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दिग्विजय सिंह को काशी के अधिवक्ता शशांक शेखर का विधिक नोटिस, बोले—राम मंदिर का ₹1.11 लाख दान वापस चाहिए तो मैं दूंगा...

दिग्विजय सिंह को काशी के अधिवक्ता शशांक शेखर का विधिक नोटिस, बोले—राम मंदिर का ₹1.11 लाख दान वापस चाहिए तो मैं दूंगा...
Jul 06, 2026, 01:10 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दी गई ₹1 लाख 11 हजार की दान राशि वापस मांगने संबंधी मीडिया में रिपोर्ट किए गए बयान को लेकर राजनीतिक और विधिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है. भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक एवं दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को विधिक नोटिस जारी किया है.


शशांक शेखर की ओर से 5 जुलाई 2026 को जारी नोटिस रजिस्टर्ड डाक और ई-मेल के माध्यम से प्रेषित किया गया है. नोटिस की प्रतिलिपि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं महासचिव को भी भेजी गई है. इसमें दिग्विजय सिंह के उस कथित सार्वजनिक वक्तव्य का उल्लेख किया गया है, जिसमें उनके द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दी गई ₹1,11,000 की दान राशि वापस लेने और इस संबंध में न्यायालय जाने पर विचार किए जाने की बात मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है.


नोटिस में शशांक शेखर ने दान और उपहार के विधिक चरित्र का उल्लेख करते हुए संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 126 का संदर्भ दिया है. उनका कहना है कि विधिपूर्वक पूर्ण और बिना शर्त दिए गए दान को केवल दाता की इच्छा बदलने के आधार पर स्वतः वापस लेने का अधिकार उत्पन्न नहीं होता. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दान की धनराशि के कथित गबन, दुरुपयोग या किसी आपराधिक कृत्य का आरोप है तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई एक अलग विषय है.


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इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू शशांक शेखर द्वारा दिया गया व्यक्तिगत प्रस्ताव है. उन्होंने नोटिस में कहा है कि यदि दिग्विजय सिंह को वास्तव में राम मंदिर निर्माण के लिए दी गई ₹1,11,000 की राशि वापस चाहिए तो उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अथवा किसी धार्मिक संस्था से विवाद करने की आवश्यकता नहीं है. शशांक शेखर ने अपनी व्यक्तिगत और वैध आय से पूरी ₹1,11,000 की धनराशि देने की पेशकश की है.


इसके लिए उन्होंने तीन शर्तें रखी हैं. पहली, दिग्विजय सिंह अपनी मूल दान रसीद अथवा उसकी विधिवत सत्यापित प्रति प्रस्तुत करें. दूसरी, धनराशि प्राप्त करने के बाद हस्ताक्षरित प्राप्ति रसीद दें. तीसरी, यह स्पष्ट किया जाए कि ₹1,11,000 प्राप्त होने के बाद केवल इसी दान राशि की वापसी के लिए राम मंदिर अथवा संबंधित ट्रस्ट के विरुद्ध दावा करने की आवश्यकता शेष नहीं रहेगी. नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि यह प्रस्ताव किसी अन्य वैधानिक अधिकार या कथित अपराध की निष्पक्ष जांच की मांग को प्रभावित नहीं करेगा.


शशांक शेखर ने कहा, “भगवान श्रीराम किसी राजनीतिक दल के नहीं हैं. प्रभु श्रीराम राष्ट्र की आस्था, मर्यादा और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं. यदि दिग्विजय सिंह को अपनी दान राशि वास्तव में वापस चाहिए तो एक रामभक्त और अधिवक्ता के रूप में मैं व्यक्तिगत रूप से ₹1 लाख 11 हजार देने को तैयार हूं.”


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नोटिस में दिग्विजय सिंह से 15 दिनों के भीतर अधिकृत पत्र अथवा ई-मेल के जरिए प्रस्ताव पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की अपेक्षा की गई है. राशि के भुगतान के लिए पारदर्शी बैंकिंग माध्यम अपनाने की बात भी कही गई है.


शशांक शेखर ने स्पष्ट किया कि नोटिस का उद्देश्य किसी की मानहानि, अपमान या राजनीतिक विद्वेष नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किए गए वक्तव्य के संदर्भ में विधिक प्रश्न उठाना और एक स्पष्ट व्यक्तिगत प्रस्ताव रखना है. अब निगाह इस बात पर है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस विधिक नोटिस और ₹1.11 लाख की व्यक्तिगत पेशकश पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.

गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।