अवारा कुत्तों पर कोर्ट में सुनवाई, कपिल सिब्बल ने दी गजब की दलील

सुप्रीम कोर्ट ने आज अवारा कुत्तों के मामले में एक बड़ी सुनवाई की है. इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब भी कोई जानवर किसी को काटने के मूड में होता है, तो उसके इस भयानक व्यवहार को कोई भी शख्स समझ नहीं पाता है. इसी बात पर कपिल सिब्बल ने आवारा कुत्तों के पक्ष में कहा, ‘उत्तर प्रदेश में इससे कुत्तों की आबादी लगभग शून्य तक आ गई है. खास बात तो यह है कि यूपी में आवारा कुत्तों की आबादी को सफलतापूर्वक कम करने का सबसे अच्छा तरीका CSVR मॉडल है जिसे लागू किया गया है. जो विश्व स्तर पर स्वीकृत है. इसे सरल शब्दों में जाने तो पकड़ो, नसबंदी करो, टीका लगाओ, छोड़ दो कहते हैं. इसने उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कुत्तों की आबादी को कम करने का काम किया है, इसी के आगे सिब्बल ने कहा अगर हमारे पास ऐसे कुत्ते हो, जिन्हें रेबीज है और जिन्हें नहीं है, ऐसे में एक ही शेल्टर में इन्हें रखा जाएं तो सभी को रेबीज हो सकता.

हालांकि, कुत्ते के काटने की आशंका होने पर उसे सेंटर बुलाकर पकड़वाया जाता है. लेकिन आज तक मुझे किसी भी कुत्ते ने नहीं काटा है. यह बात सुनते ही सुप्रीम कोर्ट के जज साहब ने उन्हें ये जवाब दिया कि आप बहुत भाग्यशाली हैं. पर अफसोस ये अवारा कुत्ते लोगों और बच्चों, किसी को भी अपना निशाना बनाने में जरा भी देर नहीं करते है. इसलिए सड़कों को कुत्तों से साफ और खाली रखना होगा. हो सकता है वे काटें नहीं, लेकिन फिर भी वे हादसों की वजह बनते हैं.

सिब्बल पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान कहा कि मुद्दा सिर्फ काटने का नहीं है. कुत्ते पीछा करते हैं, दौड़ते हैं और इससे सड़क दुर्घटनाएं होती हैं. चलती गाड़ियों वाली सड़कों पर यह एक बड़ी समस्या है. जब सिब्बल ने कहा कि कुत्ते सड़कों पर नहीं, बल्कि परिसरों में होते हैं, तो कोर्ट ने सख्त प्रतिक्रिया दी. कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या आप गंभीर हैं? आपकी जानकारी पुरानी लगती है.

आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश पर कोर्ट की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने आज कोर्ट में बीते 7 नवंबर के उस आदेश को दोहराया जिसमें स्कूलों अस्पतालों और अन्य संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश भी दिए गए थे. जहां कोर्ट ने साफ तौर पर ये कहा कि पकड़े गए कुत्तों को उसी स्थान पर दोबारा नहीं छोड़ा जाएगा. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कुत्तों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार का मुद्दा उठाया. जहां सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ लोग कुत्तों के लिए और कुछ इंसानों के लिए पेश हो रहे हैं.

वहीं एमिकस क्यूरी ने बताया कि पशु कल्याण बोर्ड ने राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा जानवर हटाने के लिए एसओपी जारी कर दी है. कोर्ट को ये बताया गया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक ने अब तक अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं किया है.



