भारतीय भाषाएं बनेंगी वैश्विक ज्ञान-शक्ति, काशी से आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेश

वाराणसी। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में हिन्दुस्थान समाचार की ओर से ‘भारतीय ज्ञान परंपरा, क्षेत्रीय भाषाएं और समृद्ध भारत’ विषय पर भारतीय भाषा समागम-2026 का आयोजन हुआ। समागम में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, शिक्षा, तकनीक व शोध से जोड़ने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की समृद्ध ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा की वाहक हैं।
मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के पूर्व कुलपति डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भारत के पुरातन ज्ञान और आधुनिक ज्ञान के बीच बनी दीवार को तोड़कर दोनों के बीच संवाद का पुल तैयार करना होगा। प्राचीन ज्ञान को जस का तस दोहराने के बजाय उसे वर्तमान विज्ञान और शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि काशी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भौतिक विकास के लिए जिस तरह काशी में कॉरिडोर बने हैं, उसी तरह ज्ञान के क्षेत्र में भी कॉरिडोर तैयार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल दर्शन और अध्यात्म तक सीमित करना सही नहीं है। गणित, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, चिकित्सा और खगोल विज्ञान समेत कई क्षेत्रों में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियां रही हैं। संस्कृत की पांडुलिपियों और आधुनिक विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ना चाहिए। अपनी भाषा में बोलने वाले व्यक्ति को कमतर आंकने की मानसिकता भी बदलनी होगी।
मुख्य वक्ता आरएसएस की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा किसी नई चीज के निर्माण से अधिक शाश्वत सत्य के साक्षात्कार की परंपरा है। उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएं अखिल भारतीय हैं। भाषा बदल सकती है, लेकिन भाव नहीं बदलता। भाषा व्यक्ति को ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा कराती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को तकनीक से जोड़ने और काशी को इस ज्ञानधारा का प्रमुख केंद्र बनाने की जरूरत बताई।

हिन्दुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने कहा कि हिन्दुस्थान समाचार 15 भाषाओं में समाचार उपलब्ध कराने वाली बहुभाषी समाचार एजेंसी है। करीब आठ दशक की यात्रा में संस्था ने भारतीय भाषाओं में विश्वसनीय सूचना पहुंचाने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में देश की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक अनुभव सुरक्षित हैं। संस्था अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है। रूसी समाचार एजेंसी के साथ काम शुरू हो चुका है, जबकि जापानी एजेंसी से बातचीत चल रही है।
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समागम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इस दौरान डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, मुकुल कानिटकर, केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति भिक्षु प्रो. (डा.) वंगछुग दोर्जे नेगी, राज्य सूचना आयुक्त पदुमनारायण (पीएन) द्विवेदी और पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी मौजूद रहे। अध्यक्षता अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने की। स्वागत मुख्य समन्वयक एवं क्षेत्रीय संपादक डा. राजेश तिवारी ने किया। महामना पं. मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डा. नागेंद्र कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति रही। संचालन हिन्दुस्थान समाचार के संपादक जितेंद्र तिवारी ने किया।



