काशी में गंगा स्नान को सुरक्षित बनाने की कवायद, बैरीकेडिंग लगाने की तैयारी

वाराणसी: तीर्थ नगरी काशी में गंगा स्नान सुरक्षित बनाने की कवायद जारी है. ऐसा हो जाने पर गंगा में तीन किलोमीटर का घाट क्षेत्र श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों के लिए सुरक्षित होगा. पुलिस की ओर से भीड़-भाड़ वाले घाटों पर बैरीकेडिंग (फ्लोटिंग जेटी) और जाल लगाने की तैयारी चल रही है. शासन ने कमिश्नरेट पुलिस के प्रस्ताव पर तीन कराेड़ रुपये का बजट जारी किया है. इसका टेंडर भी हो गया है, लिहाजा अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह तक बैरीकेडिंग व जाल बिछाने का काम शुरू होगा. औसतन हर साल लगभग 100 लोगों की गंगा में डूबने से मौत होती है.

जाल डूबने से बचाएगा, बैरीकेड खतरा दर्शाएगा
अस्सी घाट से नमो घाट तक गंगा घाट तक तीन किमी. में परियोजना जमीन पर उतरेगी. पुलिस उन घाटों को बैरीकेड करने व जाल बिछाने पर ज्यादा फोकस करेगी, जहां विभिन्न आयोजनों पर भीड़ उमड़ने के साथ लोग स्नान करना पसंद करते हैं. लोहे और प्लास्टिक निर्मित फ्लोटिंग जेटी लोगों को खतरे का एहसास कराएंगे तो जाल पैर फिसलने पर डूबने से बजाएगा.

योजना का उद्देश्य
श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकना.
स्नान के लिए सुरक्षित ज़ोन तय करना.
डूबने की घटनाओं पर अंकुश लगाना.
बढ़ाई जा रही निगरानी व्यवस्था
गंगा में एनडीआरएफ की सतर्क टीम तैनात रहती है. अब जल पुलिस को भी संसाधनों से समृद्ध किया जा रहा है. पुलिसकर्मियों की संख्या 32 से बढ़ाकर 100 की जा रही है. आठ किमी. में 84 घाटों की सुरक्षा के लिए 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलने वाली स्पीड बोट पहले से तैनात किए गए हैं.

बोल पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल
पुलिस कमिश्नरेट मोहित अग्रवाल ने आज बातचीत के दौरान बताया कि आऐ दिन गंगा में स्नान करते हुए डूबने की ज्यादा केस देखने को मिल रही है. यही वजह है की काशी में सबसे ज्यादा डूबने से मौत हुई है. उत्तर प्रदेश सरकार से हम लोगों को बजट पास हुआ है. जैसे की प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान व्यवस्थाएं की गई थी उसी को लेकर हम लोगों ने भी तैयारी करना शुरू कर दिया है.
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कुछ ही दिनों में जल पुलिस में नई भर्तियां शुरू हो चुकी है .गंगा में हाल के वर्षों में ट्रैफिक जबरदस्त बढ़ा है. पर्यटकों की संख्या में हद दर्जे का इजाफा हुआ है. गंगा आरती का दायरा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था गंगा में ट्रैफिक प्लान लागू करने पर काम किया जा रहा है. गंगा घाटों पर फ्लोटिंग जेटी और जाल लगाने के टेंडर हो चुका है. इसकी रणनीति एक साल पूर्व बनी थी, जो अब जमीन पर उतरने जा रहा है.



