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जापान जाने से पहले काशी पहुंचा नेपाली युवक, समाजसेवी ने बचाई जिंदगी

जापान जाने से पहले काशी पहुंचा नेपाली युवक, समाजसेवी ने बचाई जिंदगी
May 14, 2026, 11:25 AM
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Posted By Preeti Kumari

Nepali youth reached Kashi before going to Japan, social worker saved his life


वाराणसी: जापान में नौकरी का सपना लेकर नेपाल के काठमांडू से निकला एक युवक वाराणसी में लावारिस हालत में मिला. आध्यात्मिक यात्रा पर निकले युवक के साथ ऐसी घटना हुई कि उसका करियर दांव पर लग गया. हालांकि काशी में उसे इंसानियत का ऐसा सहारा मिला, जिसने मुश्किल वक्त में उसकी जिंदगी संभाल ली. काठमांडू निवासी निरंजन पांडेय का चयन जापान की एक एयरपोर्ट निर्माण कंपनी में हुआ था. 14 मई को उनका इंटरव्यू तय था. जापान रवाना होने से पहले वह मिर्जापुर के सक्तेशगढ़ स्थित स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के आश्रम में दर्शन करने पहुंचे थे. यथार्थ गीता से प्रभावित होकर उन्होंने यह यात्रा तय की थी.


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नशीला पदार्थ खिलाकर लूटा


दर्शन के बाद वह वाराणसी लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक ऑटो चालक ने कथित तौर पर उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर उनका बैग और मोबाइल लूट लिया. इसके बाद निरंजन दारानगर इलाके में अचेत अवस्था में मिले. होश आने पर उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह ठीक से कुछ बता भी नहीं पा रहे थे. काफी देर तक वह महामृत्युंजय मंदिर के पास गुमसुम बैठे रहे. इसी दौरान असहाय लोगों की मदद करने वाले समाजसेवी अमन कबीर की नजर उन पर पड़ी. उन्होंने युवक को सहारा दिया और अपने साथ ले जाकर देखभाल शुरू की. स्थिति सामान्य होने पर निरंजन को जैतपुरा थाने ले जाया गया, जहां उन्होंने किसी तरह अपने बड़े भाई चित्र पांडेय का ईमेल पुलिस को दिया. पुलिस ने संपर्क किया तो चित्र पांडेय तुरंत बेंगलुरु से वाराणसी पहुंचे. अमन कबीर ने तब तक निरंजन को सारनाथ के हिरामनपुर स्थित काशी कुष्ठ सेवा संघ में रखा और उनकी सेवा करते रहे.


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इंसानियत आज भी जिंदा है


भाई से मिलते ही दोनों भावुक हो गए. चित्र पांडेय ने अमन कबीर का आभार जताते हुए कहा कि मुश्किल समय में जिस तरह उन्होंने मदद की, वह जिंदगी भर नहीं भूलेंगे. उन्होंने बताया कि पिता मोहनराज पांडेय काठमांडू में शिक्षक रह चुके हैं, जबकि मां गृहणी हैं. छोटा भाई निरंजन अपने करियर की नई शुरुआत करने वाला था.


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लेकिन इस घटना के कारण उसका जापान जाने का सपना फिलहाल टूट गया. गुरुवार को दोनों भाई सारनाथ घूमने के बाद नेपाल के लिए रवाना हो गए. यह घटना एक तरफ अपराध की सच्चाई दिखाती है, तो दूसरी ओर यह भी बताती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है.

