काशी बनी ट्रैफिक की प्रयोगशाला, 21 तिराहों और चौराहों पर टाइमर सिग्नल की तैयारी

Kashi becomes a traffic laboratory, with timer signals being installed at 21 intersections and crossroads.
वाराणसी: महादेव की नगरी काशी में ट्रैफिक का संचालन भगवान भरोसे है. ऐसा इसलिए कि क्योंकि यह समस्या आज की नहीं बल्कि दशकों पुरानी हो चुकी है. समय समय पर अधिकारी ट्रैफिक पर प्रयोग करते रहे लेकिन व्यवस्था पटरी पर नहीं आई. कई अधिकारी आए और गए और सभी ने अपने अपने तरीके से यातायात व्यवस्था को हैंडल करने की कोशिश की. हाल यह हुआ कि काशी ट्रैफिक की प्रयोगशाला बन कर रह गई. इसी क्रम में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए 21 तिराहों और चौराहों पर टाइमर युक्त ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाने की कवायद चल रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि ये सिग्नल तिराहों-चौराहों पर वाहनों की गति को बढ़ाने में सहायक होंगे.

जानकारों का कहना है कि जब ट्रैफिक सिग्नल रेड होगा, तब ग्रीन होने के लिए निर्धारित समय का काउंटडाउन टाइमर स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा, जिससे अधिकांश लोग अपने वाहनों को रोक देंगे. इस प्रक्रिया से शहर में लगभग दो लाख वाहन औसतन 40-50 सेकंड के लिए रुकेंगे, जिससे बनारस में प्रदूषण का स्तर नियंत्रित किया जा सकेगा.

परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी
नगर निगम ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे यह योजना जल्द ही धरातल पर उतरेगी. काशी, जो एक प्रमुख पर्यटन और सांस्कृतिक नगरी है, में पिछले कुछ वर्षों में भीड़ का रेला तेजी से बढ़ा है. इसका प्रभाव यातायात व्यवस्था और पर्यावरण दोनों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है. प्रमुख चौराहों और तिराहों पर टाइमर सिग्नल की अनुपस्थिति के कारण अक्सर जाम की स्थिति उत्पन्न होती है. कई बार लोग ट्रैफिक सिग्नल लाल होने पर भी निकलने की कोशिश करते हैं, जबकि ग्रीन सिग्नल होने पर जल्दी निकलने की होड़ में जाम की स्थिति बन जाती है.
Also Read: भक्तों के लिए खुल गए केदारनाथ धाम के कपाट, यात्रा से पहले जान लें ये जरूरी बातें

सुबह सात से रात 11 बजे रहेगा क्रियाशील
ट्रैफिक टाइमर सिग्नल की स्थापना से यातायात की गति में सुधार होगा. यह सिग्नल सुबह सात बजे से रात 11 बजे तक सक्रिय रहेंगे. इस 16 घंटे की अवधि में ट्रैफिक के जवान दो शिफ्ट में (सुबह सात से तीन बजे और तीन से रात 11 बजे तक) ड्यूटी करेंगे. इस दौरान शहर में लगभग दो लाख वाहनों की आवाजाही होती है. यदि सभी वाहन 16 घंटों में से छह घंटे धुआं नहीं उड़ाते हैं, तो इससे शहर में डीजल और पेट्रोल के धुएं से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी.

इन स्थानों पर का चयन
टाइमर युक्त ट्रैफिक सिग्नल कुछ प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे. इनमें मलदहिया चौराहा, मरीमाई तिराहा, अंधरापुल, आशियाना तिराहा, चौकाघाट चौराहा, गोलगड्डा तिराहा, आकाशवाणी तिराहा, सिगरा चौराहा, साजन तिराहा, रथयात्रा चौराहा, पांडेयपुर चौराहा, लहरतारा चौराहा, चेतमणि चौराहा, पद्मश्री चौराहा, कालीमाता मंदिर चौराहा, मंडुवाडीह चौराहा, भिखारीपुर तिराहा, चांदपुर चौराहा, रवींद्रपुरी चौराहा, और मुढैला तिराहा शामिल हैं.



