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भारतीय भाषाएं बनेंगी वैश्विक ज्ञान-शक्ति, काशी से आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेश

भारतीय भाषाएं बनेंगी वैश्विक ज्ञान-शक्ति, काशी से आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेश
Sep 14, 2026, 05:10 AM
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Posted By Niharika dwivedi

वाराणसी। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में हिन्दुस्थान समाचार की ओर से ‘भारतीय ज्ञान परंपरा, क्षेत्रीय भाषाएं और समृद्ध भारत’ विषय पर भारतीय भाषा समागम-2026 का आयोजन हुआ। समागम में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, शिक्षा, तकनीक व शोध से जोड़ने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की समृद्ध ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा की वाहक हैं।


मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के पूर्व कुलपति डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भारत के पुरातन ज्ञान और आधुनिक ज्ञान के बीच बनी दीवार को तोड़कर दोनों के बीच संवाद का पुल तैयार करना होगा। प्राचीन ज्ञान को जस का तस दोहराने के बजाय उसे वर्तमान विज्ञान और शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि काशी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भौतिक विकास के लिए जिस तरह काशी में कॉरिडोर बने हैं, उसी तरह ज्ञान के क्षेत्र में भी कॉरिडोर तैयार करने की आवश्यकता है।

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उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल दर्शन और अध्यात्म तक सीमित करना सही नहीं है। गणित, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, चिकित्सा और खगोल विज्ञान समेत कई क्षेत्रों में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियां रही हैं। संस्कृत की पांडुलिपियों और आधुनिक विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ना चाहिए। अपनी भाषा में बोलने वाले व्यक्ति को कमतर आंकने की मानसिकता भी बदलनी होगी।


मुख्य वक्ता आरएसएस की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा किसी नई चीज के निर्माण से अधिक शाश्वत सत्य के साक्षात्कार की परंपरा है। उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएं अखिल भारतीय हैं। भाषा बदल सकती है, लेकिन भाव नहीं बदलता। भाषा व्यक्ति को ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा कराती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को तकनीक से जोड़ने और काशी को इस ज्ञानधारा का प्रमुख केंद्र बनाने की जरूरत बताई।

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हिन्दुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने कहा कि हिन्दुस्थान समाचार 15 भाषाओं में समाचार उपलब्ध कराने वाली बहुभाषी समाचार एजेंसी है। करीब आठ दशक की यात्रा में संस्था ने भारतीय भाषाओं में विश्वसनीय सूचना पहुंचाने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में देश की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक अनुभव सुरक्षित हैं। संस्था अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है। रूसी समाचार एजेंसी के साथ काम शुरू हो चुका है, जबकि जापानी एजेंसी से बातचीत चल रही है।


ALSO READ:पहली बार काशी पहुंचे भाजयुमो अध्यक्ष हेमांग जोशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी


समागम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इस दौरान डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, मुकुल कानिटकर, केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति भिक्षु प्रो. (डा.) वंगछुग दोर्जे नेगी, राज्य सूचना आयुक्त पदुमनारायण (पीएन) द्विवेदी और पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी मौजूद रहे। अध्यक्षता अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने की। स्वागत मुख्य समन्वयक एवं क्षेत्रीय संपादक डा. राजेश तिवारी ने किया। महामना पं. मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डा. नागेंद्र कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति रही। संचालन हिन्दुस्थान समाचार के संपादक जितेंद्र तिवारी ने किया।