सीवर,सड़क,पानी की समस्या बन गई बजरंग नगर की पहचान, लोग घर छोड़ने को मजबूर...
सीवर,सड़क,पानी की समस्या बन गई बजरंग नगर की पहचान, लोग घर छोड़ने को मजबूर...
वाराणसी : बजरंग नगर एक समय फल-सब्जी मंडी और दुकानों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यह इलाका बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है.स्थानीय निवासी बता रहे हैं कि यहां की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग घर ताले लगाकर या बेचकर जा रहे हैं. जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हैं, वे मजबूरी में यहीं रहने को विवश हैं.सड़कें और सीवर की बदहालीविनय कुमार सिंह के अनुसार मोहल्ले की 10 से ज्यादा गलियों की हालत बेहद खराब है. ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर दोपहिया वाहन चलाना भी मुश्किल हो गया है, चार पहिया वाहनों की तो बात ही छोड़ दें. ऊंचे सीवर चैंबर राहगीरों के लिए बड़े खतरे बन गए हैं.बचाऊलाल विश्वकर्मा ने बताया कि सामान्य दिनों में तो जैसे-तैसे जिंदगी कट जाती है, लेकिन बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए सजा बन जाता है. जलजमाव के कारण लोग घरों में कैद हो जाते हैं और स्थानीय व्यापार पूरी तरह चौपट हो जाता है.मुख्य सीवर लाइन टूटने का मामलागणेश कुमार चौबे और रमेश चौबे ने बताया कि जब लोहता बाजार में मुख्य सड़क बन रही थी, तब लापरवाही के चलते बजरंग नगर की सीवर पाइपलाइन कई जगहों से टूट गई और कनेक्टिविटी बंद हो गई. बाद में विभाग ने मोहल्ले के एक हिस्से में नई पाइपलाइन बिछाई, लेकिन वह भी कम क्षमता की थी और जल्दी चोक हो गई.सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि आधे से ज्यादा मोहल्ला अभी भी सीवर नेटवर्क से वंचित है. गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। ऊंचे सीवर चैंबर आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं. शफीउर्रहमान ने बताया कि बरसात में सीवेज और बारिश का पानी घरों में घुस जाता है. सड़कों पर कूड़ा फेंकने की मजबूरी है क्योंकि सफाईकर्मी भी नियमित नहीं आते.बिजली के लटकते तारों का खतरापवन कुमार चौबे ने बिजली के तारों की समस्या पर ध्यान दिलाया.उन्होंने कहा कि पर्याप्त खंभे न होने से तार लोगों के सिर के ऊपर लटक रहे हैं.कई जगह तार घरों की खिड़कियों और दीवारों से सटकर गुजर रहे हैं.संतोष विश्वकर्मा ने कहा हर पल किसी अनहोनी का डर रहता है.उर्मिला देवी ने बताया कि बरसात में ये लटकते और उलझे तार और भी खतरनाक हो जाते हैं. चिंगारियां निकलने का खतरा बना रहता है.ALSO READ : तेजाबी हमले के दर्द को दिया सुर, काशी की ‘काशी की स्‍वर कोकिला’ को मिला पद्मश्री सम्‍मान...पानी की समस्याजयप्रकाश सिंह ने गर्मी के मौसम में पानी की कमी बताई. पाइपलाइन में प्रेशर इतना कम रहता है कि एक बाल्टी पानी भरने में लंबा इंतजार करना पड़ता है. पवन कुमार चौबे ने कहा कि समस्या सिर्फ प्रेशर की नहीं है, बारिश शुरू होते ही पाइपलाइन का पानी बदबूदार और दूषित हो जाता है, जो पीने लायक तो दूर, किसी काम का भी नहीं रहता.स्थानीय लोग अब प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं.उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सड़क, सीवर, पानी और बिजली की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो यह मोहल्ला जल्द ही पूरी तरह उजड़ सकता है.
तेजाबी हमले के दर्द को दिया सुर,‘काशी की स्‍वर कोकिला’ को मिला पद्मश्री सम्‍मान...
तेजाबी हमले के दर्द को दिया सुर,‘काशी की स्‍वर कोकिला’ को मिला पद्मश्री सम्‍मान...
वाराणसी : वक्‍त है कांटों की सेज तो कभी फूलों का ताज.जी हां, तेजाब हमले ने उनका चेहरा झुलसा दिया था, समाज ने ताने दिए, स्कूल ने ठुकराया और जिंदगी ने बार-बार कठिन इम्तिहान के दौर से गुजारा. वाबजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने दर्द को सुरों में ढाल दिया और आज वही स्‍वर उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री तक ले आए.बात हो रही है भारतीय शास्त्रीय संगीत की वरिष्ठ गायिका और “काशी की लता” के नाम से प्रसिद्ध मंगला कपूर की जिन्‍हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है.यह सम्मान केवल उनकी संगीत साधना का नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष का भी सम्मान है जिसने उन्हें लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना दिया. यह सम्मान पाकर भावुक हुई मंगला कपूर ने कहा, “मैं अपनी खुशी को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती. मेरे जैसी महिला के लिए पद्मश्री तक पहुंचना कितना कठिन रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने हर मुश्किल समय में मेरा साथ दिया.”12 साल की उम्र में बदल गई पूरी जिंदगीउनकी जिंदगी का सबसे भयावह अध्याय तब शुरू हुआ जब वह मात्र 12 वर्ष की थीं. पारिवारिक व्यावसायिक रंजिश के चलते उन पर तेजाब से हमला कराया गया. जांच में सामने आया कि इस साजिश को घर के एक नौकर के माध्यम से अंजाम दिया गया था. इस हमले ने न केवल उनका चेहरा और शरीर बुरी तरह झुलसाया बल्कि अगले छह वर्षों तक अस्पताल, ऑपरेशन थिएटर और इलाज ही उनकी दुनिया बन गए. शारीरिक पीड़ा से भी अधिक उन्हें मानसिक और सामाजिक पीड़ा ने तोड़ा. आज भी उस घटना को याद करते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं. “जब भी उस दिन को याद करती हूं, आंखों में आंसू आ जाते हैं और पूरा शरीर सिहर उठता है.”