Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

भगोड़े शुभम जायसवाल के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी, पुलिस रिकॉर्ड में नाम दर्ज

भगोड़े शुभम जायसवाल के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी, पुलिस रिकॉर्ड में नाम दर्ज
Apr 15, 2026, 08:54 AM
|
Posted By Preeti Kumari

Interpol Red Corner Notice issued against fugitive Shubham Jaiswal, his name registered in police records


वाराणसी: कफ सिरप तस्करी मामले में भगोड़ा घोषित शुभम जायसवाल को भारत लाने की राह आसान हो गई है. इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अब दुनिया के 196 सदस्य देशों की पुलिस एजेंसियों को उसकी तलाश में सहयोग करने का अलर्ट भेजा गया है. सूत्रों के अनुसार शुभम जायसवाल के दुबई में ठिकाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है.

वाराणसी पुलिस द्वारा लगातार तलाश के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी गई है.


4


शुभम को हिरासत में लेकर पुलिस सीबीआई को सौंपेगी


रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद शुभम जायसवाल की लोकेशन ट्रेस करने और उसे हिरासत में लेने की प्रक्रिया मजबूत हो सकती है. अब संबंधित देश शुभम को हिरासत में लेकर सीबीआई को सौंपेगी. सीबीआई के जरिए उसे प्रत्‍यर्पण के जरिए देश में लाने की तैयारी है.


j


शुभम के पिता भोला जायसवाल गिरफ्तार


इस मामले में शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल को पहले ही कोलकाता से गिरफ्तार किया जा चुका है. वहीं, जांच एजेंसियों ने शुभम की उन संपत्तियों को भी फ्रीज किया है, जिन्हें अवैध कमाई से अर्जित किया गया बताया जा रहा है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि रेड कॉर्नर नोटिस अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता. इसका मतलब यह है कि इंटरपोल सदस्य देशों को आरोपी की जानकारी साझा करता है और संबंधित देश अपने कानून के अनुसार गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण पर फैसला लेता है.


h


इंटरपोल क्या है?


इंटरपोल (International Criminal Police Organization) दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग संगठन है. इसका मुख्यालय फ्रांस के लियोन (Lyon) शहर में स्थित है. इसमें 196 सदस्य देश शामिल हैं. यह कोई स्वतंत्र पुलिस बल नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों की पुलिस एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करता है. इंटरपोल का मुख्य काम फरार अपराधियों, तस्करों, आतंकियों, साइबर अपराधियों और संगठित अपराध से जुड़े आरोपियों के बारे में सूचनाओं का आदान-प्रदान कर कार्रवाई में सहयोग करना है.


h


Also read: आतंकी कनेक्‍शन - डॉक्‍टर परिवार से ATS ने की नौ घंटे पूछताछ, 22 अप्रैल को बुलाया मुंबई


रेड कॉर्नर नोटिस क्या है?


रेड कॉर्नर नोटिस इंटरपोल द्वारा जारी एक अंतरराष्ट्रीय अलर्ट है, जिसके जरिए सदस्य देशों को किसी वांछित आरोपी की तलाश कर उसे अस्थायी रूप से हिरासत में लेने का अनुरोध किया जाता है, ताकि आगे प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके.