श्रीविश्वकर्मा सभा में करोड़ों के घोटाले का आरोप, 13 आरोपियों पर प्राथमिकी
श्रीविश्वकर्मा सभा में करोड़ों के घोटाले का आरोप, 13 आरोपियों पर प्राथमिकी
वाराणसी : श्री विश्वकर्मा सभा चौकाघाट की संपत्ति, जमीन और बैंक खातों में धोखाधड़ी और अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है. इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ जैतपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई. आरोप है कि विद्यालय परिसर का व्यावसायिक उपयोग किया गया. कक्षाओं को विवाह स्थल विश्वकर्मा बाग और सिलाई अकादमी को देकर लाखों रुपये का किराया गबन किया गया है. करोड़ों रुपये की एक बीघे से अधिक जमीन का मात्र 3.60 लाख रुपये में फर्जी समझौता करा दिया गया.संस्था के पूर्व अध्यक्ष गणेश प्रसाद विश्वकर्मा की तहरीर और कोर्ट के आदेश पर जैतपुरा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. भेलूपुर थाना क्षेत्र के दुर्गाकुंड कैवल्यधाम एक्सटेंशन निवासी पीड़ित गणेश प्रसाद विश्वकर्मा ने अधिवक्ता के जरिये कोर्ट में आवेदन दिया. वह संस्था के आजीवन सदस्य भी हैं. आरोप लगाया कि संस्था के स्वघोषित पदाधिकारियों सहित 13 लोगों ने संस्था की संपत्ति, जमीन, बैंक खातों के जरिये करोड़ों की धोखाधड़ी की है. कई अनियमितताएं सामने आई हैं. मुख्य आरोपियों में रामचंद्र शर्मा, अनिल कुमार शर्मा, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, लेखा परीक्षक विश्व प्रकाश सिंह और लॉन संचालक घनश्याम गुप्ता हैं. अन्य आरोपियों में राजकुमार शर्मा, शोभनाथ विश्वकर्मा, नित्यानंद विश्वकर्मा, विशाल विश्वकर्मा, वेंकटेश, सुनील कुमार विश्वकर्मा, कन्हैया लाल विश्वकर्मा व धर्मेंद्र कुमार शर्मा है.ALSO READ: भारतीय भाषाएं बनेंगी वैश्विक ज्ञान-शक्ति, काशी से आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेशआरोपियों ने विद्यालय परिसर का व्यावसायिक उपयोग किया. कक्षाओं को विवाह स्थल विश्वकर्मा बाग और सिलाई अकादमी को देकर लाखों रुपये का किराया गबन किया गया. संस्था की करोड़ों रुपये की एक बीघे से अधिक जमीन का मात्र 3.60 लाख रुपये में फर्जी समझौता किया गया. बैंक खातों से फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) समय से पहले तुड़वाकर लाखों रुपये नकद निकाले गए. फर्जी बिलों और रसीद पुस्तकों के जरिये भी गबन किया गया.आरोपियों ने संस्था के मूल रजिस्टर चोरी करते हुए समानांतर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए लेखा परीक्षा प्रक्रिया में सांठगांठ की गई. जैतपुरा थाना प्रभारी उपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस सभी आरोपों की गहनता से जांच कर रही है.
भारतीय भाषाएं बनेंगी वैश्विक ज्ञान-शक्ति, काशी से आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेश
भारतीय भाषाएं बनेंगी वैश्विक ज्ञान-शक्ति, काशी से आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेश
वाराणसी। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में हिन्दुस्थान समाचार की ओर से ‘भारतीय ज्ञान परंपरा, क्षेत्रीय भाषाएं और समृद्ध भारत’ विषय पर भारतीय भाषा समागम-2026 का आयोजन हुआ। समागम में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, शिक्षा, तकनीक व शोध से जोड़ने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की समृद्ध ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा की वाहक हैं।मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के पूर्व कुलपति डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भारत के पुरातन ज्ञान और आधुनिक ज्ञान के बीच बनी दीवार को तोड़कर दोनों के बीच संवाद का पुल तैयार करना होगा। प्राचीन ज्ञान को जस का तस दोहराने के बजाय उसे वर्तमान विज्ञान और शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि काशी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भौतिक विकास के लिए जिस तरह काशी में कॉरिडोर बने हैं, उसी तरह ज्ञान के क्षेत्र में भी कॉरिडोर तैयार करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल दर्शन और अध्यात्म तक सीमित करना सही नहीं है। गणित, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, चिकित्सा और खगोल विज्ञान समेत कई क्षेत्रों में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियां रही हैं। संस्कृत की पांडुलिपियों और आधुनिक विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ना चाहिए। अपनी भाषा में बोलने वाले व्यक्ति को कमतर आंकने की मानसिकता भी बदलनी होगी।