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इस उम्र में इंसान होता है सबसे ज्यादा खुश, जानें कब और कैसे

इस उम्र में इंसान होता है सबसे ज्यादा खुश, जानें कब और कैसे
May 08, 2026, 01:21 PM
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Posted By Preeti Kumari

A person is happiest at this age, know when and how


Lifestyle: आज की बदलते लाइफस्टाइल में लोग इतने व्यस्त हो चुके है कि खुद के लिए जरा भी समय नहीं निकाल पाते है. यहीं कारण है कि, अक्सर लोग बढ़ती उम्र को लेकर परेशान रहते हैं. क्योंक बढ़ती कई तरह की बीमारियों से लोग बीमार पड़ते रहते है, इसकी वजह खराब खान-पान है, जो लोगों को बीमार बना रही है. क्योंकि भागदौड़ भरे जीवन में लोग खाना ना बना पाने की वजह से बाहर का खाना काफी पंसद करते है. जिसके वजह से वो अक्सर बीमार पड़ते है. हाल ही में ब्रिटेन में हुए एक सर्वे के मुताबिक, इंसान अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा खुश और आत्मविश्वास से भरा हुआ 47 साल की उम्र में होता है.


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इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते इंसान अपनी जिंदगी से हर तरह की नकारात्मकता और तनाव को दूर कर चुका होता है. अब लोगों का ध्यान इस बात पर नहीं होता कि वे बाहर से कैसे दिखते हैं, बल्कि वे इस बात को ज्यादा अहमियत देते हैं कि उनका शरीर अंदर से कितना स्वस्थ है, सर्वे में शामिल लगभग आधे लोगों ने माना कि 40 पार करने के बाद जीवन ज्यादा सुखद हो जाता है, क्योंकि वे अपने शरीर की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने लगते हैं.


आंकड़ों ने बदल दी 'हैप्पी लाइफ' की परिभाषा


इस उम्र में लाइफस्टाइल में आने वाले बदलाव भी इस खुशी का एक बड़ा कारण हैं. आंकड़ों पर गौर करें तो 47 प्रतिशत लोगों ने माना कि इस उम्र में खुशियां अपने चरम पर होती हैं, अब लोग 20 या 30 की उम्र की तरह देर रात तक पार्टियां या शराब पीना पसंद नहीं करते. सर्वे में 28 प्रतिशत लोगों ने ऐसी आदतों में भारी कमी की बात स्वीकारी. इसके बजाय, 32 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे अब स्वस्थ और पौष्टिक खानपान चुनना पसंद करते हैं. वहीं, 26 प्रतिशत लोगों का कहना था कि बच्चों या नाती-पोतों के पीछे भागदौड़ करने से उनकी फिजिकल एक्टिविटी बनी रहती है, सबसे बड़ी बात यह है कि इस पड़ाव पर इंसान दूसरों को खुश करने की अंधी दौड़ से बाहर आ जाता है और खुद पर ध्यान केंद्रित करना सीख जाता है.


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'सेल्फ-प्रायोरिटी' का ख्याल


आजकल सोशल मीडिया पर भी ऐसे कई पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनमें 40 पार कर चुकी महिलाएं और पुरुष बता रहे हैं कि यह उनकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन समय है, इसका मुख्य कारण यह है कि इस उम्र तक आते-आते पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का स्वरूप काफी हद तक बदल जाता है. लोगों को अपने लिए ज्यादा वक्त मिलने लगता है, वे खुद को अपनी पहली प्राथमिकता बनाते हैं, जो उन्हें जिंदगी की एक बिल्कुल नई और ताजगी भरी शुरुआत का अहसास कराता है.


69 साल है बुढ़ापे की नई 'डेडलाइन'


अब एक दिलचस्प सवाल यह उठता है कि अगर 47 की उम्र खुशियों का शिखर है, तो फिर असल में 'बुढ़ापा' कब शुरू होता है? इसी से जुड़े एक अन्य पुराने शोध के नतीजे भी काफी सुकून देने वाले हैं. 2,000 से ज्यादा ब्रिटिश लोगों के बीच हुए सर्वे में यह बात निकलकर आई कि अब लोगों को 69 साल की उम्र के बाद ही 'बूढ़ा' माना जाता है. जबकि इससे पहले के अध्ययनों में यह आंकड़ा 62 साल का था. इसका सीधा-सा मतलब है कि अब लोग पहले से कहीं ज्यादा समय तक खुद को जवां, स्वस्थ और खुशहाल महसूस करते हैं.

डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने काशी के लोकतंत्र सेनानियों का किया सम्मान, आपातकाल प्रदर्शनी का उद्घाटन...
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वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी की ओर से शुक्रवार को जगतपुर स्थित गोकुलधाम में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले काशी क्षेत्र के लोकतंत्र सेनानियों और मीसा बंदियों को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया तथा आपातकाल के दौर को दर्शाती विशेष चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया.अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र मीडिया, जागरूक नागरिकों और संविधान के प्रति निष्ठा में निहित है. उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता. उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सशक्त करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस दौरान उन्होंने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर बल दिया.कार्यक्रम के समापन पर ब्रजेश पाठक मंच से उतरकर लोकतंत्र सेनानियों से व्यक्तिगत रूप से मिले. इस दौरान वे कई बुजुर्ग सेनानियों के पास जमीन पर बैठकर उनका हालचाल जानने पहुंचे. उनके इस व्यवहार की उपस्थित लोगों ने सराहना की.ALSO READ:काशी लाया गया कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सूरज हेगड़े का अस्थि कलश, गंगा में विसर्जित...महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर प्रहार किया गया था. उन्होंने कहा कि उस समय अनेक विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दौर में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया.समारोह में लोकतंत्र सेनानियों का माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया गया.
काशी लाया गया कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सूरज हेगड़े का अस्थि कलश, गंगा में विसर्जित...
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वाराणसी : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव एवं कर्नाटक सरकार में दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री रहे सूरज हेगड़े के आकस्मिक निधन के बाद पूरे कांग्रेस परिवार में शोक की लहर है. उनके निधन को कांग्रेस संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है. इसी क्रम में शुक्रवार को उनके परिजन स्व. सूरज हेगड़े का अस्थि कलश लेकर काशी पहुंचे, जहां सनातन परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक विधि-विधान के बीच मां गंगा की पावन गोद में उनका अस्थि विसर्जन किया गया. अस्थि विसर्जन के दौरान उपस्थित कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने स्व. सूरज हेगड़े को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की. पूरे वातावरण में श्रद्धा, भावुकता और शोक का माहौल देखने को मिला.महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे परिजनों के साथ मौजूद रहे. उन्होंने स्व. सूरज हेगड़े को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सचिव सूरज हेगड़े जी का निधन केवल कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति है. सूरज हेगड़े जी कांग्रेस के समर्पित, कर्मठ और दूरदर्शी नेता थे. उन्होंने एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और अपनी मेहनत, संगठन के प्रति निष्ठा तथा नेतृत्व क्षमता के बल पर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे.उन्होंने भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी सहित संगठन के अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और शीर्ष नेतृत्व के विश्वासपात्र नेताओं में शामिल रहे. राहुल गांधी के भी वे बेहद करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे. सूरज हेगड़े का असमय निधन कांग्रेस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है. उनका व्यक्तित्व प्रेरणादायी था और वे हमेशा कार्यकर्ताओं का सम्मान करते थे. संगठन को मजबूत बनाने के लिए उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा. वाराणसी सहित पूरे देश का कांग्रेस परिवार इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों के साथ मजबूती से खड़ा है. हम बाबा विश्वनाथ जी से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा उनके परिवार को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति और संबल प्रदान करें. इस दौरान महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, महानगर अध्यक्ष युवा कांग्रेस चंचल शर्मा, रोहित दुबे, किशन यादव, विनीत चौबे, परवेज़ ख़ान, अनुभव राय, रामजी गुप्ता आदि लोग उपस्थित रहे.ALSO READ : काशी में श्री जगन्नाथ महाप्रभु स्नान यात्रा के बाद अस्‍वस्‍थ, भव्य रथयात्रा महोत्सव की तैयारियां तेज...
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वाराणसी : अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की पावन स्नान यात्रा के उपरांत 14 दिनों तक चलने वाली अनवसर लीला का शुभारंभ हो गया है. मान्यता के अनुसार इस दौरान भगवान अस्वस्थ होने के कारण श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं देते और विशेष सेवा-पूजन किया जाता है. इसके साथ ही आगामी भव्य रथयात्रा महोत्सव-2026 की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं.शुक्रवार को श्री जगन्नाथ जी ट्रस्ट के अध्‍यक्ष ब्रिजेश सिंह ने मीडिया को बताया कि काशी भारत की प्राचीनतम सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक नगरी है, जहां सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराएं आज भी जीवंत हैं. काशी को धर्म की राजधानी कहा जाता है और यहां स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है.श्री जगन्नाथ महाप्रभु भगवान विष्णु का दिव्य स्वरूप माने जाते हैं. ओडिशा के पुरी धाम के साथ-साथ काशी में भी उनकी आराधना सदियों से श्रद्धा और परंपरा के साथ की जाती है. यहां श्री जगन्नाथ मंदिर को श्रीक्षेत्र पुरी धाम का प्रतीक स्वरूप माना जाता है, जहां भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना होती है. ट्रस्ट ने बताया कि ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार काशी में भगवान श्री जगन्नाथ की दिव्य प्रतिमा की प्रतिष्ठा वर्ष 1790 ईस्वी में हुई थी तथा इसके बाद से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.ALSO READ : अमरनाथ यात्रा में मिलेगा बनारसी स्‍वाद, काशी के सेवादार संभालेंगे भंडारे की कमान...वर्ष 1802 से यहां लगातार श्री जगन्नाथ रथयात्रा मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसे शताब्दियों पुरानी परंपरा के रूप में आज भी श्रद्धा, सेवा और भक्ति भाव के साथ निभाया जा रहा है. हर वर्ष अनवसर लीला के उपरांत भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा भव्य रथ पर आरूढ़ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं. यह रथयात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और सनातन आस्था का भव्य उत्सव भी मानी जाती है. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत, विद्वान एवं काशीवासी शामिल होकर दिव्यता, एकता और सांस्कृतिक गौरव का अनुभव करते हैं.