काशी कला कुंभ - 2026 का भव्य आगाज, कला-संस्कृति का दिखा अद्भुत संगम

काशी कला कुम्भ 2026 का भव्य शुभारंभ बुधवार कोबनारस हिंदू विश्वविद्यालय परिसर स्थित पंडित ओंकारनाथ प्रेक्षागृह में हुआ.राष्ट्रीय कला मंच, बीएचयू द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम कला, संस्कृति और भारतीय परंपरा के विविध आयामों का जीवंत उत्सव बनकर उभरा है, जिसका समापन गुरुवार को होगा.
कला के विस्तार का सशक्त मंच
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य ने कहा कि ऐसे आयोजन कला के विभिन्न रूपों को मंच देने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता और विस्तार को भी निरंतर समृद्ध करते हैं.
राष्ट्रीय कला मंच के अखिल भारतीय प्रमुख अंकित शुक्ला ने मंच के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका लक्ष्य कला की अभिव्यक्ति को व्यापक और सहज बनाना है. उन्होंने युवाओं से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की.

लोक कला से समाज में नवचेतना
विशिष्ट अतिथि आनंद श्रीवास्तव ने कहा कि लोक कलाएं समाज की आत्मा होती हैं, जो न केवल भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं बल्कि सामाजिक नव निर्माण का संदेश भी देती हैं।
प्रसिद्ध कथावाचक पलक किशोरी ने Banaras Hindu University को भारतीय परंपराओं का संरक्षक बताते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा “अनहद नाद” की तरह सतत प्रवाहित होती रहती है.
कला से समाज निर्माण का संदेश
काशी प्रांत प्रचारक रमेश जी ने कहा कि कला प्रकृति के हर तत्व में मौजूद है और यह व्यक्ति तथा समाज दोनों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने युवाओं से स्क्रीन टाइम कम कर रचनात्मक गतिविधियों की ओर बढ़ने का आह्वान किया.
प्रदेश ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सुनील विश्वकर्मा ने कहा कि कला जीवन के चारों पुरुषार्थों की पूर्ति करती है और समाज को दिशा देने का कार्य करती है.
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मनोज तिवारी ने साझा की यादें
मुख्य अतिथि और मनोज तिवारी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन प्रतिभाओं को निखारने का सशक्त मंच हैं।
उन्होंने अपनी पंक्तियों— “गांव गए भी हुए महीनों, खुद ही खुद से मिला नहीं हूं” — के जरिए आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं पर भी विचार रखा और कला-संगीत की प्रासंगिकता को रेखांकित किया.
पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम
इस अवसर पर डॉ. अपराजिता मिश्रा द्वारा लिखित पुस्तक “वेदकालीन आध्यात्मिक महिलाएं” का विमोचन भी किया गया.
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में अयोध्या और ग्वालियर घराने के कलाकारों सहित देशभर से आए प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों और शास्त्रीय संगीत ने कार्यक्रम को खास बना दिया.
युवाओं में सृजनात्मकता का संचार
“काशी कला कुंभ - 2026” न केवल कला के विविध रूपों को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि युवाओं में सृजनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक संवेदनशीलता को भी सशक्त कर रहा है.