मुख्य वक्ता आरएसएस की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा किसी नई चीज के निर्माण से अधिक शाश्वत सत्य के साक्षात्कार की परंपरा है। उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएं अखिल भारतीय हैं। भाषा बदल सकती है, लेकिन भाव नहीं बदलता। भाषा व्यक्ति को ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा कराती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को तकनीक से जोड़ने और काशी को इस ज्ञानधारा का प्रमुख केंद्र बनाने की जरूरत बताई।हिन्दुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने कहा कि हिन्दुस्थान समाचार 15 भाषाओं में समाचार उपलब्ध कराने वाली बहुभाषी समाचार एजेंसी है। करीब आठ दशक की यात्रा में संस्था ने भारतीय भाषाओं में विश्वसनीय सूचना पहुंचाने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में देश की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक अनुभव सुरक्षित हैं। संस्था अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है। रूसी समाचार एजेंसी के साथ काम शुरू हो चुका है, जबकि जापानी एजेंसी से बातचीत चल रही है।ALSO READ:पहली बार काशी पहुंचे भाजयुमो अध्यक्ष हेमांग जोशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरीसमागम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इस दौरान डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, मुकुल कानिटकर, केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति भिक्षु प्रो. (डा.) वंगछुग दोर्जे नेगी, राज्य सूचना आयुक्त पदुमनारायण (पीएन) द्विवेदी और पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी मौजूद रहे। अध्यक्षता अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने की। स्वागत मुख्य समन्वयक एवं क्षेत्रीय संपादक डा. राजेश तिवारी ने किया। महामना पं. मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डा. नागेंद्र कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति रही। संचालन हिन्दुस्थान समाचार के संपादक जितेंद्र तिवारी ने किया।
पहली बार काशी पहुंचे भाजयुमो अध्यक्ष हेमांग जोशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी
पहली बार काशी पहुंचे भाजयुमो अध्यक्ष हेमांग जोशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी
वाराणसी : भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी रविवार को पहली बार काशी पहुंचे। उनके आगमन को लेकर भाजपा और भाजयुमो कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह रहा। वाराणसी एयरपोर्ट पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ और माला पहनाकर उनका स्वागत किया।एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रविंद्र जायसवाल के पुत्र आयुष जायसवाल ने डॉ. हेमांग जोशी का अभिनंदन किया। इस दौरान भाजयुमो के महानगर और जिला पदाधिकारी, प्रदेश व क्षेत्रीय पदाधिकारी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।स्वागत के बाद डॉ. जोशी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने बाबा कालभैरव के दरबार में भी मत्था टेका। मंदिर दर्शन के बाद उन्होंने काशी की गलियों में भ्रमण किया और यहां की धार्मिक परंपराओं, संस्कृति और जीवनशैली को करीब से देखा।ALSO READ: 118वां गणेशोत्सव, सात दिनों तक होंगे विविध कार्यक्रमउनके स्वागत में वाराणसी उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के तरना वार्ड में रोड शो आयोजित किया गया। रास्ते में स्थानीय लोगों और युवा कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह स्वागत किया। इस दौरान क्रेन की मदद से विशाल पुष्पमाला पहनाकर डॉ. जोशी का अभिनंदन किया गया। रोड शो के दौरान कार्यकर्ताओं में खासा जोश नजर आया।भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में डॉ. हेमांग जोशी का यह पहला काशी दौरा संगठन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके आगमन से स्थानीय युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में प्रदेश, क्षेत्र, जिला और महानगर स्तर के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में भाजयुमो कार्यकर्ता शामिल रहे।