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कांच में रचा-बसा काशी का कला संसार : काशी तमिल संगमम में चमकते मनके

कांच में रचा-बसा काशी का कला संसार : काशी तमिल संगमम में चमकते मनके
Dec 09, 2025, 12:20 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : महादेव की नगरी काशी सदियों से कला, संस्कृति और विरासत की साक्षी रही है. इसी विरासत की अनमोल धरोहर—कांच के मनकों की कला—आज भी यहां के कारीगरों की मेहनत और कौशल से जीवित है. काशी तमिल संगमम 4.0 में लगे स्टॉल नंबर 11 पर यह कला नई चमक के साथ लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है.

स्टॉल के स्वामी बाबूलाल बताते हैं कि चेन्नई और तमिलनाडु के अन्य शहरों से आए आगंतुक उनके कांच से बने खिलौनों और मनकों को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. वे न केवल इन्हें बनते हुए देखने में दिलचस्पी ले रहे हैं, बल्कि बड़ी संख्या में खरीद भी रहे हैं. उनके चेहरे की मुस्कान उनकी कला की सफलता की कहानी खुद बयां करती है.


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बाबूलाल कहते हैं कि यह कला धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही थी, लेकिन सरकार द्वारा दिए गए इस मंच ने हमें इसे बचाए रखने की नई उम्मीद दी है. वे आगे कहते हैं कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत की यह पहल न केवल सांस्कृतिक सेतु बना रही है बल्कि उनके व्यापार को भी नई दिशा और गति दे रही है. पहले यह कला सीमित दायरे तक ही जानी जाती थी, लेकिन अब यह तमिलनाडु तक पहुँच रही है. इससे उन्हें अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाज़ार मिलने की उम्मीद है.


कांच के मनकों का ऐतिहासिक वैभव


वाराणसी का कांच शिल्प भारत की भौगोलिक विशेष पहचान (जीआई टैग) प्राप्त कलाओं में से आता है. यह सिर्फ कांच को आकार देना नहीं बल्कि कारीगर की पीढ़ियों से मिली महारत और रचनात्मकता का सुंदर संगम है. कांच के मनके पिघले हुए कांच को ऊंचे तापमान पर ढालकर बनाए जाते हैं. लकड़ी के ईंधन से 600 से 750 डिग्री सेल्सियस तक गर्म पॉट फर्नेस में कांच पिघलाया जाता है. फिर इसे लोहे की छड़ पर लपेटकर मनचाहे आकार में ढाला जाता है.

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खास बात यह है कि खोखले कांच के मोती मुंह से फूंकने की पारंपरिक तकनीक से बनाए जाते हैं. शिल्पकार खोखली धातु की नली में हवा भरकर कांच को खूबसूरत रूप देता है. यह कला धैर्य, कौशल और अनुभव की परख मांगती है. आकार देने के बाद इन्हें धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है ताकि मनके मजबूत बने रहें और टूटने की संभावना कम हो. अंत में चिकनाई और चमक लाने के लिए पॉलिशिंग की विभिन्न प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं. यही बारीकियाँ इन्हें विश्वभर में लोकप्रिय बनाती हैं.


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सांस्कृतिक एकता का चमकता प्रतीक


काशी तमिल संगमम ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि परंपराएँ केवल कला नहीं होतीं वे भावनाएँ होती हैं जो लोगों को जोड़ती हैं. तमिलनाडु के लोग जब काशी के कांच कला को देखते हैं, उसे छूते हैं और अपने घर ले जाते हैं, तो केवल एक वस्तु नहीं बल्कि दो संस्कृतियों के बीच का बंधन साथ ले जाते हैं.

कांच के इन रंगीन खिलौनों और मनकों में काशी का इतिहास, कारीगरों की मेहनत और भारत की विविध संस्कृति झलकती है. संगमम में इन्हें मिल रहा प्यार इस बात का प्रमाण है कि भारतीय कला चाहे कितनी भी पुरानी हो, उसका आकर्षण सदाबहार है. काशी के ये चमकते मोती एक संदेश देते हैं कला जिंदा है, परंपरा जिंदा है, और एक भारत-श्रेष्ठ भारत का सपना भी जिंदा है.

