दिग्विजय सिंह को काशी के अधिवक्ता शशांक शेखर का विधिक नोटिस, बोले—राम मंदिर का ₹1.11 लाख दान वापस चाहिए तो मैं दूंगा...

वाराणसी : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दी गई ₹1 लाख 11 हजार की दान राशि वापस मांगने संबंधी मीडिया में रिपोर्ट किए गए बयान को लेकर राजनीतिक और विधिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है. भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक एवं दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को विधिक नोटिस जारी किया है.
शशांक शेखर की ओर से 5 जुलाई 2026 को जारी नोटिस रजिस्टर्ड डाक और ई-मेल के माध्यम से प्रेषित किया गया है. नोटिस की प्रतिलिपि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं महासचिव को भी भेजी गई है. इसमें दिग्विजय सिंह के उस कथित सार्वजनिक वक्तव्य का उल्लेख किया गया है, जिसमें उनके द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दी गई ₹1,11,000 की दान राशि वापस लेने और इस संबंध में न्यायालय जाने पर विचार किए जाने की बात मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है.
नोटिस में शशांक शेखर ने दान और उपहार के विधिक चरित्र का उल्लेख करते हुए संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 126 का संदर्भ दिया है. उनका कहना है कि विधिपूर्वक पूर्ण और बिना शर्त दिए गए दान को केवल दाता की इच्छा बदलने के आधार पर स्वतः वापस लेने का अधिकार उत्पन्न नहीं होता. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दान की धनराशि के कथित गबन, दुरुपयोग या किसी आपराधिक कृत्य का आरोप है तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई एक अलग विषय है.

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू शशांक शेखर द्वारा दिया गया व्यक्तिगत प्रस्ताव है. उन्होंने नोटिस में कहा है कि यदि दिग्विजय सिंह को वास्तव में राम मंदिर निर्माण के लिए दी गई ₹1,11,000 की राशि वापस चाहिए तो उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अथवा किसी धार्मिक संस्था से विवाद करने की आवश्यकता नहीं है. शशांक शेखर ने अपनी व्यक्तिगत और वैध आय से पूरी ₹1,11,000 की धनराशि देने की पेशकश की है.
इसके लिए उन्होंने तीन शर्तें रखी हैं. पहली, दिग्विजय सिंह अपनी मूल दान रसीद अथवा उसकी विधिवत सत्यापित प्रति प्रस्तुत करें. दूसरी, धनराशि प्राप्त करने के बाद हस्ताक्षरित प्राप्ति रसीद दें. तीसरी, यह स्पष्ट किया जाए कि ₹1,11,000 प्राप्त होने के बाद केवल इसी दान राशि की वापसी के लिए राम मंदिर अथवा संबंधित ट्रस्ट के विरुद्ध दावा करने की आवश्यकता शेष नहीं रहेगी. नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि यह प्रस्ताव किसी अन्य वैधानिक अधिकार या कथित अपराध की निष्पक्ष जांच की मांग को प्रभावित नहीं करेगा.
शशांक शेखर ने कहा, “भगवान श्रीराम किसी राजनीतिक दल के नहीं हैं. प्रभु श्रीराम राष्ट्र की आस्था, मर्यादा और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं. यदि दिग्विजय सिंह को अपनी दान राशि वास्तव में वापस चाहिए तो एक रामभक्त और अधिवक्ता के रूप में मैं व्यक्तिगत रूप से ₹1 लाख 11 हजार देने को तैयार हूं.”
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नोटिस में दिग्विजय सिंह से 15 दिनों के भीतर अधिकृत पत्र अथवा ई-मेल के जरिए प्रस्ताव पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की अपेक्षा की गई है. राशि के भुगतान के लिए पारदर्शी बैंकिंग माध्यम अपनाने की बात भी कही गई है.
शशांक शेखर ने स्पष्ट किया कि नोटिस का उद्देश्य किसी की मानहानि, अपमान या राजनीतिक विद्वेष नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किए गए वक्तव्य के संदर्भ में विधिक प्रश्न उठाना और एक स्पष्ट व्यक्तिगत प्रस्ताव रखना है. अब निगाह इस बात पर है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस विधिक नोटिस और ₹1.11 लाख की व्यक्तिगत पेशकश पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.



