कफ सीरप के सरगना शुभम की पत्नी से की शराब की दुकान का लाइसेंस निरस्त, चार मामले विचाराधीन

The wife of cough syrup kingpin Shubham has had her liquor shop license revoked; four cases are pending.
वाराणसी: कफ सीरप तस्करी प्रकरण के सरगना शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली व उसके ग्रुप से जुड़ी लाइसेंसी रेखा देवी की दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है. लाटरी में दोनों दुकानों में एक का लाइसेंस कोटवा निवासी देवेंद्र सिंह व नवापुरा की रेखा यादव को मिला है. नीलामी प्रक्रिया से आबकारी विभाग को पांच करोड़ 27 लाख रुपये से ज्यादा की धनराशि अर्जित हुई है. कफ सीरप प्रकरण से जुड़े चार अन्य लाइसेंसियों की शराब दुकान से जुड़ा मामला जिलाधिकारी के यहां विचाराधीन है. शराब की चार दुकानों के बंद होने से आबकारी विभाग को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है.

दो हजार करोड़ रुपये के कफ सीरप तस्करी मामले में बीते 12 अप्रैल को आबकारी विभाग व पुलिस की टीम ने दारानगर निवासी वैभव जायसवाल की पत्नी शिवांगी जायसवाल की कंपोजिट शाप लहरतारा, कायस्थटोला राजघाट निवासी रेखा देवी की कंपोजिट शाप शाहाबाद, कायस्थ टोला राजघाट निवासी बबिता सिंह की कंपोजिट शाप परेड कोठी, कायस्थ टोला राजघाट निवासी शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली की कंपोजिट शाप माधोपुर, भारद्वाजी टोला राजघाट की ऊषा देवी की कंपोजिट शाप कज्जाकपुरा व दारानगर की राधिका जायसवाल की कंपोजिट शाप खोजवां पहुंच दुकानों को सील करने की कार्रवाई की थी.

शराब की कमाई शुभम पर लुटाई
कार्रवाई के दायरे में आए शराब लाइसेंसियों पर शराब दुकानों से होने वाली कमाई का एक निर्धारित हिस्सा दुबई में छिपे कफ सीरप तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल तक हवाला के जरिए वैभव जायसवाल द्वारा पहुंचाने का आरोप लगा था. इन लाइसेंसियों का एक समझौता पत्र भी पुलिस को मिला था, जिसमें शराब दुकानों से होने वाली कमाई का एक निर्धारित हिस्सा शुभम को भेजा जाना था. पुलिस लाइसेसियों के खिलाफ लिखा-पढ़ी तेज की तो पता चला कि शुभम की पत्नी वैशाली व रेखा देवी का लाइसेंस नवीनीकृत नहीं हुआ है.

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ऐसे में आबकारी विभाग ने दोनों लाइसेंस को निरस्त करते हुए लाटरी निकाली तो 812 लोगों ने भाग लिया, जिसमें देवेंद्र सिंह व रेखा यादव के नाम लाटरी निकली. जिला आबकारी अधिकारी कमल किशोर शुक्ल ने बताया कि शेष चार दुकानों का मामला जिलाधिकारी के यहां विचाराधीन हैं. एसीपी विजय प्रताप सिह ने बताया कि शराब के लाइसेंसी दुकान लेने से पूर्व एक शपथपत्र भरते हैं. लाइसेंसियों को वचनबद्ध किया जाता है कि उनका किसी माफिया या संगठित अपराध में संलिप्तता सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी.




