काशी विद्यापीठ : राजनीति विज्ञान विभाग में विशेष व्याख्यान आयोजित

वाराणसी: राजनीति विज्ञान विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा शनिवार को 'नीति एवं व्यवस्थापन: वर्तमान परिप्रेक्ष्य में' विषयक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. सुशील दत्त, राजधानी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय ने कहा कि भारतीय शासन व्यवस्था की मूल भावना और देश को एकता के सूत्र में बांधे रखने के लिए निर्मित नीतियों का व्यापक प्रतिबिंब भारतीय संविधान में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समाज की आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और विविधताओं को समझने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। प्रो. दत्त ने कहा कि हिंदुस्तान के नागरिकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नीति निर्माण करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि नीतियां समाज के अधिकतम लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली हों। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में किसी भी नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी व्यवहारिक अभिव्यक्ति सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विविधताओं के अनुरूप कितनी प्रभावी है। उन्होंने नीति निर्माण में व्यावहारिकता, जनहित, समावेशिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि अध्यापन केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षकों को विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को समझते हुए उनके प्रश्नों का समग्रता से समाधान करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि उनमें विषय के प्रति तार्किक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक चिंतन विकसित हो सके।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आरिफ ने समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें समाज का कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे। विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक नागरिक तक समान रूप से पहुंचे। उन्होंने कहा कि नीतियों का निर्माण करते समय उनकी सुगमता, प्रभावशीलता और सर्वसमावेशी स्वरूप का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। संचालन डॉ. ज्योति त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रेशम लाल ने किया। इस अवसर पर प्रो. ब्रजेश कुमार सिंह, डॉ. विजय कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. चन्द्र किशोर मणि पाण्डेय, डॉ. ज्ञान प्रकाश पाण्डेय, डॉ. विजय कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।



