काशी में गंगा ने किया गलियों का रुख, वरुणा नदी में पलट प्रवाह से बढ़ रही मुश्किलें

वाराणसी : गंगा में बढ़ाव के कारण वरुणा नदी में पलट प्रवाह का क्रम जारी है. इससे निचले इलाकों में रहने वालों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. एक तरफ प्रशासन चौकन्ना है वहीं वरुणा का पानी तट के ऊपर पहुंचने लगा, जिससे सरैया और सलारपुर जैसे निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर गया. कई घरों में पानी भर गया है. इस स्थिति को देखते हुए राहत शिविरों को सक्रिय कर दिया गया है. तट वासी धीरे-धीरे अपने घरों से पलायन कर रहे हैं. मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार छतों और गलियों में होने लगा है. अंतिम संस्कार के लिए कतार लग रही है. काशी के सभी घाटों का संपर्क भी टूट गया है और नाव संचालन भी प्रभावित है. घाट किनारे के मंदिरों और जल पुलिस चौकी में भी पानी प्रवेश कर चुका है.

गुरुवार की सुबह गंगा का जल स्तर 68.35 मीटर पर स्थिर हो गया, जिससे प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली. हालांकि स्थिर होने का यह अर्थ नहीं कि पानी घटने लगा है बल्कि यह नए क्षेत्रों में भरने की वजह से स्थिर माना जा रहा है. बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कई अधिकारी क्षेत्र में पहुंचे और उन्होंने मौके का निरीक्षण किया. उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी और प्रभावित होने पर राहत शिविर में आने की अपील की.
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बुधवार की शाम को बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक की और बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखने, नावों और बचाव उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. राहत और बचाव दलों को आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रखने का भी निर्देश दिया गया. चौकियों पर स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, राजस्व और पुलिस आदि की शिफ्टवार ड्यूटी लगा दी गई है. राहत शिविर में आवश्यक संसाधनों को जुटा लिया गया है.
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अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ के दौरान सतर्क रहें और जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों का सहारा लें. स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने का निर्णय लिया है. बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि लोगों को सुरक्षित रखा जा सके.

राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी संबंधित विभागों को सक्रिय किया गया है. स्थानीय निवासियों से राहत शिविरों में जाने के लिए तैयार रहने की बात कही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति का सामना किया जा सके. प्रशासन ने सभी आवश्यक उपाय किए हैं ताकि बाढ़ से प्रभावित लोगों को समय पर सहायता मिल सके.



