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काशी विद्यापीठ में दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का शुभारंभ, आईसीएसएसआर प्रायोजित आयोजन

काशी विद्यापीठ में दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का शुभारंभ, आईसीएसएसआर प्रायोजित आयोजन
Feb 02, 2026, 01:18 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित 'सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शोधार्थियों के लिए शोध पद्धति और अकादमिक लेखन' विषयक दस दिवसीय (02 से 11 फरवरी तक) शोध पद्धति पाठ्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को हुआ. डॉ. भगवान दास केन्द्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने की. अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि पत्रकारिता समाज पर बहुत ही व्यापक प्रभाव डालता है. वर्तमान तकनीकी के दौर में पत्रकारिता का मानव कल्याण के लिये प्रयोग करना एक बड़ी चुनौती है. तकनीकी उपलब्धता ने शोध के आंकड़ों को कुछ घंटों में समेट दिया है, ऐसी स्थिति में मानवीयमूल्य परक एवं गुणवत्तापरक शोध निश्चित रूप से एक चुनौती है. शोध को भारतीय मूल्यों का प्रयोग करते हुए परिमार्जित एवं परिष्कृत शोध होना चाहिए.निश्चित ही यह कार्यशाला प्रतिभागियों को शोध की दृष्टि से समृद्ध करेगी.


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मुख्य अतिथि पांचजन्य के पूर्व संपादक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जगदीश उपासने ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महान विभूतियों यथा बौधायन, आर्यभट्ट, नागार्जुन, पाणिनि को याद करते हुए कहा कि शोध भारत का स्वभाव है. भारत में शोध के क्षेत्र में तमाम बदलाव हो रहे हैं, जिसमें समाज का एक बड़ा वर्ग पीछे छूट गया है। लैंगिक समानता, सामाजिक एकता जेन जी (GEN Z) जैसे विषय पर शोध होना चाहिए. शोध में समावेशी विकास को सम्मिलित करना होगा.


सारस्वत अतिथि जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय छपरा बिहार के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि शोध भारतीय ज्ञान परंपरा का प्राचीन काल से ही एक महत्वपूर्ण अंग रहा है. मारकंडेय पुराण के दुर्गा सप्तशती के चार वाक्यों में ही शोध के निहितार्थ हैं, जिसमें आत्म तत्व का शोधन, विद्या तत्व की शोधन, शिव तत्व का शोधन और सर्व तत्व शोधन का उल्लेख है. शोध का महत्वपूर्ण पक्ष है प्रश्न करना. शोध तत्व मीमांसा, ज्ञान मीमांसा से होते हुए मूल्य मीमांसा तक है. शोध में चार क्यू (Q) महत्वपूर्ण हैं, जिसमें क्वेस्ट (जिज्ञासा), क्वेश्चन या प्रश्न पूछना, क्वॉसेंट या बुद्धिमत्ता गुणांक तथा क्वालिटी या गुणवत्ता का स्थान है। शोध का उद्देश्य राष्ट्रधर्म सर्वोपरि होना चाहिए.


तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. एम शफे किदवई ने सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान का परिचय, अनुसंधान की प्रकृति, उद्देश्य और दायरा तथा भारत में अनुसंधान परंपरायें विषय पर व्याख्यान दिया. प्रो. किदवई ने कहा कि प्रश्न पूछना शोध की बुनियाद है. आज तकनीक ने एक सामान्यीकरण कर दिया है. पहले की तकनीक आपको समृद्ध करती थी. वर्तमान तकनीक हीनता प्रदान कर रही. तकनीक ने शोध को आसान और कठिन दोनों बना दिया है. एआई के माध्यम से डाटा आसानी से उपलब्ध हो रहा लेकिन मानवीय पक्ष खत्म हो गया है. जनसंचार मे मानवीय पक्ष को ध्यान में रखते हुए शोध करना होगा.दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम में देश की विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों से स्क्रीनिंग के बाद चयनित 30 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो सामाजिक विज्ञान और मानविकी के क्षेत्र में शोधरत हैं.

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स्वागत पाठ्यक्रम निदेशक एवं महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह, संचालन डॉ. प्रभा शंकर मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वशिष्ठ नारयण सिंह ने किया.


इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, डॉ. दयानंद, डॉ. नागेंद्र पाठक, डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. शिवजी सिंह, डॉ. मुंकेश कुमार शुक्ल, डॉ. अमित कुमार सिंह, विजय सिंह, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. वैष्णवी शुक्ला, डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, खुश्बू सिंह, अरविंद मिश्र,गुरू प्रकाश सिंह, देवेन्द्र गिरि, गणेश राय, आकाश सिंह, सपना तिवारी, डाली विश्वकर्मा, अतुल उपाध्याय, पुलकित, स्तुति, समर, शाजिया, जूली, जाह्नवी, अनुष्का, रिया, हर्षिता, शिवांगी, मनीष आदि उपस्थित रहे.

350 रुपए के पार पहुचा पेट्रोल, इस देश में मचा हाहाकार
350 रुपए के पार पहुचा पेट्रोल, इस देश में मचा हाहाकार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से पाकिस्तान ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी की है. मतलब साफ है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है. इन बढ़ते दामों की वजह कुछ और नहीं बल्कि अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के साथ-साथ मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव है. जिसकी वजह से पाकिस्तान में पेट्रोल- डीजल के तेलों की कीमतों में आग लग गई है. इन दामों को देख सबसे ज्यादा कोई परेशान है तो वो है पेट्रोल-डीजल खरीदने वाले ग्राहक जिनकी जेब पर अब हद से ज्यादा बोझ पड़ने लगा है. यहीं कारण है कि ईरान-इजरायल युद्ध से चिंतित लोगों को अब इस बात की चिंता सताने लगी है कि आखिर कब तक इस बढ़ती महंगाई का दिन देखना पड़ेगा.फ्यूल खरीदने वालों को डराने लगे पेट्रोल-डीजल के दामदरअसल, पाकिस्तान में बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दाम अब रिटेल फ्यूल खरीदने वाले लोगों को डराने लगे है. इन बढ़ते दामों से पहले पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 266 (दो सौ छियासठ).17 रुपये थी, जो अब बढ़कर 321.17 रुपये (105.62) प्रति लीटर हो गई है. वहीं हाई स्पीड वाला डीजल जो अब लोगों के लिए लो होने का एहसास कराने लगा है, इसके दाम पहले 280.86 रुपये बेचा जा रहा था, जो अब बढ़कर 335.86 (छियासी) (110) रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. इन दामों को देख रिटेल फ्यूल खरीदने वाले लोग इसलिए टेंशन में आ गये है क्योंकि भारत की तुलना में अब ये कीमतें तीन गुना से ज्यादा रफ्तार पकड़ चुकी हैं. दिल्ली में पेट्रोल 94 चौरानबे.72 बहत्तर रुपये और डीजल 87सत्तासी.62 बासठ रुपये बेचा जा रहा है. ऐसे में अब आलम ये है कि, खरीदने से पहले लोग ये तक सोचने लगे है कि अगर इतने का पेट्रोल और डीजल खरीदेंगे तो खाएंगे क्या.पाक पीएम ने लोगों को दी चेतावनीअमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज आठवां दिन है. जहां ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध की वजह से तेल की इन बढ़ती कीमतों ने लोगों के रातों की नींद उड़ा दी है. पाक पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर रिटेल फ्यूल कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की जानकारी दी है, जहां उन्होंने बताया कि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस तरह का फैसला मजबूरी में लेना पड़ा है, क्योंकि, वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी का असर पाकिस्तान पर भी पड़ा है. हालांकि, पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान को मिडिल ईस्ट ने और भी मुश्किलों बढ़ा दी है. जिससे गरीब आवाम को सबसे ज्यादा जूझना पड़ेगा. मगर हमारी पाकिस्तान सरकार के पास इसके सिवा और कोई चारा नहीं बचा है.यह भी पढ़ें: क्या था रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड, जिसमें 24 साल बाद बरी हुए राम रहीम...गजब की बात तो यह रही कि, पाक सरकार की तरफ से फ्यूल के रेट बढ़ाए जाने के ऐलान से पहले लाहौर और कराची जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी कतारें देखी गईं. इस स्थिति को देखते हुए पीएम शहबाज शरीफ ने लोगों को फ्यूल की जमाखोरी के खिलाफ पहले ही चेतावनी दे दी है. उन्होंने साफ तौर पर कह दिया है कि जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, सरकार कह रही है कि उनके पास पर्याप्त पेट्रोल है. लेकिन वह चाहती है कि फ्यूल का इस्तेमाल ज्यादा समय तक किया जा सके. क्योंकि मिडिल ईस्ट का संकट कब तक चलेगा, ये किसी को भी नहीं पता.
क्या था रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड, जिसमें 24 साल बाद बरी हुए राम रहीम...