जख्म केवल शरीर पर नहीं, आत्मा पर भी लगेएसिड अटैक के बाद समाज का व्यवहार उनके लिए दूसरी बड़ी परीक्षा बन गया. कई लोगों ने सहानुभूति देने के बजाय उन्हें ही दोषी मानने जैसा व्यवहार किया. लगातार सर्जरी के बाद जब उनका चेहरा कुछ सामान्य हुआ तो पिता ने उन्हें दोबारा स्कूल भेजा, लेकिन वहां भी उन्हें संवेदनशीलता नहीं मिली. आठवीं कक्षा में सहपाठियों ने उनका मजाक उड़ाया। यह घटना उनके लिए असहनीय साबित हुई.“मैं पसीने से भीगकर वहीं गिर पड़ी. उसके बाद फिर कभी स्कूल जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई.” बाद में उन्होंने घर से ही पढ़ाई जारी रखी और बारहवीं तक की शिक्षा पूरी की. इस पूरे संघर्ष में उनके पिता उनका सबसे बड़ा संबल बने. उन्होंने बेटी को हमेशा यह विश्वास दिलाया कि इस हादसे में उसकी कोई गलती नहीं थी.37 सर्जरी… फिर भी नहीं टूटी उम्‍मीदअब तक मंगला कपूर 37 बड़ी सर्जरी करवा चुकी हैं. दर्द, इलाज और सामाजिक उपेक्षा के लंबे दौर के बावजूद उन्होंने जीवन से समझौता नहीं किया. उन्होंने संगीत को अपना सहारा बनाया. उनके लिए संगीत केवल कला नहीं रहा, बल्कि जीवन को दोबारा जीने की वजह बन गया. “संगीत ने मुझे जीने की नई ऊर्जा दी. आत्मविश्वास लौटाया. मेरे लिए संगीत ही संजीवनी और उम्‍मीद बनी.”मंदिर के भजन से शुरू हुआ सुनहरे सफर का पहला सुरकॉलेज के दिनों में एक मंदिर में भजन गाते समय पहली बार लोगों ने उनकी आवाज की असाधारण मिठास को महसूस किया. उनकी गायकी ने श्रोताओं को इतना प्रभावित किया कि धीरे-धीरे उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतिष्ठित मंचों पर आमंत्रित किया जाने लगा. समय के साथ उनकी पहचान उनके चेहरे से नहीं, बल्कि उनकी आवाज से बनने लगी. यही आवाज उन्हें देशभर के प्रतिष्ठित संगीत समारोहों तक ले गई और वह भारतीय शास्त्रीय संगीत की सम्मानित हस्ती बन गईं.ALSO READ : गंगा में नाव पर नानवेज पार्टी करने वाले पांच आरोपियों को मिली जमानत...तीन दशक तक बीएचयू में तैयार की संगीत की नई पीढ़ीग्वालियर घराने की सुप्रसिद्ध गायिका मंगला कपूर ने वर्ष 1989 में बीएचयू के संगीत विभाग में अध्यापन कार्य शुरू किया. लगभग 30 वर्षों तक उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी. शिक्षण के साथ-साथ उन्होंने देशभर के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. संगीत के अलावा वह दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए भी लगातार कार्य करती रही हैं और लेखन के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही हैं.
गंगा में नाव पर नानवेज पार्टी करने वाले पांच आरोपियों को मिली जमानत...
गंगा में नाव पर नानवेज पार्टी करने वाले पांच आरोपियों को मिली जमानत...
वाराणसी : मान मंदिर घाट के पास गंगा में नानवेज पार्टी और शराब पीने के मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को कोर्ट से राहत मिल गई. कार्यपालक मजिस्ट्रेट/सहायक पुलिस आयुक्त तृतीय की अदालत ने सूजाबाद पड़ाव, थाना रामनगर निवासी दीपक कुमार, नाव चालक अजय साहनी, डोमरी, रामनगर, वाराणसी के अरुण कुमार साहनी, अनुराग निषाद, बंधा रोड, सूजाबाद, रामनगर निवासी राहुल साहनी को 20-20 हजार रुपए की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया. अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने पक्ष रखा.प्रकरण के अनुसार पतित पावनी मां गंगा में नानवेज पार्टी और शराब पीने का वीडियो बीते सोमवार देर शाम इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद श्रद्धालु नाराज हो उठे. पुलिस की सर्विलांस टीम ने वीडियो देखा तो आनन-फानन में पांच आरोपितों की पहचान कर सभी पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया. नाव को भी पुलिस ने सीज कर दिया है. सहायक पुलिस आयुक्त डा. अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि वीडियो जांच में मान मंदिर घाट पर वना वीडियो छह माह पुराना निकला.ALSO READ : निजी हॉस्पिटल के फर्जी लिंक से 2.67 लाख की ठगी, पुलिस जांच में जुटी...वीडियो में दिख रहे लोग सूजाबाद पड़ाव, थाना रामनगर निवासी दीपक कुमार, नाव चालक अजय साहनी, डोमरी, रामनगर, वाराणसी के अरुण कुमार साहनी, अनुराग निषाद, बंधा रोड, सूजाबाद, रामनगर निवासी राहुल साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया. बतादें कि बीते 16 मार्च को गंगा में इसी तरह का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था. कोतवाली पुलिस ने दूसरे ही दिन 17 मार्च को 14 मुस्लिम युक्कों को गिरफ्तार किया था. उस मामले में आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी.