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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्कूलों में प्रवेश हेतु ई-लॉटरी का आयोजन

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्कूलों में प्रवेश हेतु ई-लॉटरी का आयोजन
Apr 12, 2026, 12:57 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विज्ञान संस्थान स्थित महामना सभागार में रविवार को सत्र 2026-27 हेतु विश्वविद्यालय द्वारा संचालित तीनों विद्यालयों में प्रवेश के लिए ई-लॉटरी द्वारा चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई. इस प्रक्रिया के अंतर्गत सेंट्रल हिन्दू बॉयज़ स्कूल, सेंट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल,तथा रणवीर संस्कृत विद्यालय, की विभिन्न कक्षाओं (बाल वाटिका-2, बाल वाटिका-3, कक्षा-1 तथा कक्षा-6) में प्रवेश हेतु चयन किया गया है.


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इस कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में किया गया है. इस मौके पर विद्यालय बोर्ड की उपाध्यक्षा प्रोफेसर नंदिता घोषाल के मार्गदर्शन में ई-लॉटरी प्रक्रिया सम्पन्न हुई, प्रोफेसर जी.पी. सिंह, अध्यक्ष, सांख्यिकी विभाग ने पूरी प्रक्रिया का सरल एवं स्पष्ट विवरण प्रस्तुत किया, जिससे अभिभावकों एवं प्रतिभागियों को प्रक्रिया को समझने में सहायता मिली है.


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प्रवेश के लिए कुल 61 सीटें उपलब्ध


कक्षा 6 (बालक) में प्रवेश के लिए कुल 61 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 50% सीटें बीएचयू कर्मचारी वार्ड के लिए आरक्षित थीं। सभी सामाजिक श्रेणियों से आवेदन प्राप्त हुए। बीएचयू कर्मचारियों के आश्रितों में अनुसूचित जनजाति (ST) का कोई आवेदन नहीं था, जबकि कुल मिलाकर 1 SC आवेदन, 12 OBC-NCL आवेदन, 0 EWS आवेदन तथा 11 अनारक्षित आवेदन प्राप्त हुए. इस प्रकार कुल 24 आवेदन प्राप्त होने के कारण कर्मचारी वार्ड के लिए लॉटरी की आवश्यकता नहीं पड़ी तथा 7 सीटें बाहरी अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध रहीं. बाहरी अभ्यर्थियों हेतु OH (2), ST (5),SC(8), OBC-NCL (4), EWS (6) एवं अनारक्षित (14) श्रेणियों में लॉटरी आयोजित की गई. प्रत्येक श्रेणी से प्राप्त आवेदनों के आधार पर चयन किया गया तथा कुल 61 सीटों के लिए लॉटरी प्रक्रिया सम्पन्न हुई.


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कक्षा 6 (बालिका) में कुल 45 सीटें उपलब्ध हैं, जिनमें 50% सीटें बीएचयू कर्मचारी वार्ड के लिए आरक्षित हैं। इस श्रेणी में 16 स्थायी कर्मचारियों का पंजीकरण किया गया है तथा लॉटरी प्रक्रिया संचालित की जा रही है। संविदा कर्मचारियों के लिए भी निमंत्रण जारी कर लॉटरी प्रक्रिया सम्पन्न की जा रही है। प्राप्त विवरण के अनुसार OH श्रेणी में कुल 18 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें अनारक्षित वर्ग में 3, OBC में 10, अनुसूचित जाति में 1 तथा EWS में 4 आवेदन शामिल हैं। संबंधित श्रेणियों के लिए लॉटरी प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है तथा सूचियाँ तैयार की जा चुकी हैं.


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कक्षा 1 रणवीर संस्कृत विद्यालय में प्रवेश हेतु कुल 40 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 20 सीटें बीएचयू कर्मचारी वार्ड के लिए आरक्षित थीं. इन सीटों के लिए 3 स्थायी एवं 21 संविदा आश्रितों के आवेदन प्राप्त हुए, जिसके कारण संविदा श्रेणी के लिए लॉटरी आयोजित करना आवश्यक हुआ. अंतिम सीट आवंटन बीएचयू कर्मचारी वार्ड के अनुमोदन पर निर्भर करेगा.

कक्षा-बालवाटिका 3 बरकछा में प्रवेश के लिए कुल 40 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 50% सीटें बीएचयू कर्मचारी वार्ड के लिए आरक्षित थीं. सभी सामाजिक श्रेणियों से आवेदन प्राप्त हुए.


इस बीएचयू कर्मचारियों के आश्रितों में अनुसूचित जनजाति (ST) का कोई आवेदन नहीं था, जबकि कुल मिलाकर 2 (SC) आवेदन, 05 (OBC-NCL) आवेदन, 0 (EWS ) आवेदन तथा 01 (अनारक्षित) आवेदन प्राप्त हुए, इस प्रकार कुल 08 आवेदन प्राप्त होने के कारण कर्मचारी वार्ड के लिए लॉटरी की आवश्यकता नहीं पड़ी तथा 32 सीटें बाहरी अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध रहीं. बाहरी अभ्यर्थियों हेतु OH (1), ST (3), SC (04)OBC-NCL (6), EWS (4) एवं अनारक्षित (15) श्रेणियों में लॉटरी आयोजित की गई, प्रत्येक श्रेणी से प्राप्त आवेदनों के आधार पर चयन किया गया तथा कुल 32 सीटों के लिए लॉटरी प्रक्रिया सम्पन्न हुई.


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कक्षा-बालवाटिका 2 कोल्हुआ में प्रवेश के लिए कुल 120 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 100% सीटें बीएचयू कर्मचारी वार्ड के लिए आरक्षित थीं. बीएचयू कर्मचारियों के आश्रितों में कुल 20 आवेदन प्राप्त हुए,जिसमें सभी 20 का चयन सुनिश्चित किया गया. बाहरी अभ्यर्थियों हेतु OH (4), ST (9), SC (15)OBC-NCL (25), EWS (10) एवं अनारक्षित (39) श्रेणियों में लॉटरी आयोजित की गई, प्रत्येक श्रेणी से प्राप्त आवेदनों के आधार पर चयन किया गया तथा कुल 100 सीटों के लिए लॉटरी प्रक्रिया सम्पन्न हुई. बीएचयू कर्मचारी वार्ड की प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात ही विभिन्न सामाजिक श्रेणियों के लिए अंतिम सीट आवंटन स्पष्ट किया जाएगा, कक्षा-1, कक्षा-6 (बालक) एवं कक्षा-6 (बालिका) में भी यही व्यवस्था लागू रहेगी.


OBC-NCL एवं ST श्रेणियों की सूचियाँ तैयार की जा चुकी हैं तथा अन्य सूचियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. मेरिट सूची के आधार पर अभ्यर्थियों को आगे बुलाया जाएगा. सभी संबंधित जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट bhuonline.in पर उपलब्ध कराई जाएगी. ई-लॉटरी समिति में प्रोफेसर राजेश कुमार, प्रोफेसर राकेश पांडे, प्रोफेसर एस. श्री कृष्णा, प्रोफेसर रजनीश कुमार सिंह, प्रोफेसर मधु कुशवाहा, प्रोफेसर आनंद कुमार जैन एवं सहायक कुलसचिव ऋषभ तिवारी की सक्रिय भूमिका रही, इसके अतिरिक्त प्रोफेसर प्रियंका गीते एवं प्रोफेसर जे.एस. सिंह ने पर्यवेक्षक के रूप में प्रक्रिया की निगरानी की.


कार्यक्रम के सफल संचालन में समन्वयक श्री महेश चन्द्र जायसवाल , डॉ. सिद्धार्थ चौधरी एवं डॉ. आराधना तिवारी तथा सहायक समन्वयक श्री सौरभ सिंह, डॉ. रीता सिंह, श्री विवेक प्रकाश,श्री सुशांत कुमार उपाध्याय,श्री संजय कुमार गौतम, डॉ. विकास चंद्र शर्मा, डॉ. प्रदीप कुमार दीक्षित का विशेष योगदान रहा. मुख्य आरक्षाधिकारी प्रो. संदीप पोखरिया एवं उनकी टीम ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, साथ ही एसईटी एवं पीपीसी सदस्यों तथा कंप्यूटर सेंटर के समन्वयक, के तकनीकी सहयोग से ई-लॉटरी प्रक्रिया सुचारु रूप से सम्पन्न हुई.


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मंच संचालन डॉ. रीता सिंह एवं डॉ. विकास चन्द्र शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों एवं प्रतिभागियों की उपस्थिति रही तथा इसका सीधा प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम का समापन सेंट्रल हिंदू बॉयज स्कूल की प्राचार्या एवं लॉटरी प्रक्रिया की मुख्य समन्वयक डॉक्टर स्वाति अग्रवाल जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.


वाराणसी में दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता, गेंद में बंधे घुंघरू की आवाज से अंदाजा लगा गोल करेंगे
वाराणसी में दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता, गेंद में बंधे घुंघरू की आवाज से अंदाजा लगा गोल करेंगे
वाराणसी : दिव्यांग खेलों को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता वाराणसी के सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में होगी. ऑल इंडिया दिव्यांग एसोसिएशन के डॉ उत्तम ओझा ने बताया कि इसमें खास तरह के फुटबॉल का प्रयोग होगा. गेंद के अंदर विशेष घुंघरू लुढ़कने पर आवाज करती है. खिलाड़ी गेंद की आवाज के आधार पर गेंद का अंदाजा लगाकर गोल करने का प्रयास करते हैं.नवंबर में प्रस्तावित इस प्रतियोगिता में देश के सात राज्यों के 56 फुटबॉलर खेलेंगे. उन्होंने आगे बताया कि गेंद सामान्य फुटबॉल से भारी होती है. इसमें उछाल कम होता है. इसे ही दृष्टि बाधित फुटबॉल (ब्लाइंड फुटबॉल) या 5-ए-साइड फुटबॉल भी कहा जाता है. यह फुटबॉल पूरी तरह से या आंशिक रूप से भी देखने में अक्षम खिलाड़ी के लिए डिजाइन की गई है. इसकी प्रतियोगिता इंटरनेशनल ब्लाइंड स्पोर्ट्स फेडरेशन (आईबीएसए) के नियमों के तहत खेली जाती है. एक समय में प्रत्येक टीम के पांच-पांच खिलाड़ी मैदान पर होते हैं. चार खिलाड़ी पूरी तरह दृष्टि बाधित होते हैं. खेलने के दौरान चार खिलाड़ियों को अपनी आंखों पर आई-पैच (आई-ब्लाइंडफोल्ड) पहनना अनिवार्य है. गोलकीपर पूरी तरह से देखने में सक्षम होता है. वह डी-एरिया से बाहर नहीं निकल सकता और न ही गोल पोस्ट छोड़कर बाहर खेल सकता है.खिलाड़ियों को गाइड करते हैं तीन कोच मैदान पर खिलाड़ियों की मदद के लिए तीन गाइड होते हैं जो आवाज देकर खिलाड़ियों को बताते हैं कि उन्हें कहां जाना है और कब बॉल किक करनी है. दृष्टि बाधित फुटबॉल में 30 मिनट के मैच में 15-15 मिनट के दो हाफ होते हैं. कोच मिडफील्ड मैदान से खिलाड़ियों को निर्देश देते हैं.ALSO READ : गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमानबिना बोले गेंद पर अटैक करने पर होता है फाउलजब भी कोई डिफेंडर (रक्षा करने वाला खिलाड़ी) गेंद छीनने के लिए आगे बढ़ता है, तो उसे स्पष्ट आवाज में वोई या गो अनिवार्य रूप से बोलना होता है. स्पेनिश शब्द वोई का अर्थ है मैं आ रहा हूं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि गेंद लेकर जा रहे खिलाड़ी को पता चल सके कि कोई सामने से आ रहा है. वोई नहीं बोलने पर फाउल दिया जाता है.दर्शकों के लिए भी होती है गाइडलाइनदृष्टि बाधित फुटबॉल में दर्शकों के लिए भी गाइडलाइन होती है. इसमें दर्शक ज्यादातर शांत रहते हैं. इसमें दर्शक तभी शोर या जश्न मना सकते हैं जब कोई टीम गोल करती है. ऐसा इसलिए कि खिलाड़ी गेंद की आवाज और अपने गाइड के निर्देशों को साफ-साफ सुन सकें और कमांड के आधार पर खेल को किक कर सके.प्रदेश में पहला आयोजनआयोजन सचिव डॉ. संजय चौरसिया ने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांग खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए फुटबॉल प्रतियोगिता वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में कराई जाएगी. इसमें स्थानीय फुटबॉल संघ से मदद ली जाएगी. इससे दिव्यांग खिलाड़ियों में भी लोगों में खेल के प्रति जुनून बढ़ेगा और वे प्रेरित होंगे.
गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमान
गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमान
वाराणसी : नमो घाट पर शनिवार को एयर शो के दूसरे दिन आसमान में भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना गूंज उठी. गंगा की लहरों के ऊपर हेलिकॉप्टर से तिरंगा प्रदर्शन और राफेल, सुखोई व तेजस लड़ाकू विमानों के हैरतअंगेज कलाबाजियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. नमो घाट से लेकर अस्सी घाट तक एयर शो देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी. विमानों के करतब देखकर कहीं तालियां गूंजती रहीं, तो कहीं लोग मोबाइल से इन यादगार पलों को कैमरे में कैद करते नजर आए.म‍िड एयर रिफ्यूलिंग का प्रदर्शनआयोजन जब अपने समाप्‍त‍ि की ओर पहुंचा तो बीच हवा में भारी भरकम टैंकर व‍िमान के पीछे राफेल व‍िमान उड़ते नजर आए. दो पाइपों के सहारे बीच हवा में पर्याप्‍त दूरी बनाकर व‍िमान एक समान गत‍ि से उड़े और म‍िड एयर रिफ्यूलिंग का प्रदर्शन क‍िया गया. इस प्रकार के फार्मेशन के माध्‍यम से भारतीय वायु सेना ने प्रदर्श‍ित कि‍या क‍ि लंबी दूरी में जंग के दौरान व‍िमानों को उतरने की जरूरत नहीं होगी और बीच हवा में ईंधन भरा जा सकता है. इससे लंबी दूरी की मारक क्षमता का भी भारतीय वायु सेना की दक्षता साब‍ित होती है.ALSO READ : रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटनादर्शक हुए रोमांचितएयर शो शुरू होते ही नमो घाट पर उत्साह का माहौल बन गया. आसमान में तेज गर्जना के साथ लड़ाकू विमानों ने अपनी रफ्तार और कौशल का प्रदर्शन किया. राफेल के हवा में अचानक मुड़ने, नीचे की ओर आने और फिर तेजी से ऊंचाई पकड़ने जैसे करतबों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. वहीं, सुखोई के हवाई करतबों ने भी लोगों का ध्यान खींचा. तेजस की दमदार गर्जना से गंगा के घाट गूंज उठे.इस दौरान भारतीय सेना का हेलिकॉप्टर तिरंगा लेकर गंगा के ऊपर से गुजरा. आसमान में लहराते तिरंगे को देखकर घाटों पर मौजूद लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया. लोगों ने तालियां बजाकर इस दृश्य का स्वागत किया. एयर शो के दौरान नमो घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे आयोजन का उत्साह और बढ़ गया. एयर शो को लेकर शहर के गंगा घाटों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी. नमो घाट, अस्सी घाट समेत विभिन्न घाटों पर लोग विमानों के करतब देखने पहुंचे. कई लोगों ने अपने घरों की छतों से भी एयर शो का आनंद लिया. शहर के 84 गंगा घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के मद्देनजर बैरिकेडिंग की गई है. नमो घाट पर भारतीय रेलवे के अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की गई है. वहीं, मीडियाकर्मियों और अन्य दर्शकों के लिए भी अलग-अलग इंतजाम किए गए हैं. एयर शो देखने के लिए एनसीसी कैडेट्स भी पहुंचे. पूरे आयोजन के दौरान काशीवासियों में देशभक्ति और रोमांच का माहौल देखने को मिला.हर पल को बनाया यादगारगंगा के ऊपर भारतीय तिरंगे का प्रदर्शन, लड़ाकू विमानों की गर्जना और आसमान में उनके हैरतअंगेज करतबों ने एयर शो के दूसरे दिन को यादगार बना दिया. घाटों पर उमड़ी भीड़ और दर्शकों का उत्साह इस आयोजन के प्रति लोगों के आकर्षण को दर्शाता रहा. मणिकर्णिका घाट पर जलती चिता के सामने भी लोग एयर शो का लुत्फ उठाते हुए काशी में नजर आए. वहीं दशाश्वमेध घाट पर नाव पर बैठकर देखने में जो आनंद पब्लिक को आ रहा है वह नमो घाट पर नहीं आ रहा है. कुछ इसी तरह के भाव से पर्यटक भी अन्‍य घाटों पर भरे नजर आए. जबक‍ि गंगा में नमो घाट की ओर नौका संचालन पर प्रत‍िबंध होने से नाव‍िक कुछ उदास भी दिखे.
रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटना
रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटना
वाराणसी : रामनगर की रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत घपलू नट उर्फ छपलू की आजमगढ़ के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. 18 अक्टूबर को हाथी को नहलाने ले जाते समय हाथी अचानक बेकाबू हो गया था और उसने महावत को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया था. गंभीर रूप से घायल होने के बाद संक्रमण फैलने से डॉक्टरों को उसका बायां पैर काटना पड़ा, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.घपलू चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था. उसको चार साल का बेटा है. उसकी मौत से पत्नी सरीकुन और मां कलावती का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और घटना से गांव में शोक का माहौल है.ALSO READ : वाराणसी एयर शो: दूसरे दिन चरमराई यातायात व्यवस्था, शहर में लगा भीषण जाम, रहगीर परेशानगत 18 अक्‍टूबर को रामनगर में उस समय हड़कंप मच गया था, जब रामलीला में आया हाथी अचानक बेकाबू होकर इधर-उधर भागने लगा. हाथी का उत्‍पात देख लोगों में भगदड़ मच गई. महावत ने उसे काबू करने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उसे पटक दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया. उसका इलाज अस्पताल में चल रहा था. हाथी को आजमगढ़ से रामलीला में लाया गया था, जहां वह पंचवटी मैदान से निकलकर सड़क पर भागने लगा. 12 घंटे बाद थककर एक जगह हाथी रुक गया. मौके पर वन विभाग के कर्मी व पुलिस फोर्स मौजूद रहे. इसके साथ ही गोरखपुर से भी वन विभाग की स्पेशल टीम पहुंची. हाथी पर मशक्‍कत के बाद काबू पाया जा सका. हाथी के हमले में घायल महावत को 50 टांके लगे थे. हाथी के बेकाबू होने की वजह से रविवार को लीला भी प्रभावित हुई. लीला का मंचन नहीं हुआ, बल्कि भगवान की आरती हुई थी.