क्या था रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड, जिसमें 24 साल बाद बरी हुए राम रहीम...
रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आज डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को 24 साल पुराने हत्याकांड में बरी कर दिया है. हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले में बदलाव करते हुए राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया. हालांकि हाईकोर्ट ने इस केस में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों कुलदीप, निर्मल और किशन लाल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है.अक्टूबर 2002 में हुई थी हत्या...बता दें कि, सिरसा में एक स्थानीय समाचार पत्र चलाने वाले रामचंद्र छत्रपति की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा क्यूंकि, पत्रकार ने डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ सम्बंधित आरोपों के खिलाफ रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इन रिपोर्ट में पत्रकार ने डेरा प्रमुख के खिलाफ यौन संबंध के मामले में आरोप लगाए थे. मामले में जांच शुरू हुई और मामले को CBI को दे दिया गया.यह भी पढ़ें: UP को वन ट्रिलियन डालर की आर्थिक शक्ति बनाने में कृषि की होगी बड़ी भूमिकाहाईकोर्ट ने राम रहीम को किया बरीबता दें कि आरोपियों ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ दायर की थीं. हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुनने के बाद यह निर्णय दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि राम रहीम के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले. इसलिए उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है. वहीं बाकी तीन आरोपियों के खिलाफ मौजूद साक्ष्यों को अदालत ने पर्याप्त माना. कोर्ट ने इन दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा.
UP को वन ट्रिलियन डालर की आर्थिक शक्ति बनाने में कृषि की होगी बड़ी भूमिका
UP को वन ट्रिलियन डालर की आर्थिक शक्ति बनाने में कृषि की होगी बड़ी भूमिका
वाराणसी: उत्तर प्रदेश तेजी से आर्थिक विकास के रास्ते पर बढ़ रहा है. सरकार अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तदनुरूप नीतियों का अनुगमन कर रही है. प्रदेश को वन ट्रिलियन डालर की आर्थिक शक्ति बनाने मेें कृषि क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी. आइसार्क में आरंभ धान नीतियों पर उच्च स्तरीय नीति संवाद के निष्कर्षों को प्रदेश सरकार कृषि व किसान हित में लागू करेगी.ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आर्थििक सलाहकार केवी राजू ने कही. वह शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान, दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क व भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद के सहयोग से, आइसार्क में आरंभ दो दिवसीय उच्च स्तरीय नीति संवाद के दो दिवसीय आयोजन में प्रथम दिवस उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे.यह भी पढ़े: संपूर्ण समाधान दिवस: राजातालाब तहसील में 160 प्रार्थना पत्र, सिर्फ 8 का निस्‍तारणकार्यक्रम का मुख्य विषय “भारत में टिकाऊ एवं सुदृढ़ धान प्रणाली के लिए नीतियों का पुनर्गठन : सीख एवं प्राथमिकताएं’ है. इस दो दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंंध भारतीय अनुसंधान परिषद के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर डा. अशोक गुलाटी, विश्व बैंक की कृषि विशेषज्ञ डा. सौम्या श्रीवास्तव, फेडरेशन आफ सीड इंडस्ट्री आफ इंडिया के महानिदेशक डा. परेश वर्मा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक कृषि प्रसार डा. राजबीर सिंह आदि ने अपने विचार रखे. आयोजन में विभिन्न सरकारी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, शोधकर्ता, विकास सहयोगी संस्थाएं, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा किसान भाग ले रहे हैं.इसमें भारत की वर्तमान धान नीति की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के लिए आवश्यक सुधारों पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इस संवाद में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग ले रहे हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के सलाहकार, कृषि उत्पादन आयुक्त तथा प्रमुख सचिव प्रमुख हैं. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों, विकास संगठनों तथा निजी क्षेत्र की कंपनियों, जिनमें बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी शामिल हैं व उनके प्रतिनिधि भी इस संवाद में सहभागिता करेंगे.