा महकेगा भी नहीं और खाद भी तैयार हो जाएगी.


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तकीनीक का इस्‍तेमाल आसान


डॉक्टर अभिषेक का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल कोई भी अपार्टमेंट में अपने फ्लैट में या फिर ऑफिसेज में उसे कर सकता है. खास तौर पर ऐसे लोग जो अपार्टमेंट के बालकनी में पौधे लगाने के शौकीन होते हैं. टेरिस गार्डन बनाकर उसे डेवलप करते हैं, ऑफिसेज में भी ग्रीनरी बढ़ाने के साथ उसे जैविक खाद की मदद से बेहतर रखने के लिए इस तरह के डस्टबिन का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह एक सार्थक पहल है जो न सिर्फ जैविक खाद घर पर ही तैयार करने की प्रक्रिया को बल देगी बल्कि नगर निगम के कूड़ा निस्तारण के लोड को भी काम करेगी और भविष्य के लिए हम स्मार्ट सिटी के साथ मिलकर इसके प्रमोशन की तैयारी कर रहे हैं ताकि नगर निगम भी लोगों तक यह बात पहुंचाएं की ऐसे डस्टबिन आपके कचरे को घर में ही निस्तारित कर देंगे. यह प्रक्रिया घर-घर तक पहुंचेगी तो बहुत ही सार्थक परिणाम सामने आएंगे नगर निगम के कचरे का लोड कम होगा और सिटी से निकलकर बाहर तैयार हो रहे कूड़े के पहाड़ को भी काम करने में बड़ी मदद मिलेगी.

काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के पहले दिन सजी भव्य सांस्कृतिक संध्या, भजनों और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के पहले दिन सजी भव्य सांस्कृतिक संध्या, भजनों और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन रविवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित मंदिर चौक में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। मां भगवती की आराधना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित इस कार्यक्रम में भजन गायन और नृत्य की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन उद्घोषिका मीनाक्षी दीक्षित ने किया।सांस्कृतिक संध्या में भजन गायक प्रवीण कुमार सिंह ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्तिमय वातावरण बनाया। इसके बाद भजन गायक शेर सिंह ने भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक भाव से जोड़ा। वहीं, सोनी सेठ के नृत्य समूह की आकर्षक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिए।ALSO READ : बीएचयू के श्री विश्वनाथ मंदिर में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय पूजा कार्यक्रम का शुभारंभ.नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के साथ भारतीय कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है। मंदिर न्यास की ओर से नवरात्रि के प्रत्येक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे धाम आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिल सके।श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।
सगरा तालाब के आसपास से हटेगा अतिक्रमण, नगर आयुक्त ने दिए सीमांकन के निर्देश.
सगरा तालाब के आसपास से हटेगा अतिक्रमण, नगर आयुक्त ने दिए सीमांकन के निर्देश.
वाराणसी। शहर में तालाबों के संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने माधोपुर स्थित सगरा तालाब का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान तालाब के आसपास फैली गंदगी और अतिक्रमण की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तालाब की पैमाइश कराकर उसका सीमांकन कराने और अवैध अतिक्रमण को जल्द हटाने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने तालाब के आसपास की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से वहां की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि तालाबों का संरक्षण और उनके आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए तालाब की वास्तविक सीमा निर्धारित करना जरूरी है, ताकि उसके क्षेत्र में किए गए अवैध कब्जों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।नगर आयुक्त ने अधिकारियों को सगरा तालाब की तत्काल पैमाइश कराने और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाब के आसपास यदि अवैध अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब और उसके आसपास के परिसर में व्यापक सफाई अभियान चलाकर गंदगी को दूर करने के निर्देश भी दिए।ALSO READ : केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचनसोमवार से शुरू होगी सफाई और आगे की कार्रवाईनगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए सोमवार से ही सफाई अभियान और आगे की कार्रवाई की योजना पर काम शुरू करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि तालाब के आसपास साफ-सफाई सुनिश्चित करने के साथ ही सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाए, ताकि तालाब की स्थिति में सुधार हो सके।नगर आयुक्त ने साफ किया कि तालाब के संरक्षण और सुंदरीकरण से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।नगर निगम की इस पहल से माधोपुर स्थित सगरा तालाब के आसपास स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने, उसकी सीमा स्पष्ट करने और अतिक्रमण की समस्या दूर करने की दिशा में कार्रवाई की उम्मीद है। अब संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली पैमाइश, सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचन
केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचन
वाराणसी: केंद्रीय कारागार वाराणसी में नवरात्रि के प्रथम दिन रविवार को बंदियों द्वारा मंचित दस दिवसीय रामलीला का शुभारंभ विधि-विधान से मुकुट पूजन के साथ हुआ। रामलीला के पहले दिन नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। बंदियों ने अपनी अभिनय कला के माध्यम से नारद मोह की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान जेल के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ हुआ। इसके बाद नारद मोह की लीला का मंचन शुरू किया गया। कथा के अनुसार, कामदेव द्वारा नारद की समाधि भंग करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन वह इसमें असफल रहता है। इसके बाद नारद को अपनी तपस्या पर अभिमान हो जाता है और वह स्वयं को कामदेव पर विजय प्राप्त करने वाला मानने लगते हैं। नारद इस घटना का समाचार भगवान शिव को सुनाते हैं। भगवान शिव उन्हें भगवान विष्णु से इस प्रसंग का उल्लेख नहीं करने की सलाह देते हैं।अभिमान के वशीभूत नारद भगवान विष्णु के सामने भी अपनी विजय का वर्णन करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु अपने भक्त के अहंकार को दूर करने के लिए माया रचते हैं। माया के प्रभाव में नारद राजा शीलनिधि की कन्या पर मोहित हो जाते हैं और उससे विवाह करने की इच्छा व्यक्त करते हैं। वह भगवान विष्णु से अपने लिए सुंदर रूप प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।भगवान विष्णु नारद को वानर का रूप देकर भेजते हैं। स्वयंवर में अपने रूप को लेकर नारद को अपमान का सामना करना पड़ता है। इससे क्रोधित होकर नारद भगवान विष्णु को मनुष्य रूप धारण करने और नारी वियोग में दर-दर भटकने का श्राप दे देते हैं। इसी श्राप को भगवान राम के अवतार और उनके वनवास के प्रसंग से जोड़कर दिखाया गया। इसके बाद भगवान राम अपने अंशों सहित अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां प्रकट होते हैं। इसी प्रसंग के साथ रामलीला के पहले दिन का मंचन संपन्न हुआ।ALSO READ : सपा कार्यालय में मनाई गई लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती, संपूर्ण क्रांति के विचारों पर हुई चर्चा.केंद्रीय कारागार में बंदियों द्वारा आयोजित इस रामलीला का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना है। दस दिनों तक चलने वाली इस रामलीला में विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। बंदियों की सहभागिता से आयोजित यह कार्यक्रम जेल परिसर में धार्मिक वातावरण और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का माध्यम बना।इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार मिश्र, अमित कुमार वर्मा, अशोक कुमार राय, अयोध्या प्रसाद, भोजराज, श्रीमती अमिता श्रीवास्तव और फार्मासिस्ट संदीप खरे सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।