BHU के प्रोफेसर आशुतोष मोहन को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026
BHU के प्रोफेसर आशुतोष मोहन को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026
वाराणसी. काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के प्रोफेसर आशुतोष मोहन का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (National Teachers’ Award) 2026 के लिए किया गया है। उन्हें 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जाएगा।प्रो. आशुतोष मोहन को शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक के योगदान, डिजिटल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन, शोध, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और अकादमिक नेतृत्व के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। उनके चयन को BHU के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।डिजिटल शिक्षा और SWAYAM में अहम योगदानप्रो. मोहन वर्तमान में राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के लिए INI-SWAYAM के राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने INI-SWAYAM प्लेटफॉर्म पर तीन MOOCs विकसित किए हैं, जिनमें दो पाठ्यक्रम जर्मनी के GIZ के सहयोग से तैयार किए गए हैं। उनके कार्य का उद्देश्य डिजिटल माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाना है।BHU में वह NEP 2020 कोऑर्डिनेशन सेल के को-कन्वीनर भी हैं। इस भूमिका में उन्होंने विश्वविद्यालय में बहुविषयक,h लचीली, विद्यार्थी-केंद्रित और भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।100 से अधिक मास्टर विद्यार्थियों और 12 शोधार्थियों का किया मार्गदर्शनप्रो. मोहन ने इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, BHU में मार्केटिंग मैनेजमेंट, कंज्यूमर बिहेवियर, सर्विसेज मार्केटिंग, रिसर्च मेथडोलॉजी और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे विषयों का अध्यापन किया है। उन्होंने 12 डॉक्टोरल स्कॉलर्स और 100 से अधिक मास्टर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। वर्तमान में वह IM(FMS)-BHU में प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।ALSO READ : 95 बटालियन सीआरपीएफ में हर्षोल्लास से मनाया गया रक्षाबंधन पर्व, जवानों की कलाई पर सजी राखियां50 से अधिक शोध पत्र और छह पुस्तकेंप्रो. मोहन का शोध मुख्य रूप से सप्लाई एवं डिमांड चेन मैनेजमेंट और इसके मार्केटिंग मैनेजमेंट से संबंध पर केंद्रित है। उन्होंने रेफरीड जर्नल्स में 50 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, जिनमें Scopus Q1 जर्नल्स भी शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने छह पुस्तकों का लेखन और संपादन किया है।उन्होंने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) जैसी संस्थाओं द्वारा समर्थित पांच प्रमुख बाहरी वित्त पोषित शोध परियोजनाएं भी पूरी की हैं।उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत कड़ीप्रो. मोहन ने शिक्षा को उद्योग की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया है। उन्होंने Apollo Hospitals, GAIL, NTPC, Power Grid, VSCL, CPRI और BSNL सहित विभिन्न संस्थानों के लिए कैंपस और इन-कंपनी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं। वह BHU Management Review के मैनेजिंग एडिटर भी हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित जर्नल्स के समीक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं।प्रो. मोहन ने MBA BHU से, Ph.D. दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से और D.Litt. इन मैनेजमेंट BHU से किया है। BHU से जुड़ने से पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया के सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज में भी सेवाएं दीं।राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन पर प्रो. मोहन ने कहा कि उनके लिए शिक्षण केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, आत्मविश्वास और मूल्यों का विकास करते हुए उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने इस सम्मान को अपने शिक्षकों, विद्यार्थियों, सहकर्मियों, परिवार और BHU से मिले अवसरों का सामूहिक सम्मान बताया।शिक्षक दिवस पर मिलने वाला यह सम्मान प्रो. मोहन की 25 वर्षों से अधिक की अकादमिक यात्रा, डिजिटल लर्निंग, शैक्षणिक सुधार, शोध और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है।
95 बटालियन सीआरपीएफ में हर्षोल्लास से मनाया गया रक्षाबंधन पर्व, जवानों की कलाई पर सजी राखियां
95 बटालियन सीआरपीएफ में हर्षोल्लास से मनाया गया रक्षाबंधन पर्व, जवानों की कलाई पर सजी राखियां
वाराणसी : पहाड़िया स्थित 95 बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के मुख्यालय में बुधवार को रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास और भावुक माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं और विद्यालयों से पहुंचीं छात्राओं एवं महिलाओं ने सीआरपीएफ जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान कई जवान भावुक नजर आए।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि 95 बटालियन के कमांडेंट राजेश्वर बालापुरकर तथा विशिष्ट अतिथि अर्चना बालापुरकर ने रक्षाबंधन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान अधिकारियों, जवानों, छात्राओं और विभिन्न संस्थाओं से आए लोगों को पर्व की शुभकामनाएं दी गईं।कमांडेंट राजेश्वर बालापुरकर ने कहा कि सीआरपीएफ के जवान अपने घर-परिवार से दूर रहकर देश की सेवा करते हैं। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य जवानों को यह एहसास कराना है कि उनका परिवार उनसे दूर नहीं है और समाज उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाओं की बहनों ने यहां आकर जवानों के लिए घर जैसा माहौल बना दिया।