33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में ‘GenZ For BHU’ छात्र आंदोलन के तहत सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने 33 पेड़ों की कटाई, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने और छात्रों के साथ कथित मारपीट को लेकर कार्रवाई की मांग की।छात्र प्रतिनिधिमंडल में सत्यम सिंह, रवि सिंह, अमन मौर्य, विवर्त सिंह समेत अन्य छात्र शामिल रहे। छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से पेड़ों की कटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।छात्रों की प्रमुख मांगों में U.P. Trees Protection Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराना शामिल है। छात्रों ने यह भी मांग की कि NGT द्वारा लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि छात्र फंड से नहीं वसूली जाए। उनका कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की जानी चाहिए।इसके अलावा छात्रों ने कुलपति से मिलने गए छात्र-छात्राओं के साथ कथित मारपीट के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्र प्रतिनिधियों ने अपने खिलाफ गठित कमेटियों और जारी नोटिस को भी वापस लेने की मांग की है।ALSO READ : बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयनपरिसर में पेड़ों की जियो-टैगिंग की मांगछात्रों ने बीएचयू परिसर के सभी पेड़ों का ट्री सेंसस कराने, उनकी जियो-टैगिंग करने और पेड़ों की निगरानी के लिए ‘ट्री मॉनिटरिंग समिति’ गठित करने की मांग भी रखी।छात्रों का कहना है कि परिसर में पर्यावरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के छात्र दुर्गेश यादव का ज़ी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा 2026’ के लिए चयन हुआ है। शो का प्रसारण 19 सितंबर 2026 से ज़ी टीवी पर शुरू हो चुका है।उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के महलीपुर गांव निवासी दुर्गेश यादव, श्री इंद्रजीत यादव और श्रीमती कौशिल्या देवी के पुत्र हैं। उन्होंने बीएचयू से वर्ष 2020-23 में बीपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) और 2023-25 में एमपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह संगीत एवं मंच कला संकाय में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप कर रहे हैं।दुर्गेश यादव ने पं. गिरजा शंकर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शास्त्रीय संगीत की इसी पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।उनके ‘सा रे गा मा पा 2026’ में चयन पर संगीत एवं मंच कला संकाय की संकाय प्रमुख एवं गायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप के समन्वयक प्रो. राम शंकर, प्रो. ज्ञानेश चंद्र पांडेय सहित अन्य संकाय सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।ALSO READ : बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंकबीएचयू से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो में चयन होने से विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में भी उत्साह का माहौल है।
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
वाराणसी : बेनियाबाग चौराहे से हड़हा सराय मार्केट तक सोमवार को नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया. टीम ने सड़क पर दुकान लगाकर और अन्य तरीकों से किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए मार्ग को कब्जामुक्त कराया. कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों की प्रवर्तन टीम से नोकझोंक भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल के चलते स्थिति नियंत्रित रही.अभियान के दौरान सड़क पर दुकान लगाकर रखा गया सामान नगर निगम की टीम ने वाहनों में लादकर हटाया. सड़क किनारे गिट्टी, बालू और ईंट रखकर बिक्री किए जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था. इसके अलावा सड़क पर अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी. नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे पार्षद इंद्रेश सिंह ने बताया कि बेनियाबाग क्षेत्र में सड़क जाम और अतिक्रमण की शिकायतों के बाद यह अभियान चलाया गया.ALSO READ : सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक, बोले डीएम- किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाएउन्होंने कहा कि सड़क पर कब्जे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी. अतिक्रमण हटने से यातायात सुगम होगा और स्थानीय लोगों को अपने घरों तकपहुंचने में भी सुविधा मिलेगी. पार्षद ने कहा कि हड़हा सराय मार्केट तक आवागमन सुचारु रहने से व्यापारिक गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी और ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी. नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न करने की हिदायत भी दी.