वाराणसी में थानेदार से नाराज महिला ने पुलिस कमिश्नर की गाड़ी रोकी, लगाई गुहार...

वाराणसी : जिला मुख्यालय पर मंगलवार को उस समय गहमागहमी बढ गई जब जंसा थाना क्षेत्र के सत्तनपुर गांव की रहने वाली एक दलित महिला ने पुलिस कमिश्नर की कार को रोकने का प्रयास किया. महिला ने स्थानीय पुलिस पर बेहद संगीन और संवेदनहीन आरोप लगाए हैं. पीड़िता का कहना है कि दबंगों द्वारा उसके और उसकी 18 वर्षीय बेटी पर जानलेवा हमला किए जाने के बावजूद, पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें टरका रही है. पीड़िता ने अब इस मामले में पुलिस कमिश्नर स्तर से दखल देने और क्राइम ब्रांच से जांच कराने की गुहार लगाई है.
पीड़िता ने बताया कि उनके पति गुजरात में मजदूरी करते हैं और वह घर पर अपनी 18 वर्षीय बेटी और बेटे के साथ रहती हैं. आरोप है कि गांव के ही कुछ मनबढ लोग आए दिन उन्हें जातिसूचक गालियां देते हैं और प्रताड़ित करते रहते हैं. गत 23 जून की सुबह विपक्षियों ने जबरन पीड़िता के घर के सामने मड़ई रखकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया. जब महिला और उनके बच्चों ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया. प्रार्थना पत्र में पीड़िता ने अत्यंत दर्दनाक आपबीती सुनाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि "विपक्षीगणों ने हमला कर मेरी साड़ी और अंतःवस्त्र तक खींच दिए और मुझे बुरी तरह अपमानित किया. दबंगों ने मारकर मेरा सिर फोड़ दिया. यही नहीं, मेरी 18 साल की बेटी का दाहिना हाथ तोड़ दिया और उसके भी कपड़े फाड़ दिए. मेरे बेटे को भी बेरहमी से पीटा गया."
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पीड़िता का आरोप है कि घटना के वक्त उन्होंने 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी थी. मौके पर पहुंचे रामेश्वर चौकी इंचार्ज और थानाध्यक्ष जंसा ने कोई सख्त कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता से कहा कि "ऊपर से दबाव है, 14 दिन तक घटना का मुआयना होता है और 14 दिन बाद ही मेडिकल व कार्रवाई होगी. "पीड़िता का कहना है कि थाने जाने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि जंसा पुलिस भी इस घटना में आरोपियों के साथ शामिल है. पुलिस कमिश्नर ने कार्रवाई का आश्वासन दिया.