ALSO READ : काशी में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् का भव्य अभिनन्दन समारोह, हरिवंश पुराण कार्यशाला और महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुतिकार्यक्रम में डायनेमिक स्कूल, संत अतुलानंद रेजिडेंशियल स्कूल, लायंस क्लब वाराणसी, लीला फाउंडेशन क्लब और ब्रह्माकुमारी संस्था से आईं महिलाओं एवं छात्राओं ने 95 बटालियन के 100 से अधिक जवानों को राखी बांधी। बहनों ने जवानों के माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी, मुंह मीठा कराया और उनकी कलाइयों पर रंग-बिरंगी राखियां बांधीं। इसके बदले जवानों ने भी बहनों की सुरक्षा का भरोसा दिया।इस दौरान श्रीमती सुनीता देवी, कुमारी रिंकू, माधवी सिंह, द्वितीय कमान अधिकारी आलोक कुमार, उपकमांडेंट नवनीत कुमार और सहायक कमांडेंट अभिषेक सिंह सहित 95 बटालियन के अधिकारी एवं जवान मौजूद रहे।कार्यक्रम में संत अतुलानंद रेजिडेंशियल स्कूल की श्रीमती किरण सिंह के नेतृत्व में छात्राओं तथा ब्रह्माकुमारी संस्था की तपोसी जी, राधिका जी और अन्य छात्राओं ने सहभागिता की। रक्षाबंधन के इस भावनात्मक आयोजन ने जवानों और समाज के बीच भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता को और मजबूत किया।
काशी में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् का भव्य अभिनन्दन समारोह, हरिवंश पुराण कार्यशाला और महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति
काशी में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् का भव्य अभिनन्दन समारोह, हरिवंश पुराण कार्यशाला और महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति
वाराणसी : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के योगसाधना भवन में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् की ओर से हरिवंश पुराण कार्यशाला, महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति और भव्य अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सनातन धर्म, वैदिक परम्परा, शास्त्रीय ज्ञान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन को लेकर विद्वानों एवं संतों ने अपने विचार रखे।दोपहर 12:15 बजे हरिवंश पुराण कार्यशाला का विशेष सत्र आयोजित हुआ, वहीं वेद विभाग की ओर से संचालित महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति भी संपन्न हुई। इसके बाद अपराह्न 2:30 बजे अभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया।समारोह में मुख्य रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष, धर्माचार्य प्रकोष्ठ, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा एवं महाराष्ट्र प्रदेश प्रमुख, अखिल भारतीय सन्त समिति, श्रीमहन्त वेदाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री का अभिनन्दन किया गया। सम्मान के बाद स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री ने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में परिषद् की ओर से मिला सम्मान उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि संत परम्परा और सनातन धर्म की सेवा में लगे लोगों का सम्मान है।उन्होंने कहा कि श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् को शास्त्रीय एवं धर्मसम्मत पद्धति से धार्मिक आयोजनों के संचालन और व्यवस्थापन के लिए सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर का संस्कृत विश्वविद्यालय बनाए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की कार्यदक्षता की सराहना की।ALSO READ : गांडीव इंपैक्ट: 488 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में बदल गए जांच अधिकारी, अब एसीपी करेंगे मामले की जांचपरिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष पं. कमलाकान्त त्रिपाठी ने स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री के अभिनन्दन-पत्र का वाचन किया। वहीं कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा का अभिनन्दन-पत्र प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने पढ़ा। कुलपति ने कहा कि परिषद् की ओर से मिला सम्मान विश्वविद्यालय के विकास और उत्कर्ष के लिए और अधिक प्रेरणा एवं शक्ति प्रदान करेगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद् के अध्यक्ष पं. छोटेलाल त्रिपाठी ने की। उन्होंने परिषद् के उद्देश्यों और भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि परिषद् सनातन धर्म, वैदिक परम्परा, शास्त्रीय ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण-संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।परिषद् की स्थापना की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने कहा कि परिषद् का उद्देश्य काशी की अन्य विद्वत् एवं धर्मपरिषदों से प्रतिस्पर्धा करना नहीं, बल्कि उनकी पूरक शक्ति के रूप में कार्य करना है। उन्होंने परिषद् के मूल ध्येय “गुरुकुल से गाँव तक, शास्त्र से समाधान तक” को रेखांकित किया।उन्होंने जम्मू-कश्मीर जैसे सीमांत क्षेत्रों में सूने पड़े मंदिरों में अर्चक प्रशिक्षण और नित्य पूजा की पुनर्स्थापना सहित धर्म एवं संस्कृति संरक्षण से जुड़े कार्यों को परिषद् के प्रमुख उद्देश्यों में बताया।समारोह में अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा सहित काशी के अनेक विद्वानों, आचार्यों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही। इस दौरान कई विद्वानों का पूजन, अभिनन्दन और सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन परिषद् के प्रवक्ता पं. विजय शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कार्यालय मंत्री पं. दुर्गेश पाठक ने किया।इस अवसर पर प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. रामप्रिय पाण्डेय, डॉ. उमंग नाथ शर्मा, प्रो. महेन्द्र नाथ पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग सहित शताधिक विद्वान एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।